यह अध्याय यूरोप में राष्ट्रवाद (Nationalism) के उदय तथा इसके प्रभावों पर प्रकाश डालता है। राष्ट्रवाद का तात्पर्य एक ऐसी भावना से है जिसमें समान इतिहास, संस्कृति, भाषा और भाग्य साझा करने वाले लोग एक राष्ट्र के रूप में संगठित होते हैं। अठारहवीं सदी के अंत तक यूरोप के अधिकांश देश छोटे-छोटे राज्यों, रियासतों और साम्राज्यों में बँटे हुए थे। फ्रांसीसी क्रांति (1789) ने राष्ट्रवाद की भावना को नई दिशा दी। नेपोलियन की पराजय के बाद वियना कांग्रेस (1815) ने यूरोप का पुनर्गठन किया, लेकिन उसके निर्णय राष्ट्रवाद की बढ़ती लहर को नहीं रोक पाए। इसी उथल-पुथल के बीच जर्मनी और इटली जैसे देशों का एकीकरण हुआ, जो यूरोपीय इतिहास की प्रमुख घटना बनी। इस अध्याय में हम राष्ट्रवाद के उदय, उसके विभिन्न चरणों, प्रतीकों और आर्थिक पहलुओं का अध्ययन करेंगे।
फ्रांसीसी क्रांति (1789) यूरोप में राष्ट्रवाद का पहला महत्वपूर्ण प्रयोग था। इससे पहले फ्रांस में राजा के प्रति निष्ठा ही मुख्य थी, लेकिन क्रांति के साथ "राष्ट्र" की अवधारणा उभरी। क्रांति के बाद राजतंत्र का अंत हुआ और प्रजातंत्र की स्थापना हुई। निम्नलिखित कदम राष्ट्रवाद की भावना को मजबूत करने के लिए उठाए गए:
क्रांति के बाद संविधान ने नागरिकता की अवधारणा को परिभाषित किया। "पितृभूमि" (fatherland) और "नागरिक" (citizen) जैसे शब्द सामान्य हो गए। नए राष्ट्रीय झंडे को अपनाया गया और राष्ट्रगान गाया जाने लगा। फ्रांसीसी क्रांति ने पूरे यूरोप में यह संदेश फैलाया कि सत्ता ईश्वर या राजा की नहीं, बल्कि राष्ट्र की होती है। इसी भावना ने स्पेन, इटली, जर्मनी और पोलैंड जैसे देशों में क्रांतिकारी आंदोलनों को जन्म दिया।
1799 में जनरल नेपोलियन बोनापार्ट ने फ्रांस में सत्ता पर अधिकार कर लिया। उसने खुद को सम्राट घोषित कर दिया, लेकिन उसने क्रांति के कई सिद्धांतों को अपने प्रशासन में शामिल किया। नेपोलियन की सैन्य विजयों ने पूरे यूरोप में उसके कब्जे वाले क्षेत्रों में फ्रांसीसी प्रशासन के सिद्धांतों को फैलाया।
नेपोलियन के प्रशासनिक सुधार: 1. नागरिक संहिता 1804 (Civil Code / Code Napoleon): इसने जन्म पर आधारित विशेषाधिकारों को समाप्त किया, कानून के समक्ष समानता, संपत्ति के अधिकार और धार्मिक मामलों में सहिष्णुता को स्थापित किया। 2. राज्य की सीमाओं में हुए फैलाव ने स्थानीय और क्षेत्रीय व्यापार-बाधाओं को दूर किया। 3. फ्रांसीसी प्रशासन के अधीन किसानों, मज़दूरों और नए व्यापारियों ने नई व्यवस्था से लाभ पाया।
हालाँकि, इन सुधारों के कारण भी कब्जे वाले क्षेत्रों के लोगों में असंतोष बढ़ा। कई क्षेत्रों में फ्रांसीसी कर, सेंसरशिप और अनिवार्य सैन्य भर्ती को सहन नहीं किया गया। नेपोलियन की नीतियों को राष्ट्रवाद की भावना के विपरीत माना गया। आखिरकार 1815 में वाटरलू के युद्ध में नेपोलियन की पराजय हुई।
1815 में प्रमुख यूरोपीय शक्तियों - ब्रिटेन, रूस, प्रशिया और ऑस्ट्रिया - के प्रतिनिधियों ने वियना कांग्रेस में भाग लिया। इस कांग्रेस का उद्देश्य नेपोलियन द्वारा किए गए परिवर्तनों को समाप्त करके यूरोप में स्थायी शांति स्थापित करना था। कांग्रेस की अध्यक्षता ऑस्ट्रियाई चांसलर ड्यूक मेटरनिख ने की।
