प्रायिकता गणित की वह शाखा है जो किसी घटना के घटने की संभावना का मापन करती है। दैनिक जीवन में हम अक्सर कहते हैं — "आज वर्षा होने की संभावना है", "शायद यह दवा काम करेगी"। ये सभी कथन प्रायिकता की अवधारणा पर आधारित हैं। इस अध्याय में हम किसी घटना की प्रायिकता की गणना करना सीखेंगे।
किसी घटना की प्रायिकता की गणना का सबसे सरल मॉडल सिक्का उछालना, पासा फेंकना और ताश की गड्डी से पत्ता निकालना है। इन प्रयोगों के सभी संभावित परिणाम प्रतिदर्श समष्टि (Sample Space) बनाते हैं। घटना, प्रतिदर्श समष्टि का एक उपसमुच्चय होती है।
प्रायिकता की गणितीय परिभाषा के अनुसार, किसी घटना $E$ की प्रायिकता उसके अनुकूल परिणामों की संख्या और कुल संभावित परिणामों की संख्या का अनुपात होती है। प्रायिकता सदैव 0 और 1 के बीच होती है। निश्चित घटना की प्रायिकता 1 और असंभव घटना की प्रायिकता 0 होती है।
यदि किसी प्रयोग के कुल संभावित परिणामों की संख्या $n$ हो और उनमें से घटना $E$ के अनुकूल परिणामों की संख्या $m$ हो, तो घटना $E$ की प्रायिकता:
$$P(E) = \frac{\text{अनुकूल परिणामों की संख्या}}{\text{कुल संभावित परिणामों की संख्या}} = \frac{m}{n}$$
प्रायिकता के गुणधर्म: - $0 \leq P(E) \leq 1$ - यदि $P(E) = 0$, तो घटना असंभव है। - यदि $P(E) = 1$, तो घटना निश्चित है। - घटना $E$ नहीं होने की प्रायिकता $P(\bar{E}) = 1 - P(E)$।
उदाहरण: एक सिक्के को उछालने पर चित्त (head) आने की प्रायिकता: $$P(\text{चित्त}) = \frac{1}{2}$$
सिक्का उछालना: - एक सिक्के में 2 परिणाम: चित्त (H), पट (T)। - दो सिक्कों में 4 परिणाम: HH, HT, TH, TT। - तीन सिक्कों में 8 परिणाम।
पासा फेंकना: - एक पासे में 6 परिणाम: 1, 2, 3, 4, 5, 6। - दो पासों में 36 परिणाम। - सम अंक आने की प्रायिकता: $\frac{3}{6} = \frac{1}{2}$।
ताश की गड्डी: - एक गड्डी में 52 पत्ते होते हैं। - 4 समूह (पान, ईंट, हुकुम, चिड़ी) × 13 पत्ते। - प्रत्येक समूह में 13 पत्ते: 1 से 10 और बादशाह (K), बेगम (Q), गुलाम (J)। - चित्र वाले पत्ते (K, Q, J) कुल 12 होते हैं।
मूल घटना (Elementary Event): वह घटना जिसका केवल एक ही परिणाम हो। उदाहरण के लिए, पासे में "3 आना" एक मूल घटना है।
किसी प्रयोग की सभी मूल घटनाओं की प्रायिकताओं का योग 1 होता है।
पूरक घटना (Complementary Event): घटना $E$ नहीं होने की घटना $E$ की पूरक घटना कहलाती है और इसे $\bar{E}$ से दर्शाया जाता है।
$$P(E) + P(\bar{E}) = 1$$
उदाहरण: पासे में "5 नहीं आना" की प्रायिकता $= 1 - \frac{1}{6} = \frac{5}{6}$।
परस्पर अपवर्जी घटनाएँ (Mutually Exclusive Events): ऐसी घटनाएँ जो एक साथ नहीं हो सकतीं। उदाहरण के लिए, एक सिक्के में चित्त और पट एक साथ नहीं आ सकते।
यदि घटनाएँ $A$ और $B$ परस्पर अपवर्जी हैं, तो:
$$P(A \text{ या } B) = P(A) + P(B)$$
घटना "और": यदि दो घटनाओं के एक साथ होने का अनुकूल परिणाम गिनना हो, तो उभयनिष्ठ परिणामों का ध्यान रखना चाहिए।
ऐसे प्रश्नों में पूरक घटना का उपयोग सरल होता है:
$$P(\text{कम से कम एक चित्त}) = 1 - P(\text{कोई चित्त नहीं})$$
उदाहरण: दो सिक्के उछालने पर कम से कम एक चित्त आने की प्रायिकता: $$P = 1 - P(TT) = 1 - \frac{1}{4} = \frac{3}{4}$$
"कम से कम" वाले प्रश्नों में पूरक घटना "कोई नहीं" का उपयोग करना अधिक सुविधाजनक होता है।
जब प्रयोगों की संख्या बहुत बड़ी होती है, तो प्रायोगिक प्रायिकता सैद्धांतिक प्रायिकता के बहुत निकट पहुँच जाती है। यही तथ्य प्रायिकता के अध्ययन का मूल आधार है।
| प्रयोग | कुल परिणाम | उदाहरण घटना |
|---|---|---|
| एक सिक्का | 2 | चित्त: $\frac{1}{2}$ |
| दो सिक्के | 4 | कम से कम एक चित्त: $\frac{3}{4}$ |
| एक पासा | 6 | सम अंक: $\frac{1}{2}$ |
| दो पासे | 36 | योग 7: $\frac{6}{36} = \frac{1}{6}$ |
| ताश की गड्डी | 52 | इक्का: $\frac{4}{52} = \frac{1}{13}$ |
| प्रकार | विवरण |
|---|---|
| समूह | पान, ईंट, हुकुम, चिड़ी (प्रत्येक 13) |
| चित्र पत्ते | K, Q, J (कुल 12) |
| लाल पत्ते | पान + ईंट (26) |
| काले पत्ते | हुकुम + चिड़ी (26) |
| नियम | कथन |
|---|---|
| सीमा | $0 \leq P(E) \leq 1$ |
| पूरक | $P(\bar{E}) = 1 - P(E)$ |
| अपवर्जी घटनाएँ | $P(A \text{ या } B) = P(A) + P(B)$ |
प्रायिकता अध्याय में हमने घटना की प्रायिकता की परिभाषा, प्रायिकता के गुणधर्म, सिक्का-पासा-ताश जैसे प्रयोगों के परिणाम तथा पूरक और अपवर्जी घटनाओं का अध्ययन किया। प्रायिकता की गणना का आधार अनुकूल परिणामों और कुल परिणामों का अनुपात है। प्रायिकता सदैव 0 और 1 के बीच होती है, और सभी मूल घटनाओं की प्रायिकताओं का योग 1 होता है। "कम से कम" वाले प्रश्नों में पूरक घटना की विधि अत्यंत उपयोगी है। नियमित अभ्यास से इस अध्याय में पूर्ण अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।