व्यवसाय की स्थायी सम्पत्तियाँ (जैसे मशीनरी, भवन, फर्नीचर) उपयोग, घिसाव, तकनीकी अप्रचलन आदि के कारण धीरे-धीरे अपना मूल्य खोती रहती हैं। इस मूल्य-ह्रास को 'ह्रास' (Depreciation) कहते हैं। इसी प्रकार, व्यवसाय को संभावित भविष्य की हानियों और अप्रत्याशित घटनाओं के लिए पुस्तकों में कुछ राशियाँ अलग रखनी होती हैं, जिन्हें 'प्रावधान' (Provisions) और 'संचय' (Reserves) कहते हैं। इस अध्याय में ह्रास की अवधारणा, विधियाँ, लेखा प्रक्रिया तथा प्रावधान और संचय का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
2. ह्रास का अर्थ और परिभाषा (Meaning of Depreciation)
ह्रास किसी स्थायी सम्पत्ति के मूल्य में नियमित, स्थायी और लगातार होने वाली कमी है, जो उपयोग, घिसाव, समय के बीतने या तकनीकी अप्रचलन के कारण होती है। यह एक आयगत व्यय है, जिसे उसी अवधि की आय से मिलान किया जाता है।
ह्रास की विशेषताएँ:
यह स्थायी सम्पत्तियों से संबंधित है।
यह मूल्य की स्थायी कमी है।
यह नियमित और लगातार होती है।
यह एक गैर-नकद व्यय है, अर्थात नकद भुगतान की आवश्यकता नहीं होती।
यह आयगत व्यय है।
3. ह्रास के कारण (Causes of Depreciation)
निरंतर उपयोग (Wear and Tear): मशीनरी के लगातार उपयोग से घिसाव।
समय का बीतना (Lapse of Time): उपयोग न होने पर भी समय के साथ मूल्य घटता है।
तकनीकी अप्रचलन (Obsolescence): नई तकनीक आने से पुरानी मशीन का मूल्य घटना।
कानूनी परिवर्तन: नए कानूनों के कारण सम्पत्ति का मूल्य घटना।
प्राकृतिक कारण (Natural Causes): मौसम, भूकंप, बाढ़ आदि।
4. ह्रास का महत्व (Importance of Depreciation)
सही वित्तीय परिणाम ज्ञात करने के लिए।
सम्पत्ति का सही मूल्य दर्शाने के लिए।
प्रतिस्थापन हेतु धन की व्यवस्था के लिए।
सही वित्तीय स्थिति (Balance Sheet) प्रस्तुत करने के लिए।
कर की सही गणना के लिए।
5. ह्रास की विधियाँ (Methods of Depreciation)
5.1 सरल रेखा विधि (Straight Line Method)
इस विधि में सम्पत्ति के क्रय मूल्य में से अवशिष्ट मूल्य घटाकर उसकी आयु से भाग देकर वार्षिक ह्रास ज्ञात किया जाता है।
यह सरल रेखा विधि का ही दूसरा नाम है, जिसमें प्रत्येक वर्ष समान राशि का ह्रास लिखा जाता है।
5.3 लिखित मूल्य (अवशिष्ट मूल्य) विधि (Written Down Value Method)
इस विधि में ह्रास की गणना सम्पत्ति के प्रारंभिक शेष (पुस्तक मूल्य) पर निश्चित प्रतिशत दर से की जाती है। प्रत्येक वर्ष ह्रास की राशि घटती जाती है, क्योंकि पुस्तक मूल्य कम होता जाता है।
विशेषताएँ:
- ह्रास की दर निश्चित होती है।
- ह्रास की राशि प्रत्येक वर्ष घटती जाती है।
- प्रारंभिक वर्षों में ह्रास अधिक, अंतिम वर्षों में कम होता है।
उदाहरण: मशीनरी का मूल्य 50,000 रुपये, ह्रास दर 20% वार्षिक।