वियना कांग्रेस के मुख्य निर्णय: 1. बॉर्बन वंश को फ्रांस की गद्दी पर वापस स्थापित किया गया। 2. फ्रांस की सीमाओं को वैसा ही रखा गया जैसा 1792 में थीं। 3. फ्रांस के पड़ोसी देशों को सीमा के साथ मजबूत राज्य बनाने के लिए प्रशिया को राइनलैंड के क्षेत्र दिए गए। 4. इटली में जिनोआ को सार्डिनिया-पीडमोंट में मिलाया गया, जबकि वेनिस को ऑस्ट्रिया ने अपने अधीन कर लिया। 5. रूस, प्रशिया और ऑस्ट्रिया के बीच पवित्र गठबंधन (Holy Alliance) स्थापित हुआ।
इन निर्णयों का उद्देश्य क्रांतियों को रोकना और राजतंत्रीय व्यवस्था को बनाए रखना था। मेटरनिख की नीति "यथास्थिति" (status quo) बनाए रखने पर केंद्रित थी। लेकिन यह व्यवस्था अधिक समय तक टिक नहीं पाई क्योंकि राष्ट्रवाद की भावना प्रबल होती जा रही थी।
1830 के दशक में यूरोप में राष्ट्रवादी आंदोलनों की लहर उठी। 1830 में फ्रांस में चार्ल्स X को बॉर्बन वंश के कट्टरपंथी सदस्यों ने गद्दी से उतार दिया। यूनानियों ने ऑटोमन साम्राज्य के विरुद्ध स्वतंत्रता संग्राम छेड़ा और 1832 में यूनान को स्वतंत्रता मिली।
1830 के दशक की घटनाएँ: 1. बेल्जियम के लोगों ने यूनाइटेड किंगडम ऑफ नीदरलैंड्स के विरुद्ध विद्रोह किया और 1830 में अलग राष्ट्र का निर्माण किया। 2. पोलैंड में रूस के विरुद्ध राष्ट्रवादी विद्रोह हुआ (1831), जिसे रूसी सेना ने कुचल दिया। 3. इटली और जर्मनी के राज्यों में मेटरनिख की यथास्थिति के विरुद्ध विद्रोह हुए।
इस दौरान कला और संस्कृति भी राष्ट्रवाद के माध्यम बनी। संगीतकारों, कवियों और चित्रकारों ने अपनी कला के माध्यम से देशभक्ति की भावना जगाई। रोमांटिसिज्म (स्वच्छंदतावाद) आंदोलन के कलाकारों ने राष्ट्रों की भावनात्मक और सांस्कृतिक विरासत पर बल दिया। जॉहन गॉटफ्रीड हरडर जैसे विचारकों ने कहा कि एक सच्चा जर्मन राष्ट्र केवल सामान्य लोगों (डैश वोल्क) के माध्यम से खोजा जा सकता है।
इटली में राष्ट्रवाद की भावना को जगाने में ज्युसेपे मेत्सिनी (Giuseppe Mazzini) का विशेष योगदान रहा। उसने 1815 में जिनोआ में जन्म लिया और कम उम्र में ही क्रांतिकारी विचारों से प्रभावित हुआ। उसने राष्ट्रीय आंदोलन के लिए दो प्रमुख संगठन बनाए:
मेत्सिनी का मानना था कि ईश्वर ने यूरोप के लोगों को अलग-अलग राष्ट्रों के रूप में नियुक्त किया है, और ये राष्ट्र एक मानवीय समुदाय का निर्माण करते हैं। उसके विचारों ने कई युवा क्रांतिकारियों को प्रेरित किया। हालाँकि मेत्सिनी के प्रयास इटली के एकीकरण में तत्काल सफल नहीं हुए, उन्होंने एकीकरण की नींव रखी।
कुछ इतिहासकार मेत्सिनी को राष्ट्रों का मुख्य दूत (chief prophet of nationalism) कहते हैं। उसके विचार न केवल इटली में बल्कि पूरे यूरोप में राष्ट्रवादी आंदोलनों के लिए प्रेरणा बने।
जर्मनी 1848 तक कई छोटे राज्यों में बँटा हुआ था। ये राज्य जर्मन परिसंघ (German Confederation) का हिस्सा थे, जिसकी स्थापना 1815 में वियना कांग्रेस के द्वारा की गई थी। परिसंघ में ऑस्ट्रिया का प्रभुत्व था।
