👁️

अध्याय 11: मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार — अध्ययन नोट्स

विस्तृत सिद्धांत, सूत्र, आरेख और स्मृति सहायक।

Text Size:

1. मानव नेत्र (Human Eye)

मानव नेत्र एक अत्यंत मूल्यवान और संवेदनशील ज्ञानेंद्रिय है, जो हमें इस अद्भुत रंगबिरंगे संसार को देखने योग्य बनाती है। यह एक कैमरे की भांति कार्य करता है।

नेत्र के मुख्य भाग और उनके कार्य

  1. दृढ़पटल / श्वेतमंडल (Sclera): आंख के बाहर की सफेद और कठोर परत जो आंख के आंतरिक हिस्सों की सुरक्षा करती है।
  2. कॉर्निया (Cornea / स्वच्छ मंडल): आंख के सामने का पारदर्शी उभरा हुआ भाग। प्रकाश सबसे पहले कॉर्निया से ही नेत्र में प्रवेश करता है। प्रकाश का अधिकांश अपवर्तन यहीं होता है।
  3. परितारिका (Iris): कॉर्निया के पीछे एक गहरा पेशीय डायफ्राम (रंगीन हिस्सा) होता है। यह पुतली (Pupil) के आकार को नियंत्रित करता है, जिससे आंख में जाने वाले प्रकाश की मात्रा नियंत्रित होती है। (आंख का रंग आइरिस के रंग पर निर्भर करता है)।
  4. पुतली (Pupil): आइरिस के बीच का छिद्र।
  5. तेज प्रकाश में यह सिकुड़ कर छोटी हो जाती है।
  6. कम प्रकाश (अंधेरे) में यह फैल कर बड़ी हो जाती है।
  7. नेत्र लेंस (Crystalline Lens): यह एक उत्तल (Convex) लेंस है जो जेली जैसे पारदर्शी पदार्थ से बना होता है। यह प्रकाश को अपवर्तित करके रेटिना पर केंद्रित करता है।
  8. पक्ष्माभी पेशियां (Ciliary Muscles): ये पेशियां लेंस को अपनी जगह पर रखती हैं और उसकी वक्रता (मोटाई) को बदलकर उसकी फोकस दूरी को समायोजित (Adjust) करती हैं।
  9. रेटिना (Retina / दृष्टिपटल): आंख के पीछे का पर्दा, जहाँ वस्तु का प्रतिबिंब बनता है।
  10. रेटिना पर बना प्रतिबिंब हमेशा वास्तविक और उल्टा (Real and inverted) होता है।
  11. इसमें प्रकाश-सुग्राही कोशिकाएं (शंकु/Cones - रंग देखने के लिए, और शलाका/Rods - प्रकाश की तीव्रता देखने के लिए) होती हैं।
  12. दृक् तंत्रिका (Optic Nerve): रेटिना पर बनने वाले प्रतिबिंब के विद्युत सिग्नलों को मस्तिष्क तक पहुंचाती है। मस्तिष्क इन सिग्नलों की व्याख्या करता है और हमें वस्तु सीधी दिखाई देती है।

2. समंजन क्षमता (Power of Accommodation)

नेत्र लेंस की वह क्षमता जिसके कारण वह अपनी फोकस दूरी को समायोजित कर लेता है ताकि पास और दूर दोनों की वस्तुएं स्पष्ट दिखाई दें, समंजन क्षमता कहलाती है। - दूर की वस्तुएं देखते समय: पक्ष्माभी पेशियां शिथिल (Relaxed) हो जाती हैं, लेंस पतला हो जाता है और फोकस दूरी बढ़ जाती है। - पास की वस्तुएं देखते समय: पक्ष्माभी पेशियां सिकुड़ती (Contract) हैं, लेंस मोटा हो जाता है और फोकस दूरी कम हो जाती है। - निकट बिंदु (Near Point / स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी): वह न्यूनतम दूरी जहाँ रखी वस्तु स्पष्ट दिखाई देती है। एक सामान्य आंख के लिए यह 25 cm होती है। - दूर बिंदु (Far Point): वह अधिकतम दूरी जहाँ तक आंख स्पष्ट देख सकती है। सामान्य आंख के लिए यह अनंत (Infinity) होता है।


3. दृष्टि दोष तथा उनका संशोधन (Defects of Vision and their Correction)

A. निकट दृष्टि दोष (Myopia / Near-sightedness)

B. दीर्घ दृष्टि दोष (Hypermetropia / Far-sightedness)

C. जरा-दूरदृष्टिता (Presbyopia)

(नोट: मोतियाबिंद / Cataract: उम्र बढ़ने पर नेत्र लेंस दूधिया या धुंधला हो जाता है, जिसका इलाज केवल शल्य चिकित्सा (Surgery) द्वारा संभव है।)


