'एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!' रामविलास शर्मा द्वारा रचित एक गीतिनाट्य है, जो माँ के प्रति प्रवासी पुत्र की गहरी विरह-व्यथा को प्रस्तुत करता है। शीर्षक का अर्थ है - 'हे राम! इसी जगह झूला खो गया।' 'झुलनी' (झूला) यहाँ माँ के स्नेह और बचपन की यादों का प्रतीक है। रचना में एक शहर में काम करने वाला बेटा अपनी गाँव की माँ और बचपन को याद करता है।
यह रचना प्रवासी मज़दूरों की पीड़ा, मातृ-स्नेह की अमरता और गाँव-शहर के जीवन के अंतर को सजीव रूप में चित्रित करती है। माँ की झुलनी में बीता बचपन, उसकी गोद की गरमाहट और विरह की वेदना इस गीतिनाट्य के केंद्रीय भाव हैं।
2. लेखक परिचय
रामविलास शर्मा का जन्म सन् 1912 ई. में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में हुआ। वे प्रसिद्ध साहित्यकार, आलोचक और भाषावैज्ञानिक थे।
रामविलास शर्मा हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण आलोचक और सांस्कृतिक चिंतक माने जाते हैं।
उन्होंने भाषा, साहित्य और समाज पर गहन अध्ययन किया।
प्रमुख रचनाएँ: 'भारतेंदु हरिश्चंद्र और हिंदी नवजागरण', 'महावीर प्रसाद द्विवेदी और हिंदी नवजागरण', 'निराला की साहित्य साधना'।
उनका लेखन समाजवादी दृष्टि, भाषा-चेतना और सांस्कृतिक जागरण से प्रेरित है।
'एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!' उनकी प्रसिद्ध रचना है, जो गीतिनाट्य के रूप में है।
3. पाठ-सारांश
प्रवासी पुत्र की स्थिति
रचना का केंद्रीय पात्र एक युवक है, जो रोजी-रोटी की तलाश में गाँव छोड़कर शहर आया है। वह शहर के व्यस्त जीवन में काम करता है, परंतु उसका मन अपने गाँव और माँ की ओर आकर्षित रहता है। उसे अपना बचपन याद आता है।
झुलनी की स्मृति
पुत्र को माँ की वह झुलनी (झूला) याद आती है, जिसमें माँ उसे झुलाती थी। 'एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा' का भाव है कि माँ का वह स्नेह-भरा संसार खो गया है। शहर के जीवन में वह माँ की गोद की वह शांति नहीं पा सकता।
विरह की व्यथा
पुत्र की आँखों में माँ की याद के आँसू होते हैं। वह माँ के बिना अधूरा महसूस करता है। शहर के लोग उसे समझ नहीं पाते। वह चाहता है कि एक बार फिर माँ की गोद में सिर रखकर सो सके।
मातृ-प्रेम का संदेश
रचना का अंत इस भाव के साथ होता है कि माँ का प्रेम संसार की सबसे बड़ी संपत्ति है। चाहे कितनी भी दूरी हो, माँ की याद और उसका स्नेह हर पल पुत्र के साथ रहता है। झुलनी खो जाने पर भी माँ का प्रेम अमर रहता है।
4. पात्र
प्रवासी पुत्र: शहर में काम करने वाला युवक, जो माँ की याद में विरह व्यथा अनुभव करता है।
माँ: गाँव में रहने वाली ममतामयी माँ, जो झुलनी में पुत्र को झुलाती थी।
5. मूलभाव एवं संदेश
रचना का मूल भाव मातृ-प्रेम की अमरता और प्रवासी जीवन की पीड़ा है। 'झुलनी' माँ के स्नेह और बचपन की मासूमियत का प्रतीक है। संदेश यह है कि माँ का प्रेम संसार की सबसे बड़ी शक्ति है, जो दूरी और समय से प्रभावित नहीं होता।
माँ का स्नेह सबसे पवित्र और अमर संबंध है।
प्रवासी जीवन में गाँव और माँ की याद सबसे मधुर होती है।
बचपन की स्मृतियाँ मनुष्य का सच्चा आधार हैं।
6. साहित्यिक तत्व
विधा: गीतिनाट्य।
रस: करुण और वात्सल्य रस का मार्मिक संगम।
भाषा: भोजपुरी/अवधी मिश्रित सरल और संगीतमयी भाषा।
शैली: गीत-प्रधान, संवाद और संगीत से युक्त।
बिंब: झुलनी, माँ की गोद, गाँव का दृश्य।
प्रतीक: झुलनी मातृ-स्नेह का प्रतीक है।
त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1: रचना के मुख्य बिंदु
क्रम
विषय
विवरण
1
लेखक
रामविलास शर्मा
2
विधा
गीतिनाट्य
3
मुख्य भाव
मातृ-प्रेम और विरह
4
प्रतीक
झुलनी
5
रस
करुण, वात्सल्य
तालिका 2: भाव और प्रतीक
तत्व
भाव
झुलनी
माँ का स्नेह
गाँव
बचपन और शांति
शहर
प्रवासी जीवन की पीड़ा
माँ की गोद
सुरक्षा और प्रेम
माइंड मैप
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महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
सामान्य गलतियाँ
शीर्षक को समझने में भ्रम होता है; 'झुलनी हेरानी' का भाव है 'झूला खो गया' - माँ का स्नेह-संसार दूर हो गया।
रचना को केवल प्रवास की कहानी मान लेना गलत है; इसका केंद्र मातृ-प्रेम और विरह है।
'झुलनी' को केवल झूला (खिलौना) मान लेना गलत है; यह माँ के स्नेह का प्रतीक है।
रामविलास शर्मा को केवल गीतकार लिखना अधूरा है; वे प्रसिद्ध आलोचक और भाषावैज्ञानिक हैं।
रचना में पुत्र को माँ पर क्रोध है, यह धारणा गलत है; उसमें माँ के प्रति गहरा प्रेम और विरह है।
रचना को केवल दुःख की रचना मानना गलत है; इसमें माँ के प्रेम की अमरता का सुंदर भाव है।
परीक्षा युक्तियाँ
लेखक परिचय में रामविलास शर्मा का आलोचक और भाषावैज्ञानिक होना लिखें।
शीर्षक का भावार्थ समझाते हुए उत्तर शुरू करें।
'झुलनी' प्रतीक का विश्लेषण करें।
प्रवासी जीवन की पीड़ा और माँ की याद को जोड़कर लिखें।
करुण और वात्सल्य रस के संगम को स्पष्ट करें।
गीतिनाट्य विधा की विशेषताएँ (गीत, संवाद, संगीत) लिखें।
निष्कर्ष
'एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!' रामविलास शर्मा का गीतिनाट्य है, जो प्रवासी पुत्र की मातृ-विरह व्यथा और माँ के स्नेह की अमरता को प्रस्तुत करता है। 'झुलनी' माँ के प्रेम का प्रतीक है, जो दूरी और समय से परे रहता है। यह रचना मातृ-प्रेम की पवित्रता और बचपन की स्मृतियों की मधुरता का अमर संदेश देती है।