विकास का अर्थ है जीवन की गुणवत्ता में सुधार। प्रत्येक व्यक्ति, परिवार, गाँव, राज्य और देश के लिए विकास का अलग-अलग अर्थ होता है। कुछ लोगों के लिए विकास का अर्थ है अधिक आय, कुछ के लिए बेहतर शिक्षा, कुछ के लिए अच्छा स्वास्थ्य और कुछ के लिए सुरक्षित वातावरण। इस अध्याय में हम विकास के विभिन्न पहलुओं को समझेंगे - विकास का अर्थ, विकास के संकेतक, राष्ट्रीय विकास और मानव विकास।
विकास की अवधारणा को समझने के लिए सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि विभिन्न लोगों के लिए विकास का अर्थ भिन्न हो सकता है। एक मजदूर के लिए विकास का अर्थ है अधिक वेतन और सुरक्षित रोजगार, जबकि एक किसान के लिए विकास का अर्थ है अच्छी फसल और उचित मूल्य। एक महिला के लिए विकास का अर्थ है समानता और सुरक्षा। इस प्रकार विकास की धारणा व्यक्तिपरक है, अर्थात यह हर व्यक्ति के दृष्टिकोण पर निर्भर करती है।
अर्थशास्त्र में आय को विकास का सबसे महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। उच्च आय का अर्थ है बेहतर जीवन स्तर, क्योंकि इससे व्यक्ति अपनी जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर सकता है। आय से व्यक्ति भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी कर सकता है। इसलिए विकास की माप में प्रति व्यक्ति आय को एक प्रमुख संकेतक के रूप में उपयोग किया जाता है।
हालाँकि, आय अकेला संकेतक पर्याप्त नहीं है। आय बढ़ने के साथ-साथ यह भी देखना आवश्यक है कि वह आय समाज में किस प्रकार वितरित है। यदि देश की कुल आय बढ़ जाए, परंतु उसका वितरण केवल कुछ अमीरों तक सीमित रहे, तो वह विकास नहीं है। इसलिए विकास को समझने के लिए आय के साथ-साथ उसके वितरण, सुरक्षा, स्वच्छता और अन्य कारकों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।
विकास को मापने के लिए कई संकेतकों का उपयोग किया जाता है। पहला संकेतक है आय, जिसे प्रति व्यक्ति आय या राष्ट्रीय आय के रूप में मापा जाता है। दूसरा संकेतक है स्वास्थ्य, जिसे जीवन प्रत्याशा के रूप में मापा जाता है - अर्थात औसतन कितने वर्ष एक व्यक्ति जीवित रहता है। तीसरा संकेतक है शिक्षा, जिसे साक्षरता दर या स्कूल में बिताए गए वर्षों की औसत संख्या के रूप में मापा जाता है।
इन संकेतकों के अलावा स्वच्छ जल, स्वच्छ वातावरण, सुरक्षा, अच्छा इलाज और अन्य सुविधाएँ भी विकास के संकेतक हैं। विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) इन संकेतकों के आधार पर विभिन्न देशों की विकास रिपोर्ट तैयार करते हैं। मानव विकास सूचकांक (HDI) के अंतर्गत आय, स्वास्थ्य और शिक्षा तीनों संकेतकों को मिलाकर किसी देश के विकास को मापा जाता है।
राष्ट्रीय विकास का अर्थ है पूरे देश का विकास। परंतु राष्ट्रीय विकास की परिभाषा क्या हो, यह तय करना कठिन है, क्योंकि एक देश के विभिन्न क्षेत्रों और वर्गों के लिए विकास का अर्थ भिन्न हो सकता है। कुछ लोगों के लिए राष्ट्रीय विकास का अर्थ है बढ़ती हुई राष्ट्रीय आय, तो कुछ के लिए अधिक रोजगार, कुछ के लिए स्वच्छता और कुछ के लिए रक्षा सुरक्षा। इसलिए राष्ट्रीय विकास के लिए ऐसे लक्ष्यों का निर्धारण करना आवश्यक है जो अधिकांश लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करें।
