त्रिकोणमिति शब्द ग्रीक शब्दों से बना है, जिनका अर्थ है "त्रिभुज की माप"। त्रिकोणमिति में हम समकोण त्रिभुज की भुजाओं और कोणों के बीच के संबंधों का अध्ययन करते हैं। यह अध्याय इस महत्वपूर्ण विषय का प्रथम परिचय प्रदान करता है, जिसका उपयोग भौतिकी, खगोल विज्ञान, इंजीनियरिंग और नेविगेशन में होता है।
त्रिकोणमिति के मूल में छह अनुपात हैं — ज्या (sin), कोज्या (cos), स्पर्शज्या (tan) तथा इनके व्युत्क्रम cosec, sec, cot। ये अनुपात समकोण त्रिभुज की भुजाओं से परिभाषित किए जाते हैं। कुछ विशेष कोणों जैसे $30^\circ, 45^\circ, 60^\circ$ के मान याद रखने योग्य हैं।
इस अध्याय में हम त्रिकोणमितीय अनुपातों की परिभाषाएँ, विशेष कोणों के मान, पूरक कोणों के सूत्र तथा मूल त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाओं का अध्ययन करेंगे। यह अध्याय अगले अध्याय "त्रिकोणमिति के अनुप्रयोग" का आधार है, जिसमें ऊँचाइयों और दूरियों की माप होती है।
समकोण त्रिभुज $ABC$ में, जिसका कोण $B$ समकोण है, कोण $A$ के सापेक्ष:
माना $\angle A = \theta$। तब:
$$\sin \theta = \frac{\text{सम्मुख भुजा}}{\text{कर्ण}} = \frac{BC}{AC}$$ $$\cos \theta = \frac{\text{संलग्न भुजा}}{\text{कर्ण}} = \frac{AB}{AC}$$ $$\tan \theta = \frac{\text{सम्मुख भुजा}}{\text{संलग्न भुजा}} = \frac{BC}{AB}$$
व्युत्क्रम अनुपात: $$\csc \theta = \frac{1}{\sin \theta}, \quad \sec \theta = \frac{1}{\cos \theta}, \quad \cot \theta = \frac{1}{\tan \theta}$$
स्मरण युक्ति: "पाप हिप-बोप, कोस हिप-एड्ज, टैन ओप-एड्ज" — यह तीनों मूल अनुपातों को याद रखने में सहायक है।
$$\tan \theta = \frac{\sin \theta}{\cos \theta}, \quad \cot \theta = \frac{\cos \theta}{\sin \theta}$$
यदि $\sin \theta = \frac{x}{1}$, तो समकोण त्रिभुज की तीसरी भुजा पाइथागोरस प्रमेय से $\sqrt{1 - x^2}$ होगी, और शेष अनुपात ज्ञात किए जा सकते हैं। किसी एक अनुपात के मान से शेष पाँच अनुपात ज्ञात करना त्रिकोणमिति में एक महत्वपूर्ण कौशल है।
निम्न तालिका विशेष कोणों के मान दर्शाती है:
| कोण | $0^\circ$ | $30^\circ$ | $45^\circ$ | $60^\circ$ | $90^\circ$ |
|---|---|---|---|---|---|
| $\sin$ | 0 | $\frac{1}{2}$ | $\frac{1}{\sqrt{2}}$ | $\frac{\sqrt{3}}{2}$ | 1 |
| $\cos$ | 1 | $\frac{\sqrt{3}}{2}$ | $\frac{1}{\sqrt{2}}$ | $\frac{1}{2}$ | 0 |
| $\tan$ | 0 | $\frac{1}{\sqrt{3}}$ | 1 | $\sqrt{3}$ | अपरिभाषित |
स्मरण: $\sin$ के मान $0, \frac{1}{2}, \frac{1}{\sqrt{2}}, \frac{\sqrt{3}}{2}, 1$ हैं और $\cos$ के मान उल्टे क्रम में हैं। $\tan = \frac{\sin}{\cos}$ से बाकी सब ज्ञात किए जा सकते हैं।
$\tan 90^\circ$ और $\cot 0^\circ$ परिभाषित नहीं होते, क्योंकि उनमें शून्य से भाग होता है।
