🧬
🌿
🦠
🦋
🔬
← डैशबोर्ड पर वापस जाएँ
Font Size:

1. परिचय

कोशिका चक्र (Cell Cycle) कोशिका विभाजनों के बीच की अवधि है, जिसमें कोशिका वृद्धि करती है और विभाजन की तैयारी करती है। कोशिका चक्र दो मुख्य चरणों में विभाजित होता है - अंतरावस्था (Interphase) और माइटोटिक अवस्था (M-phase)। कोशिका विभाजन की दो मुख्य विधियाँ हैं - समसूत्री विभाजन (Mitosis) और अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis)। कोशिका विभाजन जीवों की वृद्धि, मरम्मत और जनन के लिए आवश्यक है।

2. कोशिका चक्र के चरण (Phases of Cell Cycle)

अंतरावस्था (Interphase)

यह कोशिका चक्र की सबसे लंबी अवधि है, जिसमें कोशिका विभाजन के लिए तैयार होती है। इसे तीन उपचरणों में विभाजित किया गया है:

  1. G₁ चरण (Gap 1): इस चरण में कोशिका आकार में बढ़ती है, RNA और प्रोटीन का संश्लेषण होता है। G₁ चरण में कोशिका अवधि का निर्धारण होता है।
  2. S चरण (Synthesis): इस चरण में DNA का संश्लेषण (प्रतिकृति) होता है। इसके बाद कोशिका में DNA की मात्रा दुगुनी हो जाती है। क्रोमोसोम की संख्या में परिवर्तन नहीं होता।
  3. G₂ चरण (Gap 2): इस चरण में प्रोटीन का संश्लेषण होता है और कोशिका विभाजन की तैयारी पूरी होती है।

M अवस्था (M Phase)

यह वास्तविक विभाजन की अवस्था है। इसमें समसूत्री (mitotic) विभाजन और साइटोकाइनेसिस (cytokinesis) होता है।

3. समसूत्री विभाजन (Mitosis)

समसूत्री विभाजन में एक कोशिका से दो समान संतति कोशिकाएँ बनती हैं, जिनमें गुणसूत्रों की संख्या मूल कोशिका के समान होती है। इस विभाजन को समपोषी विभाजन (equational division) भी कहते हैं। समसूत्री विभाजन वृद्धि और मरम्मत के लिए होता है। समसूत्री विभाजन के चरण:

प्रोफेज (Prophase)

मेटाफेज (Metaphase)

एनाफेज (Anaphase)

टेलोफेज (Telophase)

साइटोकाइनेसिस (Cytokinesis)

4. अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis)

अर्धसूत्री विभाजन में एक कोशिका से चार संतति कोशिकाएँ बनती हैं, जिनमें गुणसूत्रों की संख्या आधी होती है। यह केवल जनन कोशिकाओं में होता है। इस विभाजन को न्यूनीकरण विभाजन (reductional division) कहते हैं। अर्धसूत्री विभाजन में गुणसूत्रों की संख्या आधी हो जाती है और आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होती है। अर्धसूत्री विभाजन के चरण:

अर्धसूत्री विभाजन I (Meiosis I)

अर्धसूत्री विभाजन II (Meiosis II)

यह समसूत्री विभाजन के समान होता है। इसमें दो कोशिकाओं से चार अगुणित कोशिकाएँ बनती हैं। इसके चरण - प्रोफेज II, मेटाफेज II, एनाफेज II, टेलोफेज II।

5. समसूत्री और अर्धसूत्री विभाजन में अंतर

विशेषता समसूत्री (Mitosis) अर्धसूत्री (Meiosis)
संतति कोशिकाएँ 2 4
गुणसूत्र संख्या समान (2n) आधी (n)
क्रॉसिंग ओवर नहीं होता है
कहाँ होता है दैहिक कोशिकाओं में जनन कोशिकाओं में
आनुवंशिक विविधता नहीं उत्पन्न होती है
graph TD A["कोशिका चक्र"] --> B["अंतरावस्था"] B --> B1["G1 चरण"] B --> B2["S चरण (DNA प्रतिकृति)"] B --> B3["G2 चरण"] A --> C["M अवस्था"] C --> D["समसूत्री विभाजन"] C --> E["अर्धसूत्री विभाजन"] D --> D1["2 संतति कोशिकाएँ (2n)"] E --> E1["4 संतति कोशिकाएँ (n)"]

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: समसूत्री विभाजन के चरण

चरण मुख्य घटना
प्रोफेज क्रोमोसोम संघनन
मेटाफेज भूमध्य रेखा पर व्यवस्था
एनाफेज क्रोमेटिड्स का पृथक्करण
टेलोफेज केन्द्रक झिल्ली का पुनर्निर्माण

तालिका 2: कोशिका चक्र के चरण और घटनाएँ

चरण घटना
G1 RNA और प्रोटीन संश्लेषण
S DNA प्रतिकृति
G2 विभाजन की तैयारी
M वास्तविक विभाजन

माइंड मैप

graph TD A["कोशिका चक्र और विभाजन"] --> B["अंतरावस्था: G1, S, G2"] A --> C["समसूत्री विभाजन (2 कोशिकाएँ)"] C --> C1["प्रोफेज, मेटाफेज, एनाफेज, टेलोफेज"] A --> D["अर्धसूत्री विभाजन (4 कोशिकाएँ)"] D --> D1["प्रोफेज I: क्रॉसिंग ओवर"] D --> D2["अर्धसूत्री II"] A --> E["साइटोकाइनेसिस: पादप-पट्टिका, प्राणी-संकुचन"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

