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अध्याय 9: आनुवंशिकता एवं जैव विकास — अध्ययन नोट्स

विस्तृत सिद्धांत, सूत्र, आरेख और स्मृति सहायक।

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1. आनुवंशिकता (Heredity) और विभिन्नता (Variation)


2. ग्रेगर जॉन मेंडल (Gregor Johann Mendel) का योगदान

मेंडल को 'आनुवंशिकी का जनक' (Father of Genetics) कहा जाता है। उन्होंने मटर के पौधे (Pisum sativum) पर संकरण (Hybridization) के प्रयोग किए और वंशागति के नियम दिए।

मटर का पौधा ही क्यों चुना? 1. इसका जीवन चक्र छोटा होता है (कुछ महीनों का)। 2. इसमें आसानी से पहचाने जा सकने वाले विपर्यासी (contrasting) लक्षण होते हैं (जैसे लंबा/बौना, गोल/झुर्रीदार बीज, सफेद/बैंगनी फूल)। 3. यह स्व-परागित होता है, लेकिन कृत्रिम रूप से पर-परागण भी कराया जा सकता है।

A. एकल संकरण क्रॉस (Monohybrid Cross)

जब एक ही लक्षण के दो विपर्यासी रूपों का अध्ययन किया जाता है (जैसे केवल पौधे की ऊंचाई)। - प्रयोग: मेंडल ने एक शुद्ध लंबे (TT) और एक शुद्ध बौने (tt) पौधे का संकरण कराया। - F1 पीढ़ी (प्रथम पीढ़ी): सभी पौधे लंबे (Tt) हुए। कोई भी पौधा बौना नहीं था। - F2 पीढ़ी (F1 का स्व-परागण): F1 के लंबे (Tt) पौधों का स्व-परागण कराने पर लंबे और बौने दोनों पौधे प्राप्त हुए। - जीनोटाइप अनुपात: 1 (TT) : 2 (Tt) : 1 (tt) - फीनोटाइप (दिखने वाला) अनुपात: 3 (लंबे) : 1 (बौना)

B. द्विसंकरण क्रॉस (Dihybrid Cross)

जब दो अलग-अलग लक्षणों का एक साथ अध्ययन किया जाता है (जैसे बीज का आकार और रंग)। - प्रयोग: गोल और पीले बीज (RRYY) का संकरण झुर्रीदार और हरे बीज (rryy) से कराया। - F1 पीढ़ी: सभी पौधे गोल और पीले (RrYy) बीज वाले थे। - F2 पीढ़ी का अनुपात: 9 (गोल-पीले) : 3 (गोल-हरे) : 3 (झुर्रीदार-पीले) : 1 (झुर्रीदार-हरे)। - निष्कर्ष (स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम): लक्षण एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से अगली पीढ़ी में जाते हैं (अर्थात गोल आकार के साथ हरा रंग भी आ सकता है)।


3. लिंग निर्धारण (Sex Determination)

किसी नवजात शिशु का लिंग (लड़का या लड़की) कैसे निर्धारित होता है, इसे लिंग निर्धारण कहते हैं। - मानव की प्रत्येक कोशिका में 23 जोड़े (46) गुणसूत्र (Chromosomes) होते हैं। - इनमें से 22 जोड़े पुरुष और महिला में समान होते हैं, जिन्हें अलिंगसूत्र (Autosomes) कहते हैं। - 23वां जोड़ा लिंग गुणसूत्र (Sex Chromosomes) कहलाता है। - महिलाओं में: XX - पुरुषों में: XY

निर्धारण की प्रक्रिया: 1. माता (XX) हमेशा X गुणसूत्र वाला अंडाणु (ovum) उत्पन्न करती है। 2. पिता (XY) दो प्रकार के शुक्राणु बनाता है: X या Y। - यदि पिता का X शुक्राणु माता के X अंडाणु से मिलता है $\rightarrow$ XX (लड़की) - यदि पिता का Y शुक्राणु माता के X अंडाणु से मिलता है $\rightarrow$ XY (लड़का)

निष्कर्ष: बच्चे का लिंग पूरी तरह से पिता के गुणसूत्र (Sperm) पर निर्भर करता है।


4. विकास (Evolution)

सरल जीवों से क्रमिक परिवर्तनों (विभिन्नताओं) के द्वारा समय के साथ जटिल जीवों के निर्माण की प्रक्रिया को जैव विकास कहते हैं।

चार्ल्स डार्विन का प्राकृतिक चयन का सिद्धांत (Theory of Natural Selection)

डार्विन ने अपनी पुस्तक 'द ओरिजिन ऑफ स्पीशीज़ (The Origin of Species)' में विकास का सिद्धांत दिया। - प्रकृति उन जीवों को चुनती है जिनके पास बदलते पर्यावरण में जीवित रहने के लिए सर्वोत्तम अनुकूलन (Adaptations) और विभिन्नताएं होती हैं। - जो जीव खुद को नहीं बदल पाते, वे नष्ट हो जाते हैं (जैसे डायनासोर)। इसे "योग्यतम की उत्तरजीविता (Survival of the Fittest)" कहते हैं।


