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1. परिचय

पर्यावरणीय रसायन वह शाखा है जो पर्यावरण में होने वाली रासायनिक तथा जैव-रासायनिक प्रक्रियाओं, प्रदूषकों के स्रोतों, उनके प्रभावों तथा नियंत्रण के उपायों का अध्ययन करती है। पर्यावरण के तीन मुख्य घटक हैं - वायुमंडल (जलमंडल, स्थलमंडल तथा जैवमंडल सहित)। इस अध्याय में हम वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण तथा औद्योगिक अपशिष्ट के कारण, प्रभाव तथा नियंत्रण, और हरित रसायन की अवधारणा का अध्ययन करेंगे। औद्योगिक विकास तथा मानवीय गतिविधियों के कारण प्रदूषण आधुनिक विश्व की प्रमुख समस्या है, जिसके समाधान में रसायनज्ञ महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

2. वायु प्रदूषण

वायु प्रदूषण वायुमंडल में ऐसे पदार्थों (गैसों, कणों) की उपस्थिति है जो मानव तथा अन्य जीवों के स्वास्थ्य को हानि पहुँचाते हैं। प्रमुख वायु प्रदूषक:

प्रदूषकों का वर्गीकरण: प्राथमिक प्रदूषक (सीधे स्रोत से निकलते हैं, जैसे CO, SO2) तथा द्वितीयक प्रदूषक (वायु में रासायनिक अभिक्रियाओं से बनते हैं, जैसे ओजोन, PAN - पेरोक्सीएसीटिल नाइट्रेट)।

3. अम्ल वर्षा तथा वैश्विक तापन

अम्ल वर्षा: वायुमंडल में SO2 तथा NO2 जल के साथ अभिक्रिया कर क्रमशः सल्फ्यूरस/सल्फ्यूरिक अम्ल तथा नाइट्रस/नाइट्रिक अम्ल बनाते हैं। इससे वर्षा जल अम्लीय (pH < 5.6) हो जाता है। अम्ल वर्षा के प्रभाव - भवनों एवं संगमरमर का क्षरण, मृदा एवं जल की अम्लता, वनस्पति एवं जलीय जीवन की क्षति। ताजमहल जैसे संगमरमर भवनों के क्षरण का कारण अम्ल वर्षा है।

वैश्विक तापन (ग्रीनहाउस प्रभाव): ग्रीनहाउस गैसें (CO2, CH4, N2O, जलवाष्प) पृथ्वी से परावर्तित अवरक्त विकिरण को अवशोषित कर ताप को बढ़ाती हैं। CO2 का वायुमंडलीय सांद्रता बढ़ने से पृथ्वी का औसत ताप बढ़ता जा रहा है। इससे हिमनदों का पिघलना, समुद्र जल स्तर में वृद्धि तथा जलवायु परिवर्तन होता है। क्योटो प्रोटोकॉल तथा पेरिस समझौते जैसे अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को नियंत्रित किया जा रहा है।

4. ओजोन परत का क्षय

समताप मंडल में उपस्थित ओजोन परत सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (UV) विकिरण को अवशोषित करती है। ओजोन का निर्माण:

$$O_2 \xrightarrow{UV} O + O \quad \text{तथा} \quad O_2 + O \rightarrow O_3$$

ओजोन परत का क्षय मुख्यतः क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) के कारण होता है। CFC से निकला क्लोरीन परमाणु ओजोन के अपघटन का उत्प्रेरक है:

$$Cl + O_3 \rightarrow ClO + O_2$$

$$ClO + O \rightarrow Cl + O_2$$

एक क्लोरीन परमाणु हजारों ओजोन अणुओं को नष्ट कर सकता है। ओजोन छिद्र (ओज़ोन होल) का सर्वाधिक प्रभाव अंटार्कटिका के ऊपर देखा गया। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987) के अंतर्गत CFC के उत्पादन पर प्रतिबंध लगाया गया। ओजोन के नाश में उत्प्रेरकों में NO भी महत्वपूर्ण है, जो वाहनों तथा विमानों के उत्सर्जन से मिलता है।

5. जल प्रदूषण

जल प्रदूषण जल निकायों में ऐसे पदार्थों की उपस्थिति है जो जल को उपयोग के लिए अनुपयुक्त बनाते हैं। जल प्रदूषकों के प्रमुख स्रोत - औद्योगिक अपशिष्ट, कृषि रसायन (उर्वरक, कीटनाशक), घरेलू सीवेज, तथा तापीय प्रदूषण।

जल प्रदूषण के मापदंड: - BOD (बायोलॉजिकल/बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड): जल में कार्बनिक पदार्थों को ऑक्सीकृत करने के लिए सूक्ष्मजीवों द्वारा आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा। उच्च BOD = अधिक कार्बनिक प्रदूषण। - COD (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड): रासायनिक ऑक्सीकरण में आवश्यक ऑक्सीजन। - जल में घुली ऑक्सीजन (DO): जलीय जीवन के लिए आवश्यक; अधिक प्रदूषण पर घटती है।