समसूत्री विभाजन के चरण प्रोफेज क्रोमोसोम संघनित तर्कु निर्माण मेटाफेज भूमध्य रेखा पर व्यवस्था एनाफेज क्रोमेटिड्स अलग ध्रुवों की ओर टेलोफेज केन्द्रक झिल्ली पुनर्निर्माण परिणाम: 1 द्विगुणित कोशिका → 2 द्विगुणित कोशिकाएँ (वृद्धि, मरम्मत) Golden Rule (स्वर्ण नियम): समसूत्री विभाजन = समपोषी (2n→2n); अर्धसूत्री = न्यूनीकरण (2n→n)
अंतरावस्था और विभाजन की समय रेखा G1 चरण RNA/प्रोटीन संश्लेषण S चरण DNA प्रतिकृति G2 चरण विभाजन की तैयारी M अवस्था विभाजन अंतरावस्था (G1 + S + G2) कोशिका चक्र की सबसे लंबी अवधि है स्वर्ण नियम (Golden Rule): DNA प्रतिकृति केवल S चरण में होती है; G1/G2 में नहीं

6. कोशिका विभाजन का महत्व और नियंत्रण

समसूत्री विभाजन जीवों की वृद्धि, क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत और अलैंगिक प्रजनन के लिए आवश्यक है। यह आनुवंशिक स्थिरता बनाए रखता है, क्योंकि संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या और आनुवंशिक सूचना मूल कोशिका के समान रहती है। अर्धसूत्री विभाजन जनन कोशिकाओं में होकर अगुणित युग्मक बनाता है, जिससे निषेचन के समय गुणसूत्रों की संख्या स्थिर बनी रहती है। अर्धसूत्री विभाजन के दौरान क्रॉसिंग ओवर और स्वतंत्र अपव्यवस्था से आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होती है, जो विकास का आधार है। कोशिका चक्र का नियंत्रण विभिन्न जांच बिंदुओं (checkpoints) पर होता है। G1 जांच बिंदु पर कोशिका यह सुनिश्चित करती है कि पर्यावरणीय परिस्थितियाँ विभाजन के लिए अनुकूल हैं। G2 जांच बिंदु पर DNA की सही प्रतिकृति की जाँच होती है। M जांच बिंदु पर क्रोमोसोम की तर्कु से सही जुड़ाव की जाँच होती है। साइक्लिन और साइक्लिन-निर्भर काइनेज (CDK) एंजाइम कोशिका चक्र को नियंत्रित करते हैं। यदि कोशिका चक्र अनियंत्रित हो जाता है, तो कैंसर जैसे रोग उत्पन्न हो सकते हैं। इस प्रकार कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन जीवन के आधारभूत प्रक्रम हैं।

सामान्य गलतियाँ

  1. गलत धारणा: DNA प्रतिकृति G2 चरण में होती है - यह केवल S चरण में होती है।
  2. गलत धारणा: समसूत्री विभाजन जनन कोशिकाओं में होता है - यह दैहिक कोशिकाओं में होता है।
  3. गलत धारणा: अर्धसूत्री विभाजन में 2 कोशिकाएँ बनती हैं - 4 बनती हैं।
  4. गलत धारणा: क्रॉसिंग ओवर समसूत्री विभाजन में होता है - यह अर्धसूत्री प्रोफेज I के पैकीटीन में होता है।
  5. गलत धारणा: S चरण में गुणसूत्रों की संख्या दुगुनी हो जाती है - संख्या वही रहती है, केवल DNA की मात्रा दुगुनी होती है।
  6. गलत धारणा: प्रोफेज में क्रोमोसोम सबसे स्पष्ट दिखते हैं - मेटाफेज में सबसे स्पष्ट दिखते हैं।
  7. गलत धारणा: पादप कोशिकाओं में संकुचन खाँच से विभाजन होता है - पादपों में कोशिका पट्टिका से विभाजन होता है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. कोशिका चक्र के चरण (G1, S, G2, M) और उनकी घटनाएँ याद रखें।
  2. समसूत्री विभाजन के चार चरणों का क्रम और घटनाएँ याद रखें।
  3. अर्धसूत्री प्रोफेज I के पाँच उपचरण याद रखें।
  4. क्रॉसिंग ओवर और उसका महत्व समझें।
  5. समसूत्री और अर्धसूत्री विभाजन की तुलना (तालिका) याद रखें।
  6. साइटोकाइनेसिस के प्रकार (पादप-पट्टिका, प्राणी-संकुचन) याद रखें।
  7. 'समपोषी' और 'न्यूनीकरण' शब्दों के अर्थ समझें।

निष्कर्ष

इस अध्याय में हमने कोशिका चक्र की अंतरावस्था (G1, S, G2) और M अवस्था का अध्ययन किया। समसूत्री विभाजन के चार चरणों और अर्धसूत्री विभाजन की प्रक्रिया को समझा। क्रॉसिंग ओवर के महत्व और आनुवंशिक विविधता के स्रोतों को जाना। यह अध्याय वंशानुक्रम, विकास और जनन को समझने का आधार है।