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1. परिचय

शरीर के विभिन्न अंगों की क्रियाओं का समन्वय तंत्रिका तंत्र और अंतःस्रावी तंत्र द्वारा होता है। तंत्रिका तंत्र (Nervous System) विद्युत-रासायनिक आवेगों द्वारा सूचनाओं का संचरण करता है। तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई न्यूरॉन है। इस अध्याय में हम न्यूरॉन की संरचना, तंत्रिका आवेग का संचरण, मस्तिष्क और मेरुरज्जु की संरचना तथा प्रतिवर्ती क्रियाओं का अध्ययन करेंगे।

2. न्यूरॉन की संरचना (Structure of Neuron)

न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की इकाई है। इसके प्रमुख भाग:

कोशिका शरीर (Cell body / Soma)

डेन्ड्राइट्स (Dendrites)

अक्षतंतु (Axon)

सिनैप्स (Synapse)

दो न्यूरॉनों के बीच का संधि स्थल सिनैप्स कहलाता है। यहाँ रासायनिक संवाहक (न्यूरोट्रांसमीटर) जैसे एसिटाइलकोलीन आवेग को अगले न्यूरॉन तक पहुँचाते हैं। सिनैप्स का संक्रमण एकतरफा होता है।

3. न्यूरॉन के प्रकार

कार्य के आधार पर:

  1. संवेदी न्यूरॉन (Sensory/Afferent): संवेदी अंगों से आवेग को CNS तक ले जाते हैं।
  2. चालक न्यूरॉन (Motor/Efferent): CNS से आवेग को प्रभावक (पेशी/ग्रंथि) तक ले जाते हैं।
  3. समायोजी न्यूरॉन (Interneurons): CNS के भीतर संबंध बनाते हैं।

4. तंत्रिका आवेग का संचरण (Nerve Impulse Transmission)

विश्राम अवस्था (Resting potential)

विश्राम अवस्था में न्यूरॉन की झिल्ली के बाहर Na⁺ अधिक और अंदर K⁺ अधिक होता है। झिल्ली का आंतरिक भाग बाहर की तुलना में ऋणात्मक होता है। विश्राम विभव लगभग -70 mV होता है। यह Na⁺-K⁺ पंप द्वारा बनाए रखा जाता है।

क्रियाशील विभव (Action potential)

जब उत्तेजना होती है, Na⁺ चैनल खुलते हैं और Na⁺ अंदर आता है, जिससे विध्रुवण (depolarization) होता है। झिल्ली विभव सकारात्मक हो जाता है (+40 mV)। इसके बाद K⁺ बाहर जाकर पुनर्ध्रुवण (repolarization) होता है। इस प्रकार विद्युत आवेग अक्षतंतु के साथ संचारित होता है। यह सब-या-कुछ-नहीं नियम का पालन करता है।

5. मानव तंत्रिका तंत्र

मानव तंत्रिका तंत्र दो भागों में विभाजित होता है:

केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS)

परिधीय तंत्रिका तंत्र (PNS)

6. मस्तिष्क की संरचना (Brain Structure)

मस्तिष्क को तीन मुख्य भागों में विभाजित किया गया है:

अग्र मस्तिष्क (Forebrain)

मध्य मस्तिष्क (Midbrain)

पश्च मस्तिष्क (Hindbrain)

7. मेरुरज्जु (Spinal Cord)

मेरुरज्जु मेरुदंड नाल में स्थित लंबी बेलनाकार संरचना है। यह CNS का भाग है। यह सुरक्षात्मक झिल्लियों (मेनिन्जेस) से घिरी होती है। मेरुरज्जु प्रतिवर्ती क्रियाओं का केंद्र है और मस्तिष्क से आवेगों को शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचाती है।

8. प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action)

प्रतिवर्ती क्रिया त्वरित, स्वतः और अनैच्छिक प्रतिक्रिया है। उदाहरण - किसी गर्म वस्तु को छूने पर हाथ हटाना, घुटने की थपकी पर प्रतिक्रिया। प्रतिवर्ती क्रिया का मार्ग: संवेदी अंग → संवेदी न्यूरॉन → CNS (मेरुरज्जु) → चालक न्यूरॉन → प्रभावक अंग

सिनैप्स में आवेग संचरण

सिनैप्स में आवेग न्यूरोट्रांसमीटर (जैसे एसिटाइलकोलीन) द्वारा संचरित होता है। यह एकतरफा होता है।

graph TD A["तंत्रिका तंत्र"] --> B["CNS"] A --> C["PNS"] B --> B1["मस्तिष्क"] B --> B2["मेरुरज्जु"] C --> C1["12 कपाल तंत्रिकाएँ"] C --> C2["31 मेरु तंत्रिकाएँ"] A --> D["न्यूरॉन: डेन्ड्राइट, सोमा, अक्षतंतु"]

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: मस्तिष्क के भाग और कार्य

भाग कार्य
सेरेब्रम सोच, स्मृति, बुद्धि
थैलेमस संवेदी रिले
हाइपोथैलेमस तापमान, भूख
सेरिबेलम संतुलन
मेडुला हृदय गति, श्वसन

