खनिज धरती की सबसे मूल्यवान प्राकृतिक संपदा हैं। खनिजों के बिना आधुनिक सभ्यता की कल्पना करना असंभव है, क्योंकि हमारे दैनिक जीवन की अधिकांश वस्तुएँ खनिजों से बनती हैं। इस्पात, एल्यूमीनियम, तांबा, सोना, कोयला, पेट्रोलियम - ये सभी खनिज हैं। इस अध्याय में हम भारत के खनिज संसाधनों, उनके वितरण, प्रकार और ऊर्जा संसाधनों को समझेंगे। खनिज संसाधन आर्थिक विकास का आधार हैं।
खनिजों का उपयोग मानव सभ्यता की शुरुआत से होता आ रहा है। पत्थर के युग के बाद तांबा, कांस्य और लोहे के युग आए। खनिजों ने औद्योगिक क्रांति को संभव बनाया। भारत खनिज संसाधनों में समृद्ध है, परंतु इनका वितरण असमान है। कुछ क्षेत्रों में खनिजों की अधिकता है, जबकि कुछ क्षेत्र खनिज-रहित हैं। खनिजों का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है, क्योंकि ये गैर-नवीकरणीय हैं और एक बार समाप्त होने पर वापस नहीं आते।
खनिजों को मुख्यतः दो प्रकारों में बाँटा जाता है - धात्विक और अधात्विक खनिज। धात्विक खनिज वे हैं जिनसे धातु प्राप्त होती है, जैसे लौह अयस्क, तांबा, सोना, एल्यूमीनियम (बॉक्साइट) और मैंगनीज। धात्विक खनिजों को आगे दो भागों में बाँटा जाता है - लौह खनिज (जैसे लौह अयस्क) और अलौह खनिज (जैसे तांबा और बॉक्साइट)। अधात्विक खनिज वे हैं जिनसे धातु नहीं मिलती, जैसे चूना पत्थर, अभ्रक, जिप्सम और मिट्टी।
खनिजों को उनके निर्माण की प्रक्रिया के आधार पर भी वर्गीकृत किया जाता है। आग्नेय और रूपांतरित चट्टानों में धात्विक खनिज पाए जाते हैं, जैसे लौह अयस्क। अवसादी चट्टानों में कोयला और चूना पत्थर जैसे खनिज पाए जाते हैं। इसके अलावा ऊर्जा खनिज भी होते हैं, जिनसे ईंधन प्राप्त होता है, जैसे कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस। इन सभी खनिजों का आर्थिक महत्व अलग-अलग है।
भारत में खनिजों का वितरण असमान है। लौह अयस्क मुख्यतः ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में पाया जाता है। भारत के सबसे महत्वपूर्ण लौह अयस्क क्षेत्र हैं - ओडिशा का गुड़ी-मालाकंडा-किरीबुरु क्षेत्र, झारखंड का धारवाड़ क्षेत्र और छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र। भारत का प्रायद्वीपीय पठार खनिजों से समृद्ध है, जिसे खनिज समृद्ध क्षेत्र कहा जाता है।
बॉक्साइट मुख्यतः ओडिशा, गुजरात, झारखंड और महाराष्ट्र में पाया जाता है। मैंगनीज मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा में पाया जाता है। तांबा मध्य प्रदेश, राजस्थान और झारखंड में पाया जाता है। अभ्रक झारखंड, आंध्र प्रदेश और राजस्थान में पाया जाता है। भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में खनिज कम हैं, जबकि दक्कन के पठार पर खनिज अधिक पाए जाते हैं।
ऊर्जा संसाधन वे हैं जिनसे बिजली और शक्ति प्राप्त होती है। भारत के ऊर्जा संसाधनों को दो भागों में बाँटा जा सकता है - परंपरागत ऊर्जा स्रोत और गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोत। परंपरागत स्रोतों में कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और जल विद्युत शामिल हैं। कोयला भारत का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत है, जो झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में पाया जाता है। भारत की लगभग आधी बिजली कोयले से बनती है।
