🧪
⚗️
🧬
🌡️
🔬
← डैशबोर्ड पर वापस जाएँ
Font Size:

1. परिचय

p-ब्लॉक तत्व वे तत्व हैं जिनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन p-कक्षक में भरता है। इनका सामान्य विन्यास $ns^2np^{1-6}$ होता है। इनमें समूह 13 से 18 तक के तत्व शामिल हैं। इस अध्याय में हम समूह 13 (बोरॉन परिवार), समूह 14 (कार्बन परिवार), समूह 15 (नाइट्रोजन परिवार), समूह 16 (ऑक्सीजन परिवार/चाल्कोजन), समूह 17 (हैलोजन) तथा समूह 18 (उत्कृष्ट गैसों) का अध्ययन करेंगे। p-ब्लॉक में धातु, अधातु तथा उपधातु सभी पाए जाते हैं। किसी समूह के प्रथम सदस्य का व्यवहार बाकी सदस्यों से काफी भिन्न होता है, क्योंकि उसके पास d-कक्षक नहीं होते, इसलिए वह अपने ऑक्टेट का विस्तार नहीं कर सकता।

2. समूह 13: बोरॉन परिवार

इस समूह में बोरॉन, एल्युमीनियम, गैलियम, इंडियम तथा थैलियम शामिल हैं। सामान्य विन्यास $ns^2np^1$ है। समूह में नीचे जाने पर:

बोरॉन एक अधातु तथा उपधातु है। यह अत्यंत कठोर तथा अभ्रक (boron) जैसा दिखता है। बोरॉन में $BF_3$, $BCl_3$ जैसे यौगिक बनते हैं, जिनमें यह अष्टक नियम का पालन नहीं करता (ऑक्टेट अधूरा)। $BF_3$ एक लुईस अम्ल है। बोरॉन के मुख्य उपयोग - काँच (बोरोसिलिकेट), उर्वरक (बोरेक्स) तथा धातु विज्ञान में।

एल्युमीनियम सबसे प्रचुर धातु है। इसकी बाह्य कोश में 3 इलेक्ट्रॉन होते हैं। $AlCl_3$ की द्विमेरिक संरचना होती है (यह क्लोराइड सेतु बनाता है)। एल्युमीनियम का उपयोग बर्तन, तार, हवाई जहाज तथा ऊष्मा-अपचयन (थर्मिट) में होता है। $Al_2O_3$ में विकर्ण संबंध के कारण बेरिलियम से समानता होती है।

3. समूह 14: कार्बन परिवार

इस समूह में कार्बन, सिलिकॉन, जर्मेनियम, टिन तथा लेड शामिल हैं। सामान्य विन्यास $ns^2np^2$ है। समूह में नीचे जाने पर:

कार्बन के अपररूप - हीरा (शुद्ध कार्बन, अति कठोर, sp³ संकरण), ग्रेफाइट (नरम, sp² संकरण, विद्युत का सुचालक) तथा फुलरीन ($C_{60}$ - फुटबॉल आकार, ग्रेफाइट के लेजर वाष्पीकरण से)। कार्बन में अपनत्व (Catenation) की क्षमता अद्वितीय है, जिसके कारण कार्बन यौगिकों की संख्या सबसे अधिक है। कार्बन के ऑक्साइड - $CO$ (विषैली, रंगहीन, गंधहीन) तथा $CO_2$ (अम्लीय ऑक्साइड)।

सिलिकॉन कार्बन से कम अपनत्व रखता है। इसका उपयोग अर्धचालक तथा सिलिकोन (पॉलिमर) में होता है। सिलिका ($SiO_2$) रेत तथा क्वार्ट्ज में पाई जाती है।

4. समूह 15: नाइट्रोजन परिवार

इस समूह में नाइट्रोजन, फास्फोरस, आर्सेनिक, एंटीमनी तथा बिस्मथ शामिल हैं। सामान्य विन्यास $ns^2np^3$ है।

नाइट्रोजन वायुमंडल में सर्वाधिक (78%) मात्रा में पाया जाता है। नाइट्रोजन गैस अक्रिय है क्योंकि $N \equiv N$ त्रि-आबंध अत्यंत मजबूत होता है। नाइट्रोजन के यौगिक:

फास्फोरस के अपररूप - श्वेत फास्फोरस ($P_4$, अत्यंत अभिक्रियाशील, विषैला), लाल फास्फोरस (कम अभिक्रियाशील) तथा काला फास्फोरस। फास्फोरस यौगिक $PH_3$ (फास्फीन) तथा $PCl_5$ हैं। फास्फोरस का उपयोग माचिस, उर्वरक (सुपरफॉस्फेट) में होता है। फास्फोरस हड्डियों तथा DNA का अंग है।