प्रमुख जल प्रदूषक: सीसा, पारा, आर्सेनिक जैसी भारी धातुएँ (जैसे मीनामाता रोग - पारा), नाइट्रेट (नीला बेबी सिंड्रोम), फॉस्फेट (यूट्रोफिकेशन), तथा रोगजनक सूक्ष्मजीव।

यूट्रोफिकेशन: जल निकायों में नाइट्रोजन-फॉस्फोरस युक्त उर्वरकों के जाने से शैवालों की अत्यधिक वृद्धि, जिससे ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और जलीय जीवन नष्ट होता है।

जल का उपचार: जल शोधन संयंत्र में अवसादन, निस्पंदन, जीवाणुनाशन (क्लोरीनीकरण/ओज़ोनीकरण) द्वारा जल को पीने योग्य बनाया जाता है। फ्लोराइड की उचित मात्रा दाँतों के लिए लाभकारी है, किंतु अधिकता से फ्लोरोसिस होता है।

6. मृदा प्रदूषण तथा औद्योगिक अपशिष्ट

मृदा प्रदूषण: मृदा में हानिकारक पदार्थों (कीटनाशक, भारी धातुएँ, रासायनिक अपशिष्ट) का संचय। कृषि रसायनों का अंधाधुंध प्रयोग मृदा की उर्वरता नष्ट करता है। डीडीटी जैसे ऑर्गेनोक्लोरीन कीटनाशक दीर्घकाल तक पर्यावरण में बने रहते हैं तथा खाद्य शृंखला में संचित (बायोमैग्नीफिकेशन) होते हैं।

बायोमैग्नीफिकेशन: जैविक वृद्धि। जहरीले पदार्थ खाद्य शृंखला के प्रत्येक स्तर पर बढ़ते जाते हैं, जिससे उच्च स्तर के जीवों (मानव सहित) में इनकी सांद्रता अधिकतम होती है।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन: कचरे का वर्गीकरण, पुनर्चक्रण, कंपोस्टिंग तथा सुरक्षित निपटान। जैव-निम्नीकरणीय तथा अजैव-निम्नीकरणीय कचरे का पृथक्करण आवश्यक है। प्लास्टिक का पुनर्चक्रण तथा कम उपयोग पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।

7. हरित रसायन (Green Chemistry)

हरित रसायन उन रासायनिक प्रक्रियाओं का डिज़ाइन है जो प्रदूषकों के उत्पादन को ही रोकते हैं, न कि केवल उन्हें नियंत्रित करते हैं। इसके मूल सिद्धांत:

हरित रसायन का प्रसिद्ध उदाहरण - कार्बन डाइऑक्साइड के स्थान पर सुपरक्रिटिकल CO2 का विलायक के रूप में उपयोग, तथा ब्लीचिंग में पर्यावरण-अनुकूल प्रक्रियाएँ। हरित रसायन के सिद्धांतों से उद्योग प्रदूषण को स्रोत पर ही समाप्त कर सकते हैं।

graph TD A["पर्यावरणीय रसायन"] --> B["वायु प्रदूषण"] A --> C["जल प्रदूषण"] A --> D["मृदा प्रदूषण"] A --> E["वैश्विक समस्याएँ"] B --> B1["CO, SO2, NOx, CFC"] C --> C1["भारी धातुएँ, सीवेज"] C --> C2["BOD, COD, DO"] D --> D1["कीटनाशक, बायोमैग्नीफिकेशन"] E --> E1["अम्ल वर्षा, ग्रीनहाउस, ओजोन क्षय"] A --> F["हरित रसायन"] F --> F1["स्रोत पर प्रदूषण रोकना"]

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

प्रदूषक स्रोत प्रभाव
CO अपूर्ण दहन ऑक्सीजन परिवहन अवरोध
SO2 कोयला/तेल दहन अम्ल वर्षा
NOx वाहन, उच्च ताप दहन अम्ल वर्षा, स्मॉग
CFC रेफ्रिजरेटर, AC ओजोन क्षय
पारा औद्योगिक मीनामाता रोग
नाइट्रेट उर्वरक नीला बेबी सिंड्रोम
जल मापदंड अर्थ उच्च मान का अर्थ
BOD सूक्ष्मजीवों द्वारा आवश्यक O2 अधिक कार्बनिक प्रदूषण
COD रासायनिक O2 मांग अधिक रासायनिक प्रदूषण
DO घुली ऑक्सीजन स्वच्छ जल

