वास्तविक संख्याएँ गणित की वह आधारशिला हैं जिस पर संपूर्ण संख्या पद्धति टिकी हुई है। कक्षा 9 में आपने संख्या रेखा के बारे में पढ़ा और जाना कि हर वास्तविक संख्या को संख्या रेखा पर एक बिंदु द्वारा दर्शाया जा सकता है। इस अध्याय में हम वास्तविक संख्याओं के दो प्रमुख प्रमेयों — यूक्लिड विभाजन एल्गोरिथ्म और अंकगणित की आधारभूत प्रमेय — का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
इस अध्याय का दूसरा महत्वपूर्ण भाग परिमेय संख्याओं के दशमलव प्रसार से संबंधित है। हम यह समझेंगे कि किसी परिमेय संख्या का दशमलव प्रसार कब सांत होता है और कब असांत आवर्ती। इसके अलावा हम अपरिमेय संख्याओं की पहचान करना और उन्हें सिद्ध करना सीखेंगे।
यह अध्याय न केवल परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भविष्य के अध्यायों जैसे बहुपद, त्रिकोणमिति आदि के लिए भी आधार प्रदान करता है। HCF और LCM की अवधारणाएँ प्रतिदिन के जीवन में भी बहुत उपयोगी होती हैं।
विभाजन एल्गोरिथ्म: धनात्मक पूर्णांकों $a$ और $b$ के लिए, अद्वितीय पूर्णांक $q$ और $r$ ऐसे विद्यमान हैं कि:
$$a = bq + r, \quad 0 \leq r < b$$
यहाँ $q$ भागफल तथा $r$ शेषफल है। इस अभिव्यक्ति का उपयोग किसी भी दो धनात्मक पूर्णांकों का HCF ज्ञात करने के लिए किया जा सकता है, जिसे यूक्लिड विभाजन एल्गोरिथ्म कहते हैं।
HCF ज्ञात करने की विधि: 1. बड़ी संख्या को छोटी संख्या से विभाजित करें और शेषफल ज्ञात करें। 2. अब भाजक को शेषफल से विभाजित करें। 3. यह प्रक्रिया तब तक दोहराएँ जब तक शेषफल शून्य न हो जाए। 4. जब शेषफल शून्य हो जाता है, तब वाला भाजक ही दी गई संख्याओं का HCF होता है।
उदाहरण: 135 और 225 का HCF ज्ञात करने के लिए: $$225 = 135 \times 1 + 90$$ $$135 = 90 \times 1 + 45$$ $$90 = 45 \times 2 + 0$$ अतः HCF = 45।
यह एल्गोरिथ्म बड़ी संख्याओं का HCF निकालने में विशेष रूप से उपयोगी है, क्योंकि इसमें अभाज्य गुणनखंड निकालना आवश्यक नहीं होता।
इस प्रमेय के अनुसार, प्रत्येक भाज्य संख्या को अभाज्य संख्याओं के गुणनफल के रूप में व्यक्त किया जा सकता है, और यह निरूपण गुणनखंडों के क्रम को छोड़कर अद्वितीय होता है।
उदाहरण के लिए: $$32760 = 2^3 \times 3^2 \times 5 \times 7 \times 13$$ $$98 = 2 \times 7^2$$
इस प्रमेय से HCF और LCM निकालने का एक सरल तरीका मिलता है: - HCF = सभी अभाज्य गुणनखंडों की न्यूनतम घातों का गुणनफल। - LCM = सभी अभाज्य गुणनखंडों की महत्तम घातों का गुणनफल।
किन्हीं दो धनात्मक पूर्णांकों $a$ और $b$ के लिए: $$\text{HCF}(a, b) \times \text{LCM}(a, b) = a \times b$$
उदाहरण: 12 = $2^2 \times 3$ और 21 = $3 \times 7$। अतः HCF = 3 और LCM = $2^2 \times 3 \times 7 = 84$। सत्यापन: $3 \times 84 = 252 = 12 \times 21$।
ऐसी संख्याएँ जिन्हें $\frac{p}{q}$ के रूप में नहीं लिखा जा सकता, जहाँ $q \neq 0$, अपरिमेय संख्याएँ कहलाती हैं। इनका दशमलव प्रसार असांत और अनावर्ती होता है। उदाहरण: $\sqrt{2}, \sqrt{3}, \sqrt{5}, \pi$।
