त्रिभुज ज्यामिति का वह मूलभूत आकार है जिससे हम कक्षा 9 से परिचित हैं। इस अध्याय में हम त्रिभुजों की समरूपता (similarity) का विस्तार से अध्ययन करेंगे। दो आकृतियाँ समरूप होती हैं यदि उनके आकार समान हों, भले ही आकार (size) भिन्न हों। समरूप त्रिभुजों के संगत कोण बराबर होते हैं और संगत भुजाएँ समान अनुपात में होती हैं।
इस अध्याय के अंतर्गत हम थेल्स प्रमेय (मूल आनुपातिकता प्रमेय) और उसका विलोम, समरूपता के मानदंड, तथा समरूप त्रिभुजों के क्षेत्रफलों के अनुपात का अध्ययन करेंगे। ये प्रमेय त्रिभुजों की ज्यामिति में सबसे महत्वपूर्ण हैं।
समरूप त्रिभुजों का उपयोग ऊँचाइयों और दूरियाँ ज्ञात करने जैसे व्यावहारिक कार्यों में भी होता है। छाया और वस्तु की ऊँचाई के संबंध, दर्पण से परावर्तन आदि समस्याएँ समरूपता के सिद्धांत पर आधारित हैं। यह अध्याय परीक्षा के साथ-साथ भविष्य की त्रिकोणमिति की समझ के लिए भी आधार प्रदान करता है।
दो आकृतियाँ समरूप कहलाती हैं यदि उनका आकार समान हो। वर्ग, समबाहु त्रिभुज, वृत्त जैसी आकृतियाँ सदैव समरूप होती हैं, क्योंकि उनके कोण सदैव बराबर होते हैं। इसके विपरीत दो आयत समरूप नहीं हो सकते यदि उनकी भुजाओं का अनुपात भिन्न हो।
समरूप त्रिभुज: दो त्रिभुज $ABC$ और $DEF$ समरूप होते हैं (लिखते हैं $\triangle ABC \sim \triangle DEF$), यदि:
$$\angle A = \angle D, \quad \angle B = \angle E, \quad \angle C = \angle F$$
तथा $$\frac{AB}{DE} = \frac{BC}{EF} = \frac{AC}{DF}$$
यहाँ संगत भुजाओं का अनुपात समरूपता का अनुपात (ratio of similarity) कहलाता है। समरूप त्रिभुजों में संगत कोण बराबर होते हैं तथा संगत भुजाएँ समानुपाती होती हैं।
प्रमेय: यदि त्रिभुज की एक भुजा के समांतर एक रेखा खींची जाए जो अन्य दो भुजाओं को दो भिन्न बिंदुओं पर काटे, तो वह रेखा अन्य दो भुजाओं को समान अनुपात में विभाजित करती है।
त्रिभुज $ABC$ में, यदि $DE \parallel BC$ तथा $D$ और $E$ क्रमशः $AB$ और $AC$ पर स्थित बिंदु हैं, तो:
$$\frac{AD}{DB} = \frac{AE}{EC}$$
विलोम प्रमेय: यदि त्रिभुज की दो भुजाओं को काटने वाली रेखा उन्हें समान अनुपात में विभाजित करे, तो वह रेखा तीसरी भुजा के समांतर होती है।
इन प्रमेयों के सत्यापन में हम आधार और ऊँचाई के गुणनफल के आधार पर क्षेत्रफलों की तुलना करते हैं। क्षेत्रफलों की बराबरी से अनुपात सिद्ध होते हैं।
समरूपता के तीन मानदंड हैं:
1. AAA (कोण-कोण-कोण) समरूपता: यदि दो त्रिभुजों के संगत कोण बराबर हों, तो वे समरूप होते हैं। चूँकि त्रिभुज के कोणों का योग $180^\circ$ होता है, इसलिए दो कोण बराबर होने पर तीसरा स्वतः बराबर हो जाता है। इसे AA समरूपता भी कहते हैं।
