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यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय — अध्ययन नोट्स

विस्तृत सिद्धांत, सूत्र, आरेख और स्मृति सहायक।

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1. प्रस्तावना (Introduction)

19वीं सदी के दौरान यूरोप में राष्ट्रवाद (Nationalism) एक शक्तिशाली शक्ति के रूप में उभरा। इसने यूरोप के राजनीतिक और मानसिक जगत में भारी परिवर्तन ला दिए। इन परिवर्तनों का अंतिम परिणाम यूरोप के बहु-राष्ट्रीय वंशवादी साम्राज्यों के स्थान पर राष्ट्र-राज्य (Nation-State) का उदय था। राष्ट्र-राज्य में न केवल शासकों बल्कि अधिकांश नागरिकों में एक साझा पहचान और साझा इतिहास या विरासत की भावना विकसित हुई।

फ्रांसीसी क्रांति और राष्ट्र का विचार (The French Revolution and the Idea of the Nation)

राष्ट्रवाद की पहली स्पष्ट अभिव्यक्ति 1789 में फ्रांसीसी क्रांति के साथ हुई। क्रांति से पहले फ्रांस एक पूर्ण राजतंत्र था। - फ्रांसीसी क्रांतिकारियों ने कई कदम उठाए जिससे फ्रांसीसी लोगों में एक सामूहिक पहचान (Collective Identity) की भावना पैदा हो सके। - पितृभूमि (la patrie) और नागरिक (le citoyen) जैसे विचारों ने एक संयुक्त समुदाय के विचार पर बल दिया जिसे संविधान के तहत समान अधिकार प्राप्त थे। - एक नया फ्रांसीसी झंडा (तिरंगा) चुना गया जिसने पुराने शाही ध्वज की जगह ली। - एस्टेट जनरल (Estates General) का चुनाव सक्रिय नागरिकों के समूह द्वारा किया गया और इसका नाम बदलकर नेशनल असेंबली (National Assembly) कर दिया गया। - आंतरिक सीमा शुल्क और कर समाप्त कर दिए गए और वज़न तथा माप की एक समान प्रणाली अपनाई गई। - क्षेत्रीय बोलियों को हतोत्साहित किया गया और पेरिस में बोली और लिखी जाने वाली फ्रेंच भाषा राष्ट्र की साझा भाषा बन गई।


2. नेपोलियन का शासन (Napoleon's Rule)

नेपोलियन ने फ्रांस में लोकतंत्र को नष्ट कर दिया, लेकिन प्रशासनिक क्षेत्र में उसने क्रांतिकारी सिद्धांतों को शामिल किया ताकि पूरी व्यवस्था अधिक तर्कसंगत और कुशल बन सके। - 1804 की नागरिक संहिता (Civil Code of 1804): इसे नेपोलियन संहिता के रूप में भी जाना जाता है। इस संहिता ने जन्म पर आधारित सभी विशेषाधिकार समाप्त कर दिए, कानून के समक्ष समानता स्थापित की और संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित किया। - डच गणराज्य, स्विट्जरलैंड, इटली और जर्मनी में नेपोलियन ने प्रशासनिक विभाजनों को सरल बनाया, सामंती व्यवस्था को समाप्त किया और किसानों को भू-दासत्व (serfdom) और जागीरदारी शुल्कों से मुक्त किया। - शहरों में कारीगरों के गिल्ड (Guild) प्रतिबंधों को हटा दिया गया। - परिवहन और संचार प्रणालियों में सुधार किया गया।

हालांकि, शुरुआत में फ्रांसीसी सेनाओं का स्वागत किया गया था, लेकिन जल्द ही यह स्पष्ट हो गया कि नई प्रशासनिक व्यवस्था राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ-साथ नहीं चल रही थी। बढ़े हुए कर, सेंसरशिप और फ्रांसीसी सेना में जबरन भर्ती ने प्रशासनिक परिवर्तनों के फायदों को कम कर दिया।


3. यूरोप में राष्ट्रवाद का निर्माण (The Making of Nationalism in Europe)

