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1. परिचय

हाइड्रोजन आवर्त सारणी का प्रथम तत्व है। इसका नाम हाइड्रोजन (Hydrogen) 'हाइड्रो' (जल) तथा 'जीन्स' (जन्मदाता) शब्दों से बना है, क्योंकि यह जल बनाता है। 1766 में हेनरी कैवेंडिश ने हाइड्रोजन की खोज की तथा लवाइजिए ने इसे तत्व का नाम दिया। हाइड्रोजन ब्रह्मांड में सर्वाधिक प्रचुर तत्व है, किंतु पृथ्वी पर यह मुक्त अवस्था में बहुत कम पाया जाता है। इसका परमाणु क्रमांक 1 तथा इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $1s^1$ है। अपने इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के कारण हाइड्रोजन को आवर्त सारणी में क्षार धातुओं के साथ रखा जाता है, किंतु इसके गुण हैलोजनों से भी मिलते-जुलते हैं, जिससे इसका स्थान विवादास्पद है। इस अध्याय में हम हाइड्रोजन की स्थिति, समस्थानिक, विधियाँ, जल, हाइड्रोजन पेरॉक्साइड तथा भारी जल का अध्ययन करेंगे।

2. हाइड्रोजन की स्थिति

हाइड्रोजन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $1s^1$ क्षार धातुओं जैसा है, किंतु यह क्षार धातुओं की तरह न तो इलेक्ट्रॉन आसानी से त्यागता है (आयनन एन्थैल्पी अधिक) और न ही हैलोजनों जैसा इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है। इसकी विद्युत-ऋणात्मकता (2.1) क्षार धातुओं से अधिक तथा हैलोजनों से कम है। इसलिए इसे समूह 1 या समूह 17 में निश्चित रूप से नहीं रखा जा सकता। अनेक विद्वान इसे स्वतंत्र समूह का तत्व मानते हैं।

हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक हैं - प्रोटियम (${}^1_1H$, 99.985%), ड्यूटेरियम (${}^2_1D$, 0.015%) तथा ट्राइटियम (${}^3_1T$, रेडियोधर्मी)। इनके भौतिक गुणों में आयनन एन्थैल्पी, गलनांक, क्वथनांक आदि में भिन्नता होती है। ट्राइटियम रेडियोधर्मी है तथा बीटा कण उत्सर्जित करता है।

3. हाइड्रोजन की विधियाँ

प्रयोगशाला विधि: जिंक तथा तनु सल्फ्यूरिक अम्ल की अभिक्रिया से हाइड्रोजन बनता है:

$$Zn + H_2SO_4 \rightarrow ZnSO_4 + H_2$$

वाणिज्यिक विधियाँ: हाइड्रोजन बोस्च विधि (जल-गैस से), लेन विधि (प्राकृतिक गैस के अपघटन से), तथा इलेक्ट्रॉलिसिस (जल के विद्युत अपघटन से) द्वारा बड़ी मात्रा में बनाया जाता है। औद्योगिक रूप से हाइड्रोजन का उपयोग अमोनिया (हैबर विधि), हाइड्रोजन पेरॉक्साइड, धातुओं के अपचयन तथा वनस्पति तेलों के हाइड्रोजनीकरण में होता है। उत्पादक गैस में हाइड्रोजन तथा कार्बन मोनोऑक्साइड होती है, जबकि जल-गैस में भी यही गैसें होती हैं, किंतु उनका अनुपात भिन्न होता है।

रासायनिक गुणधर्म: हाइड्रोजन ऑक्सीजन में जलकर जल बनाता है ($2H_2 + O_2 \rightarrow 2H_2O$), हैलोजनों से हैलोजन अम्ल बनाता है ($H_2 + Cl_2 \rightarrow 2HCl$), तथा कुछ धातुओं के साथ मिलकर हाइड्राइड बनाता है ($2Na + H_2 \rightarrow 2NaH$)। हाइड्रोजन एक अपचायक है जो धातु ऑक्साइडों को अपचित करता है, जैसे $CuO + H_2 \rightarrow Cu + H_2O$।

4. हाइड्राइडों का वर्गीकरण

तत्वों के साथ हाइड्रोजन के यौगिकों को हाइड्राइड कहते हैं। तीन प्रकार के होते हैं:

