Comprehensive theory, key formulas, diagrams, and memory aids for ह्रास, प्रावधान और संचय.
व्यवसाय की स्थायी सम्पत्तियाँ (जैसे मशीनरी, भवन, फर्नीचर) उपयोग, घिसाव, तकनीकी अप्रचलन आदि के कारण धीरे-धीरे अपना मूल्य खोती रहती हैं। इस मूल्य-ह्रास को 'ह्रास' (Depreciation) कहते हैं। इसी प्रकार, व्यवसाय को संभावित भविष्य की हानियों और अप्रत्याशित घटनाओं के लिए पुस्तकों में कुछ राशियाँ अलग रखनी होती हैं, जिन्हें 'प्रावधान' (Provisions) और 'संचय' (Reserves) कहते हैं। इस अध्याय में ह्रास की अवधारणा, विधियाँ, लेखा प्रक्रिया तथा प्रावधान और संचय का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
ह्रास किसी स्थायी सम्पत्ति के मूल्य में नियमित, स्थायी और लगातार होने वाली कमी है, जो उपयोग, घिसाव, समय के बीतने या तकनीकी अप्रचलन के कारण होती है। यह एक आयगत व्यय है, जिसे उसी अवधि की आय से मिलान किया जाता है।
इस विधि में सम्पत्ति के क्रय मूल्य में से अवशिष्ट मूल्य घटाकर उसकी आयु से भाग देकर वार्षिक ह्रास ज्ञात किया जाता है।
$$वार्षिक ह्रास = \frac{क्रय मूल्य - अवशिष्ट मूल्य}{अनुमानित आयु}$$
विशेषताएँ: - ह्रास की राशि प्रत्येक वर्ष समान रहती है। - गणना सरल होती है। - सम्पत्ति का मूल्य हर वर्ष समान राशि से घटता है।
उदाहरण: मशीनरी का क्रय मूल्य 50,000 रुपये, अवशिष्ट मूल्य 5,000 रुपये, आयु 5 वर्ष। वार्षिक ह्रास = (50,000 - 5,000) / 5 = 9,000 रुपये।
यह सरल रेखा विधि का ही दूसरा नाम है, जिसमें प्रत्येक वर्ष समान राशि का ह्रास लिखा जाता है।
इस विधि में ह्रास की गणना सम्पत्ति के प्रारंभिक शेष (पुस्तक मूल्य) पर निश्चित प्रतिशत दर से की जाती है। प्रत्येक वर्ष ह्रास की राशि घटती जाती है, क्योंकि पुस्तक मूल्य कम होता जाता है।
विशेषताएँ: - ह्रास की दर निश्चित होती है। - ह्रास की राशि प्रत्येक वर्ष घटती जाती है। - प्रारंभिक वर्षों में ह्रास अधिक, अंतिम वर्षों में कम होता है।
उदाहरण: मशीनरी का मूल्य 50,000 रुपये, ह्रास दर 20% वार्षिक। - पहले वर्ष: 50,000 × 20% = 10,000 रुपये - दूसरे वर्ष: 40,000 × 20% = 8,000 रुपये - तीसरे वर्ष: 32,000 × 20% = 6,400 रुपये
इस विधि में ह्रास का निर्धारण उत्पादित इकाइयों की संख्या के आधार पर होता है।
इस विधि में हर वर्ष एक निश्चित राशि को अलग रखकर उसका निवेश किया जाता है, ताकि सम्पत्ति की आयु समाप्त होने पर उसके प्रतिस्थापन हेतु धन उपलब्ध हो।
| आधार | सरल रेखा विधि | लिखित मूल्य विधि |
|---|---|---|
| ह्रास की राशि | समान रहती है | घटती जाती है |
| आधार | क्रय मूल्य | पुस्तक मूल्य |
| गणना | सरल | थोड़ी जटिल |
| कुल ह्रास | आयु समाप्ति पर मूल्य = अवशिष्ट | अवशिष्ट मूल्य शून्य तक |
| उपयुक्तता | भवन, लीज़ | मशीनरी |
