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1. परिचय

पिछले अध्याय में हमने जीवों की विविधता और उनके वर्गीकरण की आवश्यकता का अध्ययन किया। इस अध्याय में हम जीवों को विभिन्न जगतों में किस प्रकार वर्गीकृत किया जाता है, इसका विस्तृत अध्ययन करेंगे। आरंभिक समय में जीवों को केवल दो जगतों में बाँटा गया था - प्लांटे (पादप) और ऐनिमेलिया (प्राणी)। इस द्वि-जगत वर्गीकरण में अनेक समस्याएँ थीं, जैसे कि यूग्लीना जैसे जीव जिनमें पादप और प्राणी दोनों के गुण पाए जाते हैं, उन्हें किसी भी जगत में ठीक से नहीं रखा जा सकता था। कवक (फफूँद) में भी पादपों से भिन्न लक्षण पाए गए। इन समस्याओं के समाधान के लिए वैज्ञानिकों ने अनेक वर्गीकरण प्रणालियाँ प्रस्तुत कीं।

2. पाँच जगत वर्गीकरण (Five Kingdom Classification)

रॉबर्ट व्हिटेकर (Robert Whittaker) ने 1969 में पाँच जगत वर्गीकरण प्रणाली प्रस्तुत की। व्हिटेकर ने जीवों को वर्गीकृत करने के लिए निम्नलिखित पाँच प्रमुख विशेषताओं को आधार बनाया:

  1. कोशिका संरचना - प्रोकैरियोटिक या यूकैरियोटिक
  2. शरीर संगठन - एककोशिकीय या बहुकोशिकीय
  3. पोषण की विधि - स्वपोषी या विषमपोषी
  4. प्रजनन की विधि
  5. विकासीय (फाइलोजेनेटिक) संबंध

व्हिटेकर के पाँच जगत निम्नलिखित हैं: - मोनेरा (Monera) - प्रोटिस्टा (Protista) - कवक (Fungi) - प्लांटे (Plantae) - ऐनिमेलिया (Animalia)

3. मोनेरा जगत (Kingdom Monera)

मोनेरा जगत के सभी जीव प्रोकैरियोटिक होते हैं। इनमें झिल्ली-बद्ध केन्द्रक एवं झिल्ली-बद्ध अंगक नहीं पाए जाते। इनमें आनुवंशिक पदार्थ (DNA) कोशिका द्रव्य में बिखरा रहता है, जिसे न्यूक्लियोइड कहते हैं। इस जगत में जीवाणु, सायनोबैक्टीरिया (नीले-हरे शैवाल) और माइकोप्लाज्मा आते हैं। मोनेरा के सदस्य सबसे प्राचीन जीव हैं।

मोनेरा के मुख्य लक्षण:

जीवाणुओं के प्रकार (आकृति के आधार पर):

4. प्रोटिस्टा जगत (Kingdom Protista)

प्रोटिस्टा जगत में सभी एककोशिकीय यूकैरियोटिक जीव आते हैं। ये जीव सूक्ष्म होते हैं। इनमें सच्चा केन्द्रक और झिल्ली-बद्ध अंगक पाए जाते हैं। प्रोटिस्टा में तीन मुख्य समूह हैं:

क्राइसोफाइट्स (Chrysophytes)

इनमें डायटम और केल्फ्लैजेलेट आते हैं। डायटम की कोशिका भित्ति में सिलिका (डायटोमेसियस मिट्टी) पाई जाती है। डायटम समुद्री प्लवक के मुख्य घटक हैं।

डायनोफ्लैजेलेट्स (Dinoflagellates)

ये समुद्री जीव हैं, जिनमें दो कशाभिकाएँ होती हैं। लाल ज्वार (Red Tide) इनके कारण उत्पन्न होता है। गोन्योलैक्स प्रमुख उदाहरण है।

यूग्लिनोइड्स (Euglenoids)

