बहुपद बीजगणित की वह मूलभूत अवधारणा है जिसका प्रयोग लगभग सभी गणितीय प्रक्रियाओं में होता है। कक्षा 9 में आपने चरों के साथ व्यंजकों के बारे में पढ़ा था। इस अध्याय में हम बहुपदों की घात, शून्यक, गुणनखंडन तथा शून्यकों और गुणांकों के बीच के संबंध का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
बहुपद के शून्यकों का अध्ययन विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसी पर द्विघात समीकरणों के हल की पूरी प्रक्रिया आधारित है। द्विघात बहुपद की आकृति के आधार पर हम यह अनुमान लगा सकते हैं कि इसके शून्यकों की संख्या कितनी होगी।
इस अध्याय में हम बहुपद के शून्यकों को आलेखीय रूप में देखेंगे, शेषफल प्रमेय और गुणनखंड प्रमेय का अध्ययन करेंगे, तथा द्विघात और घन बहुपदों के गुणांकों और शून्यकों के संबंध को समझेंगे। यह अध्याय कक्षा 10 के सबसे अधिक अंक देने वाले अध्यायों में से एक है।
बहुपद: वह व्यंजक जिसमें चर के केवल पूर्ण संख्या घातांक हों तथा गुणांक वास्तविक संख्याएँ हों, बहुपद कहलाता है।
सामान्य रूप: $p(x) = a_n x^n + a_{n-1} x^{n-1} + ... + a_1 x + a_0$
महत्वपूर्ण: शून्य बहुपद ($p(x) = 0$) की घात परिभाषित नहीं होती। एक अचर बहुपद जैसे $p(x) = 7$ की घात 0 होती है।
किसी बहुपद $p(x)$ के लिए, यदि $p(k) = 0$ हो, तो $k$ को बहुपद का शून्यक (Zero) कहते हैं।
महत्वपूर्ण बिंदु: - रैखिक बहुपद $ax + b$ का शून्यक $-\frac{b}{a}$ होता है। - बहुपद के शून्यकों की संख्या उसकी घात से अधिक नहीं हो सकती। - द्विघात बहुपद के अधिकतम 2 शून्यक हो सकते हैं, घन बहुपद के अधिकतम 3।
आलेखीय व्याख्या: - रैखिक बहुपद का आलेख $x$-अक्ष को ठीक एक बिंदु पर काटता है। - द्विघात बहुपद का आलेख (परवलय) $x$-अक्ष को 0, 1 या 2 बिंदुओं पर काट सकता है। - घन बहुपद का आलेख $x$-अक्ष को अधिकतम 3 बिंदुओं पर काटता है। - जहाँ आलेख $x$-अक्ष को काटता है, वहीं $x$-निर्देशांक बहुपद का शून्यक होता है।
यदि $\alpha$ और $\beta$ द्विघात बहुपद $p(x) = ax^2 + bx + c$ के शून्यक हैं, तो:
$$\alpha + \beta = -\frac{b}{a} = -\frac{\text{x का गुणांक}}{\text{x}^2 \text{ का गुणांक}}$$
$$\alpha \beta = \frac{c}{a} = \frac{\text{अचर पद}}{\text{x}^2 \text{ का गुणांक}}$$
इस संबंध के आधार पर, यदि शून्यक $\alpha$ और $\beta$ दिए हों, तो द्विघात बहुपद इस प्रकार लिखा जा सकता है:
$$p(x) = k[x^2 - (\alpha + \beta)x + \alpha\beta]$$
जहाँ $k$ कोई भी वास्तविक अचर है।
उदाहरण: यदि $\alpha = 2$ और $\beta = 3$, तो $\alpha + \beta = 5$, $\alpha\beta = 6$। अतः $p(x) = k(x^2 - 5x + 6)$। $k = 1$ लेने पर $p(x) = x^2 - 5x + 6$।
यदि $\alpha, \beta, \gamma$ घन बहुपद $p(x) = ax^3 + bx^2 + cx + d$ के शून्यक हैं, तो:
$$\alpha + \beta + \gamma = -\frac{b}{a}$$
$$\alpha\beta + \beta\gamma + \gamma\alpha = \frac{c}{a}$$
$$\alpha\beta\gamma = -\frac{d}{a}$$
उदाहरण: बहुपद $2x^3 + 3x^2 - 5x + 6$ के लिए: - शून्यकों का योग $= -\frac{3}{2}$ - युग्मवार गुणनफलों का योग $= \frac{-5}{2}$ - तीनों का गुणनफल $= -\frac{6}{2} = -3$
यदि किसी बहुपद $p(x)$ को रैखिक बहुपद $(x - a)$ से विभाजित किया जाए, तो शेषफल $p(a)$ होता है।
सामान्यीकरण: यदि $p(x)$ को $ax + b$ से विभाजित किया जाए, तो शेषफल $p(-\frac{b}{a})$ होता है।
उदाहरण: $p(x) = x^3 - 3x^2 + 4$ को $x - 2$ से विभाजित करने पर शेषफल $= p(2) = 8 - 12 + 4 = 0$। अतः $(x - 2)$, $p(x)$ का गुणनखंड है।
गुणनखंड प्रमेय (Factor Theorem): यदि $p(a) = 0$, तो $(x - a)$, $p(x)$ का गुणनखंड है, और इसका विलोम भी सत्य है। गुणनखंड प्रमेय शेषफल प्रमेय का ही एक विशेष रूप है जब शेषफल शून्य हो।
| बहुपद | घात | सामान्य रूप | अधिकतम शून्यक |
|---|---|---|---|
| रैखिक | 1 | $ax + b$ | 1 |
| द्विघात | 2 | $ax^2 + bx + c$ | 2 |
| घन | 3 | $ax^3 + bx^2 + cx + d$ | 3 |
| चरघातांकी | 4 | $ax^4 + ...$ | 4 |
| बहुपद | शून्यकों का योग | गुणनफल |
|---|---|---|
| $ax^2 + bx + c$ | $-\frac{b}{a}$ | $\frac{c}{a}$ |
| $ax^3 + bx^2 + cx + d$ | $-\frac{b}{a}$ | $-\frac{d}{a}$ (तीनों का) |
| बहुपद की घात | $x$-अक्ष काटने वाले बिंदु | शून्यकों की संख्या |
|---|---|---|
| 1 (रैखिक) | 1 | 1 |
| 2 (द्विघात) | 0, 1, 2 | 0, 1, 2 |
| 3 (घन) | 1, 2, 3 | 1, 2, 3 |
बहुपद अध्याय में हमने बहुपदों के प्रकार, शून्यकों की अवधारणा, शेषफल और गुणनखंड प्रमेय, तथा शून्यकों और गुणांकों के संबंध का अध्ययन किया। यह संबंध द्विघात समीकरणों को हल करने के लिए सीधे उपयोगी है, जो अगला अध्याय है। आलेखीय विधि से शून्यकों की पहचान तथा गुणनखंडन की बीजीय विधियाँ परीक्षा में उच्च अंक दिलाने में सहायक हैं। नियमित अभ्यास से इस अध्याय को पूर्ण रूप से आत्मसात किया जा सकता है।