माइंड मैप

graph TD A["वैश्विक पर्यावरण समस्याएँ"] --> B["अम्ल वर्षा"] B --> B1["SO2 + NO2 → अम्ल"] B --> B2["संगमरमर क्षरण"] A --> C["वैश्विक तापन"] C --> C1["CO2, CH4, N2O"] C --> C2["जलवायु परिवर्तन"] A --> D["ओजोन क्षय"] D --> D1["CFC से Cl उत्प्रेरक"] D --> D2["UV विकिरण का बढ़ना"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

अम्ल वर्षा का निर्माण कारखाना SO2, NO2 उत्सर्जन वायुमंडल में अभिक्रिया अम्लीय वर्षा (pH < 5.6) H2SO4, HNO3 वर्षा संगमरमर क्षरण जलीय जीवन की हानि स्वर्ण नियम अम्ल वर्षा SO2 तथा NO2 के जल से संयोग से बनती है।
ओजोन क्षय की क्रियाविधि CFC CCl2F2 UV विकिरण से Cl मुक्त होता है Cl + O3 → ClO + O2 ओजोन का विनाश ClO + O → Cl + O2 Cl पुनः मुक्त एक Cl परमाणु हजारों O3 अणुओं को नष्ट कर सकता है परिणाम: UV विकिरण का अधिक आना समाधान: मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987) Golden Rule क्लोरीन ओजोन विनाश में उत्प्रेरक की तरह कार्य करता है - उपभुक्त नहीं होता।

सामान्य गलतियाँ

  1. प्राथमिक तथा द्वितीयक प्रदूषक: O3 तथा PAN द्वितीयक प्रदूषक हैं (वायु में बनते हैं), जबकि CO, SO2 प्राथमिक।
  2. अम्ल वर्षा की परिभाषा: सामान्य वर्षा जल थोड़ा अम्लीय (pH 5.6) होता है, अतः pH < 5.6 को ही अम्ल वर्षा माना जाता है।
  3. BOD तथा DO: प्रदूषित जल में BOD अधिक तथा DO कम होता है। इन्हें उल्टा लिखना आम गलती है।
  4. CO की प्रकृति: CO रंगहीन तथा गंधहीन होती है, जिससे इसकी पहचान कठिन होती है - इसे रंगीन नहीं मानना चाहिए।
  5. CFC बनाम CO2: ओजोन क्षय CFC से होता है, जबकि वैश्विक तापन CO2/CH4 से।
  6. मीनामाता रोग का कारण: यह पारा (Hg) विषाक्तता से होता है, कैडमियम से नहीं (कैडमियम से इटाई-इटाई रोग होता है)।
  7. ओजोन की दोहरी भूमिका: समताप मंडल में ओजोन रक्षक है (UV अवशोषण), परंतु सतह स्तर पर यह प्रदूषक है (धुंध का घटक)।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. प्रत्येक प्रदूषक के स्रोत तथा प्रभाव की तालिका बनाकर याद करें।
  2. ओजोन क्षय की क्रियाविधि (Cl उत्प्रेरक चक्र) तथा मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल लिखने के प्रश्नों का अभ्यास करें।
  3. BOD, COD, DO की परिभाषाओं तथा उनके संबंधों (प्रदूषण से) को स्पष्ट रखें।
  4. ग्रीनहाउस गैसों की सूची तथा उनके स्रोत याद रखें; CO2 सबसे प्रमुख है।
  5. हरित रसायन के सिद्धांत तथा 'प्रदूषण स्रोत पर रोकने' की अवधारणा को समझें।
  6. जल प्रदूषण के रोग (मीनामाता, नीला बेबी) तथा उनके कारण जोड़कर याद करें।
  7. अम्ल वर्षा के संगमरमर क्षरण (ताजमहल) उदाहरण के साथ उत्तर दें।

निष्कर्ष

इस अध्याय में हमने पर्यावरणीय रसायन का अध्ययन किया, जो वायु, जल तथा मृदा के प्रदूषण के स्रोतों, प्रभावों तथा नियंत्रण से संबंधित है। CO, SO2, NOx तथा CFC जैसे वायु प्रदूषक अम्ल वर्षा, वैश्विक तापन तथा ओजोन क्षय जैसी वैश्विक समस्याएँ उत्पन्न करते हैं। जल प्रदूषण के मापदंड BOD, COD तथा DO से जल की गुणवत्ता का आकलन होता है। मृदा प्रदूषण तथा बायोमैग्नीफिकेशन से खाद्य शृंखला की सुरक्षा प्रभावित होती है। हरित रसायन प्रदूषण को स्रोत पर ही रोकने की नई दिशा प्रस्तुत करता है। पर्यावरण संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रोटोकॉल (मॉन्ट्रियल, क्योटो, पेरिस) के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। यह ज्ञान विज्ञान तथा समाज के बीच संतुलन स्थापित करने में सहायक है।