विस्तृत सिद्धांत, सूत्र, आरेख और स्मृति सहायक।
एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश = $-1.6 \times 10^{-19} \, C$
विद्युत धारा ($I$): किसी चालक (जैसे तांबे का तार) में विद्युत आवेश (इलेक्ट्रॉनों) के बहने की दर को विद्युत धारा कहते हैं।
जर्मन भौतिकविद् जॉर्ज साइमन ओम (1827) के अनुसार: "यदि भौतिक अवस्थाएं (जैसे तापमान) समान रहें, तो किसी चालक के सिरों के बीच का विभवांतर ($V$), उसमें प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा ($I$) के समानुपाती होता है।" - $V \propto I$ - $V = I \times R$ (जहाँ $R$ एक स्थिरांक है, जिसे चालक का प्रतिरोध (Resistance) कहते हैं)। - $V$ और $I$ के बीच ग्राफ हमेशा एक सीधी रेखा (Straight line) होता है।
यह चालक का वह गुण है जो उसमें प्रवाहित होने वाले आवेशों (विद्युत धारा) के प्रवाह का विरोध करता है। - SI मात्रक: ओम (Ohm - $\Omega$) - $R = \frac{V}{I}$
प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है? 1. चालक की लंबाई ($l$): प्रतिरोध लंबाई के समानुपाती होता है ($R \propto l$)। तार जितना लंबा होगा, प्रतिरोध उतना अधिक होगा। 2. अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल ($A$): प्रतिरोध मोटाई के व्युत्क्रमानुपाती होता है ($R \propto \frac{1}{A}$)। तार जितना मोटा होगा, प्रतिरोध उतना कम होगा। 3. पदार्थ की प्रकृति: अलग-अलग धातुओं का प्रतिरोध अलग होता है (जैसे चांदी सबसे अच्छी सुचालक है)। 4. तापमान: धातुओं का तापमान बढ़ने पर उनका प्रतिरोध भी बढ़ जाता है।
प्रतिरोधकता (Resistivity - $\rho$): - $R = \rho \frac{l}{A}$ - इसका मात्रक ओम-मीटर ($\Omega \cdot m$) है। - मिश्रधातुओं (जैसे नाइक्रोम) की प्रतिरोधकता शुद्ध धातुओं से अधिक होती है, और ये उच्च तापमान पर पिघलती नहीं हैं, इसलिए इनका उपयोग हीटर, प्रेस (विद्युत तापन युक्तियों) में किया जाता है।
जब प्रतिरोधकों को एक सिरे से दूसरे सिरे तक जोड़ा जाता है। - कुल प्रतिरोध ($R_s$): $R_s = R_1 + R_2 + R_3$ - इस क्रम में परिपथ के हर हिस्से में विद्युत धारा ($I$) समान रहती है। - विभवांतर ($V$) अलग-अलग प्रतिरोधकों में बंट जाता है ($V = V_1 + V_2 + V_3$)। - नुकसान: यदि एक उपकरण (जैसे बल्ब) खराब हो जाए, तो परिपथ टूट जाता है और कोई भी उपकरण काम नहीं करता (जैसे दीवाली की झालर)।
जब सभी प्रतिरोधकों के एक सिरे को एक बिंदु पर और दूसरे सिरे को दूसरे बिंदु पर जोड़ा जाता है। - कुल प्रतिरोध ($R_p$): $\frac{1}{R_p} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \frac{1}{R_3}$ - इस क्रम में हर उपकरण के सिरों पर विभवांतर ($V$) समान रहता है। - विद्युत धारा ($I$) अलग-अलग शाखाओं में बंट जाती है ($I = I_1 + I_2 + I_3$)। - लाभ: घरों में वायरिंग समांतर क्रम में की जाती है, ताकि एक उपकरण खराब होने पर भी बाकी उपकरण काम करते रहें और हर उपकरण अपनी जरूरत के अनुसार अलग-अलग धारा ले सके। इस संयोजन में कुल प्रतिरोध परिपथ के सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम हो जाता है।
जब किसी उच्च प्रतिरोध वाले तार (जैसे नाइक्रोम) में से विद्युत धारा गुजारी जाती है, तो इलेक्ट्रॉन तार के परमाणुओं से टकराते हैं और उनकी गतिज ऊर्जा ऊष्मा में बदल जाती है। तार गर्म हो जाता है।
जूल का तापन नियम (Joule's Law of Heating): उत्पन्न ऊष्मा ($H$) निर्भर करती है: 1. धारा के वर्ग के समानुपाती ($I^2$) 2. प्रतिरोध के समानुपाती ($R$) 3. समय के समानुपाती ($t$) - सूत्र: $H = I^2 \times R \times t$ (यहाँ $H$ जूल में है)
तापीय प्रभाव के व्यावहारिक उपयोग: - इलेक्ट्रिक आयरन, टोस्टर, हीटर: इनमें नाइक्रोम (मिश्रधातु) का तार उपयोग होता है। - विद्युत बल्ब: फिलामेंट टंगस्टन (Tungsten) का बना होता है, क्योंकि इसका गलनांक बहुत उच्च ($3380^\circ C$) होता है। यह पिघलता नहीं है और रोशनी देता है। इसमें आर्गन या नाइट्रोजन गैस भरी जाती है ताकि फिलामेंट का उपचयन (जलना) न हो। - विद्युत फ्यूज (Fuse): यह सुरक्षा उपकरण है जो शॉर्ट-सर्किट (लघुपथन) या ओवरलोडिंग के समय पिघल कर परिपथ को तोड़ देता है। यह हमेशा परिपथ के साथ श्रेणीक्रम (Series) में जोड़ा जाता है। यह सीसा और टिन की मिश्रधातु से बना होता है जिसका गलनांक कम होता है।
विद्युत ऊर्जा के खर्च होने की दर को विद्युत शक्ति कहते हैं। - सूत्र: 1. $P = V \times I$ 2. $P = I^2 \times R$ 3. $P = \frac{V^2}{R}$ - SI मात्रक: वाट (Watt - $W$)
विद्युत ऊर्जा का व्यावसायिक मात्रक: - घरों में बिजली का बिल यूनिट में आता है। 1 यूनिट का अर्थ है 1 किलोवाट-घंटा (kWh)। - 1 kWh = $3.6 \times 10^6$ जूल (J) - (जब 1000 वाट का उपकरण 1 घंटे तक चलता है, तो 1 यूनिट बिजली खर्च होती है)।
graph TD
A[विद्युत् - Electricity] --> B(विद्युत धारा और विभवांतर)
A --> C(ओम का नियम और प्रतिरोध)
A --> D(तापीय प्रभाव और शक्ति)
B --> B1[धारा I = Q/t, मात्रक: Ampere]
B --> B2[विभवांतर V = W/Q, मात्रक: Volt]
C --> C1(ओम का नियम: V = IR)
C --> C2(श्रेणीक्रम: Rs = R1 + R2 + R3)
C --> C3(समांतर क्रम: 1/Rp = 1/R1 + 1/R2)
D --> D1(जूल का नियम: H = I²Rt)
D --> D2(उपयोग: हीटर, बल्ब, फ्यूज)
D --> D3[शक्ति P = VI, मात्रक: Watt]
D --> D4[1 यूनिट = 1 kWh = 3.6 × 10⁶ J]