5. उपार्जित एवं आनुवंशिक लक्षण (Acquired vs Inherited Traits)

  1. उपार्जित लक्षण (Acquired Traits):
  2. ये लक्षण जीव अपने जीवनकाल में पर्यावरण के प्रभाव या अभ्यास से प्राप्त करता है।
  3. ये DNA (जनन कोशिकाओं) में कोई बदलाव नहीं करते, इसलिए ये अगली पीढ़ी में नहीं जाते
  4. उदाहरण: तैरना सीखना, साइकिल चलाना, किसी दुर्घटना में पूंछ का कट जाना, वजन कम होना।
  5. आनुवंशिक लक्षण (Inherited Traits):
  6. ये लक्षण माता-पिता से DNA के माध्यम से प्राप्त होते हैं।
  7. ये जनन कोशिकाओं (DNA) में मौजूद होते हैं, इसलिए ये अगली पीढ़ी में स्थानांतरित होते हैं
  8. उदाहरण: आंखों का रंग, बालों का प्रकार, त्वचा का रंग।

6. जाति उद्भवन (Speciation)

एक पुरानी प्रजाति से एक नई प्रजाति के बनने की प्रक्रिया को जाति उद्भवन कहते हैं। यह तब होता है जब एक ही प्रजाति की आबादी किसी भौगोलिक कारण (जैसे नदी, पहाड़) से दो हिस्सों में बंट जाती है (Geographical isolation)। धीरे-धीरे दोनों हिस्सों के जीवों में अलग-अलग विभिन्नताएं आती हैं। हजारों वर्षों बाद उनका DNA इतना बदल जाता है कि वे आपस में जनन (संभोग) नहीं कर सकते। तब वे दो अलग प्रजातियां बन जाती हैं।


7. विकास के प्रमाण (Evidences of Evolution)

हम कैसे जानते हैं कि विकास हुआ है? इसके कई प्रमाण हैं:

A. समजात अंग (Homologous Organs)

वे अंग जिनकी मूलभूत संरचना और उत्पत्ति समान होती है, लेकिन उनके कार्य अलग-अलग होते हैं। - उदाहरण: पक्षी के पंख, मनुष्य का हाथ, घोड़े का अग्रपाद, और मेंढक का अग्रपाद। - इन सभी की हड्डियों का ढांचा एक जैसा है, लेकिन मनुष्य हाथ से चीजें पकड़ता है, पक्षी उड़ता है और घोड़ा दौड़ता है। यह दर्शाता है कि इन सभी का पूर्वज एक ही था।

B. समरूप अंग (Analogous Organs)

वे अंग जिनकी मूलभूत संरचना अलग-अलग होती है, लेकिन वे कार्य समान करते हैं। - उदाहरण: पक्षी के पंख और तितली (कीट) के पंख। - दोनों का काम उड़ना है, लेकिन तितली के पंख में हड्डियां नहीं होतीं। यह दर्शाता है कि समान पर्यावरण (हवा) में रहने के कारण उनमें समान अनुकूलन आ गया, लेकिन उनके पूर्वज अलग थे।

C. जीवाश्म (Fossils)

अतीत में रहने वाले मृत जीवों के कठोर अंगों (जैसे हड्डियां, दांत, खोपड़ी) के चट्टानों में दबे हुए अवशेष या उनके छापों को जीवाश्म कहते हैं। - जीवाश्मों से हमें उन जीवों के बारे में पता चलता है जो अब विलुप्त (Extinct) हो चुके हैं (उदा: डायनासोर)। - जीवाश्म की आयु का निर्धारण: 1. खुदाई विधि: जो जीवाश्म पृथ्वी की सतह के जितने पास मिलते हैं, वे उतने ही नए होते हैं। 2. रेडियो-कार्बन डेटिंग (Carbon-14 Dating): जीवाश्म में मौजूद कार्बन-14 समस्थानिक के क्षय (decay) को मापकर उसकी सटीक आयु ज्ञात की जाती है। - आर्किओप्टेरिक्स (Archaeopteryx): यह एक ऐसा जीवाश्म था जिसमें रेंगने वाले जीवों (सरीसृप) और पक्षियों दोनों के लक्षण थे। इससे सिद्ध होता है कि पक्षियों का विकास सरीसृपों से हुआ है।


त्वरित सारांश (Quick Summary Flowchart)

graph TD
    A[आनुवंशिकता एवं विकास] --> B(मेंडल के प्रयोग - मटर)
    A --> C(लिंग निर्धारण - XX/XY)
    A --> D(जैव विकास)

    B --> B1(F1 पीढ़ी: सभी लंबे Tt)
    B --> B2(F2 पीढ़ी अनुपात: 3:1)

    D --> D1(प्राकृतिक चयन - डार्विन)
    D --> D2(विकास के प्रमाण)

    D2 --> E1(समजात अंग - संरचना समान, कार्य अलग)
    D2 --> E2(समरूप अंग - कार्य समान, संरचना अलग)
    D2 --> E3(जीवाश्म - अवशेष, कार्बन डेटिंग)
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