राष्ट्रीय विकास के लिए सरकारें पंचवर्षीय योजनाएँ, विकास कार्यक्रम और नीतियाँ बनाती हैं। इनका उद्देश्य आर्थिक विकास, गरीबी उन्मूलन, शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार करना होता है। राष्ट्रीय विकास का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसका लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुँचे, न कि केवल कुछ चुनिंदा लोगों तक। इसलिए विकास का वितरण उतना ही महत्वपूर्ण है जितना विकास की दर।
विकास को केवल आय से नहीं मापा जा सकता, क्योंकि आय के साथ-साथ कई अन्य लक्ष्य भी महत्वपूर्ण हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, स्वच्छता, स्वतंत्रता और आत्म-सम्मान जैसे लक्ष्य भी विकास का हिस्सा हैं। उदाहरण के लिए, एक व्यक्ति उच्च आय वाला हो सकता है, परंतु यदि उसे अपने जीवन की सुरक्षा नहीं मिलती या उसकी स्वतंत्रता छीनी जाती है, तो उसका विकास अधूरा माना जाएगा।
आय और गैर-आय संकेतक दोनों का संयोजन ही विकास का सच्चा माप है। कुछ विकासशील देशों में आय कम है, परंतु वहाँ शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति अच्छी है। वहीं कुछ देशों में आय अधिक है, परंतु समानता और सुरक्षा की स्थिति खराब है। इसलिए विकास का मूल्यांकन करते समय सभी संकेतकों को एक साथ देखना चाहिए। यही विकास की समग्र समझ है।
मानव विकास की अवधारणा इस बात पर आधारित है कि विकास के केंद्र में मनुष्य होना चाहिए। केवल आय बढ़ाना विकास नहीं है, बल्कि मनुष्य की क्षमताओं का विकास करना विकास है। मानव विकास में शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और जीवन की गुणवत्ता पर जोर दिया जाता है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा प्रकाशित मानव विकास रिपोर्ट में मानव विकास सूचकांक का उपयोग किया जाता है।
मानव विकास सूचकांक (HDI) तीन संकेतकों पर आधारित होता है - जीवन प्रत्याशा (स्वास्थ्य), साक्षरता दर और स्कूली शिक्षा के वर्ष (शिक्षा), और प्रति व्यक्ति आय (जीवन स्तर)। इन तीनों के आधार पर देशों को उच्च, मध्यम और निम्न मानव विकास श्रेणियों में बाँटा जाता है। मानव विकास की अवधारणा यह सिखाती है कि विकास केवल आँकड़ों का खेल नहीं, बल्कि मानव जीवन को बेहतर बनाने की प्रक्रिया है।
| संकेतक | क्या मापता है | मापन इकाई |
|---|---|---|
| आय | जीवन स्तर | प्रति व्यक्ति आय |
| स्वास्थ्य | जीवन की गुणवत्ता | जीवन प्रत्याशा |
| शिक्षा | ज्ञान और कौशल | साक्षरता दर |
| समानता | आय का वितरण | गिनी गुणांक |
| घटक | संकेतक |
|---|---|
| स्वास्थ्य | जीवन प्रत्याशा |
| शिक्षा | साक्षरता दर, स्कूली वर्ष |
| जीवन स्तर | प्रति व्यक्ति आय |
विकास एक बहुआयामी अवधारणा है, जो केवल आय तक सीमित नहीं है। विकास का सही माप आय, स्वास्थ्य, शिक्षा, समानता और सुरक्षा के संयोजन से होता है। राष्ट्रीय विकास का उद्देश्य केवल आय बढ़ाना नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाना है। मानव विकास की अवधारणा हमें सिखाती है कि विकास के केंद्र में मनुष्य और उसकी क्षमताएँ होनी चाहिए। यही समग्र विकास की सही समझ है। जब विकास के लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुँचते हैं, तभी वह सच्चा और स्थायी विकास कहलाता है।