4. प्रिज्म से प्रकाश का अपवर्तन

प्रिज्म एक पारदर्शी माध्यम है जिसके दो त्रिभुजाकार आधार और तीन आयताकार पार्श्व पृष्ठ होते हैं। - जब कोई प्रकाश किरण प्रिज्म से गुजरती है, तो वह प्रिज्म के आधार (Base) की ओर मुड़ जाती है। - विचलन कोण (Angle of Deviation): आपतित किरण की दिशा और निर्गत किरण की दिशा के बीच के कोण को विचलन कोण कहते हैं।


5. श्वेत प्रकाश का विक्षेपण (Dispersion of White Light)

सूर्य का श्वेत (सफेद) प्रकाश सात रंगों का मिश्रण है। जब श्वेत प्रकाश किसी कांच के प्रिज्म से गुजरता है, तो वह अपने सात अवयवी रंगों में बंट जाता है। इस घटना को विक्षेपण कहते हैं। - प्राप्त सात रंगों की पट्टी को स्पेक्ट्रम (Spectrum) कहते हैं। - रंगों का क्रम (VIBGYOR): बैंगनी (Violet), जामुनी (Indigo), नीला (Blue), हरा (Green), पीला (Yellow), नारंगी (Orange), लाल (Red)। - कारण: अलग-अलग रंगों के प्रकाश की चाल कांच में अलग-अलग होती है। - लाल रंग (Red): सबसे कम मुड़ता है (इसका तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक होता है)। - बैंगनी रंग (Violet): सबसे अधिक मुड़ता है (इसका तरंगदैर्ध्य सबसे कम होता है)।

इंद्रधनुष (Rainbow)

इंद्रधनुष हमेशा बारिश के बाद, सूर्य की विपरीत दिशा में बनता है। - हवा में लटकी हुई पानी की सूक्ष्म बूंदें छोटे प्रिज्मों की तरह कार्य करती हैं। - सूर्य का प्रकाश जब इन बूंदों में प्रवेश करता है, तो इसका अपवर्तन और विक्षेपण होता है, फिर बूंद के अंदर पूर्ण आंतरिक परावर्तन होता है और अंत में बाहर निकलते समय फिर से अपवर्तन होता है।


6. वायुमंडलीय अपवर्तन (Atmospheric Refraction)

पृथ्वी का वायुमंडल अलग-अलग घनत्व वाली हवा की परतों से बना है (गर्म हवा हल्की/विरल और ठंडी हवा सघन होती है)। जब प्रकाश इन परतों से गुजरता है, तो उसका लगातार अपवर्तन होता है। - तारों का टिमटिमाना (Twinkling of stars): वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण तारे की आभासी स्थिति बदलती रहती है और आंख में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा घटती-बढ़ती रहती है, जिससे तारे टिमटिमाते हुए प्रतीत होते हैं। - ग्रह क्यों नहीं टिमटिमाते? ग्रह पृथ्वी के बहुत करीब हैं, इसलिए वे प्रकाश के बड़े स्रोत (बिंदुओं का समूह) माने जाते हैं। इनसे आने वाले प्रकाश में परिवर्तन औसत रूप से शून्य हो जाता है। - अग्रिम सूर्योदय और विलंबित सूर्यास्त: वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण सूर्य क्षितिज से नीचे होने पर भी हमें 2 मिनट पहले दिखाई देने लगता है और सूर्यास्त के 2 मिनट बाद तक दिखाई देता है।


7. प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering of Light)

जब प्रकाश किसी माध्यम के सूक्ष्म कणों (जैसे हवा के अणु, धूल, धुआं) से टकराता है, तो वह सभी दिशाओं में फैल जाता है। इसे प्रकाश का प्रकीर्णन कहते हैं। (छोटे कण छोटे तरंगदैर्ध्य वाले नीले रंग का प्रकीर्णन अधिक करते हैं)।


त्वरित सारांश (Quick Summary Flowchart)

graph TD
    A[मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार] --> B(मानव नेत्र)
    A --> C(प्रिज्म और विक्षेपण)
    A --> D(प्राकृतिक घटनाएं)

    B --> B1(दृष्टि दोष)
    B1 --> M1(निकट दृष्टि - दूर का धुंधला - अवतल लेंस)
    B1 --> H1(दीर्घ दृष्टि - पास का धुंधला - उत्तल लेंस)

    C --> C1(विक्षेपण - 7 रंगों में बटना - VIBGYOR)
    C --> C2(इंद्रधनुष का बनना)

    D --> D1(वायुमंडलीय अपवर्तन)
    D1 --> D1a(तारों का टिमटिमाना)
    D1 --> D1b(अग्रिम सूर्योदय 2 मिनट)

    D --> D2(प्रकाश का प्रकीर्णन)
    D2 --> D2a(आकाश का नीला रंग)
    D2 --> D2b(सूर्योदय/सूर्यास्त पर सूर्य का लाल होना)
    D2 --> D2c(खतरे का लाल रंग)
ज्ञान की जाँच करें →