वृत्त और उसके भागों से संबंधित क्षेत्रफलों का अध्ययन इस अध्याय का मुख्य विषय है। कक्षा 9 में हमने वृत्त की परिधि $2\pi r$ और क्षेत्रफल $\pi r^2$ का अध्ययन किया था। इस अध्याय में हम वृत्त के भागों — वृत्तखंड (sector), वृत्ताकार खंड (segment) — के क्षेत्रफल तथा संयुक्त आकृतियों के क्षेत्रफल ज्ञात करना सीखेंगे।
किसी वृत्त में दो त्रिज्याओं और एक चाप से घिरा क्षेत्र वृत्तखंड कहलाता है। जीवा और चाप के बीच का क्षेत्र वृत्ताकार खंड कहलाता है। इन भागों के क्षेत्रफलों के सूत्रों की सहायता से घड़ी की सुइयों द्वारा बना क्षेत्र, गोल मेज़पोश, दौड़ का मैदान आदि के क्षेत्रफल ज्ञात किए जा सकते हैं।
इस अध्याय में सबसे महत्वपूर्ण अवधारणा है कि दो वृत्तों के बीच का वलयाकार क्षेत्रफल बड़े वृत्त और छोटे वृत्त के क्षेत्रफलों का अंतर होता है। संयुक्त आकृतियों के प्रश्नों में आकृति को त्रिभुज, वृत्तखंड, आयत आदि में विभाजित करके क्षेत्रफल ज्ञात किया जाता है।
माना वृत्त की त्रिज्या $r$ है, तो:
यदि केवल परिधि ज्ञात हो, तो $r = \frac{C}{2\pi}$ से त्रिज्या निकाली जा सकती है। कुछ समस्याओं में पहिए के घूर्णन से तय की गई दूरी ज्ञात करने के लिए परिधि का उपयोग होता है:
$$\text{तय की गई दूरी} = \text{घूर्णनों की संख्या} \times \text{परिधि}$$
माना वृत्त में केंद्र पर बना कोण $\theta$ (डिग्री में) है, त्रिज्या $r$ है।
वृत्तखंड का क्षेत्रफल: $$A = \frac{\theta}{360^\circ} \times \pi r^2$$
चाप की लंबाई: $$l = \frac{\theta}{360^\circ} \times 2\pi r$$
वृत्तखंड का क्षेत्रफल चाप की लंबाई से भी ज्ञात किया जा सकता है: $$A = \frac{1}{2} l r$$
उदाहरण: त्रिज्या 7 सेमी और केंद्रीय कोण $60^\circ$ वाले वृत्तखंड का क्षेत्रफल: $$A = \frac{60}{360} \times \frac{22}{7} \times 49 = \frac{1}{6} \times 154 = 25.67 \text{ सेमी}^2$$
यदि कोण $90^\circ$ या $180^\circ$ हो, तो क्षेत्रफल क्रमशः वृत्त के क्षेत्रफल का चौथाई या आधा होता है।
जीवा और संबंधित चाप से घिरा क्षेत्र वृत्ताकार खंड कहलाता है। छोटा खंड (minor segment) उस भाग का क्षेत्रफल:
$$\text{वृत्ताकार खंड का क्षेत्रफल} = \text{वृत्तखंड का क्षेत्रफल} - \text{त्रिभुज OAB का क्षेत्रफल}$$
$$= \frac{\theta}{360^\circ} \times \pi r^2 - \frac{1}{2} r^2 \sin \theta$$
बड़ा खंड (major segment) का क्षेत्रफल वृत्त के क्षेत्रफल में से छोटे खंड का क्षेत्रफल घटाकर प्राप्त होता है।