यदि आप 18वीं सदी के मध्य के यूरोप के मानचित्र को देखें, तो आपको कोई भी 'राष्ट्र-राज्य' वैसा नहीं मिलेगा जैसा कि हम आज जानते हैं। जो आज जर्मनी, इटली और स्विट्जरलैंड हैं, वे साम्राज्यों और कैंटन में विभाजित थे जिनके शासकों के अपने स्वायत्त क्षेत्र थे।

कुलीन वर्ग और नया मध्य वर्ग (The Aristocracy and the New Middle Class)

उदारवादी राष्ट्रवाद का क्या अर्थ था? (What did Liberal Nationalism Stand for?)

19वीं सदी की शुरुआत में यूरोप में राष्ट्रीय एकता के विचार उदारवाद (Liberalism) की विचारधारा से घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए थे। - राजनीतिक क्षेत्र में: उदारवाद का अर्थ था कानून के समक्ष समानता, निरंकुश शासन और पादरी वर्ग के विशेषाधिकारों की समाप्ति, एक संविधान, और संसदीय सरकार। - आर्थिक क्षेत्र में: उदारवाद का मतलब बाज़ारों की स्वतंत्रता और राज्य द्वारा माल तथा पूंजी की आवाजाही पर लगाए गए प्रतिबंधों को समाप्त करना था। 1834 में प्रशिया की पहल पर एक सीमा शुल्क संघ, ज़ोल्वेरिन (Zollverein), का गठन किया गया था जिसमें अधिकांश जर्मन राज्य शामिल हुए।


4. 1815 के बाद नया रूढ़िवाद (A New Conservatism after 1815)

1815 में नेपोलियन की हार के बाद, यूरोपीय सरकारें रूढ़िवाद (Conservatism) की भावना से प्रेरित थीं। - रूढ़िवादी मानते थे कि राज्य और समाज की स्थापित पारंपरिक संस्थाओं—जैसे राजतंत्र, चर्च, सामाजिक पदानुक्रम, संपत्ति और परिवार—को संरक्षित किया जाना चाहिए। - 1815 में, यूरोपीय शक्तियों (ब्रिटेन, रूस, प्रशिया और ऑस्ट्रिया) के प्रतिनिधियों, जिन्होंने सामूहिक रूप से नेपोलियन को हराया था, ने यूरोप के लिए एक समझौता तैयार करने के लिए वियना में मुलाकात की (वियना की संधि, 1815)। - इसका मुख्य उद्देश्य नेपोलियन के युद्धों के दौरान हुए अधिकांश परिवर्तनों को पूर्ववत करना और यूरोप में एक नई रूढ़िवादी व्यवस्था स्थापित करना था। - 1815 में स्थापित रूढ़िवादी शासन निरंकुश थे। वे आलोचना और असहमति को बर्दाश्त नहीं करते थे और उन गतिविधियों को रोकने की कोशिश करते थे जो निरंकुश सरकारों की वैधता पर सवाल उठाती थीं।


5. क्रांतियों का युग: 1830-1848 (The Age of Revolutions)

जैसे-जैसे रूढ़िवादी शासनों ने अपनी शक्ति को मजबूत करने की कोशिश की, यूरोप के कई क्षेत्रों जैसे इतालवी और जर्मन राज्यों, ओटोमन साम्राज्य के प्रांतों, आयरलैंड और पोलैंड में राष्ट्रवाद और उदारवाद को क्रांति के साथ जोड़ा जाने लगा।


6. जर्मनी और इटली का एकीकरण (The Making of Germany and Italy)

जर्मनी का एकीकरण (1866-1871)

1848 के बाद यूरोप में राष्ट्रवाद लोकतंत्र और क्रांति से अलग हो गया। - प्रशिया (Prussia) ने राष्ट्रीय एकीकरण के आंदोलन का नेतृत्व संभाला। इसके मुख्यमंत्री, ओटो वॉन बिस्मार्क (Otto von Bismarck), इस प्रक्रिया के मुख्य वास्तुकार थे, जिन्होंने प्रशिया की सेना और नौकरशाही की मदद ली। - सात वर्षों में तीन युद्ध—ऑस्ट्रिया, डेनमार्क और फ्रांस के साथ—प्रशिया की जीत में समाप्त हुए और एकीकरण की प्रक्रिया पूरी हुई। - जनवरी 1871 में, वर्साय में हुए एक समारोह में प्रशिया के राजा विलियम प्रथम (William I) को जर्मन सम्राट घोषित किया गया।