- पहले वर्ष: 50,000 × 20% = 10,000 रुपये
- दूसरे वर्ष: 40,000 × 20% = 8,000 रुपये
- तीसरे वर्ष: 32,000 × 20% = 6,400 रुपये
5.4 इकाई उत्पादन विधि (Units of Production Method)
इस विधि में ह्रास का निर्धारण उत्पादित इकाइयों की संख्या के आधार पर होता है।
5.5 सम-निधि विधि (Sinking Fund Method)
इस विधि में हर वर्ष एक निश्चित राशि को अलग रखकर उसका निवेश किया जाता है, ताकि सम्पत्ति की आयु समाप्त होने पर उसके प्रतिस्थापन हेतु धन उपलब्ध हो।
6. दोनों प्रमुख विधियों का तुलनात्मक अंतर
आधार
सरल रेखा विधि
लिखित मूल्य विधि
ह्रास की राशि
समान रहती है
घटती जाती है
आधार
क्रय मूल्य
पुस्तक मूल्य
गणना
सरल
थोड़ी जटिल
कुल ह्रास
आयु समाप्ति पर मूल्य = अवशिष्ट
अवशिष्ट मूल्य शून्य तक
उपयुक्तता
भवन, लीज़
मशीनरी
7. ह्रास की लेखा प्रविष्टि (Accounting for Depreciation)
ह्रास का लेखा दो विधियों से किया जाता है:
विधि 1: ह्रास खाता बनाकर
प्रविष्टि:
- ह्रास खाता नामे
- सम्पत्ति खाते से (या ह्रास संचय खाते से)
वर्ष के अंत में ह्रास खाता लाभ-हानि खाते में स्थानांतरित किया जाता है।
विधि 2: सम्पत्ति खाते में ही लिखना
प्रविष्टि:
- ह्रास खाता नामे
- सम्पत्ति खाते से
8. प्रावधान (Provisions)
प्रावधान वह राशि है जो किसी ज्ञात देयता या संभावित हानि के लिए लाभ में से अलग रखी जाती है, जिसकी राशि निश्चित नहीं होती। उदाहरण:
- संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधान।
- अदत्त मरम्मत के लिए प्रावधान।
- कर के लिए प्रावधान।
प्रावधान की विशेषताएँ:
यह किसी ज्ञात देयता या संभावित हानि के लिए बनता है।
यह लाभ-हानि खाते से काटा जाता है (व्यय के रूप में)।
यह बैलेंस शीट में संबंधित सम्पत्ति से घटाकर या देयता के रूप में दिखाया जाता है।
यह अनिवार्य होता है।
9. संचय (Reserves)
संचय वह राशि है जो व्यवसाय की अनिश्चित भविष्य की आवश्यकताओं या विस्तार के लिए लाभ में से अलग रखी जाती है। उदाहरण: सामान्य संचय, आकस्मिक कोष।
संचय के प्रकार:
सामान्य संचय (General Reserve): किसी विशेष उद्देश्य के लिए नहीं।
विशेष संचय (Specific Reserve): विशेष उद्देश्य के लिए, जैसे विस्तार संचय।
प्रतिभूति प्रीमियम संचय: शेयरों पर प्रीमियम प्राप्त होने पर।
पूँजी संचय (Capital Reserve): पूँजीगत लाभों से।
आय संचय (Revenue Reserve): आयगत लाभों से।
संचय की विशेषताएँ:
यह लाभ में से आवंटित (Appropriation) किया जाता है।
यह अनिवार्य नहीं, स्वैच्छिक है।
यह व्यवसाय के विस्तार में सहायक है।
यह बैलेंस शीट के देयता पक्ष में दिखता है।
10. प्रावधान और संचय में अंतर
आधार
प्रावधान
संचय
उद्देश्य
ज्ञात देयता/हानि
अनिश्चित आवश्यकताएँ
बनाने का आधार
अनिवार्य
स्वैच्छिक
लाभ-हानि में
