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अध्याय 6: जैव प्रक्रम — अध्ययन नोट्स

विस्तृत सिद्धांत, सूत्र, आरेख और स्मृति सहायक।

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1. जैव प्रक्रम (Life Processes) क्या हैं?

वे सभी प्रक्रम (processes) जो सम्मिलित रूप से जीवों के अनुरक्षण (maintenance) का कार्य करते हैं, जैव प्रक्रम कहलाते हैं। एक सजीव को जीवित रहने के लिए मुख्य रूप से चार प्रक्रमों की आवश्यकता होती है: 1. पोषण (Nutrition): भोजन ग्रहण करना। 2. श्वसन (Respiration): भोजन से ऊर्जा प्राप्त करना। 3. वहन (Transportation): पदार्थों (भोजन, ऑक्सीजन, अपशिष्ट) का शरीर में एक स्थान से दूसरे स्थान तक परिवहन। 4. उत्सर्जन (Excretion): शरीर से हानिकारक अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालना।


2. पोषण (Nutrition)

सजीवों द्वारा भोजन ग्रहण करने और उसका उपयोग ऊर्जा प्राप्त करने तथा शरीर की वृद्धि के लिए करने की प्रक्रिया पोषण कहलाती है। पोषण दो प्रकार का होता है: - स्वपोषी पोषण (Autotrophic Nutrition): जीव अपना भोजन स्वयं बनाते हैं (उदा: हरे पौधे और कुछ जीवाणु)। - विषमपोषी पोषण (Heterotrophic Nutrition): जीव अपने भोजन के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दूसरों (स्वपोषियों) पर निर्भर रहते हैं (उदा: जंतु, मानव, कवक)।

पौधों में पोषण (प्रकाश संश्लेषण - Photosynthesis)

हरे पौधे सूर्य के प्रकाश और क्लोरोफिल की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) और जल ($H_2O$) का उपयोग करके कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज) बनाते हैं। इस प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं। - रासायनिक समीकरण: $6CO_2 + 12H_2O \xrightarrow{\text{सूर्य का प्रकाश / क्लोरोफिल}} C_6H_{12}O_6 + 6O_2 + 6H_2O$ - प्रकाश संश्लेषण की मुख्य घटनाएं: 1. क्लोरोफिल द्वारा प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करना। 2. प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलना तथा जल के अणुओं का हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में टूटना। 3. $CO_2$ का कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज) में अपचयन। - रंध्र (Stomata): पत्तियों की सतह पर मौजूद सूक्ष्म छिद्र जिनके द्वारा गैसों ($O_2$ और $CO_2$) का आदान-प्रदान और वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) होता है।

मानव में पोषण (Nutrition in Human Beings)

मानव का पाचन तंत्र एक लंबी नली है जो मुँह से गुदा (Anus) तक फैली होती है, जिसे आहारनाल (Alimentary Canal) कहते हैं। 1. मुँह (Mouth): दाँत भोजन को चबाते हैं। लार ग्रंथि से एमाइलेज (Amylase) एंजाइम निकलता है जो स्टार्च (मंड) को शर्करा में बदलता है। 2. ग्रसिका (Oesophagus): भोजन क्रमांकुंचन (Peristaltic) गति द्वारा आमाशय तक पहुँचता है। 3. आमाशय (Stomach): यहाँ जठर ग्रंथियां होती हैं जो हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($HCl$), पेप्सिन (प्रोटीन पाचक एंजाइम) और श्लेष्मा (Mucus) स्रावित करती हैं। $HCl$ अम्लीय माध्यम तैयार करता है और श्लेष्मा आमाशय की दीवार को अम्ल से बचाती है। 4. क्षुद्रांत्र (Small Intestine - छोटी आंत): यह कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के पूर्ण पाचन का स्थान है। - यकृत (Liver): पित्त रस (Bile juice) स्रावित करता है जो वसा की बड़ी गोलिकाओं को छोटी गोलिकाओं में तोड़ता है (इमल्सीकरण - Emulsification) और माध्यम को क्षारीय बनाता है। - अग्न्याशय (Pancreas): अग्न्याशयिक रस स्रावित करता है जिसमें ट्रिप्सिन (प्रोटीन के लिए) और लाइपेज (वसा के लिए) एंजाइम होते हैं। - पचे हुए भोजन का अवशोषण क्षुद्रांत्र की आंतरिक भित्ति में मौजूद उंगली जैसी संरचनाओं (दीर्घरोम - Villi) द्वारा होता है, जो अवशोषण का सतह क्षेत्र बढ़ा देते हैं। 5. बृहदांत्र (Large Intestine): बिना पचे हुए भोजन से जल का अवशोषण होता है और शेष अपशिष्ट गुदा द्वारा बाहर निकाल दिया जाता है।


3. श्वसन (Respiration)

कोशिकाओं में ऑक्सीजन की उपस्थिति या अनुपस्थिति में ग्लूकोज (भोजन) के विखंडन से ऊर्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया श्वसन कहलाती है। - कोशिका में ग्लूकोज (6-कार्बन) सबसे पहले कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm) में पाइरुवेट (3-कार्बन) में टूटता है। इसके बाद पाइरुवेट का विखंडन तीन तरह से हो सकता है:

