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1. परिचय

हमारे चारों ओर की अधिकांश वस्तुएँ — डिब्बे, पाइप, गेंद, शंकु आकार के खिलौने — त्रिविमीय (3D) आकृतियाँ हैं। इस अध्याय में हम घन, घनाभ, बेलन, शंकु, गोला, अर्धगोला तथा इनके संयोजन से बनी आकृतियों के पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन का अध्ययन करेंगे।

किसी त्रिविमीय आकृति की बाहरी सतह का कुल क्षेत्रफल पृष्ठीय क्षेत्रफल कहलाता है। वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल केवल वक्र सतह का क्षेत्रफल होता है, जबकि कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल में सभी फलक सम्मिलित होते हैं। आकृति के अंदर का स्थान आयतन कहलाता है।

इस अध्याय में विशेष महत्व का भाग संयुक्त आकृतियों (combination of solids) का है, जहाँ बेलन पर अर्धगोला या शंकु पर बेलन जैसी आकृतियों का निर्माण होता है। ऐसी आकृतियों का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात करते समय जोड़ के क्षेत्रफल को नहीं जोड़ा जाता, बल्कि उन भागों के पृष्ठीय क्षेत्रफल जोड़े जाते हैं जो दिखाई देते हैं।

2. घनाभ और घन (Cuboid and Cube)

घनाभ: लंबाई $l$, चौड़ाई $b$, ऊँचाई $h$:

घन: भुजा $a$ (यहाँ $l = b = h = a$):

3. बेलन (Cylinder)

त्रिज्या $r$, ऊँचाई $h$:

खोखला बेलन (बाहरी त्रिज्या $R$, आंतरिक त्रिज्या $r$): - वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल: $2\pi(R + r)h$ - कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल: $2\pi(R + r)h + 2\pi(R^2 - r^2)$ - आयतन: $\pi(R^2 - r^2)h$

4. शंकु (Cone)

त्रिज्या $r$, ऊँचाई $h$, तिर्यक ऊँचाई $l$:

$$l = \sqrt{r^2 + h^2}$$

शंकु का आयतन समान आधार और समान ऊँचाई वाले बेलन के आयतन का एक-तिहाई होता है।

5. गोला और अर्धगोला (Sphere and Hemisphere)

गोला (त्रिज्या $r$): - पृष्ठीय क्षेत्रफल: $4\pi r^2$ - आयतन: $\frac{4}{3}\pi r^3$

अर्धगोला (त्रिज्या $r$): - वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल: $2\pi r^2$ - कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल: $3\pi r^2$ - आयतन: $\frac{2}{3}\pi r^3$

6. संयुक्त आकृतियाँ (Combination of Solids)

जब दो या दो से अधिक आकृतियाँ जुड़ी होती हैं, तो उस संयुक्त आकृति का पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात करते समय जोड़ वाले क्षेत्रफल को शामिल नहीं किया जाता। उदाहरण के लिए, बेलन पर बैठा अर्धगोला:

संयुक्त आकृतियों के आयतन में सभी आकृतियों के आयतन जुड़ते हैं, परंतु पृष्ठीय क्षेत्रफल में जोड़ का क्षेत्रफल हटाया जाता है।

7. ठोसों का पिघलाकर परिवर्तन (Conversion of Solids)

जब एक ठोस को पिघलाकर दूसरे ठोस में बदला जाता है, तो आयतन समान रहता है (यदि पिघलने में कोई हानि न हो)।

उदाहरण: एक गोले को पिघलाकर शंकु बनाने पर: $$\text{गोले का आयतन} = \text{शंकु का आयतन}$$ $$\frac{4}{3}\pi r_1^3 = \frac{1}{3}\pi r_2^2 h$$

इस समीकरण से अज्ञात त्रिज्या या ऊँचाई ज्ञात की जा सकती है। कुछ प्रश्नों में गोले को कई छोटे गोलों में बदला जाता है, तब बड़े गोले का आयतन छोटे गोलों के आयतनों के योग के बराबर होता है।

8. आयतन से पृष्ठीय क्षेत्रफल या इसके विपरीत

कुछ प्रश्नों में आयतन दिया होता है और पृष्ठीय क्षेत्रफल पूछा जाता है या इसके विपरीत। ऐसे प्रश्नों में पहले आयतन से त्रिज्या/ऊँचाई ज्ञात करें, फिर पृष्ठीय क्षेत्रफल का सूत्र लगाएँ।

उदाहरण: यदि बेलन का आयतन और ऊँचाई ज्ञात है, तो $r = \sqrt{\frac{V}{\pi h}}$ से त्रिज्या निकालकर पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात किया जा सकता है।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: पृष्ठीय क्षेत्रफल

आकृति वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल
घनाभ $2h(l + b)$ $2(lb + bh + hl)$
घन $4a^2$ $6a^2$
बेलन $2\pi rh$ $2\pi r(h + r)$
शंकु $\pi rl$ $\pi r(l + r)$
गोला $4\pi r^2$ $4\pi r^2$
अर्धगोला $2\pi r^2$ $3\pi r^2$

