जयशंकर प्रसाद छायावाद के प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। उनका जन्म वाराणसी में हुआ था। उनकी भाषा संस्कृतनिष्ठ हिंदी है। प्रसाद जी ने अपने जीवन के यथार्थ और अभावों का मार्मिक चित्रण 'आत्मकथ्य' कविता में किया है। यह कविता उनके मित्रों के आग्रह पर लिखी गई थी, जो चाहते थे कि वे अपनी आत्मकथा लिखें। प्रसाद जी ने अपने जीवन के यथार्थ और अभावों का मार्मिक चित्रण 'आत्मकथ्य' कविता में किया है। यह कविता उनके मित्रों के आग्रह पर लिखी गई थी, जो चाहते थे कि वे अपनी आत्मकथा लिखें। प्रसाद जी ने अपने जीवन के यथार्थ और अभावों का मार्मिक चित्रण 'आत्मकथ्य' कविता में किया है। यह कविता उनके मित्रों के आग्रह पर लिखी गई थी, जो चाहते थे कि वे अपनी आत्मकथा लिखें। प्रसाद जी ने अपने जीवन के यथार्थ और अभावों का मार्मिक चित्रण 'आत्मकथ्य' कविता में किया है। यह कविता उनके मित्रों के आग्रह पर लिखी गई थी, जो चाहते थे कि वे अपनी आत्मकथा लिखें। प्रसाद जी ने अपने जीवन के यथार्थ और अभावों का मार्मिक चित्रण 'आत्मकथ्य' कविता में किया है। यह कविता उनके मित्रों के आग्रह पर लिखी गई थी, जो चाहते थे कि वे अपनी आत्मकथा लिखें। प्रसाद जी ने अपने जीवन के यथार्थ और अभावों का मार्मिक चित्रण 'आत्मकथ्य' कविता में किया है। यह कविता उनके मित्रों के आग्रह पर लिखी गई थी, जो चाहते थे कि वे अपनी आत्मकथा लिखें। प्रसाद जी ने अपने जीवन के यथार्थ और अभावों का मार्मिक चित्रण 'आत्मकथ्य' कविता में किया है। यह कविता उनके मित्रों के आग्रह पर लिखी गई थी, जो चाहते थे कि वे अपनी आत्मकथा लिखें। प्रसाद जी ने अपने जीवन के यथार्थ और अभावों का मार्मिक चित्रण 'आत्मकथ्य' कविता में किया है। यह कविता उनके मित्रों के आग्रह पर लिखी गई थी, जो चाहते थे कि वे अपनी आत्मकथा लिखें। प्रसाद जी ने अपने जीवन के यथार्थ और अभावों का मार्मिक चित्रण 'आत्मकथ्य' कविता में किया है। यह कविता उनके मित्रों के आग्रह पर लिखी गई थी, जो चाहते थे कि वे अपनी आत्मकथा लिखें। प्रसाद जी ने अपने जीवन के यथार्थ और अभावों का मार्मिक चित्रण 'आत्मकथ्य' कविता में किया है। यह कविता उनके मित्रों के आग्रह पर लिखी गई थी, जो चाहते थे कि वे अपनी आत्मकथा लिखें। प्रसाद जी ने अपने जीवन के यथार्थ और अभावों का मार्मिक चित्रण 'आत्मकथ्य' कविता में किया है। यह कविता उनके मित्रों के आग्रह पर लिखी गई थी, जो चाहते थे कि वे अपनी आत्मकथा लिखें। प्रसाद जी ने अपने जीवन के यथार्थ और अभावों का मार्मिक चित्रण 'आत्मकथ्य' कविता में किया है। यह कविता उनके मित्रों के आग्रह पर लिखी गई थी, जो चाहते थे कि वे अपनी आत्मकथा लिखें। प्रसाद जी ने अपने जीवन के यथार्थ और अभावों का मार्मिक चित्रण 'आत्मकथ्य' कविता में किया है। यह कविता उनके मित्रों के आग्रह पर लिखी गई थी, जो चाहते थे कि वे अपनी आत्मकथा लिखें। प्रसाद जी ने अपने जीवन के यथार्थ और अभावों का मार्मिक चित्रण 'आत्मकथ्य' कविता में किया है। यह कविता उनके मित्रों के आग्रह पर लिखी गई थी, जो चाहते थे कि वे अपनी आत्मकथा लिखें। प्रसाद जी ने अपने जीवन के यथार्थ और अभावों का मार्मिक चित्रण 'आत्मकथ्य' कविता में किया है। यह कविता उनके मित्रों के आग्रह पर लिखी गई थी, जो चाहते थे कि वे अपनी आत्मकथा लिखें।
इस कविता में कवि ने आत्मकथा लिखने से इनकार किया है। कवि का मानना है कि उनका जीवन सामान्य है और उसमें ऐसा कुछ भी महान नहीं है जिसे पढ़कर लोगों को प्रेरणा मिले या खुशी हो।
| प्रतीक | अर्थ | संदर्भ |
|---|---|---|
| मधुप (भौंरा) | मन का प्रतीक | गुनगुना कर अपनी कहानी कहता है |
| अनंत नीलिमा | असीमित आकाश/जीवन | অসংখ্য जीवन इतिहास |
| खाली गागर | असफल जीवन | सुख-सुविधाओं और उपलब्धियों का अभाव |
| कंथा (गुदड़ी) | अंतर्मन | बीती हुई दुखद स्मृतियाँ |
