विस्तृत सिद्धांत, सूत्र, आरेख और स्मृति सहायक।
धातुएं ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके धात्विक ऑक्साइड बनाती हैं (जो क्षारीय प्रकृति के होते हैं)। - धातु + ऑक्सीजन $\rightarrow$ धातु ऑक्साइड - उदाहरण: $2Cu + O_2 \rightarrow 2CuO$ (कॉपर ऑक्साइड - काला) - एल्यूमीनियम: $4Al + 3O_2 \rightarrow 2Al_2O_3$ (एल्यूमीनियम ऑक्साइड) (कुछ धात्विक ऑक्साइड जैसे $Al_2O_3$ और $ZnO$ उभयधर्मी (Amphoteric) होते हैं, अर्थात् ये अम्ल और क्षारक दोनों के साथ क्रिया करके लवण और जल बनाते हैं)।
ऑक्सीजन के साथ क्रियाशीलता: - $Na$ और $K$ इतने अधिक क्रियाशील हैं कि खुले में रखने पर आग पकड़ लेते हैं। (इसलिए इन्हें केरोसिन तेल में डुबोकर रखा जाता है)। - $Mg, Al, Zn, Pb$ पर ऑक्साइड की पतली परत चढ़ जाती है जो इन्हें आगे ऑक्सीकरण से बचाती है (Anodising)। - $Au$ और $Ag$ उच्च ताप पर भी ऑक्सीजन से क्रिया नहीं करते।
धातुएं जल से क्रिया करके धातु ऑक्साइड/हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोजन गैस बनाती हैं। - ठंडे जल के साथ: $Na, K, Ca$ (बहुत तेज़ी से क्रिया करते हैं। $Ca$ जल पर तैरने लगता है क्योंकि $H_2$ के बुलबुले उसकी सतह पर चिपक जाते हैं)। - गर्म जल के साथ: $Mg$ गर्म जल से क्रिया करता है और तैरने लगता है। - भाप (Steam) के साथ: $Al, Fe, Zn$ केवल भाप के साथ क्रिया करते हैं। ($3Fe + 4H_2O \rightarrow Fe_3O_4 + 4H_2$) - कोई क्रिया नहीं: $Pb, Cu, Ag, Au$ जल के साथ बिल्कुल अभिक्रिया नहीं करते।
एक्वा रेजिया (Aqua Regia): सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (3 भाग) और सांद्र नाइट्रिक अम्ल (1 भाग) का ताज़ा मिश्रण। यह सोने (Gold) और प्लेटिनम को भी गला सकता है।
अधिक क्रियाशील धातु, कम क्रियाशील धातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित कर देती है। - सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series): धातुओं को उनकी क्रियाशीलता के घटते क्रम में रखने पर प्राप्त सूची। (K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > [H] > Cu > Hg > Ag > Au)
धातुएं अपने संयोजकता कोश (valence shell) से इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन (Cation) बनाती हैं, और अधातुएं इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन (Anion) बनाती हैं। - उदाहरण (NaCl का निर्माण): $Na \rightarrow Na^+ + e^-$ (इलेक्ट्रॉन त्याग) $Cl + e^- \rightarrow Cl^-$ (इलेक्ट्रॉन ग्रहण) विपरीत आवेशित आयन एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं और स्थिर वैद्युत आकर्षण बल (Electrostatic force) द्वारा जुड़कर आयनिक यौगिक ($Na^+Cl^-$) बनाते हैं।
आयनिक यौगिकों के गुणधर्म: 1. भौतिक प्रकृति: ये ठोस और कठोर होते हैं। (भंगुर होते हैं)। 2. गलनांक और क्वथनांक: इनके बीच मजबूत अंतर-आयनिक आकर्षण बल के कारण इनका गलनांक और क्वथनांक बहुत अधिक होता है। 3. घुलनशीलता: ये जल में घुलनशील होते हैं (लेकिन केरोसिन/पेट्रोल जैसे कार्बनिक विलायकों में अघुलनशील)। 4. विद्युत चालकता: ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते, लेकिन जलीय विलयन या गलित (molten) अवस्था में विद्युत के सुचालक होते हैं।
पृथ्वी की भूपर्पटी धातुओं का मुख्य स्रोत है। - खनिज (Minerals): पृथ्वी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले तत्व या यौगिक। - अयस्क (Ores): वे खनिज जिनमें कोई विशेष धातु काफी मात्रा में होती है और जिसे निकालना लाभकारी होता है।
उच्च क्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण: (उदा: Na, Ca, Al) इन्हें कार्बन द्वारा अपचयित नहीं किया जा सकता। इन्हें उनके गलित क्लोराइड या ऑक्साइड के विद्युत अपघटन (Electrolytic Reduction) द्वारा प्राप्त किया जाता है। कैथोड पर धातु और एनोड पर गैस मुक्त होती है।
धातुओं का परिष्करण (Refining of Metals): अशुद्ध धातु को शुद्ध करने के लिए विद्युत अपघटनी परिष्करण (Electrolytic refining) का उपयोग होता है (उदा: Cu)। अशुद्ध तांबे को एनोड और शुद्ध तांबे की पतली पट्टी को कैथोड बनाते हैं।
संक्षारण: हवा और नमी के कारण धातुओं का क्षय होना (उदा: लोहे पर भूरी जंग, चाँदी पर काली परत (Ag₂S), तांबे पर हरी परत (CuCO₃))। - लोहे को जंग से बचाने के लिए उस पर जिंक की परत चढ़ाई जाती है, जिसे यशदलेपन (Galvanization) कहते हैं।
मिश्रधातु (Alloy): दो या दो से अधिक धातुओं (या धातु और अधातु) के समांगी मिश्रण को मिश्रधातु कहते हैं। इससे धातु के गुण बदल जाते हैं (जैसे जंग न लगना, कठोरता बढ़ना)। - पीतल (Brass): कॉपर (Cu) + जिंक (Zn) - कांसा (Bronze): कॉपर (Cu) + टिन (Sn) - सोल्डर (Solder): लेड (Pb) + टिन (Sn) - इसका गलनांक कम होता है, उपयोग वेल्डिंग में। - स्टेनलेस स्टील: लोहा (Fe) + निकेल (Ni) + क्रोमियम (Cr) - अमलगम: यदि मिश्रधातु में एक धातु पारा (मर्करी - Hg) है, तो उसे अमलगम कहते हैं।
graph TD
A[धातुएं] --> B(भौतिक गुण: चमकदार, आघातवर्ध्य, तन्य, सुचालक)
A --> C(रासायनिक गुण)
C --> C1(O2 से क्रिया: क्षारीय ऑक्साइड)
C --> C2(H2O से क्रिया: H2 गैस)
C --> C3(अम्ल से क्रिया: H2 गैस)
A --> D(निष्कर्षण - Metallurgy)
D --> D1(उच्च क्रियाशील: विद्युत अपघटन)
D --> D2(मध्यम क्रियाशील: भर्जन/निस्तापन + अपचयन)
D --> D3(कम क्रियाशील: केवल गर्म करना)