5. समूह 16: ऑक्सीजन परिवार (चाल्कोजन)

इस समूह में ऑक्सीजन, सल्फर, सेलेनियम, टेल्यूरियम तथा पोलोनियम शामिल हैं। सामान्य विन्यास $ns^2np^4$ है।

ऑक्सीजन वायुमंडल में 21% है। ऑक्सीजन के अपररूप - $O_2$ तथा ओजोन ($O_3$)। ओजोन पराबैंगनी विकिरण को अवशोषित कर पृथ्वी की रक्षा करता है। ओजोन परत का क्षय क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) के कारण होता है।

सल्फर के अपररूप - रॉम्बिक (α) तथा मोनोक्लिनिक (β) सल्फर। सल्फर की मुख्य औद्योगिक क्रिया कॉन्टैक्ट विधि में सल्फ्यूरिक अम्ल ($H_2SO_4$) का निर्माण है। $H_2SO_4$ को 'रसायनों का राजा' कहा जाता है। सल्फर डाइऑक्साइड ($SO_2$) एक विषैली गैस है जो अम्ल वर्षा का कारण बनती है। सल्फर यौगिकों - $H_2S$ (सड़े अंडे की गंध) का उपयोग विश्लेषण में होता है।

6. समूह 17: हैलोजन

इस समूह में फ्लोरीन, क्लोरीन, ब्रोमीन, आयोडीन तथा एस्टाटिन शामिल हैं। सामान्य विन्यास $ns^2np^5$ है। हैलोजन का अर्थ 'लवण जनक' है।

हैलोजनों का ऑक्सीकारक क्रम: $F_2 > Cl_2 > Br_2 > I_2$। क्लोरीन ब्रोमाइड को विस्थापित करता है, ब्रोमीन आयोडाइड को। हैलोजन अम्ल - $HF$ (दुर्बल अम्ल), $HCl$, $HBr$, $HI$ (प्रबल अम्ल) - अम्लीय प्रबलता $HI > HBr > HCl > HF$ क्रम में। हैलोजन यौगिक - क्लोरीन के उपयोग जल शोधन, विरंजक, PVC में। $HCl$ का उपयोग अम्ल के रूप में। ब्रोमीन तथा आयोडीन के यौगिक दवाओं में।

अंतर-हैलोजन यौगिक ($ICl$, $ClF_3$, $IF_5$ आदि) तथा हैलोजन ऑक्साइड भी महत्वपूर्ण हैं। हैलोजनों की ऑक्सीअम्ल जैसे $HOCl$, $HClO_3$, $HClO_4$ में ऑक्सीजन की संख्या बढ़ने पर अम्लीय प्रबलता बढ़ती है।

7. समूह 18: उत्कृष्ट गैसें

इन्हें अक्रिय गैसें भी कहते हैं। सामान्य विन्यास $ns^2np^6$ (पूर्ण भरा कोश)। हीलियम का विन्यास $1s^2$ है। इनकी आयनन एन्थैल्पी अत्यधिक होती है तथा ये सामान्यतः अभिक्रिया नहीं करतीं। 1962 में नील बार्टलेट ने $XePtF_6$ बनाकर सिद्ध किया कि इनके यौगिक बन सकते हैं। जीनॉन के यौगिक - $XeF_2$, $XeF_4$, $XeF_6$, $XeOF_4$ तथा $XeO_3$। उत्कृष्ट गैसों के उपयोग - हीलियम (गुब्बारे, विद्युत क्षेत्र), नियॉन (विज्ञापन संकेत), आर्गन (टंगस्टन बल्ब), क्रिप्टन तथा जीनॉन (फोटोग्राफिक फ्लैश)।

graph TD A["p-ब्लॉक तत्व"] --> B["समूह 13 - बोरॉन, Al"] A --> C["समूह 14 - कार्बन, Si"] A --> D["समूह 15 - N, P"] A --> E["समूह 16 - O, S"] A --> F["समूह 17 - हैलोजन"] A --> G["समूह 18 - उत्कृष्ट गैसें"] D --> D1["NH3, HNO3, PH3"] E --> E1["O3, SO2, H2SO4"] F --> F1["F2, Cl2, HCl"] G --> G1["XeF4, XeOF4"] A --> H["विशेषताएँ"] H --> H1["अष्टक विस्तार केवल d-कक्षक से"] H --> H2["निष्क्रिय युग्म प्रभाव"]

