सांख्यिकी गणित की वह शाखा है जो आँकड़ों के संग्रह, संगठन, प्रस्तुति और विश्लेषण से संबंधित है। दैनिक जीवन में हम खेलों के स्कोर, बाजार मूल्य, वर्षा के आँकड़े आदि देखते रहते हैं। इस अध्याय में हम विभिन्न प्रकार के आँकड़ों के केंद्रीय प्रवृत्ति के माप — माध्य (mean), माध्यिका (median) और बहुलक (mode) — ज्ञात करना सीखेंगे।
कक्षा 9 में आपने अवर्गीकृत आँकड़ों का माध्य, माध्यिका और बहुलक ज्ञात करना सीखा था। इस अध्याय में हम वर्गीकृत आँकड़ों (grouped data) के लिए इनकी गणना की विधियों का अध्ययन करेंगे। वर्गीकृत आँकड़ों में आँकड़ों को वर्ग अंतरालों में बाँटा जाता है, जैसे "10-20"।
माध्य, माध्यिका और बहुलक के बीच के अनुभवजन्य संबंध को जानना भी महत्वपूर्ण है, जो आँकड़ों के वितरण को समझने में सहायक होता है। साथ ही हम आँकड़ों के संचयी आवृत्ति वितरण और उसके आलेखीय निरूपण का भी अध्ययन करेंगे।
वर्गीकृत आँकड़ों में प्रत्येक वर्ग के मध्य बिंदु (class mark) को वर्ग का निरूपक मान लिया जाता है:
$$\text{वर्ग मध्य बिंदु} = \frac{\text{ऊपरी सीमा} + \text{निचली सीमा}}{2}$$
वर्गीकृत आँकड़ों का माध्य ज्ञात करने की तीन विधियाँ हैं। यहाँ $x_i$ वर्ग मध्य बिंदु, $f_i$ आवृत्ति है।
1. प्रत्यक्ष विधि (Direct Method): $$\bar{x} = \frac{\sum f_i x_i}{\sum f_i}$$
2. कल्पित माध्य विधि (Assumed Mean Method): माना $a$ कल्पित माध्य और $d_i = x_i - a$। $$\bar{x} = a + \frac{\sum f_i d_i}{\sum f_i}$$
3. पग-विचलन विधि (Step Deviation Method): माना $u_i = \frac{x_i - a}{h}$, जहाँ $h$ वर्ग-आकार है। $$\bar{x} = a + h \times \frac{\sum f_i u_i}{\sum f_i}$$
तीनों विधियों से प्राप्त माध्य समान होता है। बड़े आँकड़ों में पग-विचलन विधि सबसे सरल होती है।
उदाहरण (प्रत्यक्ष विधि): निम्न वितरण का माध्य ज्ञात करें।
| वर्ग | 10-20 | 20-30 | 30-40 |
|---|---|---|---|
| आवृत्ति | 2 | 3 | 5 |
वर्ग मध्य बिंदु: 15, 25, 35। $\sum f_i x_i = 2(15) + 3(25) + 5(35) = 30 + 75 + 175 = 280$। $\sum f_i = 10$। अतः $\bar{x} = 28$।
बहुलक वह मान है जो आँकड़ों में सबसे अधिक बार आता है। वर्गीकृत आँकड़ों में बहुलक वर्ग ज्ञात करने के बाद निम्न सूत्र प्रयुक्त होता है:
$$\text{Mode} = l + \frac{f_1 - f_0}{2f_1 - f_0 - f_2} \times h$$
यहाँ: - $l$ = बहुलक वर्ग की निचली सीमा - $h$ = वर्ग-आकार - $f_1$ = बहुलक वर्ग की आवृत्ति - $f_0$ = बहुलक वर्ग से पहले वाले वर्ग की आवृत्ति - $f_2$ = बहुलक वर्ग के बाद वाले वर्ग की आवृत्ति
बहुलक वर्ग वह वर्ग है जिसकी आवृत्ति सर्वाधिक होती है।
