जैव अणु (Biomolecules) सजीवों में पाए जाने वाले कार्बनिक अणु हैं। इनमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, लिपिड और न्यूक्लिक अम्ल प्रमुख हैं। इनके अतिरिक्त जल, खनिज लवण और विटामिन भी महत्वपूर्ण हैं। जीवों के भीतर होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं का अध्ययन जैव रसायन (Biochemistry) कहलाता है। सजीवों के द्रव्य को कोशिका द्रव्य कहते हैं, जिसमें विभिन्न जैव अणु पाए जाते हैं। जैव अणुओं को छोटे अणुओं (जैसे अमीनो अम्ल, मोनोसैकेराइड) और बड़े अणुओं (जैसे प्रोटीन, पॉलीसैकेराइड) में विभाजित किया जाता है।
जैव अणुओं को मुख्यतः दो श्रेणियों में बाँटा जाता है:
ये छोटे आकार के अणु हैं - जैसे अमीनो अम्ल, नाइट्रोजन क्षार, मोनोसैकेराइड, वसा अम्ल, विटामिन। इनका आणविक द्रव्यमान कम होता है।
ये बड़े अणु हैं जिनका आणविक द्रव्यमान अधिक होता है। जैसे प्रोटीन, पॉलीसैकेराइड, न्यूक्लिक अम्ल। ये छोटी इकाइयों (मोनोमर्स) के जुड़ने से बनते हैं। पॉलीसैकेराइड, प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्ल वृहत् अणुओं के उदाहरण हैं।
कार्बोहाइड्रेट पॉलीहाइड्रॉक्सी एल्डिहाइड या कीटोन हैं। इनके मुख्य प्रकार:
सबसे सरल शर्करा। उदाहरण - ग्लूकोज (C₆H₁₂O₆), फ्रक्टोज, गैलेक्टोज, राइबोस, डीऑक्सीराइबोस। ग्लूकोज और फ्रक्टोज हेक्सोज हैं।
दो मोनोसैकेराइड के जुड़ने से बनते हैं। ग्लूकोज + ग्लूकोज = माल्टोज; ग्लूकोज + फ्रक्टोज = सुक्रोज; ग्लूकोज + गैलेक्टोज = लैक्टोज। सुक्रोज सामान्य टेबल शुगर है।
अनेक मोनोसैकेराइड के जुड़ने से बनते हैं। ये जल में अविलेय होते हैं। उदाहरण - स्टार्च, सेल्यूलोज, ग्लाइकोजन। ग्लाइकोजन को 'पशु स्टार्च' कहते हैं। सेल्यूलोज में ग्लूकोज इकाइयाँ β-बंध द्वारा जुड़ी होती हैं। स्टार्च में α-बंध होता है। काइटिन भी एक पॉलीसैकेराइड है।
प्रोटीन अमीनो अम्लों की पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला होती है। प्रोटीन शरीर के निर्माण खंड हैं। प्रोटीन में C, H, O, N (और कभी S) होते हैं।
लिपिड जल में अविलेय कार्बनिक अणु हैं। ये वसा अम्ल और ग्लिसरॉल से बनते हैं। लिपिड के मुख्य प्रकार:
फॉस्फोलिपिड कोशिका झिल्ली का प्रमुख घटक है। लिपिड ऊर्जा का संघनित स्रोत हैं। लिपिड ठोस (वसा) और तरल (तेल) दोनों रूपों में पाए जाते हैं। वसा अम्ल दो प्रकार के होते हैं - संतृप्त (बिना द्विबंध) और असंतृप्त (द्विबंध युक्त)।
न्यूक्लिक अम्ल आनुवंशिक पदार्थ हैं। ये दो प्रकार के होते हैं:
न्यूक्लिक अम्ल की इकाई न्यूक्लियोटाइड है। न्यूक्लियोटाइड तीन भागों से बनता है - नाइट्रोजन क्षार, पेन्टोज शर्करा और फॉस्फेट समूह।
एंजाइम जैव उत्प्रेरक हैं। ये अभिक्रियाओं की दर बढ़ाते हैं। एंजाइम प्रोटीन होते हैं। एंजाइम का वह भाग जहाँ अभिक्रिया होती है, सक्रिय स्थल (active site) कहलाता है। एंजाइम विशिष्टता दर्शाते हैं। एंजाइम के कार्य को गति देने के लिए सहकारक (cofactor) की आवश्यकता होती है। लॉक एंड की मॉडल के अनुसार सब्सट्रेट एंजाइम के सक्रिय स्थल से जुड़ता है।
| वृहत् अणु | मोनोमर | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्रोटीन | अमीनो अम्ल | एल्ब्यूमिन, कैसीन |
| पॉलीसैकेराइड | मोनोसैकेराइड | स्टार्च, सेल्यूलोज |
| न्यूक्लिक अम्ल | न्यूक्लियोटाइड | DNA, RNA |
| विशेषता | DNA | RNA |
|---|---|---|
| शर्करा | डीऑक्सीराइबोस | राइबोस |
| क्षार | A, G, C, T | A, G, C, U |
| संरचना | द्विकुंडलित | एकल कुंडलित |
| कार्य | वंशानुगत | प्रोटीन संश्लेषण |
जैव अणु जीवन की सभी क्रियाओं में भाग लेते हैं। ATP (एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट) कोशिका का प्रमुख ऊर्जा अणु है, जो श्वसन में उत्पन्न होता है और सभी जैविक क्रियाओं को ऊर्जा प्रदान करता है। ATP में तीन फॉस्फेट समूह होते हैं और इसके विभाजन से ADP और ऊर्जा मुक्त होती है। कार्बोहाइड्रेट शरीर का प्रमुख तात्कालिक ऊर्जा स्रोत हैं, जबकि लिपिड ऊर्जा का संघनित भंडार हैं। प्रोटीन शरीर के निर्माण और मरम्मत में सहायक होते हैं तथा अनेक एंजाइम प्रोटीन ही होते हैं। न्यूक्लिक अम्ल आनुवंशिक सूचना का संग्रह करते हैं। वसा अम्ल संतृप्त और असंतृप्त दो प्रकार के होते हैं - संतृप्त वसा (जैसे घी, मक्खन) में कोई द्विबंध नहीं होता, जबकि असंतृप्त वसा (जैसे वनस्पति तेल) में द्विबंध होते हैं। कोशिका झिल्ली की संरचना में फॉस्फोलिपिड की दोहरी परत मुख्य है, जिसमें प्रोटीन अंतर्निहित होते हैं। विटामिन शरीर की सामान्य क्रियाओं के लिए कम मात्रा में आवश्यक सूक्ष्म अणु हैं - जैसे विटामिन D कैल्शियम अवशोषण में सहायक है। खनिज लवण जैसे लोहा हीमोग्लोबिन का घटक है। इस प्रकार जैव अणुओं का अध्ययन कोशिका की कार्यप्रणाली, चयापचय और जीवन के रासायनिक आधार को समझने के लिए आवश्यक है।
इस अध्याय में हमने जैव अणुओं - कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, लिपिड और न्यूक्लिक अम्ल - की संरचना और कार्यों का अध्ययन किया। वृहत् अणुओं के मोनोमर्स, डाइसैकेराइड का निर्माण, प्रोटीन के संरचनात्मक स्तर, DNA और RNA की संरचना तथा एंजाइमों की भूमिका इस अध्याय की प्रमुख अवधारणाएँ हैं। जैव अणुओं का ज्ञान कोशिका की कार्यप्रणाली, चयापचय और आनुवंशिकी को समझने के लिए आवश्यक है।