जर्मनी के एकीकरण की प्रक्रिया: 1. 1834 में ज़ोलवेरिन (Zollverein) नामक सीमा-शुल्क संघ की स्थापना की गई। इसने जर्मन राज्यों के बीच व्यापार-बाधाओं को समाप्त किया और एक राष्ट्रीय आर्थिक भावना विकसित की। 2. फ्रैंकफर्ट संसद (1848) में जर्मन राष्ट्रवादियों ने संविधान बनाने के लिए प्रयास किया, परंतु प्रशिया के राजा फ्रेडरिक विलियम IV ने "ताज" को ठुकरा दिया। 3. ओटो वॉन बिस्मार्क प्रशिया का प्रधानमंत्री बना, जिसने "रक्त और लौह" (Blood and Iron) की नीति अपनाई। 4. बिस्मार्क ने तीन युद्ध लड़े - डेनमार्क (1864), ऑस्ट्रिया (1866) और फ्रांस (1870-71) - और जर्मन राज्यों को एकजुट किया। 5. 18 जनवरी 1871 को पेरिस के पास वर्साय के महल में जर्मन साम्राज्य की घोषणा की गई। विलियम I (कैसर) जर्मन सम्राट बना।
बिस्मार्क की नीति "ऊपर से क्रांति" (revolution from above) कहलाती है क्योंकि एकीकरण जनता के बजाय सैन्य शक्ति के माध्यम से किया गया।
इटली भी 19वीं सदी में कई राज्यों में बँटा था। सार्डिनिया-पीडमोंट इटली के एकीकरण का केंद्र बना। एकीकरण के प्रमुख व्यक्ति थे:
एकीकरण की प्रक्रिया: 1. 1859 में कावूर ने ऑस्ट्रिया के विरुद्ध फ्रांस की मदद से युद्ध लड़ा और लोम्बार्डी प्राप्त किया। 2. 1860 में मध्य इटली के राज्य जनमत द्वारा सार्डिनिया-पीडमोंट में मिला दिए गए। 3. गैरीबाल्डी ने सिसिली और नेपल्स में विद्रोह छेड़ा और विजय प्राप्त की। 4. 1861 में विक्टर इमैनुएल II को संयुक्त इटली का राजा घोषित किया गया। 5. 1866 में इटली ने प्रशिया के साथ मिलकर ऑस्ट्रिया से वेनिस तथा 1870 में फ्रांस से रोम को प्राप्त किया। रोम इटली की राजधानी बना।
इस प्रकार इटली भी एक राष्ट्र-राज्य बन गया।
अन्य देशों के विपरीत ब्रिटेन में राष्ट्रवाद का विकास धीरे-धीरे, बिना किसी प्रमुख क्रांति के हुआ। ब्रिटिश राष्ट्र की अवधारणा अंग्रेज़, वेल्श, स्कॉटिश और आयरिश लोगों के संयोजन से बनी। स्कॉटलैंड 1707 में यूनाइटेड किंगडम में शामिल हुआ। बाद में यूनियन जैक नामक झंडा ब्रिटिश राष्ट्र का प्रतीक बना।
ब्रिटिश राष्ट्र के निर्माण में अंग्रेज़ी भाषा का विशेष योगदान रहा। स्कॉटिश हाइलैंडर और आयरिश लोगों की संस्कृति को "पिछड़ी" माना गया, जबकि अंग्रेज़ी भाषा को प्रगतिशील माना गया। आयरलैंड में स्थायी रूप से ब्रिटिश राष्ट्र का विरोध चला और आयरिश राष्ट्रवादियों ने स्वतंत्रता की मांग की। इस प्रकार ब्रिटेन में राष्ट्रवाद एक अभिजात्य परियोजना थी, जिसे प्रमुख रूप से अंग्रेज़ों ने आगे बढ़ाया।
रोमांटिसिज्म (स्वच्छंदतावाद) एक सांस्कृतिक आंदोलन था जिसने तर्क और बुद्धि के स्थान पर भावनाओं, कल्पना और संस्कृति पर बल दिया। रोमांटिक कलाकारों का मानना था कि राष्ट्र एक "जीवित" चीज़ है जिसकी आत्मा उसकी भाषा, लोककथाओं और संगीत में रहती है।
राष्ट्रवाद के प्रतीक: 1. भू-देवी (Female figure): जर्मनी में जर्मेनिया और फ्रांस में मैरियाने को राष्ट्र का प्रतीक बनाया गया। 2. मैरियाने के प्रतीक - लाल टोपी, तिरंगा झंडा, पतंग जैसी भावनाओं को दर्शाती थी। उसे राष्ट्रीय शक्ति और स्वतंत्रता का प्रतीक माना गया। 3. जर्मेनिया को ओक की पत्तियों, तलवार और किरणों के साथ दर्शाया गया। ओक का वृक्ष जर्मन वीरता का प्रतीक था। 4. विशेष प्रतीकों जैसे नमक, टूटी जंजीर, जलता हुआ मशाल का उपयोग राष्ट्रीय पहचान दर्शाने के लिए किया गया।
कलाकारों ने राष्ट्र को एक निश्चित भूमि से जोड़ा और नक्शों के माध्यम से भी राष्ट्रीयता की भावना जगाई। राष्ट्रीय नक्शे और भवन राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक बन गए।