आयनिक (लवण जैसे) हाइड्राइड: s-ब्लॉक तत्वों (क्षार तथा क्षारीय मृदा धातु) के हाइड्राइड। इनमें $H^-$ आयन होता है। उदाहरण - $NaH$, $CaH_2$। ये उच्च गलनांक वाले, जल से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन मुक्त करने वाले तथा विद्युत का चालन करने वाले होते हैं। $NaH + H_2O \rightarrow NaOH + H_2$।

सहसंयोजक हाइड्राइड: p-ब्लॉक तत्वों के हाइड्राइड। इनमें सहसंयोजक आबंध होता है। उदाहरण - $CH_4$, $NH_3$, $H_2O$, $HCl$। ये गैसीय या द्रव होते हैं।

धात्विक (अंतरालीय) हाइड्राइड: d-ब्लॉक तथा f-ब्लॉक तत्वों के हाइड्राइड। इनमें हाइड्रोजन के छोटे परमाणु धातु जालक के अंतरालों (Interstices) में प्रवेश करते हैं। ये गैर-स्टाइकियोमित्रिक होते हैं, जैसे $TiH_{1.7}$। धात्विक हाइड्राइड का उपयोग हाइड्रोजन के भंडारण में होता है।

हाइड्रोजन बंधन का भी इस अध्याय में विशेष महत्व है। जब हाइड्रोजन फ्लोरीन, ऑक्सीजन या नाइट्रोजन जैसे अधिक विद्युत-ऋणात्मक परमाणु से जुड़ा होता है, तो वह दूसरे विद्युत-ऋणात्मक परमाणु के साथ द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण द्वारा हाइड्रोजन बंध बनाता है। अंतर-आण्विक हाइड्रोजन बंध (जैसे जल में) से अणु एकत्रित रहते हैं तथा अंतरा-आण्विक हाइड्रोजन बंध (जैसे सैलिसिलिक अम्ल में) अणु के भीतर बनता है। हाइड्रोजन बंध के कारण जल का क्वथनांक अत्यधिक उच्च होता है।

5. जल (Water)

जल पृथ्वी पर सबसे प्रचुर यौगिक है। जल का अणुसूत्र $H_2O$ तथा संकरण sp³ है, जिसके कारण इसका आबंध कोण 104.5° होता है। जल के भौतिक गुण:

जल की रासायनिक क्रियाएँ: जल धातुओं के साथ अभिक्रिया कर हाइड्रोजन मुक्त करता है, ऑक्साइडों से अम्ल या क्षार बनाता है ($CaO + H_2O \rightarrow Ca(OH)_2$), तथा अनेक लवणों के साथ जलयोजित यौगिक बनाता है ($CuSO_4 + 5H_2O \rightarrow CuSO_4 \cdot 5H_2O$)। जल में स्व-आयनन होता है जो साम्यावस्था के अध्याय में अध्ययन किया गया है।

कठोर जल: जल जिसमें कैल्शियम तथा मैग्नीशियम के घुलनशील लवण (बाइकार्बोनेट, क्लोराइड, सल्फेट) अधिक मात्रा में हों, कठोर जल कहलाता है। अस्थायी कठोरता बाइकार्बोनेटों से तथा स्थायी कठोरता क्लोराइड एवं सल्फेटों से होती है। कठोर जल साबुन के साथ अविलेय पदार्थ बनाता है तथा बॉयलरों में स्केल जमा करता है। जल की कठोरता दूर करने के लिए उबालना (अस्थायी), कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड, वाशिंग सोडा ($Na_2CO_3$) तथा जिओलाइट/आयन-विनिमय विधि का प्रयोग होता है। पर्मुटिट (सोडियम एल्युमिनोसिलिकेट) विधि भी कठोरता दूर करती है।

6. भारी जल (D2O)

भारी जल ($D_2O$) ड्यूटेरियम का ऑक्साइड है। यह जल के विद्युत अपघटन द्वारा प्राप्त होता है। भारी जल का गलनांक (3.82°C) तथा क्वथनांक (101.42°C) सामान्य जल से अधिक होता है। भारी जल का उपयोग:

ड्यूटेरियम तथा प्रोटियम के रासायनिक गुण समान होते हैं, किंतु प्रतिक्रियाओं की दर में भिन्नता होती है।

7. हाइड्रोजन पेरॉक्साइड (H2O2)

