Comprehensive theory, key formulas, diagrams, and memory aids for वनस्पति जगत.
वनस्पति जगत (Kingdom Plantae) में बहुकोशिकीय यूकैरियोटिक स्वपोषी पादपों को सम्मिलित किया जाता है। इन पादपों की कोशिका भित्ति सेल्यूलोज से बनी होती है। पादपों में प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन का निर्माण होता है। वनस्पति जगत का वर्गीकरण मुख्यतः निम्नलिखित विशेषताओं के आधार पर किया गया है - शरीर की रचना, संवहनी ऊतकों की उपस्थिति या अनुपस्थिति, बीजों का निर्माण, बीजों का ढकना या न ढकना। पादपों का अध्ययन करने वाले जीवविज्ञानी को वनस्पतिशास्त्री (Botanist) कहते हैं।
वनस्पति जगत को पाँच प्रमुख समूहों में विभाजित किया गया है: - थैलोफाइटा (Thallophyta) - ब्रायोफाइटा (Bryophyta) - टेरिडोफाइटा (Pteridophyta) - जिम्नोस्पर्मे (Gymnosperms) - एंजियोस्पर्मे (Angiosperms)
थैलोफाइटा पादप जगत के सबसे सरल बहुकोशिकीय पादप हैं। इन्हें शैवाल (Algae) भी कहा जाता है। इनमें शरीर को जड़, तना और पत्ती में विभेदित नहीं किया जा सकता। इनका शरीर थैलस (Thallus) कहलाता है। थैलोफाइटा को निम्न तीन मुख्य समूहों में बाँटा गया है:
ब्रायोफाइटा को पादप जगत का 'उभयचर' (Amphibians of plant kingdom) कहा जाता है, क्योंकि ये जल की उपस्थिति में ही प्रजनन कर सकते हैं, परंतु शेष क्रियाओं के लिए भूमि पर रहते हैं। ये सामान्यतः आर्द्र स्थानों में पाए जाते हैं। इनमें संवहनी ऊतक (जाइलम और फ्लोएम) नहीं पाए जाते। इनका मुख्य पादप शरीर युग्मकोद्भिद् (Gametophyte) होता है। ये भूमि पर पाए जाने वाले सबसे प्राचीन पादप माने जाते हैं। प्रमुख उदाहरण हैं - मार्केंशिया, रिक्शिया, पेलिया (लिवरवर्ट), फ्यूनेरिया, स्पैगनम (मॉस)।
इनका पादप शरीर थैलस रूपी होता है। उदाहरण - मार्केंशिया, रिक्शिया।
इनमें काई (प्रोटोनेमा) नामक प्रारंभिक अवस्था पाई जाती है। प्रमुख उदाहरण - फ्यूनेरिया, स्पैगनम, पॉलीट्रिकम। स्पैगनम (पीट मॉस) का उपयोग पीट निर्माण में होता है।
टेरिडोफाइटा भूमि पर पाए जाने वाले सबसे पहले संवहनी पादप हैं। इनमें संवहनी ऊतक (जाइलम और फ्लोएम) उपस्थित होते हैं। इनके मुख्य पादप शरीर को जड़, तना और पत्तियों में विभेदित किया जा सकता है। इनमें बीज का निर्माण नहीं होता। प्रजनन बीजाणुओं द्वारा होता है। इन्हें 'सीलिंग प्लांट्स' (Seedless vascular plants) भी कहा जाता है। मुख्य शरीर बीजाणुद्भिद् (Sporophyte) होता है। प्रमुख उदाहरण हैं - टेरिस (फर्न), सेलाजिनेला, इक्विसीटम (हॉर्सटेल), साइकस प्लांट।
जिम्नोस्पर्मे बीज धारण करने वाले पादप हैं, जिनमें बीज ढके हुए नहीं होते। अर्थात इनमें फल का निर्माण नहीं होता, बीज नग्न होते हैं। ये सदाबहार वृक्ष होते हैं। इनमें संवहनी ऊतक अच्छी तरह विकसित होते हैं। जिम्नोस्पर्मे के उदाहरण हैं - साइकस, पाइनस (पाइन), सीड्रस (देवदार), एबीज़, टैक्सस, जिन्कगो, एफेड्रा। साइकस का प्रमुख उदाहरण है, जिसमें ताड़ के समान शरीर होता है। जिम्नोस्पर्मे में बीज बीजाणु पत्तियों (स्पोरोफिल) पर स्थित होते हैं।
