विस्तृत सिद्धांत, सूत्र, आरेख और स्मृति सहायक।
कार्बन एक अधातु है जिसका प्रतीक C है। इसका परमाणु क्रमांक 6 है और इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 4 है। इसके सबसे बाहरी कोश (संयोजकता कोश) में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए इसकी संयोजकता 4 है (इसे चतुष्संयोजक / Tetravalent कहा जाता है)।
कार्बन के आयनिक बंध न बनाने के कारण: 1. $C^{4+}$ धनायन बनाना: 4 इलेक्ट्रॉन खोने के लिए अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जो संभव नहीं है। 2. $C^{4-}$ ऋणायन बनाना: 6 प्रोटॉन वाले नाभिक के लिए 10 इलेक्ट्रॉनों (4 अतिरिक्त) को संभालना अत्यधिक कठिन है। निष्कर्ष: इसलिए कार्बन न तो इलेक्ट्रॉन खोता है और न ही ग्रहण करता है। इसके बजाय, यह दूसरे परमाणुओं के साथ इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी (Sharing) करके सहसंयोजी आबंध (Covalent Bond) बनाता है।
दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉन के एक युग्म (pair) की साझेदारी के द्वारा बनने वाले आबंध को सहसंयोजी आबंध कहते हैं। - एकल आबंध (Single Bond): जब 1-1 इलेक्ट्रॉन की साझेदारी होती है (उदा: $H_2, Cl_2, CH_4$)। $H - H$ - द्वि-आबंध (Double Bond): जब 2-2 इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी होती है (उदा: $O_2, CO_2$)। $O = O$ - त्रि-आबंध (Triple Bond): जब 3-3 इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी होती है (उदा: $N_2$)। $N \equiv N$
सहसंयोजी यौगिकों के भौतिक गुण: - इनके अणुओं के बीच दुर्बल अंतराणुक बल (weak intermolecular force) होता है, इसलिए इनके गलनांक और क्वथनांक कम होते हैं। - ये विद्युत के कुचालक होते हैं क्योंकि इनमें मुक्त इलेक्ट्रॉन या आयन नहीं होते हैं।
प्रकृति में कार्बन के लाखों यौगिक पाए जाते हैं। इसके दो मुख्य कारण हैं: 1. श्रृंखलन (Catenation): कार्बन में कार्बन के ही अन्य परमाणुओं के साथ आबंध बनाकर लंबी श्रृंखला, शाखित श्रृंखला या वलय (ring) बनाने की अद्वितीय क्षमता होती है। 2. चतुष्संयोजकता (Tetravalency): कार्बन की संयोजकता 4 होने के कारण यह कार्बन के 4 अन्य परमाणुओं या ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन आदि के परमाणुओं के साथ आसानी से आबंध बना सकता है।
वे यौगिक जो केवल कार्बन और हाइड्रोजन से बने होते हैं, हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं:
इनमें कार्बन परमाणुओं के बीच केवल एकल आबंध (Single bond) होता है। - एल्केन (Alkane): सामान्य सूत्र $C_nH_{2n+2}$ - उदाहरण: - मेथेन (Methane) - $CH_4$ - एथेन (Ethane) - $C_2H_6$ - प्रोपेन (Propane) - $C_3H_8$
इनमें कार्बन परमाणुओं के बीच कम से कम एक द्वि-आबंध (Double bond) या त्रि-आबंध (Triple bond) होता है। - एल्कीन (Alkene): द्वि-आबंध। सामान्य सूत्र $C_nH_{2n}$ - उदा: एथीन ($C_2H_4$), प्रोपीन ($C_3H_6$) - एल्काइन (Alkyne): त्रि-आबंध। सामान्य सूत्र $C_nH_{2n-2}$ - उदा: एथाइन ($C_2H_2$), प्रोपाइन ($C_3H_4$)
यौगिकों की वह श्रृंखला जिसमें कार्बन श्रृंखला में स्थित हाइड्रोजन को एक ही प्रकार का प्रकार्यात्मक समूह (Functional Group) प्रतिस्थापित करता है, समजातीय श्रेणी कहलाती है। - विशेषताएं: 1. इनके दो क्रमागत (successive) सदस्यों के बीच -CH₂- का अंतर होता है। 2. इनके आणविक द्रव्यमान में 14u का अंतर होता है। 3. इनके रासायनिक गुण समान होते हैं, लेकिन भौतिक गुणों में क्रमिक परिवर्तन होता है (जैसे आणविक द्रव्यमान बढ़ने पर गलनांक/क्वथनांक बढ़ता है)। - उदा: $CH_3OH, C_2H_5OH, C_3H_7OH$ (एल्कोहल की समजातीय श्रेणी)।
हाइड्रोकार्बन श्रृंखला में उपस्थित वह परमाणु या परमाणुओं का समूह जो उस यौगिक के रासायनिक गुणों का निर्धारण करता है। 1. हैलोजन (Halogen - Cl, Br): हैलोएल्केन (उदा: क्लोरोमेथेन $CH_3Cl$) 2. एल्कोहल (Alcohol): -OH (उदा: एथेनॉल $C_2H_5OH$) 3. एल्डिहाइड (Aldehyde): -CHO (उदा: मेथेनल $HCHO$) 4. कीटोन (Ketone): >C=O (उदा: प्रोपेनोन $CH_3COCH_3$) 5. कार्बोक्सिलिक अम्ल (Carboxylic Acid): -COOH (उदा: एथेनॉइक अम्ल $CH_3COOH$)
साबुन (Soap): लंबी श्रृंखला वाले कार्बोक्सिलिक अम्लों के सोडियम या पोटेशियम लवण होते हैं। - साबुन के अणु के दो सिरे होते हैं: 1. जलरागी सिरा (Hydrophilic) - जो जल में घुलता है (आयनिक सिरा)। 2. जलविरागी सिरा (Hydrophobic) - जो तेल या मैल में घुलता है (कार्बन श्रृंखला)। - मिसेल (Micelle) का निर्माण: जब साबुन पानी में होता है, तो इसके अणु एक गोलाकार संरचना बनाते हैं जिसमें जलविरागी सिरा मैल की ओर और जलरागी सिरा बाहर पानी की ओर होता है। इसे मिसेल कहते हैं, जो मैल को पानी में घोलने में मदद करता है। - कठोर जल में साबुन: कठोर जल में $Ca$ और $Mg$ के आयन होते हैं। साबुन इनके साथ क्रिया करके एक अघुलनशील पदार्थ (स्कम/Scum) बनाता है, जिससे झाग नहीं बनता। - अपमार्जक (Detergent): ये लंबी श्रृंखला वाले सल्फोनिक अम्लों के सोडियम लवण होते हैं। ये कठोर जल में उपस्थित आयनों के साथ स्कम नहीं बनाते, इसलिए कठोर जल में भी प्रभावी होते हैं।
graph TD
A[कार्बन यौगिक] --> B(हाइड्रोकार्बन)
B --> C(संतृप्त - एल्केन)
B --> D(असंतृप्त - एल्कीन, एल्काइन)
A --> E(प्रकार्यात्मक समूह)
E --> E1(-OH एल्कोहल)
E --> E2(-CHO एल्डिहाइड)
E --> E3(-COOH अम्ल)
A --> F(रासायनिक अभिक्रियाएं)
F --> F1(दहन, ऑक्सीकरण, संकलन, प्रतिस्थापन)