ऊर्जा किसी भी कार्य को करने की क्षमता है, और मानव सभ्यता के विकास में ऊर्जा सदैव केन्द्रीय भूमिका निभाती रही है। प्रारम्भिक मानव अग्नि से ऊष्मा और प्रकाश प्राप्त करता था, किन्तु आज हमें विद्युत, ईंधन, परिवहन, कृषि, उद्योग और घरेलू कार्यों के लिए विभिन्न प्रकार की ऊर्जा की आवश्यकता होती है। पृथ्वी पर ऊर्जा के अनेक स्रोत उपलब्ध हैं, जिनमें सूर्य, पवन, जल, भूताप, बायोमास, कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस तथा परमाणु नाभिक शामिल हैं। इन स्रोतों को नवीकरणीय (Renewable) और अनवीकरणीय (Non-renewable) ऊर्जा स्रोतों के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
किसी अच्छे ऊर्जा स्रोत के गुणों में उच्च ऊर्जा घनत्व, सरल उपलब्धता, सस्ता भण्डारण, पर्यावरण के अनुकूल होना तथा अधिक मात्रा में ऊर्जा प्रदान करना शामिल है। जैसे-जैसे जनसंख्या और विकास की माँग बढ़ रही है, वैसे-वैसे ऊर्जा की आवश्यकता भी निरन्तर बढ़ रही है। इसलिए यह आवश्यक है कि हम ऊर्जा के स्रोतों की विशेषताओं, उनकी सीमाओं तथा उनके प्रभावी उपयोग को भली-भाँति समझें, ताकि ऊर्जा की आपूर्ति सतत (Sustainable) बनी रह सके। इस अध्याय में हम ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
ऊर्जा के स्रोतों को उनकी उपलब्धता के आधार पर दो मुख्य वर्गों में विभाजित किया गया है:
अच्छे ऊर्जा स्रोत के लक्षण: प्रति इकाई द्रव्यमान में अधिक ऊर्जा दें, सरलता से और सस्ते में उपलब्ध हों, सुरक्षित तथा भण्डारण योग्य हों, और पर्यावरण को न्यूनतम क्षति पहुँचाएँ।
कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को जीवाश्म ईंधन कहते हैं, क्योंकि ये लाखों वर्ष पूर्व मृत पौधों और जीवों के दबाव तथा ऊष्मा में अपघटन से बने हैं। इनका उपयोग विद्युत उत्पादन, परिवहन, उद्योग तथा घरेलू कार्यों में होता है।
जीवाश्म ईंधन की सीमाएँ:
सूर्य ऊर्जा का सबसे विशाल स्रोत है। सौर ऊर्जा एक नवीकरणीय, प्रदूषण मुक्त और असीमित ऊर्जा स्रोत है। सौर ऊर्जा के उपयोग के मुख्य साधन निम्न हैं:
सौर ऊर्जा की सीमाएँ: सौर कुकर केवल दिन में तथा साफ मौसम में कार्य करता है। सौर सेल के लिए सिलिकॉन की अधिक मात्रा चाहिए जो महँगी है।
गतिशील वायु को पवन कहते हैं और पवन की गतिज ऊर्जा से प्राप्त ऊर्जा को पवन ऊर्जा कहते हैं। पवन चक्कियों के ब्लेड पवन की गतिज ऊर्जा ग्रहण करके विद्युत जनित्र को घुमाते हैं। पवन खेत (Wind Farm) वे स्थान हैं जहाँ बड़ी संख्या में पवन चक्कियाँ स्थापित होती हैं। पवन ऊर्जा नवीकरणीय तथा प्रदूषण मुक्त स्रोत है, और भारत का पवन ऊर्जा क्षेत्र विश्व में अग्रणी है। सीमाएँ - पवन चक्कियों के लिए न्यूनतम 15 किमी/घंटा की पवन गति आवश्यक है तथा पवन की गति अनिश्चित होती है।
बहते या गिरते जल की गतिज ऊर्जा से उत्पन्न विद्युत जल विद्युत कहलाती है। नदियों पर बाँध बनाकर जल को ऊँचाई से गिराया जाता है, जिससे स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में बदलकर टरबाइनों को घुमाती है। जल विद्युत स्वच्छ एवं नवीकरणीय स्रोत है, परन्तु बाँधों से विस्थापन तथा जलीय पारिस्थितिकी पर प्रभाव जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। ज्वारीय ऊर्जा समुद्र में चाँद के आकर्षण से उत्पन्न ज्वार से प्राप्त होती है। तरंग ऊर्जा समुद्र की तरंगों की गतिज ऊर्जा से प्राप्त होती है।
पृथ्वी के आन्तरिक भाग की ऊष्मा से प्राप्त ऊर्जा भूतापीय ऊर्जा कहलाती है। भूतापीय क्षेत्रों में जल ऊष्माग्रस्त चट्टानों के सम्पर्क में आकर भाप बन जाता है, जो टरबाइन घुमाकर विद्युत उत्पन्न करता है। यह नवीकरणीय स्रोत है, किन्तु इसकी उपलब्धता केवल विशिष्ट भूगर्भीय क्षेत्रों में ही होती है; भारत में लद्दाख का पुगा घाटी भूतापीय क्षेत्र है।
