निर्देशांक ज्यामिति वह शाखा है जिसमें बीजगणित और ज्यामिति का समन्वय होता है। इसमें समतल के प्रत्येक बिंदु को संख्याओं के क्रमित युग्म $(x, y)$ द्वारा निरूपित किया जाता है। इस विचार को सबसे पहले फ्रांसीसी गणितज्ञ रेने देकार्ते (René Descartes) ने प्रस्तुत किया, जिसके कारण इसे कार्तीय तल भी कहते हैं।
निर्देशांक तल में दो परस्पर लंबवत रेखाएँ होती हैं — क्षैतिज रेखा को $x$-अक्ष और ऊर्ध्वाधर रेखा को $y$-अक्ष कहते हैं। इनके प्रतिच्छेदन बिंदु को मूल बिंदु (Origin) कहते हैं, जिसे $O(0, 0)$ से निरूपित किया जाता है। $x$-अक्ष और $y$-अक्ष तल को चार भागों में विभाजित करते हैं, जिन्हें चतुर्थांश (Quadrants) कहते हैं।
इस अध्याय में हम निर्देशांक तल में दो बिंदुओं के बीच की दूरी, किसी बिंदु का विभाजन अनुपात में निर्देशांक, तथा त्रिभुज का क्षेत्रफल ज्ञात करना सीखेंगे। ये अवधारणाएँ मानचित्रण, नेविगेशन और कंप्यूटर ग्राफिक्स में भी उपयोगी हैं।
किसी बिंदु $P(x, y)$ में $x$ को भुज (abscissa) और $y$ को कोटि (ordinate) कहते हैं। चारों चतुर्थांशों में चिन्हों का प्रतिरूप इस प्रकार है:
| चतुर्थांश | चिन्ह प्रतिरूप |
|---|---|
| प्रथम चतुर्थांश | $(+, +)$ |
| द्वितीय चतुर्थांश | $(-, +)$ |
| तृतीय चतुर्थांश | $(-, -)$ |
| चतुर्थ चतुर्थांश | $(+, -)$ |
$x$-अक्ष पर स्थित बिंदु की कोटि शून्य होती है, जैसे $(5, 0)$। $y$-अक्ष पर स्थित बिंदु की भुज शून्य होती है, जैसे $(0, -3)$। मूल बिंदु $O(0, 0)$ दोनों अक्षों का प्रतिच्छेदन है।
बिंदुओं $P(x_1, y_1)$ और $Q(x_2, y_2)$ के बीच की दूरी निम्न सूत्र से ज्ञात की जाती है:
$$PQ = \sqrt{(x_2 - x_1)^2 + (y_2 - y_1)^2}$$
विशेष स्थितियाँ: - मूल बिंदु से दूरी: $OP = \sqrt{x^2 + y^2}$ - $x$-अक्ष पर बिंदुओं की दूरी: $PQ = |x_2 - x_1|$ - $y$-अक्ष पर बिंदुओं की दूरी: $PQ = |y_2 - y_1|$
उदाहरण: बिंदुओं $A(2, 3)$ और $B(6, 6)$ के बीच की दूरी: $$AB = \sqrt{(6 - 2)^2 + (6 - 3)^2} = \sqrt{16 + 9} = \sqrt{25} = 5$$
दूरी सूत्र का उपयोग यह जाँचने के लिए किया जाता है कि दिए गए बिंदु समद्विबाहु त्रिभुज, समबाहु त्रिभुज, वर्ग, आयत या समांतर चतुर्भुज बनाते हैं या नहीं। यदि तीन बिंदु संरेखी (collinear) हैं, तो उनके बीच की दूरियों में एक दूरी अन्य दो दूरियों के योग के बराबर होती है।
यदि बिंदु $P(x, y)$, बिंदुओं $A(x_1, y_1)$ और $B(x_2, y_2)$ को मिलाने वाले रेखाखंड को $m : n$ के अनुपात में आंतरिक रूप से विभाजित करता है, तो:
$$x = \frac{mx_2 + nx_1}{m + n}, \quad y = \frac{my_2 + ny_1}{m + n}$$