  1. वायवीय श्वसन (Aerobic Respiration): ऑक्सीजन की उपस्थिति में (माइटोकॉन्ड्रिया में)। पाइरुवेट $\rightarrow CO_2$ + जल + अधिक ऊर्जा (38 ATP)
  2. अवायवीय श्वसन (Anaerobic Respiration - यीस्ट में): ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में। पाइरुवेट $\rightarrow$ एथेनॉल + $CO_2$ + कम ऊर्जा (2 ATP)। इसे किण्वन (Fermentation) कहते हैं।
  3. ऑक्सीजन के अभाव में (हमारी पेशियों में): जब हम भारी व्यायाम करते हैं। पाइरुवेट $\rightarrow$ लैक्टिक अम्ल + ऊर्जा। (लैक्टिक अम्ल के जमा होने से पेशियों में ऐंठन या क्रैम्प (Cramps) होते हैं)।

मानव श्वसन तंत्र (Human Respiratory System)


4. वहन (Transportation)

मानव में वहन (Circulatory System)

रक्त, हृदय और रुधिर वाहिकाएं (Blood vessels) मिलकर मानव का परिसंचरण तंत्र बनाती हैं। - रक्त (Blood): एक तरल संयोजी ऊतक है। इसके तरल भाग को प्लाज्मा (Plasma) कहते हैं, जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं (RBC), श्वेत रक्त कोशिकाएं (WBC) और प्लेटलेट्स (रक्त का थक्का बनाने वाली) होती हैं। - हृदय (Heart): मानव हृदय एक पेशीय अंग है जिसमें 4 कोष्ठ (Chambers) होते हैं - 2 आलिंद (Atria) ऊपर और 2 निलय (Ventricles) नीचे। - ऑक्सीजन प्रचुर रक्त (शुद्ध रक्त) फेफड़ों से बाएं आलिंद में आता है, फिर बाएं निलय से पूरे शरीर में पंप किया जाता है। - विऑक्सीजनित रक्त (अशुद्ध रक्त) शरीर से दाएं आलिंद में आता है, फिर दाएं निलय द्वारा फेफड़ों में ऑक्सीजन लेने के लिए पंप किया जाता है। - इसे दोहरा परिसंचरण (Double Circulation) कहते हैं। - रुधिर वाहिकाएं (Blood Vessels): - धमनियाँ (Arteries): हृदय से ऑक्सीजनित रक्त शरीर के अंगों तक ले जाती हैं (अपवाद: फुफ्फुस धमनी)। इनकी भित्ति मोटी और लचीली होती है क्योंकि रक्त उच्च दाब से बहता है। - शिराएं (Veins): शरीर के अंगों से विऑक्सीजनित रक्त हृदय तक लाती हैं (अपवाद: फुफ्फुस शिरा)। इनमें रक्त पीछे न बहे, इसके लिए वाल्व (Valves) होते हैं।

पादपों में वहन (Transportation in Plants)

पौधों में दो मुख्य संवहन ऊतक होते हैं: 1. जाइलम (Xylem): जड़ों द्वारा मिट्टी से अवशोषित जल और खनिजों को पत्तियों तक पहुँचाता है (यह गति हमेशा नीचे से ऊपर की ओर होती है)। यह वाष्पोत्सर्जन कर्षण (Transpirational pull) द्वारा काम करता है। 2. फ्लोएम (Phloem): पत्तियों में बने भोजन (सुक्रोज) को पौधे के अन्य सभी भागों तक पहुँचाता है। इसे स्थानांतरण (Translocation) कहते हैं, जिसमें ऊर्जा (ATP) का उपयोग होता है। (यह गति ऊपर और नीचे दोनों दिशाओं में होती है)।


5. उत्सर्जन (Excretion)

शरीर में होने वाली उपापचयी (Metabolic) क्रियाओं के फलस्वरूप बने हानिकारक नाइट्रोजनयुक्त अपशिष्ट पदार्थों (जैसे यूरिया, यूरिक अम्ल) को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया उत्सर्जन कहलाती है।

मानव उत्सर्जन तंत्र (Human Excretory System)

पादपों में उत्सर्जन (Excretion in Plants)

पौधे अपने अपशिष्ट पदार्थों को कई तरह से निकालते हैं: - $O_2$ (प्रकाश संश्लेषण का अपशिष्ट) रंध्रों द्वारा बाहर निकलती है। - अतिरिक्त जल वाष्पोत्सर्जन द्वारा बाहर निकलता है। - पुराने पत्ते और छाल गिर जाते हैं, जिनमें अपशिष्ट जमा होता है। - रेज़िन और गोंद (Resin and Gum) के रूप में (मुख्यतः पुराने जाइलम में)। - कुछ अपशिष्ट मिट्टी में स्रावित कर दिए जाते हैं।


त्वरित सारांश (Quick Summary Flowchart)

graph TD
    A[जैव प्रक्रम] --> B(पोषण)
    A --> C(श्वसन)
    A --> D(वहन)
    A --> E(उत्सर्जन)

    B --> B1(स्वपोषी - प्रकाश संश्लेषण)
    B --> B2(विषमपोषी - मानव पाचन)

    C --> C1(वायवीय - O2 में, 38 ATP)
    C --> C2(अवायवीय - बिना O2, 2 ATP)

    D --> D1(मानव: हृदय, धमनी, शिरा)
    D --> D2(पादप: जाइलम-जल, फ्लोएम-भोजन)

    E --> E1(मानव: वृक्क / नेफ्रॉन)
    E --> E2(पादप: रंध्र, रेज़िन, पत्तों का गिरना)
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