ध्यान दें: $\theta = 180^\circ$ होने पर वृत्ताकार खंड अर्धवृत्त बन जाता है, जिसका क्षेत्रफल $\frac{1}{2}\pi r^2$ होता है।
बाहरी त्रिज्या $R$ और आंतरिक त्रिज्या $r$ वाले वलयाकार क्षेत्र का क्षेत्रफल:
$$\text{क्षेत्रफल} = \pi R^2 - \pi r^2 = \pi (R^2 - r^2)$$
यह सूत्र वृत्ताकार पथ, वलय, ट्यूब के अनुप्रस्थ काट आदि के क्षेत्रफल ज्ञात करने में प्रयुक्त होता है।
दो संकेंद्रीय वृत्तों (जिनका केंद्र समान हो) के बीच का क्षेत्रफल उपरोक्त वलय सूत्र से ज्ञात होता है। यदि वृत्तों की त्रिज्याएँ $R$ और $r$ हैं, तो:
$$\text{बीच का क्षेत्रफल} = \pi(R^2 - r^2) = \pi(R + r)(R - r)$$
इस सूत्र का प्रयोग गोलाकार सड़क, फव्वारे के चारों ओर के रास्ते आदि के क्षेत्रफल में होता है।
संयुक्त आकृतियों में वृत्त के भाग (वृत्तखंड, अर्धवृत्त, चतुर्थांश) के साथ आयत, त्रिभुज, वर्ग आदि भी जुड़े होते हैं। ऐसी आकृतियों का क्षेत्रफल ज्ञात करने की विधि:
उदाहरण: वर्ग के अंदर बने चतुर्थांश का क्षेत्रफल ज्ञात करने के लिए वर्ग के क्षेत्रफल से चतुर्थांश का क्षेत्रफल घटाया जाता है। आकृति को ध्यान से देखकर सही जोड़-घटाव तय करना आवश्यक है।
अर्धवृत्त की परिधि में केवल चाप की लंबाई ही नहीं, बल्कि व्यास भी शामिल होता है। विद्यार्थी प्रायः व्यास जोड़ना भूल जाते हैं।
| अवधारणा | सूत्र |
|---|---|
| परिधि | $2\pi r$ |
| क्षेत्रफल | $\pi r^2$ |
| वृत्तखंड का क्षेत्रफल | $\frac{\theta}{360^\circ}\pi r^2$ |
| चाप की लंबाई | $\frac{\theta}{360^\circ}2\pi r$ |
| वलय का क्षेत्रफल | $\pi(R^2 - r^2)$ |
| वृत्ताकार खंड | वृत्तखंड - त्रिभुज |
| कोण | वृत्तखंड क्षेत्रफल | चाप लंबाई |
|---|---|---|
| $60^\circ$ | $\frac{1}{6}\pi r^2$ | $\frac{1}{3}\pi r$ |
| $90^\circ$ | $\frac{1}{4}\pi r^2$ | $\frac{1}{2}\pi r$ |
| $180^\circ$ | $\frac{1}{2}\pi r^2$ | $\pi r$ |
| आकृति | परिधि/परिमाप |
|---|---|
| अर्धवृत्त | $r(\pi + 2)$ |
| चतुर्थांश | $\frac{1}{2}\pi r + 2r$ |
| पूर्ण वृत्त | $2\pi r$ |
वृत्तों से संबंधित क्षेत्रफल अध्याय में हमने वृत्त की परिधि, क्षेत्रफल, वृत्तखंड और वृत्ताकार खंड के क्षेत्रफल, वलय तथा संयुक्त आकृतियों के क्षेत्रफल ज्ञात करना सीखा। वृत्तखंड और वृत्ताकार खंड के सूत्रों में कोण और त्रिज्या की भूमिका स्पष्ट होती है। संयुक्त आकृतियों के प्रश्नों में आकृति को सरल भागों में विभाजित करना सबसे महत्वपूर्ण कौशल है। इन सूत्रों के नियमित अभ्यास से परीक्षा में इस अध्याय से आने वाले प्रश्नों को आसानी से हल किया जा सकता है।