Comprehensive theory, key formulas, diagrams, and memory aids for तंत्रिकीय नियंत्रण एवं समन्वय.
शरीर के विभिन्न अंगों की क्रियाओं का समन्वय तंत्रिका तंत्र और अंतःस्रावी तंत्र द्वारा होता है। तंत्रिका तंत्र (Nervous System) विद्युत-रासायनिक आवेगों द्वारा सूचनाओं का संचरण करता है। तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई न्यूरॉन है। इस अध्याय में हम न्यूरॉन की संरचना, तंत्रिका आवेग का संचरण, मस्तिष्क और मेरुरज्जु की संरचना तथा प्रतिवर्ती क्रियाओं का अध्ययन करेंगे।
न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की इकाई है। इसके प्रमुख भाग:
दो न्यूरॉनों के बीच का संधि स्थल सिनैप्स कहलाता है। यहाँ रासायनिक संवाहक (न्यूरोट्रांसमीटर) जैसे एसिटाइलकोलीन आवेग को अगले न्यूरॉन तक पहुँचाते हैं। सिनैप्स का संक्रमण एकतरफा होता है।
विश्राम अवस्था में न्यूरॉन की झिल्ली के बाहर Na⁺ अधिक और अंदर K⁺ अधिक होता है। झिल्ली का आंतरिक भाग बाहर की तुलना में ऋणात्मक होता है। विश्राम विभव लगभग -70 mV होता है। यह Na⁺-K⁺ पंप द्वारा बनाए रखा जाता है।
जब उत्तेजना होती है, Na⁺ चैनल खुलते हैं और Na⁺ अंदर आता है, जिससे विध्रुवण (depolarization) होता है। झिल्ली विभव सकारात्मक हो जाता है (+40 mV)। इसके बाद K⁺ बाहर जाकर पुनर्ध्रुवण (repolarization) होता है। इस प्रकार विद्युत आवेग अक्षतंतु के साथ संचारित होता है। यह सब-या-कुछ-नहीं नियम का पालन करता है।
मानव तंत्रिका तंत्र दो भागों में विभाजित होता है:
मस्तिष्क को तीन मुख्य भागों में विभाजित किया गया है:
मेरुरज्जु मेरुदंड नाल में स्थित लंबी बेलनाकार संरचना है। यह CNS का भाग है। यह सुरक्षात्मक झिल्लियों (मेनिन्जेस) से घिरी होती है। मेरुरज्जु प्रतिवर्ती क्रियाओं का केंद्र है और मस्तिष्क से आवेगों को शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचाती है।
प्रतिवर्ती क्रिया त्वरित, स्वतः और अनैच्छिक प्रतिक्रिया है। उदाहरण - किसी गर्म वस्तु को छूने पर हाथ हटाना, घुटने की थपकी पर प्रतिक्रिया। प्रतिवर्ती क्रिया का मार्ग: संवेदी अंग → संवेदी न्यूरॉन → CNS (मेरुरज्जु) → चालक न्यूरॉन → प्रभावक अंग
सिनैप्स में आवेग न्यूरोट्रांसमीटर (जैसे एसिटाइलकोलीन) द्वारा संचरित होता है। यह एकतरफा होता है।
graph TD
A["तंत्रिका तंत्र"] --> B["CNS"]
A --> C["PNS"]
B --> B1["मस्तिष्क"]
B --> B2["मेरुरज्जु"]
C --> C1["12 कपाल तंत्रिकाएँ"]
C --> C2["31 मेरु तंत्रिकाएँ"]
A --> D["न्यूरॉन: डेन्ड्राइट, सोमा, अक्षतंतु"]
| भाग | कार्य |
|---|---|
| सेरेब्रम | सोच, स्मृति, बुद्धि |
| थैलेमस | संवेदी रिले |
| हाइपोथैलेमस | तापमान, भूख |
| सेरिबेलम | संतुलन |
| मेडुला | हृदय गति, श्वसन |
| भाग | कार्य |
|---|---|
| डेन्ड्राइट | आवेग ग्रहण |
| कोशिका शरीर | आवेग एकीकरण |
| अक्षतंतु | आवेग संचरण |
graph TD
A["तंत्रिकीय नियंत्रण एवं समन्वय"] --> B["न्यूरॉन: -70 mV विश्राम विभव"]
A --> C["आवेग संचरण: विध्रुवण → पुनर्ध्रुवण"]
A --> D["CNS: मस्तिष्क + मेरुरज्जु"]
A --> E["मस्तिष्क: अग्र/मध्य/पश्च"]
A --> F["प्रतिवर्ती क्रिया: स्वतः अनैच्छिक"]
परिधीय तंत्रिका तंत्र (PNS) में कपाल तंत्रिकाएँ (12 जोड़ी) और मेरु तंत्रिकाएँ (31 जोड़ी) होती हैं। मेरु तंत्रिकाएँ मेरुरज्जु से निकलकर शरीर के विभिन्न भागों में जाती हैं। प्रत्येक मेरु तंत्रिका एक संवेदी जड़ (पृष्ठीय) और एक चालक जड़ (उदर) से बनी होती है। तंत्रिका तंत्र का एक महत्वपूर्ण भाग स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (Autonomic Nervous System) है, जो अनैच्छिक क्रियाओं - हृदय गति, पाचन, श्वसन - को नियंत्रित करता है। स्वायत्त तंत्र के दो उपभाग होते हैं - सहानुभूति तंत्रिका तंत्र (sympathetic) जो तनाव में शरीर को सक्रिय करता है, और परासहानुभूति तंत्रिका तंत्र (parasympathetic) जो विश्राम अवस्था में क्रियाएँ सामान्य करता है। सहानुभूति तंत्र हृदय गति बढ़ाता है, जबकि परासहानुभूति तंत्र इसे घटाता है। मेरुरज्जु प्रतिवर्ती क्रियाओं का केंद्र होने के कारण कई क्रियाएँ मस्तिष्क के आदेश के बिना भी तेजी से होती हैं। तंत्रिका तंत्र के समन्वय से शरीर पर्यावरणीय परिवर्तनों के प्रति तीव्र प्रतिक्रिया करता है। मस्तिष्क और मेरुरज्जु सुरक्षात्मक झिल्लियों (मेनिन्जेस) तथा मस्तिष्कीय मेरु द्रव (cerebrospinal fluid) द्वारा सुरक्षित रहते हैं। इस प्रकार तंत्रिकीय नियंत्रण शरीर की सभी क्रियाओं का तीव्र और सटीक समन्वय करता है।
इस अध्याय में हमने तंत्रिका तंत्र की संरचना और कार्य का अध्ययन किया। न्यूरॉन की संरचना, तंत्रिका आवेग का संचरण, मस्तिष्क और मेरुरज्जु की संरचना तथा प्रतिवर्ती क्रियाएँ इस अध्याय की प्रमुख अवधारणाएँ हैं। तंत्रिका तंत्र शरीर के सभी अंगों की क्रियाओं का तीव्र समन्वय करता है, जो जीवन के लिए आवश्यक है।