ह्रास का लेखा दो विधियों से किया जाता है:
प्रविष्टि: - ह्रास खाता नामे - सम्पत्ति खाते से (या ह्रास संचय खाते से) वर्ष के अंत में ह्रास खाता लाभ-हानि खाते में स्थानांतरित किया जाता है।
प्रविष्टि: - ह्रास खाता नामे - सम्पत्ति खाते से
प्रावधान वह राशि है जो किसी ज्ञात देयता या संभावित हानि के लिए लाभ में से अलग रखी जाती है, जिसकी राशि निश्चित नहीं होती। उदाहरण: - संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधान। - अदत्त मरम्मत के लिए प्रावधान। - कर के लिए प्रावधान।
संचय वह राशि है जो व्यवसाय की अनिश्चित भविष्य की आवश्यकताओं या विस्तार के लिए लाभ में से अलग रखी जाती है। उदाहरण: सामान्य संचय, आकस्मिक कोष।
| आधार | प्रावधान | संचय |
|---|---|---|
| उद्देश्य | ज्ञात देयता/हानि | अनिश्चित आवश्यकताएँ |
| बनाने का आधार | अनिवार्य | स्वैच्छिक |
| लाभ-हानि में | व्यय के रूप में | आवंटन के रूप में |
| बैलेंस शीट में | सम्पत्ति से घटाया/देयता | देयता पक्ष |
| पूँजी/आय | आयगत | दोनों प्रकार |
| विधि | ह्रास की राशि | आधार |
|---|---|---|
| सरल रेखा विधि | समान | क्रय मूल्य |
| लिखित मूल्य विधि | घटती | पुस्तक मूल्य |
| इकाई उत्पादन | उत्पादन के अनुसार | इकाइयाँ |
| सम-निधि विधि | निवेश आधारित | निधि |
| आधार | प्रावधान | संचय |
|---|---|---|
| उद्देश्य | ज्ञात हानि | अनिश्चित भविष्य |
| अनिवार्यता | अनिवार्य | स्वैच्छिक |
| लेखा उपचार | व्यय | लाभ का आवंटन |
| उदाहरण | संदिग्ध ऋण प्रावधान | सामान्य संचय |
| कारण | विवरण |
|---|---|
| घिसाव (Wear and Tear) | उपयोग से मूल्य कमी |
| समय | कालावधि बीतना |
| अप्रचलन | तकनीकी बदलाव |
| प्राकृतिक | मौसम, आपदा |
graph TD
A["ह्रास, प्रावधान और संचय"] --> B["ह्रास"]
B --> B1["मूल्य में स्थायी कमी"]
B --> B2["कारण: घिसाव, समय, अप्रचलन"]
B --> B3["विधियाँ"]
B3 --> B31["सरल रेखा विधि"]
B3 --> B32["लिखित मूल्य विधि"]
B3 --> B33["सम-निधि विधि"]
A --> C["प्रावधान"]
C --> C1["ज्ञात हानि/देयता"]
C --> C2["अनिवार्य, व्यय"]
C --> C3["उदा. संदिग्ध ऋण"]
A --> D["संचय"]
D --> D1["अनिश्चित भविष्य"]
D --> D2["स्वैच्छिक, आवंटन"]
D --> D3["सामान्य/विशेष संचय"]
A --> E["लेखा प्रविष्टि"]
E --> E1["ह्रास खाता नामे, सम्पत्ति खाता जमा"]
E --> E2["वर्ष के अंत में लाभ-हानि में"]
ह्रास, प्रावधान और संचय लेखांकन के वे महत्वपूर्ण पहलू हैं जो वित्तीय विवरणों को सही, तर्कसंगत और विश्वसनीय बनाते हैं। ह्रास सम्पत्तियों के सही मूल्य को दर्शाता है, प्रावधान संभावित हानियों से सुरक्षा देता है, और संचय व्यवसाय के विस्तार में सहायक होता है। इन अवधारणाओं की सही समझ किसी भी व्यवसाय के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है।