त्रिकोणमिति के सैद्धांतिक ज्ञान को व्यवहार में लाने के लिए यह अध्याय ऊँचाइयों और दूरियों की माप से संबंधित है। बिना किसी मापक यंत्र से सीधे माप किए, त्रिकोणमितीय अनुपातों की सहायता से किसी भवन, मीनार या पेड़ की ऊँचाई ज्ञात की जा सकती है। इसके लिए उन्नयन कोण (angle of elevation) और अवनमन कोण (angle of depression) की अवधारणाएँ प्रयुक्त होती हैं।
जब हम किसी ऊँची वस्तु को देखते हैं, तो हमारी दृष्टि क्षैतिज से ऊपर की ओर जाती है; बने कोण को उन्नयन कोण कहते हैं। जब हम ऊँचे स्थान से नीचे की वस्तु को देखते हैं, तो दृष्टि क्षैतिज से नीचे की ओर जाती है; बने कोण को अवनमन कोण कहते हैं।
इस अध्याय में हम ऐसी समस्याओं को हल करना सीखेंगे जिनमें एक समकोण त्रिभुज बनता है। सामान्यतः इन समस्याओं में ऊँचाई, दूरी, छाया की लंबाई और कोणों में से कुछ राशियाँ ज्ञात होती हैं और कुछ अज्ञात होती हैं, जिन्हें त्रिकोणमितीय अनुपातों से ज्ञात किया जाता है।
महत्वपूर्ण गुणधर्म: उन्नयन कोण और अवनमन कोण सदैव बराबर होते हैं, यदि दोनों को समान क्षैतिज रेखा के सापेक्ष मापा जाए। यह इस तथ्य से सिद्ध होता है कि क्षैतिज रेखाएँ समांतर होती हैं और एकांतर कोण बराबर होते हैं।
ऐसी समस्याओं को हल करने की सामान्य विधि:
उदाहरण: एक मीनार के आधार से 50 मीटर दूर स्थित बिंदु से मीनार के शिखर का उन्नयन कोण $60^\circ$ है। मीनार की ऊँचाई ज्ञात कीजिए।
माना मीनार की ऊँचाई $h$ मीटर है। $$\tan 60^\circ = \frac{h}{50} \Rightarrow \sqrt{3} = \frac{h}{50} \Rightarrow h = 50\sqrt{3} \text{ मीटर}$$
जब वस्तु पर्यवेक्षक से ऊँचाई पर होती है, तो उन्नयन कोण का प्रयोग होता है। किसी सीधी खड़ी मीनार, मीनार के शिखर या पेड़ की ऊँचाई ज्ञात करने में $\tan$ अनुपात सर्वाधिक उपयोगी होता है, क्योंकि इसमें सम्मुख (ऊँचाई) और संलग्न (क्षैतिज दूरी) भुजाएँ जुड़ती हैं।
कुछ समस्याओं में दो उन्नयन कोण दिए होते हैं — जैसे जब पर्यवेक्षक वस्तु की ओर बढ़ता है तो कोण बदल जाता है। ऐसी स्थिति में दो समकोण त्रिभुज बनते हैं और अज्ञात ऊँचाई दोनों समीकरणों को हल करके ज्ञात की जाती है। पहले कोण के स्थान पर दूसरे कोण की स्थिति से दूरी में अंतर को चित्र पर अंकित करें।
जब पर्यवेक्षक ऊँचे स्थान (जैसे टॉवर, चट्टान, जहाज के डेक) से नीचे की वस्तु को देखता है, तो अवनमन कोण का प्रयोग होता है। अवनमन कोण की सहायता से नदी की चौड़ाई, जहाज की दूरी या किसी वस्तु की क्षैतिज दूरी ज्ञात की जा सकती है।
उदाहरण: एक जहाज से लाइटहाउस के शिखर का उन्नयन कोण $30^\circ$ है। लाइटहाउस की ऊँचाई 90 मीटर है। जहाज की लाइटहाउस से दूरी ज्ञात कीजिए। $$\tan 30^\circ = \frac{90}{d} \Rightarrow \frac{1}{\sqrt{3}} = \frac{90}{d} \Rightarrow d = 90\sqrt{3} \text{ मीटर}$$
स्मरण योग्य: अवनमन कोण की गणना में नीचे के बिंदु पर बनने वाला कोण उन्नयन कोण के बराबर होता है, इसलिए चित्र को उल्टा करके समस्या को सरल बनाया जा सकता है।
कुछ प्रश्नों में दोनों कोण (उन्नयन और अवनमन) एक साथ आते हैं, जैसे किसी टॉवर के शीर्ष से दो वस्तुओं के अवनमन कोण भिन्न हों। ऐसी स्थिति में:
इन समस्याओं का सही चित्र बनाना सबसे महत्वपूर्ण चरण है, क्योंकि गलत चित्र से अनुपात भी गलत बनते हैं।
| पद | अर्थ |
|---|---|
| उन्नयन कोण | दृष्टि रेखा और क्षैतिज के बीच का कोण (वस्तु ऊपर) |
| अवनमन कोण | दृष्टि रेखा और क्षैतिज के बीच का कोण (वस्तु नीचे) |
| दृष्टि रेखा | आँख से वस्तु तक जाने वाली रेखा |
| क्षैतिज रेखा | आँख के स्तर पर समतल रेखा |
| स्थिति | ज्ञात | अज्ञात | अनुपात |
|---|---|---|---|
| ऊँचाई और क्षैतिज दूरी | कोण, दूरी | ऊँचाई | $\tan$ |
| ऊँचाई और कर्ण | कोण, कर्ण | ऊँचाई | $\sin$ |
| दूरी और कर्ण | कोण, कर्ण | दूरी | $\cos$ |
| कोण | $\sin$ | $\cos$ | $\tan$ |
|---|---|---|---|
| $30^\circ$ | $\frac{1}{2}$ | $\frac{\sqrt{3}}{2}$ | $\frac{1}{\sqrt{3}}$ |
| $45^\circ$ | $\frac{1}{\sqrt{2}}$ | $\frac{1}{\sqrt{2}}$ | 1 |
| $60^\circ$ | $\frac{\sqrt{3}}{2}$ | $\frac{1}{2}$ | $\sqrt{3}$ |
त्रिकोणमिति के अनुप्रयोग अध्याय में हमने उन्नयन और अवनमन कोणों की अवधारणाओं तथा उनकी सहायता से ऊँचाइयों और दूरियों की माप का अध्ययन किया। इन समस्याओं का मूल एक समकोण त्रिभुज बनाना और उसमें उचित त्रिकोणमितीय अनुपात लगाना है। चित्र बनाना, सही अनुपात चुनना और मानक मान रखना सफलता की कुंजी है। यह अध्याय त्रिकोणमिति के व्यावहारिक महत्व को प्रदर्शित करता है और सर्वेक्षण तथा निर्माण कार्यों में उपयोगी सिद्ध होता है।