इटली का एकीकरण

जर्मनी की तरह, इटली का भी राजनीतिक विखंडन का एक लंबा इतिहास रहा है। इतालवी कई वंशवादी राज्यों के साथ-साथ बहु-राष्ट्रीय हैब्सबर्ग साम्राज्य में बिखरे हुए थे। - 1830 के दशक के दौरान, ग्यूसेप मैज़िनी (Giuseppe Mazzini) ने इतालवी गणराज्य के लिए एक सुसंगत कार्यक्रम तैयार करने का प्रयास किया था। उन्होंने 'यंग इटली' नामक एक गुप्त समाज भी बनाया था। - 1831 और 1848 के क्रांतिकारी विद्रोहों की विफलता का मतलब था कि अब इटली के राज्यों को एकजुट करने की जिम्मेदारी सार्डिनिया-पीडमोंट के शासक किंग विक्टर इमैनुएल द्वितीय पर आ गई थी। - मुख्यमंत्री कैवूर (Cavour) ने इटली के क्षेत्रों को एकजुट करने के आंदोलन का नेतृत्व किया। वह न तो क्रांतिकारी थे और न ही डेमोक्रेट। फ्रांस के साथ कूटनीतिक गठबंधन के माध्यम से, सार्डिनिया-पीडमोंट ने 1859 में ऑस्ट्रियाई सेनाओं को हराने में सफलता प्राप्त की। - 1860 में, वे दक्षिण इटली और टू सिसिलीज के राज्य में चले गए और ग्यूसेप गैरीबाल्डी (Giuseppe Garibaldi) के नेतृत्व में स्थानीय किसानों का समर्थन जीतने में सफल रहे। - 1861 में विक्टर इमैनुएल द्वितीय को एकीकृत इटली का राजा घोषित किया गया।


7. राष्ट्र का दृश्यीकरण और साम्राज्यवाद (Visualising the Nation and Imperialism)

18वीं और 19वीं शताब्दी के कलाकारों ने एक राष्ट्र का मानवीकरण करके (यानी उसे एक व्यक्ति के रूप में चित्रित करके) उसका प्रतिनिधित्व करने का तरीका खोजा। - राष्ट्रों को नारी रूपकों (Female Allegories) के रूप में चित्रित किया गया। - फ्रांस में इसे मारियान (Marianne) का नाम दिया गया, जो स्वतंत्रता और गणतंत्र के विचारों का प्रतिनिधित्व करती थी। - इसी तरह, जर्मेनिया (Germania) जर्मन राष्ट्र का रूपक बन गई। दृश्य अभ्यावेदन में, जर्मेनिया बलूत (oak) के पत्तों का मुकुट पहनती है, क्योंकि जर्मन बलूत वीरता का प्रतीक है।

राष्ट्रवाद और साम्राज्यवाद (Nationalism and Imperialism): 19वीं सदी की अंतिम तिमाही तक, राष्ट्रवाद ने अपने आदर्शवादी उदारवादी-लोकतांत्रिक स्वरूप को खो दिया और यह संकीर्ण लक्ष्यों वाला एक सीमित सिद्धांत बन गया। इसका सबसे बड़ा उदाहरण बाल्कन (Balkans) क्षेत्र था, जो 1871 के बाद यूरोप में गंभीर राष्ट्रवादी तनाव का स्रोत बन गया। विभिन्न स्लाविक राष्ट्रीयताओं ने अपनी पहचान और स्वतंत्रता को परिभाषित करने के लिए संघर्ष किया, जिससे बाल्कन क्षेत्र तीव्र संघर्ष का क्षेत्र बन गया, जो अंततः प्रथम विश्व युद्ध (1914) का कारण बना।

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