2. SSS (भुजा-भुजा-भुजा) समरूपता: यदि दो त्रिभुजों की संगत भुजाएँ समान अनुपात में हों, तो वे समरूप होते हैं।
3. SAS (भुजा-कोण-भुजा) समरूपता: यदि दो त्रिभुजों में एक त्रिभुज की दो भुजाएँ दूसरे की संगत दो भुजाओं के समानुपाती हों तथा उनके बीच के कोण बराबर हों, तो त्रिभुज समरूप होते हैं।
ध्यान दें: सर्वांगसमता (congruence) में संगत भुजाएँ बराबर होती हैं, जबकि समरूपता में केवल समानुपाती। सर्वांगसम त्रिभुज सदैव समरूप होते हैं, परंतु समरूप त्रिभुज सर्वांगसम होना आवश्यक नहीं।
प्रमेय: दो समरूप त्रिभुजों के क्षेत्रफलों का अनुपात उनकी संगत भुजाओं के वर्गों के अनुपात के बराबर होता है।
यदि $\triangle ABC \sim \triangle DEF$, तो:
$$\frac{\text{ar}(\triangle ABC)}{\text{ar}(\triangle DEF)} = \frac{AB^2}{DE^2} = \frac{BC^2}{EF^2} = \frac{AC^2}{DF^2}$$
यह अनुपात संगत ऊँचाइयों, माध्यिकाओं और कोण समद्विभाजकों के वर्गों के अनुपात के भी बराबर होता है।
उदाहरण: यदि दो समरूप त्रिभुजों की भुजाओं का अनुपात $2 : 3$ है, तो क्षेत्रफलों का अनुपात $2^2 : 3^2 = 4 : 9$ होगा।
किसी समकोण त्रिभुज के शीर्ष से कर्ण पर डाला गया लंब उस त्रिभुज को दो समरूप त्रिभुजों में विभाजित करता है, जो आपस में और मूल त्रिभुज दोनों के समरूप होते हैं।
समकोण त्रिभुज में कर्ण पर खींचे गए लंब के कारण बनने वाले त्रिभुजों की समरूपता से भुजाओं के बीच महत्वपूर्ण संबंध स्थापित होते हैं। इसके अतिरिक्त पाइथागोरस प्रमेय भी समरूपता की सहायता से ही सिद्ध किया जा सकता है।
| मानदंड | पूर्ण रूप | शर्त |
|---|---|---|
| AA | कोण-कोण | दो संगत कोण बराबर |
| SSS | भुजा-भुजा-भुजा | तीनों संगत भुजाएँ समानुपाती |
| SAS | भुजा-कोण-भुजा | दो भुजाएँ समानुपाती और बीच का कोण बराबर |
| विशेषता | समरूपता ($\sim$) | सर्वांगसमता ($\cong$) |
|---|---|---|
| संगत कोण | बराबर | बराबर |
| संगत भुजाएँ | समानुपाती | बराबर |
| क्षेत्रफल | अनुपात वर्गों के रूप में | बराबर |
| चिह्न | $\sim$ | $\cong$ |
| स्थिति | परिणाम |
|---|---|
| $DE \parallel BC$ | $\frac{AD}{DB} = \frac{AE}{EC}$ |
| $\frac{AD}{DB} = \frac{AE}{EC}$ | $DE \parallel BC$ |
त्रिभुज अध्याय में हमने समरूपता की अवधारणा, थेल्स प्रमेय और उसके विलोम, समरूपता के तीन मानदंड, तथा समरूप त्रिभुजों के क्षेत्रफलों के अनुपात का अध्ययन किया। थेल्स प्रमेय भुजाओं के अनुपात में समांतर रेखाओं की भूमिका को स्पष्ट करता है, जबकि क्षेत्रफल प्रमेय मापन में सहायक है। समरूपता के मानदंडों का अभ्यास करने से ज्यामिति के अन्य प्रमेयों को सिद्ध करना सरल हो जाता है। यह अध्याय त्रिकोणमिति और वृत्तों के अध्ययन के लिए भी ठोस आधार प्रदान करता है।