यूग्लीना इनका प्रमुख उदाहरण है। इनमें पादप और प्राणी दोनों के लक्षण पाए जाते हैं। इनमें प्रकाश संश्लेषण होता है, परंतु प्रकाश के अभाव में ये विषमपोषी बन जाते हैं।

स्लाइम मोल्ड्स (Slime Molds)

ये विषमपोषी प्रोटिस्ट हैं जो सड़ते कार्बनिक पदार्थों पर पाए जाते हैं। परिस्थितियाँ अनुकूल न होने पर ये गतिशील पादकाबीजाणु (flagellated spores) बनाते हैं।

प्रोटोजोआ (Protozoans)

ये सभी विषमपोषी हैं। इन्हें निम्न चार समूहों में बाँटा गया है: - अमीबा, एंटअमीबा (जन्तु - लोकोमोटिव अंग पादक/सीलिया) - एमीबा प्रोटियस - फ्लैगेलेट्स - ट्रिपैनोसोमा - सीलिएट्स - पैरामीशियम - स्पोरोजोआ - प्लाज्मोडियम

5. कवक जगत (Kingdom Fungi)

कवक विषमपोषी यूकैरियोटिक जीव हैं। इनकी कोशिका भित्ति काइटिन से बनी होती है। कवक मृतजीवी (सैप्रोफाइट) या परजीवी होते हैं। कवक का शरीर कवककाय (Mycelium) कहलाता है, जो कवकतंतुओं (Hyphae) से बना होता है। कुछ कवक सहजीवी होते हैं जैसे लाइकेन और माइकोराइजा में। प्रजनन विभिन्न विधियों से होता है।

कवकों का वर्गीकरण (प्रजनन संरचनाओं के आधार पर):

6. प्लांटे जगत (Kingdom Plantae)

प्लांटे जगत में बहुकोशिकीय यूकैरियोटिक स्वपोषी पादप आते हैं। इनमें प्रकाश संश्लेषण होता है। कोशिका भित्ति सेल्यूलोज से बनी होती है। पादपों में जीवन चक्र दो प्रकार के शरीरों से होता है - युग्मकोद्भिद् (haploid gametophyte) और बीजाणुद्भिद् (diploid sporophyte)। इनके विभिन्न समूह हैं - थैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा, जिम्नोस्पर्मे और एंजियोस्पर्मे।

7. ऐनिमेलिया जगत (Kingdom Animalia)

ऐनिमेलिया जगत में बहुकोशिकीय यूकैरियोटिक विषमपोषी जीव आते हैं जो पोषण के लिए अन्य जीवों पर निर्भर होते हैं। इनमें पादपों जैसी कोशिका भित्ति नहीं पाई जाती। अधिकांश प्राणी गतिशील होते हैं। इनके शरीर का संगठन ऊतक, अंग और अंग-तंत्र स्तर का होता है। इनमें निम्न संघ शामिल हैं - पोरिफेरा, कोइलेंटेरेटा, सीलेन्टेरेटा, प्लैटिहेल्मिंथीज, ऐनेलिडा, आर्थ्रोपोडा, मोलस्का, इकाइनोडर्मेटा, हेमिकोर्डेटा और कॉर्डेटा।

8. विषाणु, विरॉइड एवं लाइकेन (Viruses, Viroids and Lichens)

विषाणु (Viruses)

विषाणु (Virus) जीवों और निर्जीवों के बीच की कड़ी माने जाते हैं। ये प्रोटीन खोल (कैप्सिड) के भीतर बंद न्यूक्लिक अम्ल (DNA या RNA) से बने होते हैं। ये जीवित कोशिकाओं के बाहर निर्जीव की तरह व्यवहार करते हैं परंतु कोशिका के अंदर प्रवेश करने पर सजीव की तरह प्रजनन करते हैं। तम्बाकू मोजेक विषाणु (TMV) का अध्ययन सबसे पहले स्टेनली ने किया। विषाणुओं को पाँच मानदंडों पर आधारित नहीं रखा जा सकता क्योंकि वे कोशिका संरचना वाले नहीं होते।