मध्य बिंदु (Midpoint): जब $m = n = 1$, तब:
$$x = \frac{x_1 + x_2}{2}, \quad y = \frac{y_1 + y_2}{2}$$
उदाहरण: बिंदुओं $A(2, -4)$ और $B(-3, 7)$ को $3 : 2$ के अनुपात में विभाजित करने वाले बिंदु का निर्देशांक: $$x = \frac{3(-3) + 2(2)}{3 + 2} = \frac{-9 + 4}{5} = -1$$ $$y = \frac{3(7) + 2(-4)}{3 + 2} = \frac{21 - 8}{5} = \frac{13}{5}$$
शीर्षों $A(x_1, y_1)$, $B(x_2, y_2)$ और $C(x_3, y_3)$ वाले त्रिभुज का क्षेत्रफल:
$$\text{Area} = \frac{1}{2}|x_1(y_2 - y_3) + x_2(y_3 - y_1) + x_3(y_1 - y_2)|$$
क्षेत्रफल हमेशा धनात्मक होता है, इसलिए निरपेक्ष मान लिया जाता है। यदि क्षेत्रफल शून्य हो, तो तीनों बिंदु संरेखी होते हैं।
संरेखीयता की जाँच: तीन बिंदु $A, B, C$ संरेखी होंगे यदि उनसे बने त्रिभुज का क्षेत्रफल शून्य है। इसके लिए:
$$x_1(y_2 - y_3) + x_2(y_3 - y_1) + x_3(y_1 - y_2) = 0$$
उदाहरण: $A(1, 2), B(3, 4), C(5, 6)$ संरेखी हैं या नहीं: $$\text{क्षेत्रफल} = \frac{1}{2}|1(4 - 6) + 3(6 - 2) + 5(2 - 4)| = \frac{1}{2}|-2 + 12 - 10| = 0$$ अतः बिंदु संरेखी हैं।
| अवधारणा | सूत्र |
|---|---|
| दूरी | $\sqrt{(x_2 - x_1)^2 + (y_2 - y_1)^2}$ |
| मूल बिंदु से दूरी | $\sqrt{x^2 + y^2}$ |
| विभाजन सूत्र | $\left(\frac{mx_2 + nx_1}{m+n}, \frac{my_2 + ny_1}{m+n}\right)$ |
| मध्य बिंदु | $\left(\frac{x_1 + x_2}{2}, \frac{y_1 + y_2}{2}\right)$ |
| त्रिभुज का क्षेत्रफल | $\frac{1}{2}|x_1(y_2-y_3) + x_2(y_3-y_1) + x_3(y_1-y_2)|$ |
| केंद्रक | $\left(\frac{x_1+x_2+x_3}{3}, \frac{y_1+y_2+y_3}{3}\right)$ |
| चतुर्थांश | $x$ | $y$ | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| I | $+$ | $+$ | $(3, 4)$ |
| II | $-$ | $+$ | $(-3, 4)$ |
| III | $-$ | $-$ | $(-3, -4)$ |
| IV | $+$ | $-$ | $(3, -4)$ |
| जाँच | परिणाम |
|---|---|
| तीनों भुजाएँ बराबर | समबाहु त्रिभुज |
| दो भुजाएँ बराबर | समद्विबाहु त्रिभुज |
| क्षेत्रफल = 0 | संरेखी बिंदु |
| चारों भुजाएँ बराबर, विकर्ण बराबर | वर्ग |
निर्देशांक ज्यामिति अध्याय में हमने निर्देशांक तल, दूरी सूत्र, विभाजन सूत्र और त्रिभुज के क्षेत्रफल के सूत्रों का अध्ययन किया। दूरी सूत्र से आकृतियों की पहचान और विभाजन सूत्र से रेखाखंडों के विभाजन बिंदु ज्ञात किए जाते हैं। क्षेत्रफल सूत्र संरेखीयता की जाँच में सहायक है। ये अवधारणाएँ मानचित्रण और गणना में दैनिक जीवन में भी प्रयुक्त होती हैं। सूत्रों को सही चिन्हों के साथ लागू करने का अभ्यास इस अध्याय में पूर्ण अंक दिला सकता है।