पेट्रोलियम भारत का दूसरा महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत है। भारत में पेट्रोलियम मुख्यतः असम (डिगबोई), गुजरात (अंकलेश्वर) और महाराष्ट्र के अपतटीय क्षेत्रों (मुंबई हाई) में पाया जाता है। भारत को अपनी पेट्रोलियम आवश्यकता का अधिकांश भाग आयात करना पड़ता है। प्राकृतिक गैस भी महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत है। इन परंपरागत स्रोतों के अलावा गैर-परंपरागत स्रोत, जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा और जैव ऊर्जा, भविष्य के ऊर्जा स्रोत हैं।
खनिज गैर-नवीकरणीय संसाधन हैं, इसलिए इनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। खनिजों का संरक्षण करने के कई उपाय हैं। पहला, खनिजों का कुशल उपयोग करना, ताकि कम खनिज में अधिक उत्पादन हो। दूसरा, स्क्रैप धातुओं का पुनर्चक्रण (recycling) करना। तीसरा, अपशिष्टों का उचित प्रबंधन करना। चौथा, वैकल्पिक स्रोतों का विकास करना, जैसे नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग।
खनिजों का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि सभी की है। लोगों को खनिजों का विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए। खनन से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को भी ध्यान में रखना चाहिए। खनन से वनों का नाश, भूमि का निम्नीकरण और जल प्रदूषण होता है। इसलिए खनन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी आवश्यक है। खनिजों का संरक्षण ही आने वाली पीढ़ियों के लिए उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का विकास आवश्यक है। सौर ऊर्जा भारत के लिए सबसे आशाजनक ऊर्जा स्रोत है, क्योंकि भारत में प्रचुर मात्रा में धूप उपलब्ध है। राजस्थान में स्थापित पवन ऊर्जा परियोजनाएँ देश की ऊर्जा आवश्यकताओं में योगदान दे रही हैं। तमिलनाडु और गुजरात पवन ऊर्जा के प्रमुख राज्य हैं। भू-तापीय ऊर्जा और जैव ऊर्जा भी विकसित हो रही हैं।
नवीकरणीय ऊर्जा के कई लाभ हैं। ये प्रदूषण नहीं फैलातीं, ये असीमित हैं और ये स्थानीय स्तर पर उत्पन्न हो सकती हैं। पर्यावरण को बचाने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दे रहा है। जब हम कोयले और पेट्रोलियम जैसे सीमित संसाधनों पर निर्भरता कम करके नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ाएँगे, तभी स्थायी विकास संभव होगा। ऊर्जा का संरक्षण और नवीकरणीय स्रोतों का उपयोग ही भविष्य की कुंजी है।
| प्रकार | उदाहरण |
|---|---|
| धात्विक लौह | लौह अयस्क, मैंगनीज |
| धात्विक अलौह | तांबा, बॉक्साइट |
| अधात्विक | चूना पत्थर, अभ्रक |
| ऊर्जा खनिज | कोयला, पेट्रोलियम |
| खनिज | प्रमुख राज्य |
|---|---|
| लौह अयस्क | ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ |
| बॉक्साइट | ओडिशा, गुजरात |
| कोयला | झारखंड, ओडिशा |
| पेट्रोलियम | असम, गुजरात, मुंबई हाई |
खनिज और ऊर्जा संसाधन आधुनिक सभ्यता और आर्थिक विकास के आधार हैं। भारत खनिज संसाधनों में समृद्ध है, और प्रायद्वीपीय पठार विशेष रूप से खनिजों से भरपूर है। कोयला भारत का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत है, जबकि पेट्रोलियम के लिए भारत आयात पर निर्भर है। खनिज गैर-नवीकरणीय हैं, इसलिए इनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। खनिजों का कुशल उपयोग, पुनर्चक्रण और नवीकरणीय ऊर्जा का विकास ही स्थायी विकास की कुंजी है। ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना होगा, ताकि भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधन सुरक्षित रह सकें।