तालिका 2: न्यूरॉन के भाग और कार्य

भाग कार्य
डेन्ड्राइट आवेग ग्रहण
कोशिका शरीर आवेग एकीकरण
अक्षतंतु आवेग संचरण

माइंड मैप

graph TD A["तंत्रिकीय नियंत्रण एवं समन्वय"] --> B["न्यूरॉन: -70 mV विश्राम विभव"] A --> C["आवेग संचरण: विध्रुवण → पुनर्ध्रुवण"] A --> D["CNS: मस्तिष्क + मेरुरज्जु"] A --> E["मस्तिष्क: अग्र/मध्य/पश्च"] A --> F["प्रतिवर्ती क्रिया: स्वतः अनैच्छिक"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

मस्तिष्क के मुख्य भाग सेरेब्रम सोच, स्मृति, बुद्धि सेरिबेलम मेडुला Golden Rule (स्वर्ण नियम): सेरिबेलम संतुलन नियंत्रित करता है, मेडुला हृदय गति और श्वसन
तंत्रिका आवेग का संचरण -70 mV (विश्राम) +40 mV (विध्रुवण) Na+ अंदर प्रवेश → विध्रुवण, K+ बाहर → पुनर्ध्रुवण आवेग दिशा स्वर्ण नियम (Golden Rule): विश्राम विभव -70 mV, क्रियाशील विभव +40 mV (सब-या-कुछ-नहीं नियम)

9. परिधीय तंत्रिका तंत्र और स्वायत्त तंत्रिका तंत्र

परिधीय तंत्रिका तंत्र (PNS) में कपाल तंत्रिकाएँ (12 जोड़ी) और मेरु तंत्रिकाएँ (31 जोड़ी) होती हैं। मेरु तंत्रिकाएँ मेरुरज्जु से निकलकर शरीर के विभिन्न भागों में जाती हैं। प्रत्येक मेरु तंत्रिका एक संवेदी जड़ (पृष्ठीय) और एक चालक जड़ (उदर) से बनी होती है। तंत्रिका तंत्र का एक महत्वपूर्ण भाग स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (Autonomic Nervous System) है, जो अनैच्छिक क्रियाओं - हृदय गति, पाचन, श्वसन - को नियंत्रित करता है। स्वायत्त तंत्र के दो उपभाग होते हैं - सहानुभूति तंत्रिका तंत्र (sympathetic) जो तनाव में शरीर को सक्रिय करता है, और परासहानुभूति तंत्रिका तंत्र (parasympathetic) जो विश्राम अवस्था में क्रियाएँ सामान्य करता है। सहानुभूति तंत्र हृदय गति बढ़ाता है, जबकि परासहानुभूति तंत्र इसे घटाता है। मेरुरज्जु प्रतिवर्ती क्रियाओं का केंद्र होने के कारण कई क्रियाएँ मस्तिष्क के आदेश के बिना भी तेजी से होती हैं। तंत्रिका तंत्र के समन्वय से शरीर पर्यावरणीय परिवर्तनों के प्रति तीव्र प्रतिक्रिया करता है। मस्तिष्क और मेरुरज्जु सुरक्षात्मक झिल्लियों (मेनिन्जेस) तथा मस्तिष्कीय मेरु द्रव (cerebrospinal fluid) द्वारा सुरक्षित रहते हैं। इस प्रकार तंत्रिकीय नियंत्रण शरीर की सभी क्रियाओं का तीव्र और सटीक समन्वय करता है।

सामान्य गलतियाँ

  1. गलत धारणा: विश्राम विभव +40 mV होता है - विश्राम विभव -70 mV होता है, +40 mV क्रियाशील विभव है।
  2. गलत धारणा: अक्षतंतु आवेग को कोशिका शरीर की ओर ले जाता है - अक्षतंतु आवेग को कोशिका शरीर से दूर ले जाता है।
  3. गलत धारणा: डेन्ड्राइट आवेग संचरित करते हैं - डेन्ड्राइट आवेग ग्रहण करते हैं।
  4. गलत धारणा: सिनैप्स संचरण दोतरफा होता है - यह एकतरफा होता है।
  5. गलत धारणा: संतुलन का केंद्र मेडुला है - सेरिबेलम है।
  6. गलत धारणा: कपाल तंत्रिकाएँ 31 जोड़ी होती हैं - 12 जोड़ी होती हैं, मेरु तंत्रिकाएँ 31 जोड़ी।
  7. गलत धारणा: पुनर्ध्रुवण में Na+ अंदर आता है - विध्रुवण में Na+ अंदर आता है, पुनर्ध्रुवण में K+ बाहर जाता है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. न्यूरॉन के भागों और उनके कार्यों का क्रम याद रखें।
  2. विश्राम विभव (-70 mV) और क्रियाशील विभव (+40 mV) याद रखें।
  3. मस्तिष्क के तीन भागों और उनके कार्यों की सूची बनाएँ।
  4. प्रतिवर्ती क्रिया के मार्ग को याद रखें।
  5. CNS और PNS के घटक याद रखें।
  6. सिनैप्स और न्यूरोट्रांसमीटर की अवधारणा समझें।
  7. कपाल (12) और मेरु (31) तंत्रिकाओं की संख्या याद रखें।

निष्कर्ष

इस अध्याय में हमने तंत्रिका तंत्र की संरचना और कार्य का अध्ययन किया। न्यूरॉन की संरचना, तंत्रिका आवेग का संचरण, मस्तिष्क और मेरुरज्जु की संरचना तथा प्रतिवर्ती क्रियाएँ इस अध्याय की प्रमुख अवधारणाएँ हैं। तंत्रिका तंत्र शरीर के सभी अंगों की क्रियाओं का तीव्र समन्वय करता है, जो जीवन के लिए आवश्यक है।