व्यय के रूप में
आवंटन के रूप में
बैलेंस शीट में
सम्पत्ति से घटाया/देयता
देयता पक्ष
पूँजी/आय
आयगत
दोनों प्रकार
त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1: ह्रास की विधियाँ
विधि
ह्रास की राशि
आधार
सरल रेखा विधि
समान
क्रय मूल्य
लिखित मूल्य विधि
घटती
पुस्तक मूल्य
इकाई उत्पादन
उत्पादन के अनुसार
इकाइयाँ
सम-निधि विधि
निवेश आधारित
निधि
तालिका 2: प्रावधान बनाम संचय
आधार
प्रावधान
संचय
उद्देश्य
ज्ञात हानि
अनिश्चित भविष्य
अनिवार्यता
अनिवार्य
स्वैच्छिक
लेखा उपचार
व्यय
लाभ का आवंटन
उदाहरण
संदिग्ध ऋण प्रावधान
सामान्य संचय
तालिका 3: ह्रास के कारण
कारण
विवरण
घिसाव (Wear and Tear)
उपयोग से मूल्य कमी
समय
कालावधि बीतना
अप्रचलन
तकनीकी बदलाव
प्राकृतिक
मौसम, आपदा
माइंड मैप
graph TD
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E --> E1["ह्रास खाता नामे, सम्पत्ति खाता जमा"]
E --> E2["वर्ष के अंत में लाभ-हानि में"]
महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
आरेख 1: ह्रास की दो प्रमुख विधियों की तुलना
आरेख 2: प्रावधान और संचय का वर्गीकरण
सामान्य गलतियाँ
सरल रेखा विधि और लिखित मूल्य विधि में ह्रास की गणना के आधार को उल्टा कर देना।
सरल रेखा विधि में अवशिष्ट मूल्य को ह्रास में न घटाना।
लिखित मूल्य विधि में प्रत्येक वर्ष क्रय मूल्य पर ही दर लगाना, जबकि शेष पुस्तक मूल्य पर लगती है।
ह्रास को नकद व्यय मान लेना; यह गैर-नकद व्यय है।
प्रावधान को लाभ का आवंटन मान लेना; प्रावधान व्यय है और संचय आवंटन।
संदिग्ध ऋणों के प्रावधान की गणना में पूर्व वर्ष के प्रावधान को ध्यान में न रखना।
ह्रास की प्रविष्टि में सम्पत्ति खाते को नामे कर देना, जबकि सम्पत्ति खाता जमा होता है।
परीक्षा युक्तियाँ
ह्रास के सूत्र कंठस्थ करें: सरल रेखा = (क्रय - अवशिष्ट)/आयु; लिखित मूल्य = पुस्तक मूल्य × दर%।
दोनों विधियों का तुलनात्मक प्रश्न प्रायः पूछा जाता है - तालिका बनाकर लिखें।
प्रावधान और संचय के अंतर को कम से कम पाँच बिंदुओं में लिखें।
संदिग्ध ऋण प्रावधान की गणना में पुराने प्रावधान को बैलेंस शीट में दिखाना न भूलें।
संचय के प्रकार (सामान्य, विशेष, पूँजी, आय) की सूची तैयार रखें।
स्थायी सम्पत्तियों के उदाहरण और अमूर्त सम्पत्तियों (सद्भावना) में अंतर स्पष्ट रखें।
निष्कर्ष
ह्रास, प्रावधान और संचय लेखांकन के वे महत्वपूर्ण पहलू हैं जो वित्तीय विवरणों को सही, तर्कसंगत और विश्वसनीय बनाते हैं। ह्रास सम्पत्तियों के सही मूल्य को दर्शाता है, प्रावधान संभावित हानियों से सुरक्षा देता है, और संचय व्यवसाय के विस्तार में सहायक होता है। इन अवधारणाओं की सही समझ किसी भी व्यवसाय के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है।