विस्तृत सिद्धांत, सूत्र, आरेख और स्मृति सहायक।
सजीवों के शरीर में पर्यावरण में हो रहे परिवर्तनों (उद्दीपन - Stimulus) के प्रति अनुक्रिया (Response) करने के लिए विभिन्न अंगों का एक साथ मिलकर काम करना ही 'नियंत्रण एवं समन्वय' कहलाता है। - जंतुओं में यह कार्य तंत्रिका तंत्र (Nervous System) और अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System - हॉर्मोन) द्वारा किया जाता है। - पौधों में तंत्रिका तंत्र नहीं होता, वे केवल रासायनिक (हॉर्मोनल) नियंत्रण द्वारा समन्वय करते हैं।
यह संवेदी अंगों से सूचनाओं को ग्रहण करता है और प्रतिक्रिया के लिए पेशियों तक संदेश भेजता है।
न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है। यह शरीर की सबसे लंबी कोशिका होती है। इसके मुख्य भाग हैं: 1. द्रुमिका (Dendrite): यह कोशिका काय (Cell body) से निकलने वाले धागेनुमा प्रवर्ध हैं, जो सूचनाओं (संवेदनाओं) को ग्रहण करते हैं। 2. कोशिका काय (Soma / Cell Body): इसमें केंद्रक और कोशिकाद्रव्य होता है। 3. तंत्रिकाक्ष (Axon): यह सूचना को विद्युत आवेग (Electrical impulse) के रूप में कोशिका काय से दूर ले जाता है। 4. अंतर्ग्रथन (Synapse): दो न्यूरॉनों के बीच का खाली स्थान जहाँ एक न्यूरॉन के तंत्रिकाक्ष का अंतिम सिरा दूसरे न्यूरॉन के द्रुमिका से मिलता है। यहाँ विद्युत आवेग को रसायनों (Neurotransmitters) में बदलकर अगले न्यूरॉन तक भेजा जाता है।
प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action): किसी उद्दीपन के प्रति मस्तिष्क के हस्तक्षेप के बिना, मेरुरज्जु (Spinal Cord) द्वारा दी गई अचानक और अनैच्छिक प्रतिक्रिया को प्रतिवर्ती क्रिया कहते हैं (जैसे गर्म वस्तु छूने पर तुरंत हाथ हटा लेना)। - जिस मार्ग से आवेग गुजरता है, उसे प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc) कहते हैं। (ग्राही अंग $\rightarrow$ संवेदी न्यूरॉन $\rightarrow$ मेरुरज्जु $\rightarrow$ प्रेरक न्यूरॉन $\rightarrow$ कार्यकर पेशी)।
मस्तिष्क शरीर का मुख्य समन्वय केंद्र है। इसके तीन मुख्य भाग होते हैं:
यह भूख, प्यास, सुनने, सूंघने और देखने के संवेदी केंद्रों को भी नियंत्रित करता है।
मध्य मस्तिष्क (Midbrain):
यह सिर, गर्दन और धड़ की प्रतिवर्ती गतियों को नियंत्रित करता है, तथा पुतली के आकार और नेत्र लेंस में परिवर्तन का नियंत्रण करता है।
पश्च मस्तिष्क (Hindbrain): इसके 3 भाग होते हैं:
(मस्तिष्क की सुरक्षा के लिए यह कपाल (Skull) नामक हड्डियों के बॉक्स में बंद होता है और प्रमस्तिष्कमेरु द्रव (Cerebrospinal Fluid - CSF) झटके (shock) से बचाता है।)
पौधों में न तो तंत्रिका तंत्र होता है और न ही पेशियां। पौधे उद्दीपनों के प्रति दो प्रकार की गतियां दर्शाते हैं:
