कक्षा दसवीं के संस्कृत पाठ्यक्रम (शेमुषी) का तीसरा पाठ व्यायामः सर्वदा पथ्यः है, जिसमें व्यायाम के महत्व का वर्णन किया गया है। यह पाठ एक संवाद के रूप में है, जिसमें सुनील और विशाल नामक दो बालकों की वार्ता प्रस्तुत की गई है। सुनील प्रतिदिन सुबह उठकर व्यायाम करता है, दौड़ता है, योगासन करता है और अपने शरीर को स्वस्थ रखता है। इसके विपरीत विशाल को व्यायाम करना पसंद नहीं है। वह देर से उठता है, आलस्य करता है और अधिक भोजन करता है। इसके परिणामस्वरूप विशाल आलसी, मोटा और अस्वस्थ हो जाता है। सुनील विशाल को समझाता है कि व्यायाम हमारे शरीर के लिए कितना आवश्यक है। व्यायाम से शरीर सुगठित होता है, रक्त का संचार ठीक रहता है, पाचन शक्ति बढ़ती है और अनेक रोगों से सुरक्षा होती है। पाठ का शीर्षक 'व्यायामः सर्वदा पथ्यः' है, अर्थात् व्यायाम सदा (हमेशा) पथ्य (हितकारी) होता है। यह पाठ हमें यह संदेश देता है कि स्वस्थ जीवन के लिए प्रतिदिन व्यायाम करना अत्यंत आवश्यक है। व्यायाम केवल शारीरिक बल ही नहीं बढ़ाता, वरन् मानसिक शक्ति को भी बढ़ाता है।
सुनील प्रतिदिन प्रातःकाल शीघ्र उठता है और व्यायाम करता है। वह दौड़ता है, कसरत करता है और योगासन का अभ्यास करता है। एक दिन सुनील की मुलाकात विशाल से होती है। विशाल सुस्त और आलसी दिखाई देता है। सुनील उससे पूछता है कि तुम इतने सुस्त क्यों हो? विशाल उत्तर देता है कि उसे व्यायाम करने में आनंद नहीं आता। सुनील विशाल को समझाता है कि व्यायाम से शरीर में शक्ति आती है, पाचन शक्ति बढ़ती है और रोग दूर होते हैं।
सुनील के अनुसार व्यायाम के अनेक लाभ हैं: - व्यायाम से शरीर सुगठित और मजबूत होता है। - व्यायाम से रक्त का संचार ठीक रहता है। - व्यायाम से शरीर में आलस्य नहीं आता। - व्यायाम से मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं। - व्यायाम करने वाले व्यक्ति के मन में उत्साह और उल्लास रहता है।
विशाल को सुबह उठना भी पसंद नहीं है। वह अधिक भोजन करता है और व्यायाम नहीं करता। इसके कारण वह मोटा और आलसी हो गया है। सुनील उसे समझाता है कि इस प्रकार का आलसी जीवन उचित नहीं है। हमें प्रतिदिन व्यायाम करना चाहिए। व्यायाम के बिना स्वस्थ रहना संभव नहीं है। विशाल सुनील की बातों से सहमत होता है और व्यायाम करने का संकल्प लेता है।
पाठ में बताया गया है कि व्यायाम सदा पथ्य है। जो व्यक्ति नियमित व्यायाम करता है, वह स्वस्थ और दीर्घायु होता है। व्यायाम करने से शरीर के सभी अंगों का विकास होता है। आधुनिक जीवन में जहाँ लोग शारीरिक श्रम से बचते हैं, वहाँ व्यायाम और भी आवश्यक हो जाता है। हमें प्रतिदिन सुबह उठकर कम से कम एक घंटा व्यायाम अवश्य करना चाहिए।
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | शक्तिः | शक्ती | शक्तयः |
| द्वितीया | शक्तिम् | शक्ती | शक्तीः |
| तृतीया | शक्त्या | शक्तिभ्याम् | शक्तिभिः |
| चतुर्थी | शक्त्यै | शक्तिभ्याम् | शक्तिभ्यः |
| पंचमी | शक्त्याः | शक्तिभ्याम् | शक्तिभ्यः |
| षष्ठी | शक्त्याः | शक्त्योः | शक्तीनाम् |
| सप्तमी | शक्त्याम् | शक्त्योः | शक्तिषु |
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ | संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ |
|---|---|---|---|
| व्यायामः | कसरत | सर्वदा | हमेशा |
| पथ्यः | हितकारी | आलस्यम् | आलस्य |
| शरीरम् | शरीर | स्वास्थ्यम् | स्वास्थ्य |
| बलम् | बल | सुगठितः | सुगठित |
| पाचनम् | पाचन | रक्तम् | रक्त |
| रोगः | रोग | आरोग्यम् | निरोगता |
| उत्साहः | उत्साह | उल्लासः | प्रसन्नता |
| प्रातःकालः | सुबह | दौडः | दौड़ |
| योगः | योग | आसनम् | आसन |
| कसरतः | कसरत | समर्थः | समर्थ |
| शारीरिक लाभ | मानसिक लाभ |
|---|---|
| शरीर सुगठित होता है | मन में उत्साह रहता है |
| रक्त संचार ठीक रहता है | मानसिक शांति मिलती है |
| पाचन शक्ति बढ़ती है | आलस्य दूर होता है |
| मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं | एकाग्रता बढ़ती है |
| रोगों से सुरक्षा होती है | आत्मविश्वास बढ़ता है |
| सुनील | विशाल |
|---|---|
| प्रतिदिन व्यायाम करता है | व्यायाम नहीं करता |
| शीघ्र उठता है | देर से उठता है |
| स्वस्थ और सुगठित | मोटा और आलसी |
| उत्साही | सुस्त |
| पाचन शक्ति ठीक | पाचन गड़बड़ |
पाठ 'व्यायामः सर्वदा पथ्यः' हमें बताता है कि व्यायाम सदा हितकारी होता है। सुनील और विशाल के संवाद के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि नियमित व्यायाम से शरीर सुगठित, पाचन शक्ति ठीक और मन प्रसन्न रहता है। आलस्य, मोटापा और अस्वस्थता से बचने के लिए प्रतिदिन व्यायाम करना आवश्यक है। स्वस्थ जीवन के लिए व्यायाम को अपनी दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बनाना चाहिए। व्यायाम ही स्वस्थ, प्रसन्न और दीर्घायु जीवन का मूल मंत्र है।