सिद्ध करना कि $\sqrt{2}$ अपरिमेय है: मान लीजिए $\sqrt{2}$ परिमेय है, अर्थात $\sqrt{2} = \frac{p}{q}$, जहाँ $p$ और $q$ सह-अभाज्य हैं। वर्ग करने पर $2q^2 = p^2$। अतः $p^2$, 2 से विभाज्य है, इसलिए $p$ भी 2 से विभाज्य होगा। माना $p = 2r$। तब $2q^2 = 4r^2 \Rightarrow q^2 = 2r^2$, अतः $q$ भी 2 से विभाज्य है। यह $p$ और $q$ के सह-अभाज्य होने का विरोधाभास है। इसलिए $\sqrt{2}$ अपरिमेय है।
यदि $p$ एक अभाज्य संख्या है, तो $\sqrt{p}$ अपरिमेय संख्या होती है। अपरिमेय संख्या का परिमेय संख्या से योग, अंतर, गुणनफल और भागफल (शून्य परिमेय से भाग को छोड़कर) अपरिमेय ही होता है।
किसी परिमेय संख्या $\frac{p}{q}$ का दशमलव प्रसार निम्न प्रकार निर्धारित होता है:
उदाहरण: $\frac{1}{8} = 0.125$ (सांत, क्योंकि $8 = 2^3$)। $\frac{1}{7} = 0.\overline{142857}$ (असांत आवर्ती, क्योंकि $7$ अन्य अभाज्य है)।
इस प्रकार किसी सांत दशमलव वाली परिमेय संख्या को हर $10^n$ वाले रूप में लिखा जा सकता है, और फिर अभाज्य गुणनखंडन से सत्यापित किया जा सकता है।
कुछ महत्वपूर्ण पहचानें जो इस अध्याय में बार-बार काम आती हैं: $$(a + b)^2 = a^2 + 2ab + b^2$$ $$(a - b)^2 = a^2 - 2ab + b^2$$ $$a^2 - b^2 = (a + b)(a - b)$$ $$(a + b)^3 = a^3 + 3a^2b + 3ab^2 + b^3$$
यदि $m$ और $n$ धनात्मक पूर्णांक हैं, तो $\sqrt{m}$ और $\sqrt{n}$ के योगफल, अंतर, गुणनफल तथा भागफल के अपरिमेय होने का निर्धारण हम उपरोक्त पहचानों की सहायता से करते हैं। उदाहरण के लिए, $(\sqrt{2} + \sqrt{3})(\sqrt{2} - \sqrt{3}) = 2 - 3 = -1$, जो कि परिमेय है।
| अवधारणा | परिभाषा/रूप | उदाहरण |
|---|---|---|
| परिमेय संख्या | $\frac{p}{q}$ रूप में, जहाँ $q \neq 0$ | $\frac{3}{4}, 2.5$ |
| अपरिमेय संख्या | $\frac{p}{q}$ रूप में नहीं लिखी जा सकती | $\sqrt{2}, \pi$ |
| अभाज्य संख्या | केवल 1 और स्वयं से विभाज्य | 2, 3, 5, 7 |
| भाज्य संख्या | अभाज्यों के गुणनफल के रूप में | 6, 9, 12 |
| सह-अभाज्य संख्याएँ | HCF = 1 वाली संख्याएँ | (3, 4), (8, 15) |
| विशेषता | HCF | LCM |
|---|---|---|
| पूर्ण रूप | Highest Common Factor | Least Common Multiple |
| अभाज्य गुणनखंडन विधि | न्यूनतम घातों का गुणनफल | महत्तम घातों का गुणनफल |
| गुणधर्म | $HCF \times LCM = a \times b$ | $HCF \times LCM = a \times b$ |
| दशमलव प्रसार से संबंध | अधिकतम साझा भाजक | न्यूनतम साझा गुणज |
| हर का रूप | दशमलव प्रसार | उदाहरण |
|---|---|---|
| $2^n \times 5^m$ | सांत | $\frac{1}{4} = 0.25$ |
| 2, 5 के अतिरिक्त अन्य अभाज्य | असांत आवर्ती | $\frac{1}{6} = 0.1\overline{6}$ |
वास्तविक संख्याओं का यह अध्याय यूक्लिड विभाजन एल्गोरिथ्म, अंकगणित की आधारभूत प्रमेय, अपरिमेय संख्याएँ और दशमलव प्रसार के सिद्धांतों पर आधारित है। HCF और LCM के बीच का संबंध तथा दशमलव प्रसार का नियम परीक्षा में सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं। इन अवधारणाओं को अच्छी तरह समझकर तथा अभ्यास द्वारा आप इस अध्याय में पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं। यह अध्याय आगे के सभी बीजगणितीय अध्यायों का आधार भी है।