यदि दो कोणों का योग $90^\circ$ है, तो वे पूरक कोण कहलाते हैं। निम्न संबंध सत्य हैं:
$$\sin(90^\circ - \theta) = \cos \theta, \quad \cos(90^\circ - \theta) = \sin \theta$$ $$\tan(90^\circ - \theta) = \cot \theta, \quad \cot(90^\circ - \theta) = \tan \theta$$ $$\sec(90^\circ - \theta) = \csc \theta, \quad \csc(90^\circ - \theta) = \sec \theta$$
उदाहरण: $\sin 30^\circ = \cos 60^\circ$, क्योंकि $30^\circ + 60^\circ = 90^\circ$। इस प्रकार किसी कोण का अनुपात उसके पूरक कोण के संबंधित अनुपात में बदला जा सकता है।
कुछ महत्वपूर्ण सर्वसमिकाएँ, जो $\theta$ के सभी मानों के लिए सत्य हैं:
$$\sin^2 \theta + \cos^2 \theta = 1$$
$$\sec^2 \theta = 1 + \tan^2 \theta$$
$$\csc^2 \theta = 1 + \cot^2 \theta$$
इन सर्वसमिकाओं की सहायता से व्यंजकों को सरल बनाया जाता है और अन्य सर्वसमिकाएँ सिद्ध की जाती हैं। उदाहरण के लिए:
$$1 - \cos^2 \theta = \sin^2 \theta, \quad \sec^2 \theta - 1 = \tan^2 \theta$$
सर्वसमिका सिद्ध करते समय बाएँ पक्ष को दाईं ओर बदलने की कोशिश की जाती है या दोनों पक्षों को समान रूप में परिवर्तित किया जाता है।
ये मापन इकाइयाँ कोणों को सटीक रूप में व्यक्त करने में सहायक हैं।
| अनुपात | सूत्र | संक्षिप्त रूप |
|---|---|---|
| $\sin \theta$ | सम्मुख/कर्ण | O/H |
| $\cos \theta$ | संलग्न/कर्ण | A/H |
| $\tan \theta$ | सम्मुख/संलग्न | O/A |
| $\csc \theta$ | कर्ण/सम्मुख | H/O |
| $\sec \theta$ | कर्ण/संलग्न | H/A |
| $\cot \theta$ | संलग्न/सम्मुख | A/O |
| कोण | $\sin$ | $\cos$ | $\tan$ |
|---|---|---|---|
| $30^\circ$ | $\frac{1}{2}$ | $\frac{\sqrt{3}}{2}$ | $\frac{1}{\sqrt{3}}$ |
| $45^\circ$ | $\frac{1}{\sqrt{2}}$ | $\frac{1}{\sqrt{2}}$ | 1 |
| $60^\circ$ | $\frac{\sqrt{3}}{2}$ | $\frac{1}{2}$ | $\sqrt{3}$ |
| सर्वसमिका | वैकल्पिक रूप |
|---|---|
| $\sin^2 \theta + \cos^2 \theta = 1$ | $1 - \cos^2 \theta = \sin^2 \theta$ |
| $1 + \tan^2 \theta = \sec^2 \theta$ | $\sec^2 \theta - 1 = \tan^2 \theta$ |
| $1 + \cot^2 \theta = \csc^2 \theta$ | $\csc^2 \theta - 1 = \cot^2 \theta$ |
त्रिकोणमिति का परिचय अध्याय में हमने छह त्रिकोणमितीय अनुपातों की परिभाषा, विशेष कोणों के मान, पूरक कोणों के सूत्र और मूल सर्वसमिकाओं का अध्ययन किया। त्रिकोणमितीय अनुपात समकोण त्रिभुज की भुजाओं के अनुपात हैं, जो केवल कोण पर निर्भर करते हैं। विशेष कोणों की तालिका और तीन सर्वसमिकाएँ इस अध्याय का मेरुदंड हैं। इन्हें अच्छी तरह सीखने पर न केवल इस अध्याय के प्रश्न हल होंगे, बल्कि ऊँचाइयों और दूरियों जैसे व्यावहारिक अनुप्रयोगों की नींव भी तैयार होगी।