एंजियोस्पर्मे पादप जगत के सबसे उन्नत पादप हैं। इन्हें 'पुष्पीय पादप' (Flowering plants) कहा जाता है। इनमें बीज फल के अंदर बंद होते हैं। एंजियोस्पर्मे में पुष्प, फल और बीज का निर्माण होता है। इन्हें दो प्रमुख समूहों में बाँटा गया है:
पादपों में पीढ़ियों का एकांतरण (Alternation of generations) पाया जाता है। युग्मकोद्भिद् (haploid gametophyte) और बीजाणुद्भिद् (diploid sporophyte) एक-दूसरे के साथ बारी-बारी से आते हैं। जीवन चक्र के विभिन्न प्रकार:
graph TD
A["वनस्पति जगत"] --> B["थैलोफाइटा"]
A --> C["ब्रायोफाइटा"]
A --> D["टेरिडोफाइटा"]
A --> E["जिम्नोस्पर्मे"]
A --> F["एंजियोस्पर्मे"]
B --> B1["हरे/भूरे/लाल शैवाल - जल में"]
C --> C1["उभयचर - संवहनी ऊतक नहीं"]
D --> D1["संवहनी - बीज रहित"]
E --> E1["बीज - नग्न, फल नहीं"]
F --> F1["बीज - फल में ढके हुए"]
| समूह | संवहनी ऊतक | बीज | फल | प्रमुख उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| थैलोफाइटा | अनुपस्थित | नहीं | नहीं | स्पाइरोगाइरा, लैमिनेरिया |
| ब्रायोफाइटा | अनुपस्थित | नहीं | नहीं | मार्केंशिया, फ्यूनेरिया |
| टेरिडोफाइटा | उपस्थित | नहीं | नहीं | टेरिस, सेलाजिनेला |
| जिम्नोस्पर्मे | उपस्थित | नग्न | नहीं | साइकस, पाइनस |
| एंजियोस्पर्मे | उपस्थित | ढके हुए | उपस्थित | गेहूँ, आम |
| समूह | वर्णक | संग्रहीत भोजन | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| क्लोरोफाइसी | क्लोरोफिल a, b | स्टार्च | स्पाइरोगाइरा, वॉलवोक्स |
| फियोफाइसी | क्लोरोफिल a, c + फूकोजैन्थिन | मैनिटोल, लैमिनेरिन | लैमिनेरिया, सरगासम |
| रोडोफाइसी | क्लोरोफिल a, d + फाइकोइरिथ्रिन | फ्लोरिडियन स्टार्च | पॉलिसाइफोनिया, पोरफाइरा |
graph TD
A["वनस्पति जगत (Plant Kingdom)"] --> B["शैवाल (थैलोफाइटा)"]
B --> B1["क्लोरोफाइसी: स्टार्च, सेल्यूलोज भित्ति"]
B --> B2["फियोफाइसी: मैनिटोल, फूकोजैन्थिन"]
B --> B3["रोडोफाइसी: फ्लोरिडियन स्टार्च"]
A --> C["ब्रायोफाइटा: उभयचर, गैमेटोफाइट प्रमुख"]
C --> C1["लिवरवर्ट्स: मार्केंशिया"]
C --> C2["मॉस: फ्यूनेरिया, स्पैगनम"]
A --> D["टेरिडोफाइटा: संवहनी, बीज रहित"]
A --> E["जिम्नोस्पर्मे: नग्न बीज"]
A --> F["एंजियोस्पर्मे: फल में बीज"]
F --> F1["एकबीजपत्री: समांतर शिरा विन्यास"]
F --> F2["द्विबीजपत्री: जालिका शिरा विन्यास"]
इस अध्याय में हमने वनस्पति जगत के पाँच प्रमुख समूहों - थैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा, जिम्नोस्पर्मे और एंजियोस्पर्मे - का विस्तृत अध्ययन किया। हमने शैवालों के तीन प्रकार, ब्रायोफाइटा की उभयचर प्रकृति, टेरिडोफाइटा की संवहनी रचना, जिम्नोस्पर्मे के नग्न बीज और एंजियोस्पर्मे के फल-युक्त बीजों के बारे में जाना। पादपों का जीवन चक्र और पीढ़ियों का एकांतरण भी इस अध्याय का महत्वपूर्ण भाग है। यह अध्याय आगे की आकारिकी और शारीर के अध्ययन का आधार बनता है।