पौधों तथा जन्तुओं से प्राप्त कार्बनिक पदार्थों को बायोमास कहते हैं। जब बायोमास (गोबर, सीवेज, फसल अवशेष) को वायु की अनुपस्थिति में (अवायवीय परिस्थितियों में) जीवाणुओं द्वारा अपघटित किया जाता है तो बायोगैस बनती है। बायोगैस में मुख्य रूप से मीथेन (CH₄), कार्बन डाइऑक्साइड तथा हाइड्रोजन होती है। मीथेन के कारण यह उत्कृष्ट ईंधन है। बायोगैस का उपयोग खाना पकाने, प्रकाश तथा विद्युत उत्पादन में होता है, और बची हुई स्लरी का उपयोग उर्वरक के रूप में होता है।
परमाणु के केन्द्रक में अत्यधिक ऊर्जा संग्रहीत होती है। परमाणु नाभिकों से निकली ऊर्जा को परमाणु ऊर्जा कहते हैं। यह दो प्रकार से प्राप्त होती है:
सीमाएँ: यूरेनियम सीमित है, रेडियोधर्मी कचरे के निपटान की समस्या गम्भीर है तथा दुर्घटनाएँ जानलेवा हो सकती हैं। किन्तु एक ग्राम यूरेनियम से लगभग 3 टन कोयले के बराबर ऊर्जा प्राप्त होती है।
ऊर्जा एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित हो सकती है। सौर सेल में प्रकाश ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा; पवन चक्की में गतिज ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा; ताप विद्युत संयंत्र में रासायनिक ऊर्जा → ऊष्मा → गतिज → विद्युत। ऊर्जा संरक्षण के लिए हमें जीवाश्म ईंधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए, नवीकरणीय स्रोतों को अपनाना चाहिए तथा ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग करना चाहिए। ऊर्जा का सतत विकास वह रणनीति है जो भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं से समझौता किए बिना वर्तमान की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करती है।
| ऊर्जा स्रोत | प्रकार | उदाहरण | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|---|
| सौर ऊर्जा | नवीकरणीय | सूर्य | असीमित, प्रदूषण मुक्त |
| पवन ऊर्जा | नवीकरणीय | पवन चक्की | न्यूनतम 15 किमी/घंटा गति |
| जल विद्युत | नवीकरणीय | बाँध | टरबाइन से विद्युत |
| बायोमास | नवीकरणीय | गोबर | बायोगैस - मीथेन |
| कोयला | अनवीकरणीय | जीवाश्म ईंधन | सीमित, प्रदूषणकारी |
| पेट्रोलियम | अनवीकरणीय | जीवाश्म ईंधन | परिवहन का मुख्य ईंधन |
| परमाणु ईंधन | अनवीकरणीय | यूरेनियम-235 | नाभिकीय विखंडन |
| उपकरण | ऊर्जा रूपांतरण |
|---|---|
| सौर सेल | प्रकाश ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा |
| पवन चक्की | गतिज ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा |
| विद्युत मोटर | विद्युत ऊर्जा → यांत्रिक ऊर्जा |
| विद्युत जनित्र | यांत्रिक ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा |
| सौर कुकर | प्रकाश ऊर्जा → ऊष्मा ऊर्जा |
ऊर्जा मानव जीवन और विकास का आधार है। ऊर्जा के स्रोतों को नवीकरणीय और अनवीकरणीय में वर्गीकृत किया गया है, जिनमें सौर, पवन, जल, भूतापीय और बायोगैस नवीकरणीय हैं, जबकि कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और यूरेनियम अनवीकरणीय हैं। जीवाश्म ईंधन सीमित होने के साथ-साथ प्रदूषण के भी कारण हैं, अतः हमें उनके स्थान पर स्वच्छ नवीकरणीय स्रोतों को अपनाना होगा। सौर सेल, बायोगैस संयंत्र और पवन चक्की जैसी तकनीकें ऊर्जा संकट का समाधान हैं। ऊर्जा संरक्षण एवं सतत विकास के सिद्धांतों का पालन करके ही हम भविष्य के लिए सुरक्षित ऊर्जा सुनिश्चित कर सकते हैं।