हाइड्रोजन पेरॉक्साइड एक असंगत यौगिक है जो बेरियम पेरॉक्साइड तथा तनु सल्फ्यूरिक अम्ल की अभिक्रिया से प्राप्त होता है:

$$BaO_2 + H_2SO_4 \rightarrow BaSO_4 + H_2O_2$$

इसका अणुसूत्र $H_2O_2$ तथा ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या -1 है। यह एक दुर्बल अम्ल है। $H_2O_2$ ऑक्सीकारक तथा अपचायक दोनों रूपों में व्यवहार करता है (असमानुपातन)। यह कागज, रेशम को विरंजित (Bleaching) करता है, संक्रमण विरोधी (एंटीसेप्टिक) के रूप में, तथा रॉकेट ईंधन के ऑक्सीकारक के रूप में प्रयुक्त होता है। $H_2O_2$ प्रकाश में विघटित हो जाता है:

$$2H_2O_2 \rightarrow 2H_2O + O_2$$

इसलिए इसे गहरे रंग की बोतल में रखा जाता है। $H_2O_2$ की सांद्रता आयतन द्वारा व्यक्त की जाती है, जैसे 30 आयतन $H_2O_2$।

8. हाइड्रोजन के औद्योगिक एवं अन्य उपयोग

हाइड्रोजन का उपयोग अमोनिया तथा नाइट्रिक अम्ल के निर्माण, वनस्पति तेलों के हाइड्रोजनीकरण (मार्जरीन), धातुकर्म में धातु ऑक्साइडों के अपचयन, ऑक्सी-हाइड्रोजन ज्वाला (वेल्डिंग) तथा रॉकेट ईंधन के रूप में होता है। हाइड्रोजन को स्वच्छ ईंधन माना जाता है क्योंकि इसके दहन से केवल जल बनता है। भविष्य में हाइड्रोजन ईंधन कोशिकाओं के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन की संभावना है, जिसमें हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन की अभिक्रिया से सीधे विद्युत उत्पन्न होती है और केवल जल उप-उत्पाद के रूप में बनता है।

graph TD A["हाइड्रोजन"] --> B["समस्थानिक"] B --> B1["प्रोटियम, ड्यूटेरियम, ट्राइटियम"] A --> C["हाइड्राइड"] C --> C1["आयनिक - NaH, CaH2"] C --> C2["सहसंयोजक - CH4, NH3"] C --> C3["धात्विक - TiH1.7"] A --> D["जल"] D --> D1["कठोर जल तथा उपचार"] D --> D2["भारी जल D2O"] A --> E["हाइड्रोजन पेरॉक्साइड"] E --> E1["ऑक्सीकारक + अपचायक"] A --> F["उपयोग"] F --> F1["अमोनिया, हाइड्रोजनीकरण, ईंधन"]

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

हाइड्राइड प्रकार बनाने वाले तत्व उदाहरण प्रकृति
आयनिक s-ब्लॉक NaH, CaH2 लवण जैसे, उच्च गलनांक
सहसंयोजक p-ब्लॉक CH4, NH3, H2O गैस/द्रव
धात्विक d, f-ब्लॉक TiH1.7 अंतरालीय, गैर-स्टाइकियोमित्रिक
समस्थानिक द्रव्यमान संख्या प्रचुरता विशेषता
प्रोटियम 1 99.985% सामान्य हाइड्रोजन
ड्यूटेरियम 2 0.015% भारी जल बनाता है
ट्राइटियम 3 अल्प रेडियोधर्मी

माइंड मैप

graph TD A["जल की कठोरता"] --> B["अस्थायी - बाइकार्बोनेट"] B --> B1["उबालकर दूर"] A --> C["स्थायी - क्लोराइड, सल्फेट"] C --> C1["सोडा, जिओलाइट से दूर"] A --> D["प्रभाव"] D --> D1["साबुन का अपव्यय"] D --> D2["बॉयलर स्केल"] A --> E["उपचार विधियाँ"] E --> E1["उबालना, Na2CO3, आयन-विनिमय"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