विरॉइड (Viroids)

विरॉइड केवल न्यूक्लिक अम्ल (RNA) से बने होते हैं, इनमें प्रोटीन खोल नहीं होता। इनकी खोज टी.ओ. डीनर (T.O. Diener) ने 1971 में की। विरॉइड पादपों में रोग उत्पन्न करते हैं, जैसे आलू स्पिंडल ट्यूबर।

लाइकेन (Lichens)

लाइकेन कवक और शैवाल का सहजीवी संबंध है। इसमें कवक जल और खनिज प्रदान करता है, जबकि शैवाल प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाता है। लाइकेन वायु प्रदूषण के सूचक (Indicator organisms) होते हैं।

graph TD A["पाँच जगत वर्गीकरण - व्हिटेकर 1969"] --> B["मोनेरा"] A --> C["प्रोटिस्टा"] A --> D["कवक"] A --> E["प्लांटे"] A --> F["ऐनिमेलिया"] B --> B1["जीवाणु, सायनोबैक्टीरिया, माइकोप्लाज्मा"] C --> C1["प्रोटोजोआ, डायटम, यूग्लीना"] D --> D1["यीस्ट, मशरूम, राइज़ोपस"] E --> E1["स्वपोषी, सेल्यूलोज भित्ति"] F --> F1["विषमपोषी, गतिशील"]

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: पाँच जगत की तुलना

जगत कोशिका प्रकार पोषण शरीर संगठन
मोनेरा प्रोकैरियोटिक स्वपोषी/विषमपोषी एककोशिकीय
प्रोटिस्टा यूकैरियोटिक स्वपोषी/विषमपोषी एककोशिकीय
कवक यूकैरियोटिक विषमपोषी (सैप्रोफाइटिक) कवककाय
प्लांटे यूकैरियोटिक स्वपोषी बहुकोशिकीय
ऐनिमेलिया यूकैरियोटिक विषमपोषी बहुकोशिकीय

तालिका 2: प्रमुख उदाहरण एवं विशेषताएँ

जीव समूह मुख्य विशेषता
डायटम क्राइसोफाइट सिलिका कोशिका भित्ति
गोन्योलैक्स डायनोफ्लैजेलेट लाल ज्वार
यूग्लीना यूग्लिनोइड पादप+प्राणी लक्षण
ट्रिपैनोसोमा फ्लैगेलेट निद्रा रोग
प्लाज्मोडियम स्पोरोजोआ मलेरिया
पैरामीशियम सीलिएट सिलिया गति

माइंड मैप

graph TD A["जीव जगत का वर्गीकरण"] --> B["द्वि-जगत (प्लांटे + ऐनिमेलिया)"] B --> C["पाँच जगत (व्हिटेकर)"] C --> D["मोनेरा: प्रोकैरियोटिक"] C --> E["प्रोटिस्टा: एककोशिकीय यूकैरियोट"] C --> F["कवक: काइटिन भित्ति, सैप्रोफाइट"] C --> G["प्लांटे: स्वपोषी, सेल्यूलोज"] C --> H["ऐनिमेलिया: विषमपोषी, गतिशील"] A --> I["विषाणु: प्रोटीन खोल + न्यूक्लिक अम्ल"] A --> J["विरॉइड: केवल RNA"] A --> K["लाइकेन: कवक + शैवाल सहजीवन"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