ये गतियां दिशात्मक (Directional) होती हैं, जो उद्दीपन की दिशा पर निर्भर करती हैं। 1. प्रकाशानुवर्तन (Phototropism): प्रकाश की दिशा में वृद्धि (जैसे तने का प्रकाश की ओर मुड़ना)। 2. गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism): गुरुत्वाकर्षण की दिशा में वृद्धि (जैसे जड़ों का नीचे की ओर जाना और तने का ऊपर की ओर जाना)। 3. जलानुवर्तन (Hydrotropism): जल की ओर जड़ों की वृद्धि। 4. रसायनानुवर्तन (Chemotropism): रसायनों के प्रति वृद्धि (जैसे पराग नलिका (Pollen tube) का बीजांड (Ovule) की ओर विकास)।
ये दिशाहीन गतियां हैं (जैसे 'छुई-मुई / Touch-me-not' के पौधे को छूने पर उसकी पत्तियों का सिकुड़ जाना)। इसमें पौधे की कोशिकाएं पानी की मात्रा में परिवर्तन करके अपना आकार बदलती हैं।
जंतुओं में अंतःस्रावी ग्रंथियां (Endocrine glands) रसायनों का स्राव सीधे रक्त में करती हैं, जिन्हें हॉर्मोन कहते हैं।
| ग्रंथि (Gland) | हॉर्मोन (Hormone) | कार्य (Function) |
|---|---|---|
| थायरॉइड (Thyroid) | थायरॉक्सिन | कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के उपापचय का नियंत्रण। (इसकी कमी से 'घेंघा/Goitre' रोग होता है। इसके निर्माण के लिए आयोडीन आवश्यक है)। |
| पीयूष (Pituitary) | वृद्धि हॉर्मोन (Growth Hormone) | इसे 'मास्टर ग्रंथि' कहते हैं। यह शरीर की वृद्धि और विकास को नियंत्रित करता है (कमी से बौनापन, अधिकता से भीमकायता)। |
| अग्न्याशय (Pancreas) | इंसुलिन (Insulin) | रक्त में शर्करा (Sugar/Glucose) के स्तर को नियंत्रित करता है। (कमी से 'मधुमेह / Diabetes' रोग होता है)। |
| अधिवृक्क (Adrenal) | एड्रिनलीन (Adrenaline) | इसे 'लड़ो या उड़ो (Fight or Flight)' हॉर्मोन कहते हैं। आपातकालीन स्थितियों (डर, गुस्सा) में शरीर को निपटने के लिए तैयार करता है (हृदय गति बढ़ा देता है)। |
| वृषण (Testes - नर में) | टेस्टोस्टेरोन | नर में यौवनारंभ के लक्षणों का विकास (जैसे दाढ़ी-मूंछ आना, आवाज़ भारी होना)। |
| अंडाशय (Ovary - मादा में) | एस्ट्रोजन / प्रोजेस्टेरोन | मादा में यौवनारंभ के लक्षणों का विकास और मासिक धर्म (Menstrual cycle) का नियंत्रण। |
पुनर्भरण क्रियाविधि (Feedback Mechanism): हॉर्मोनों का स्राव उचित मात्रा में होना आवश्यक है। शरीर में इसकी मात्रा का नियंत्रण पुनर्भरण क्रियाविधि द्वारा होता है (उदा: रक्त में शुगर बढ़ने पर इंसुलिन का स्राव बढ़ना, शुगर कम होने पर इंसुलिन का स्राव कम होना)।
graph TD
A[नियंत्रण एवं समन्वय] --> B(मानव तंत्रिका तंत्र)
A --> C(पादपों में समन्वय)
A --> D(मानव अंतःस्रावी तंत्र)
B --> B1(मस्तिष्क)
B1 --> F1(अग्र: सोचना, स्मृति)
B1 --> F2(पश्च: संतुलन, अनैच्छिक क्रिया)
B --> B2(मेरुरज्जु - प्रतिवर्ती क्रिया)
C --> C1(अनुवर्तन गतियां - दिशात्मक)
C --> C2(हॉर्मोन - ऑक्सिन, जिब्बेरेलिन, साइटोकाइनिन, ABA)
D --> D1(इंसुलिन - शुगर नियंत्रण)
D --> D2(थायरॉक्सिन - उपापचय)
D --> D3(एड्रिनलीन - आपातकाल)