कक्षा दसवीं के संस्कृत पाठ्यक्रम (शेमुषी) का आठवाँ पाठ वृक्षा गीतम् है। यह पाठ वृक्षों के महत्व को दर्शाने वाली एक सुंदर कविता है। पाठ का शीर्षक 'वृक्षा गीतम्' है, जिसका अर्थ है - वृक्षों का गीत। इस पाठ में वृक्षों के उपकारों का वर्णन किया गया है। वृक्ष हमें फल, फूल, छाया, लकड़ी, ऑक्सीजन आदि अनेक वस्तुएँ प्रदान करते हैं। वृक्ष पक्षियों का आश्रय होते हैं। वृक्ष वर्षा को आमंत्रित करते हैं और पर्यावरण को शुद्ध रखते हैं। पाठ में बताया गया है कि वृक्ष अपना सब कुछ दूसरों को दे देते हैं। वे काटे जाने पर भी लकड़ी के रूप में काम आते हैं। वृक्ष कभी किसी से कुछ माँगते नहीं, केवल देते हैं। वृक्षों का यह त्याग और सेवा भाव अद्भुत है। पाठ हमें वृक्षों का महत्व समझाता है और उनकी रक्षा करने की प्रेरणा देता है। वृक्ष ही हमारे जीवन का आधार हैं। वृक्षों के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। यह पाठ पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश देता है।
पाठ में बताया गया है कि वृक्ष हमें अनेक उपहार देते हैं। वृक्ष मीठे फल देते हैं, सुंदर फूल देते हैं और ठंडी छाया देते हैं। वृक्षों की लकड़ी से हम घर, फर्नीचर और अन्य वस्तुएँ बनाते हैं। वृक्ष पत्तों, जड़ों, छाल और तने से भी लाभदायक होते हैं। वृक्षों से हमें ऑक्सीजन मिलती है, जो जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
वृक्षों का त्याग सबसे बड़ा है। वृक्ष अपना सब कुछ दूसरों के लिए अर्पित कर देते हैं। लोग उन पर पत्थर फेंकते हैं, फिर भी वृक्ष उन्हें फल देते हैं। लोग वृक्षों को काट देते हैं, फिर भी वृक्ष उन्हें लकड़ी देते हैं। वृक्ष कभी बदला नहीं लेते, केवल देते रहते हैं। यही वृक्षों की महानता है।
वृक्ष पक्षियों का घर होते हैं। पक्षी वृक्षों की डालियों पर अपना घोंसला बनाते हैं। वृक्ष पक्षियों को आश्रय देते हैं। सुबह-सुबह पक्षियों की चहचहाहट वृक्षों की डालियों से ही सुनाई देती है। वृक्षों के बिना पक्षी विचलित हो जाते। वृक्ष और पक्षियों का संबंध अत्यंत घनिष्ठ है।
वृक्ष पर्यावरण के रक्षक हैं। वृक्ष ही वर्षा को आमंत्रित करते हैं। वृक्षों से प्राप्त ऑक्सीजन से वायु शुद्ध होती है। वृक्ष भूमि का कटाव रोकते हैं। वृक्षों की जड़ें भूमि को मजबूत करती हैं। वृक्षों के कारण ही हमें शुद्ध जल और उपजाऊ भूमि मिलती है। वृक्षों के बिना जीवन असंभव है। इसलिए हमें अधिक से अधिक वृक्ष लगाने चाहिए और उनकी रक्षा करनी चाहिए।
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | वृक्षः | वृक्षौ | वृक्षाः |
| द्वितीया | वृक्षम् | वृक्षौ | वृक्षान् |
| तृतीया | वृक्षेण | वृक्षाभ्याम् | वृक्षैः |
| चतुर्थी | वृक्षाय | वृक्षाभ्याम् | वृक्षेभ्यः |
| पंचमी | वृक्षात् | वृक्षाभ्याम् | वृक्षेभ्यः |
| षष्ठी | वृक्षस्य | वृक्षयोः | वृक्षाणाम् |
| सप्तमी | वृक्षे | वृक्षयोः | वृक्षेषु |
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ | संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ |
|---|---|---|---|
| वृक्षः | पेड़ | गीतम् | गीत |
| फलम् | फल | पुष्पम् | फूल |
| छाया | छाया | वनम् | जंगल |
| पर्णम् | पत्ता | मूलम् | जड़ |
| त्वचा | छाल | काष्ठम् | लकड़ी |
| प्राणवायुः | ऑक्सीजन | पक्षी | पक्षी |
| घोषणा | घोंसला | वर्षा | बारिश |
| पर्यावरणम् | पर्यावरण | त्यागः | त्याग |
| उपकारः | उपकार | सेवा | सेवा |
| रक्षा | रक्षा | भूमिः | भूमि |
| भाग | उपहार |
|---|---|
| फल | मीठे फल |
| पुष्प | सुंदर फूल |
| पर्ण | ऑक्सीजन |
| छाया | ठंडी छाया |
| काष्ठ | लकड़ी |
| मूल | भूमि सुरक्षा |
| क्षेत्र | योगदान |
|---|---|
| पर्यावरण | वायु शुद्धि |
| पक्षी | आश्रय |
| वर्षा | वर्षा का आमंत्रण |
| मनुष्य | फल, छाया, लकड़ी |
| भूमि | कटाव से रक्षा |
पाठ 'वृक्षा गीतम्' वृक्षों के महत्व और उनकी महानता को दर्शाने वाली सुंदर कविता है। वृक्ष हमें फल, फूल, छाया, लकड़ी और ऑक्सीजन देते हैं। वृक्ष पक्षियों का आश्रय हैं और पर्यावरण के रक्षक हैं। वृक्षों का त्याग अद्भुत है - वे केवल देते हैं, कभी माँगते नहीं। हमें चाहिए कि हम अधिक से अधिक वृक्ष लगाएं, उनकी रक्षा करें और उनके प्रति कृतज्ञ रहें। वृक्षों के बिना जीवन की कल्पना असंभव है। वृक्षों की रक्षा ही पर्यावरण संरक्षण का मूल मंत्र है।