पाँच जगत वर्गीकरण (व्हिटेकर, 1969) सभी जीव मोनेरा प्रोकैरियोटिक प्रोटिस्टा यूकैरियोटिक कवक काइटिन भित्ति प्लांटे स्वपोषी ऐनिमेलिया विषमपोषी आधार: कोशिका संरचना, शरीर संगठन, पोषण, प्रजनन, फाइलोजेनेटिक संबंध Golden Rule (स्वर्ण नियम): मोनेरा एकमात्र प्रोकैरियोटिक जगत है - शेष सभी चार यूकैरियोटिक हैं
जीवाणु की संरचना (प्रोकैरियोटिक कोशिका) कोशिका द्रव्य न्यूक्लियोइड 70S राइबोसोम कोशिका भित्ति (म्यूरिन) कशाभिका स्वर्ण नियम (Golden Rule): प्रोकैरियोट में झिल्ली-बद्ध केन्द्रक नहीं होता - DNA कोशिका द्रव्य में ही रहता है

सामान्य गलतियाँ

  1. गलत धारणा: छात्र सोचते हैं कि सभी कवक मृतजीवी होते हैं, परंतु कुछ कवक परजीवी (जैसे रस्ट कवक) और सहजीवी (लाइकेन, माइकोराइजा) भी होते हैं।
  2. गलत धारणा: यूग्लीना को पादप मान लिया जाता है, परंतु यह प्रोटिस्टा जगत का जीव है।
  3. गलत धारणा: विषाणुओं को सजीव मान लिया जाता है, परंतु वे कोशिका संरचना के बाहर निर्जीव होते हैं और उन्हें पाँच जगत में नहीं रखा जाता।
  4. गलत धारणा: विषाणु और विरॉइड को एक ही माना जाता है, परंतु विरॉइड में प्रोटीन खोल नहीं होता।
  5. गलत धारणा: सायनोबैक्टीरिया को शैवाल समझा जाता है, परंतु ये प्रोकैरियोटिक हैं, इसलिए मोनेरा जगत में आते हैं।
  6. गलत धारणा: डायटम को क्राइसोफाइट की जगह सीधे शैवाल कहना गलत है - ये प्रोटिस्टा जगत में आते हैं।
  7. गलत धारणा: लाल ज्वार डायटम के कारण होता है - यह गलत है, यह डायनोफ्लैजेलेट्स (गोन्योलैक्स) के कारण होता है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. व्हिटेकर के पाँच जगत के नाम और उनके आधार (कोशिका संरचना, पोषण, शरीर संगठन) अवश्य याद रखें।
  2. कवकों के वर्गीकरण में प्रजनन संरचनाओं पर ध्यान दें - फाइकोमाइसीटीज, एस्कोमाइसीटीज, बेसिडियोमाइसीटीज, ड्यूटेरोमाइसीटीज।
  3. प्रोटोजोआ के चार समूहों (अमीबा, फ्लैगेलेट, सीलिएट, स्पोरोजोआ) का अध्ययन करें।
  4. मुख्य उदाहरण याद रखें - गोन्योलैक्स, यूग्लीना, प्लाज्मोडियम, ट्रिपैनोसोमा, पैरामीशियम।
  5. विषाणु, विरॉइड, लाइकेन की तुलनात्मक समझ बनाएँ।
  6. कोशिका भित्ति का मुख्य घटक याद रखें - जीवाणु में म्यूरिन, कवक में काइटिन, पादप में सेल्यूलोज।
  7. NCERT में दिए गए चित्र और तालिकाओं का अभ्यास करें।

निष्कर्ष

इस अध्याय में हमने पाँच जगत वर्गीकरण का विस्तार से अध्ययन किया। व्हिटेकर द्वारा दी गई यह प्रणाली जीवों को मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, प्लांटे और ऐनिमेलिया में वर्गीकृत करती है। हमने विषाणु, विरॉइड और लाइकेन जैसे विशेष जीवों का भी अध्ययन किया। यह अध्याय आगे के अध्यायों - वनस्पति जगत और प्राणि जगत - का आधार है, जहाँ हम इन जगतों के विभिन्न समूहों का विस्तार से अध्ययन करेंगे। परीक्षा की दृष्टि से पाँच जगत के आधार, प्रोटोजोआ के समूह और कवकों के वर्गीकरण पर विशेष ध्यान देना चाहिए।