माध्यिका आँकड़ों को क्रम में रखने पर बीच का मान होता है। वर्गीकृत आँकड़ों में माध्यिका के लिए सबसे पहले संचयी आवृत्ति ज्ञात की जाती है।
माध्यिका वर्ग: वह वर्ग जिसकी संचयी आवृत्ति $\frac{n}{2}$ से ठीक बड़ी हो, जहाँ $n = \sum f_i$।
$$\text{Median} = l + \frac{\frac{n}{2} - cf}{f} \times h$$
यहाँ: - $l$ = माध्यिका वर्ग की निचली सीमा - $cf$ = माध्यिका वर्ग से पहले वाले वर्ग की संचयी आवृत्ति - $f$ = माध्यिका वर्ग की आवृत्ति - $h$ = वर्ग-आकार
सौम्य वितरणों के लिए अनुभवजन्य संबंध:
$$\text{बहुलक} = 3 \times \text{माध्यिका} - 2 \times \text{माध्य}$$
$$\text{Mode} = 3\text{Median} - 2\text{Mean}$$
इस संबंध की सहायता से, यदि तीनों में से दो ज्ञात हों, तो तीसरा ज्ञात किया जा सकता है।
संचयी आवृत्ति किसी वर्ग की सीमा तक की सभी आवृत्तियों का योग होती है। संचयी आवृत्ति के दो प्रकार होते हैं:
संचयी आवृत्ति वितरण को तोरण (Ogive) वक्र द्वारा निरूपित किया जाता है। दोनों तोरणों के प्रतिच्छेदन बिंदु से माध्यिका ज्ञात की जा सकती है।
आयतचित्र केवल निरंतर (continuous) वर्गों के लिए बनता है, जबकि आवृत्ति बहुभुज असतत वर्गों के लिए भी बनाया जा सकता है।
| माप | परिभाषा | सूत्र |
|---|---|---|
| माध्य | औसत मान | $\frac{\sum f_i x_i}{\sum f_i}$ |
| माध्यिका | बीच का मान | $l + \frac{\frac{n}{2} - cf}{f} \times h$ |
| बहुलक | सर्वाधिक बार आने वाला मान | $l + \frac{f_1 - f_0}{2f_1 - f_0 - f_2} \times h$ |
| विधि | सूत्र | कब उपयुक्त |
|---|---|---|
| प्रत्यक्ष | $\frac{\sum f_i x_i}{\sum f_i}$ | छोटे आँकड़े |
| कल्पित माध्य | $a + \frac{\sum f_i d_i}{\sum f_i}$ | मध्यम आँकड़े |
| पग-विचलन | $a + h\frac{\sum f_i u_i}{\sum f_i}$ | बड़े आँकड़े |
| विषय | विवरण |
|---|---|
| अनुभवजन्य संबंध | Mode = 3Median - 2Mean |
| तोरण | संचयी आवृत्ति वक्र |
| आयतचित्र | आसन्न आयतों द्वारा |
| आवृत्ति बहुभुज | मध्य बिंदुओं को जोड़कर |
सांख्यिकी अध्याय में हमने वर्गीकृत आँकड़ों के माध्य, माध्यिका और बहुलक ज्ञात करने की विधियों, तथा आयतचित्र, आवृत्ति बहुभुज और तोरण जैसे आलेखीय निरूपणों का अध्ययन किया। केंद्रीय प्रवृत्ति के तीनों माप आँकड़ों की विशेषताओं को अलग-अलग दृष्टि से बताते हैं। माध्य सबसे सामान्य औसत है, माध्यिका क्रम-आधारित है और बहुलक सर्वाधिक प्रचलित मान है। इन सूत्रों और आलेख विधियों के अभ्यास से परीक्षा में इस अध्याय से अच्छे अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।