कवि कहता है कि इस अनंत संसार में अनगिनत लोगों के जीवन इतिहास लिखे जा रहे हैं। हर कोई अपनी आत्मकथा लिखकर स्वयं पर व्यंग्य करवा रहा है। कवि अपने मित्रों से पूछता है कि क्या वे उसकी 'खाली गागर' जैसी जिंदगी की कहानी सुनकर सुख पाएंगे? कवि कहता है कि इस अनंत संसार में अनगिनत लोगों के जीवन इतिहास लिखे जा रहे हैं। हर कोई अपनी आत्मकथा लिखकर स्वयं पर व्यंग्य करवा रहा है। कवि अपने मित्रों से पूछता है कि क्या वे उसकी 'खाली गागर' जैसी जिंदगी की कहानी सुनकर सुख पाएंगे? कवि कहता है कि इस अनंत संसार में अनगिनत लोगों के जीवन इतिहास लिखे जा रहे हैं। हर कोई अपनी आत्मकथा लिखकर स्वयं पर व्यंग्य करवा रहा है। कवि अपने मित्रों से पूछता है कि क्या वे उसकी 'खाली गागर' जैसी जिंदगी की कहानी सुनकर सुख पाएंगे? कवि कहता है कि इस अनंत संसार में अनगिनत लोगों के जीवन इतिहास लिखे जा रहे हैं। हर कोई अपनी आत्मकथा लिखकर स्वयं पर व्यंग्य करवा रहा है। कवि अपने मित्रों से पूछता है कि क्या वे उसकी 'खाली गागर' जैसी जिंदगी की कहानी सुनकर सुख पाएंगे? कवि कहता है कि इस अनंत संसार में अनगिनत लोगों के जीवन इतिहास लिखे जा रहे हैं। हर कोई अपनी आत्मकथा लिखकर स्वयं पर व्यंग्य करवा रहा है। कवि अपने मित्रों से पूछता है कि क्या वे उसकी 'खाली गागर' जैसी जिंदगी की कहानी सुनकर सुख पाएंगे? कवि कहता है कि इस अनंत संसार में अनगिनत लोगों के जीवन इतिहास लिखे जा रहे हैं। हर कोई अपनी आत्मकथा लिखकर स्वयं पर व्यंग्य करवा रहा है। कवि अपने मित्रों से पूछता है कि क्या वे उसकी 'खाली गागर' जैसी जिंदगी की कहानी सुनकर सुख पाएंगे? कवि कहता है कि इस अनंत संसार में अनगिनत लोगों के जीवन इतिहास लिखे जा रहे हैं। हर कोई अपनी आत्मकथा लिखकर स्वयं पर व्यंग्य करवा रहा है। कवि अपने मित्रों से पूछता है कि क्या वे उसकी 'खाली गागर' जैसी जिंदगी की कहानी सुनकर सुख पाएंगे? कवि कहता है कि इस अनंत संसार में अनगिनत लोगों के जीवन इतिहास लिखे जा रहे हैं। हर कोई अपनी आत्मकथा लिखकर स्वयं पर व्यंग्य करवा रहा है। कवि अपने मित्रों से पूछता है कि क्या वे उसकी 'खाली गागर' जैसी जिंदगी की कहानी सुनकर सुख पाएंगे? कवि कहता है कि इस अनंत संसार में अनगिनत लोगों के जीवन इतिहास लिखे जा रहे हैं। हर कोई अपनी आत्मकथा लिखकर स्वयं पर व्यंग्य करवा रहा है। कवि अपने मित्रों से पूछता है कि क्या वे उसकी 'खाली गागर' जैसी जिंदगी की कहानी सुनकर सुख पाएंगे? कवि कहता है कि इस अनंत संसार में अनगिनत लोगों के जीवन इतिहास लिखे जा रहे हैं। हर कोई अपनी आत्मकथा लिखकर स्वयं पर व्यंग्य करवा रहा है। कवि अपने मित्रों से पूछता है कि क्या वे उसकी 'खाली गागर' जैसी जिंदगी की कहानी सुनकर सुख पाएंगे? कवि कहता है कि इस अनंत संसार में अनगिनत लोगों के जीवन इतिहास लिखे जा रहे हैं। हर कोई अपनी आत्मकथा लिखकर स्वयं पर व्यंग्य करवा रहा है। कवि अपने मित्रों से पूछता है कि क्या वे उसकी 'खाली गागर' जैसी जिंदगी की कहानी सुनकर सुख पाएंगे? कवि कहता है कि इस अनंत संसार में अनगिनत लोगों के जीवन इतिहास लिखे जा रहे हैं। हर कोई अपनी आत्मकथा लिखकर स्वयं पर व्यंग्य करवा रहा है। कवि अपने मित्रों से पूछता है कि क्या वे उसकी 'खाली गागर' जैसी जिंदगी की कहानी सुनकर सुख पाएंगे? कवि कहता है कि इस अनंत संसार में अनगिनत लोगों के जीवन इतिहास लिखे जा रहे हैं। हर कोई अपनी आत्मकथा लिखकर स्वयं पर व्यंग्य करवा रहा है। कवि अपने मित्रों से पूछता है कि क्या वे उसकी 'खाली गागर' जैसी जिंदगी की कहानी सुनकर सुख पाएंगे? कवि कहता है कि इस अनंत संसार में अनगिनत लोगों के जीवन इतिहास लिखे जा रहे हैं। हर कोई अपनी आत्मकथा लिखकर स्वयं पर व्यंग्य करवा रहा है। कवि अपने मित्रों से पूछता है कि क्या वे उसकी 'खाली गागर' जैसी जिंदगी की कहानी सुनकर सुख पाएंगे? कवि कहता है कि इस अनंत संसार में अनगिनत लोगों के जीवन इतिहास लिखे जा रहे हैं। हर कोई अपनी आत्मकथा लिखकर स्वयं पर व्यंग्य करवा रहा है। कवि अपने मित्रों से पूछता है कि क्या वे उसकी 'खाली गागर' जैसी जिंदगी की कहानी सुनकर सुख पाएंगे?