तालिका 2: आयतन

आकृति आयतन
घनाभ $lbh$
घन $a^3$
बेलन $\pi r^2 h$
शंकु $\frac{1}{3}\pi r^2 h$
गोला $\frac{4}{3}\pi r^3$
अर्धगोला $\frac{2}{3}\pi r^3$

तालिका 3: महत्वपूर्ण संबंध

संबंध कथन
शंकु की तिर्यक ऊँचाई $l = \sqrt{r^2 + h^2}$
घन का विकर्ण $a\sqrt{3}$
परिवर्तन पिघलाने पर आयतन समान रहता है

माइंड मैप

graph TD A["पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन"] --> B["घनाभ, घन"] A --> C["बेलन"] A --> D["शंकु"] A --> E["गोला, अर्धगोला"] A --> F["संयुक्त आकृतियाँ"] A --> G["पिघलाकर परिवर्तन"] B --> H["TSA = 2(lb+bh+hl)"] C --> I["V = πr²h"] D --> J["V = 1/3 πr²h"] E --> K["V = 4/3 πr³"] F --> L["आयतन जुड़ते, जोड़ का CSA नहीं"] G --> M["आयतन समान रहता है"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: त्रिविमीय आकृतियाँ

मुख्य त्रिविमीय आकृतियाँ घनाभ (Cuboid) बेलन (Cylinder) शंकु (Cone) गोला (Sphere) अर्धगोला (Hemisphere) स्वर्ण नियम (Golden Rule) शंकु का आयतन समान आधार और ऊँचाई वाले बेलन का 1/3 होता है

आरेख 2: संयुक्त आकृति का पृष्ठीय क्षेत्रफल

संयुक्त आकृति: बेलन + अर्धगोला बेलन (ऊँचाई h) अर्धगोला r गणना विधि CSA = 2πrh (बेलन) CSA = 2πr² (अर्धगोला) + πr² (नीचे का वृत्तीय आधार) V = πr²h + 2/3 πr³ जोड़ वाला क्षेत्रफल नहीं जोड़ते! स्वर्ण नियम (Golden Rule) पृष्ठीय क्षेत्रफल में जोड़ का क्षेत्र छुपा रहता है, आयतन में सब जुड़ता है

सामान्य गलतियाँ

  1. बेलन के कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल में दोनों वृत्तीय फलक भूलना: कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल $2\pi r(h + r)$ में दोनों वृत्तीय सिरे शामिल होते हैं।
  2. शंकु की तिर्यक ऊँचाई को ऊँचाई मान लेना: $l = \sqrt{r^2 + h^2}$ से तिर्यक ऊँचाई निकालना आवश्यक है; $l$ और $h$ भिन्न हैं।
  3. अर्धगोले के कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल में आधार न जोड़ना: अर्धगोले का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल $3\pi r^2$ होता है (वक्र $2\pi r^2$ + आधार $\pi r^2$)।
  4. संयुक्त आकृति में जोड़ का क्षेत्र जोड़ना: दो आकृतियों के जोड़ वाला क्षेत्रफल पृष्ठीय क्षेत्रफल में नहीं आता।
  5. पिघलाने के प्रश्न में आयतन बराबर न रखना: पिघलाकर नई आकृति बनाने पर दोनों आयतन समान होते हैं।
  6. इकाई की गलती: पृष्ठीय क्षेत्रफल में वर्ग इकाई ($\text{cm}^2$), आयतन में घन इकाई ($\text{cm}^3$)।
  7. खोखले बेलन के आयतन में आंतरिक त्रिज्या का प्रयोग न करना: खोखले बेलन का आयतन $\pi(R^2 - r^2)h$ होता है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. प्रश्न को ध्यान से पढ़कर पहचानें कि आकृति ठोस है या खोखली, और कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल चाहिए या वक्र।
  2. संयुक्त आकृति में पहले आकृति को पहचानें, फिर दिखाई देने वाले भागों के पृष्ठीय क्षेत्रफल जोड़ें।
  3. पिघलाने वाले प्रश्नों में दोनों आयतनों को बराबर रखकर अज्ञात राशि ज्ञात करें।
  4. शंकु और बेलन के संयोजन में $l = \sqrt{r^2 + h^2}$ का प्रयोग करें।
  5. उत्तर में हमेशा सही इकाई लिखें और पूछे गए प्रश्न के अनुसार ही उत्तर दें।
  6. जब केवल वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल की आवश्यकता हो (जैसे पाइप, टंकी को रंगना), तो केवल वक्र भाग ज्ञात करें।
  7. ऊँचाई या त्रिज्या अज्ञात होने पर पहले उसे आयतन सूत्र से ज्ञात करें।

निष्कर्ष

पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन अध्याय में हमने घनाभ, घन, बेलन, शंकु, गोला और अर्धगोले के पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन के सूत्रों का अध्ययन किया। संयुक्त आकृतियों का पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात करते समय दिखाई देने वाले भागों का ही योग किया जाता है, जबकि आयतन में सब जुड़ता है। पिघलाने से परिवर्तन के प्रश्नों में आयतन संरक्षित रहता है। ये अवधारणाएँ रोजमर्रा की वस्तुओं के मापन में उपयोगी हैं। सूत्रों की तालिका याद रखकर और प्रश्नों के अभ्यास से इस अध्याय में पूर्ण अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।