हाइड्रोजन परमाणु तथा समस्थानिक p⁺ प्रोटियम (¹H) 1 प्रोटॉन p⁺ n⁰ ड्यूटेरियम (²H / D) 1 प्रोटॉन + 1 न्यूट्रॉन p⁺ n⁰ n⁰ ट्राइटियम (³H / T) 1 प्रोटॉन + 2 न्यूट्रॉन ट्राइटियम रेडियोधर्मी है (β- उत्सर्जक) स्वर्ण नियम समस्थानिकों में प्रोटॉन संख्या समान, न्यूट्रॉन संख्या भिन्न होती है।
जल की कठोरता तथा उपचार कठोर जल अस्थायी कठोरता Ca(HCO3)2, Mg(HCO3)2 उबालने से दूर होती है Ca(HCO3)2 → CaCO3 + H2O + CO2 स्थायी कठोरता CaCl2, CaSO4, MgCl2 उबालने से दूर नहीं होती Na2CO3 या जिओलाइट से उपचार विधियाँ उबालना, Ca(OH)2, Na2CO3, पर्मुटिट/जिओलाइट, आयन-विनिमय Golden Rule अस्थायी कठोरता उबालने से, स्थायी कठोरता रसायनों से दूर होती है।

सामान्य गलतियाँ

  1. हाइड्रोजन की स्थिति: हाइड्रोजन को केवल क्षार धातुओं का सदस्य नहीं मानना चाहिए; इसके गुण हैलोजनों से भी मिलते हैं।
  2. ड्यूटेरियम में न्यूट्रॉन: ड्यूटेरियम में 1 न्यूट्रॉन होता है, प्रोटियम में 0 तथा ट्राइटियम में 2।
  3. पेरॉक्साइड में O की ऑक्सीकरण संख्या: H2O2 में O = -1 होती है, जो दोनों ऑक्सीकारक व अपचायक व्यवहार का कारण है।
  4. जल में आबंध कोण: जल का आबंध कोण 104.5° है, 109.5° नहीं, क्योंकि दो अकेले युग्म होते हैं।
  5. H2O2 की सांद्रता: इसे आयतन से व्यक्त किया जाता है (जैसे 30 आयतन), न कि मोलरता से।
  6. धात्विक हाइड्राइड की स्टाइकियोमिति: ये गैर-स्टाइकियोमित्रिक होते हैं (जैसे TiH1.7), निश्चित अनुपात वाले नहीं।
  7. कठोरता में लवण: अस्थायी कठोरता बाइकार्बोनेटों से, स्थायी क्लोराइड/सल्फेटों से होती है - इन्हें परस्पर मिलाना गलत है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. समस्थानिकों के नाम, प्रोटॉन-न्यूट्रॉन संख्या तथा ट्राइटियम की रेडियोधर्मिता याद रखें।
  2. हाइड्राइडों के वर्गीकरण तथा उदाहरणों की तालिका बनाकर याद करें।
  3. H2O2 की तैयारी (BaO2 + H2SO4) तथा विरंजन के कारण वाले प्रश्नों का अभ्यास करें।
  4. जल की विशेषताएँ (हाइड्रोजन बंध, उच्च क्वथनांक, बर्फ का हल्का होना) समझकर याद करें।
  5. कठोरता दूर करने की विधियों को लवणों के प्रकार से जोड़कर याद करें।
  6. भारी जल के उपयोग (मंदक, अनुरेखक) को विशेष रूप से स्मरण रखें।
  7. हाइड्रोजन को स्वच्छ ईंधन क्यों कहा जाता है (दहन से केवल H2O) - यह प्रश्न अक्सर पूछा जाता है।

निष्कर्ष

इस अध्याय में हमने हाइड्रोजन का विस्तृत अध्ययन किया - इसकी स्थिति, तीन समस्थानिक, निर्माण की विधियाँ तथा रासायनिक गुणधर्म। हाइड्राइडों का आयनिक, सहसंयोजक तथा धात्विक में वर्गीकरण तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक गुणधर्मों को दर्शाता है। जल पृथ्वी का सबसे महत्वपूर्ण यौगिक है, जिसके अद्वितीय गुण हाइड्रोजन बंधन के कारण हैं। कठोर जल की समस्या तथा उसके उपचार की विधियाँ व्यावहारिक महत्व रखती हैं। भारी जल नाभिकीय प्रौद्योगिकी में तथा हाइड्रोजन पेरॉक्साइड औद्योगिक तथा घरेलू उपयोग में महत्वपूर्ण है। हाइड्रोजन एक स्वच्छ ऊर्जा स्रोत के रूप में भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह अध्याय s-ब्लॉक तथा p-ब्लॉक तत्वों के अध्ययन की पृष्ठभूमि तैयार करता है।