19वीं सदी में उदारवादी (Liberals) विचारकों ने राष्ट्रवाद को आर्थिक विकास से जोड़ा। उदारवादियों का मत था कि प्रत्येक व्यक्ति को समान अधिकार होने चाहिए और व्यापार में सरकारी बाधाएँ नहीं होनी चाहिए।
प्रमुख आर्थिक प्रयास: 1. ज़ोलवेरिन (1834): जर्मन राज्यों के बीच सीमा-शुल्क बाधाओं को समाप्त करने के लिए स्थापित हुआ। 2. व्यापार-बाधाओं के कारण व्यापारी वर्ग राष्ट्रीय सरकारों की मांग करने लगा, क्योंकि एकीकृत बाजार से उन्हें लाभ मिलता। 3. उदारवादियों ने संवैधानिक सरकार और राष्ट्रीय एकता की मांग की, जिससे आर्थिक प्रगति संभव हो सके।
अर्थव्यवस्था का यह राष्ट्रीयीकरण आधुनिक राष्ट्र-राज्य के निर्माण में महत्वपूर्ण कदम था।
राष्ट्रवाद के उदय ने यूरोप के नक्शे को पूरी तरह बदल दिया। छोटे-छोटे राज्यों का स्थान बड़े राष्ट्र-राज्यों ने ले लिया। राष्ट्रवाद के कारण:
हालाँकि, राष्ट्रवाद ने जातीय तनाव और साम्राज्यवाद को भी बढ़ावा दिया। इसका नकारात्मक पहलू भी देखा गया, क्योंकि कई राष्ट्रों ने दूसरे क्षेत्रों पर अपनी श्रेष्ठता थोपी। यही राष्ट्रवाद बाद में विश्व युद्धों का कारण भी बना।
| तिथि/वर्ष | घटना | महत्व |
|---|---|---|
| 1789 | फ्रांसीसी क्रांति | राष्ट्रवाद की भावना का उदय |
| 1804 | नेपोलियन का नागरिक संहिता | कानून के समक्ष समानता |
| 1815 | वियना कांग्रेस | यूरोप का पुनर्गठन |
| 1831 | मेत्सिनी ने यंग इटली बनाई | इटली के एकीकरण की नींव |
| 1832 | यूनान को स्वतंत्रता | ऑटोमन साम्राज्य का कमजोर होना |
| 1834 | ज़ोलवेरिन की स्थापना | जर्मन आर्थिक एकता |
| 1848 | फ्रैंकफर्ट संसद | जर्मन संविधान का प्रयास |
| 1871 | जर्मन साम्राज्य की घोषणा | जर्मनी का एकीकरण |
| व्यक्ति | देश | योगदान |
|---|---|---|
| नेपोलियन बोनापार्ट | फ्रांस | नागरिक संहिता, प्रशासनिक सुधार |
| ड्यूक मेटरनिख | ऑस्ट्रिया | वियना कांग्रेस की अध्यक्षता |
| ज्युसेपे मेत्सिनी | इटली | यंग इटली, यंग यूरोप |
| काउंट कावूर | इटली | कूटनीति से एकीकरण |
| ज्युसेपे गैरीबाल्डी | इटली | रेड शर्ट्स के साथ दक्षिणी अभियान |
| ओटो वॉन बिस्मार्क | प्रशिया | रक्त और लौह नीति |
| विलियम I | प्रशिया | पहला जर्मन सम्राट |
| प्रतीक | राष्ट्र | अर्थ |
|---|---|---|
| मैरियाने | फ्रांस | स्वतंत्रता और राष्ट्रीय शक्ति |
| जर्मेनिया | जर्मनी | जर्मन राष्ट्र की आत्मा |
| लाल टोपी | फ्रांस | स्वतंत्रता |
| टूटी जंजीर | यूरोप | स्वतंत्रता की बाधाओं का अंत |
| ओक का पत्ता | जर्मनी | वीरता |
यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय 19वीं सदी का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक विकास था। फ्रांसीसी क्रांति ने "राष्ट्र" की अवधारणा को जन्म दिया, नेपोलियन ने अपने प्रशासन से उसके सिद्धांतों को फैलाया, और वियना कांग्रेस ने यथास्थिति बनाए रखने का प्रयास किया। इसके बावजूद राष्ट्रवाद की लहर रुकी नहीं। जर्मनी और इटली जैसे देशों का एकीकरण हुआ, और कला, संस्कृति तथा अर्थव्यवस्था ने राष्ट्रीय पहचान को सशक्त बनाया। यह अध्याय हमें सिखाता है कि राष्ट्र केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि एक साझा भावना, इतिहास और नियति है।