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

समूह सामान्य नाम विन्यास प्रथम तत्व
13 बोरॉन परिवार ns²np¹ बोरॉन
14 कार्बन परिवार ns²np² कार्बन
15 नाइट्रोजन परिवार ns²np³ नाइट्रोजन
16 चाल्कोजन ns²np⁴ ऑक्सीजन
17 हैलोजन ns²np⁵ फ्लोरीन
18 उत्कृष्ट गैसें ns²np⁶ हीलियम
गैस औद्योगिक विधि अभिक्रिया
NH3 हैबर विधि N2 + 3H2 ⇌ 2NH3
HNO3 ऑस्टवाल्ड विधि NH3 का ऑक्सीकरण
H2SO4 कॉन्टैक्ट विधि SO2 + O2 → SO3
NaOH कास्टनर-केल्नर NaCl का विद्युत अपघटन

माइंड मैप

graph TD A["p-ब्लॉक की प्रवृत्तियाँ"] --> B["समूह में नीचे"] B --> B1["त्रिज्या बढ़ती है"] B --> B2["आयनन एन्थैल्पी घटती है"] B --> B3["धात्विक चरित्र बढ़ता है"] A --> C["निष्क्रिय युग्म प्रभाव"] C --> C1["Tl+1, Pb+2, Bi+3 स्थायी"] A --> D["अष्टक विस्तार"] D --> D1["PCl5, SF6, IF7"] A --> E["प्रथम सदस्य विशेष"] E --> E1["कोई d-कक्षक नहीं"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

समूह 17 हैलोजनों का विस्थापन क्रम F2 सबसे प्रबल ऑक्सीकारक Cl2 Br⁻ को विस्थापित करता है Br2 I⁻ को विस्थापित करता है I2 सबसे कम अभिक्रियाशील विस्थापन: Cl2 + 2KBr → 2KCl + Br2 अभिक्रियाशीलता तथा ऑक्सीकारक क्षमता: F2 > Cl2 > Br2 > I2 अम्लीय प्रबलता: HI > HBr > HCl > HF स्वर्ण नियम ऊपर वाला हैलोजन नीचे वाले हैलोजन को उसके लवण से विस्थापित करता है।
H2SO4 का उत्पादन - कॉन्टैक्ट विधि भट्ठी S + O2 → SO2 संपर्क कक्ष 2SO2 + O2 ⇌ 2SO3 (V2O5) अवशोषण SO3 + H2SO4 → H2S2O7 H2S2O7 + H2O → 2H2SO4 H2SO4 - रसायनों का राजा उर्वरक, बैटरी, पेट्रोलियम शोधन, रंग SO3 बनाने में उत्प्रेरक V2O5 तथा ताप 450°C दाब बढ़ाने पर SO3 की लब्धि बढ़ती है (ले-शातेलिये) Golden Rule कॉन्टैक्ट विधि में SO3 को जल में नहीं, सांद्र H2SO4 में अवशोषित किया जाता है।

सामान्य गलतियाँ

  1. अम्लीय प्रबलता का क्रम: HI > HBr > HCl > HF। यह हैलोजन अम्ल का सही क्रम है, न कि HF सबसे प्रबल।
  2. निष्क्रिय युग्म प्रभाव: समूह 13, 14, 15 में नीचे जाने पर निम्न ऑक्सीकरण अवस्था स्थायी होती है (Tl⁺¹, Pb⁺², Bi⁺³)।
  3. अष्टक विस्तार: केवल वे तत्व जिनके पास d-कक्षक हैं, अष्टक का विस्तार कर सकते हैं (P, S, Xe)। कार्बन तथा नाइट्रोजन नहीं।
  4. सल्फर के अपररूप: रॉम्बिक सल्फर सामान्य ताप पर स्थायी, मोनोक्लिनिक 96°C से ऊपर स्थायी।
  5. SO3 का अवशोषण: SO3 को जल में नहीं बल्कि सांद्र H2SO4 में अवशोषित कराया जाता है (धूम्रिक अम्ल बनाने के लिए)।
  6. O3 की ध्रुवता: ओजोन का आकार कोणीय होता है, यह अध्रुवीय नहीं है।
  7. उत्कृष्ट गैसों की अक्रियता: सभी पूर्णतः अभ्रिय नहीं हैं; जीनॉन के यौगिक बनते हैं (XePtF6, XeF4)।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. प्रत्येक समूह के प्रथम सदस्य का अद्वितीय व्यवहार (कोई d-कक्षक नहीं, अष्टक अधूरा) याद रखें।
  2. औद्योगिक विधियों (हैबर, ऑस्टवाल्ड, कॉन्टैक्ट) के समीकरण तथा शर्तें रट लें।
  3. हैलोजनों के विस्थापन क्रम तथा ऑक्सीकारक क्षमता के प्रश्नों का अभ्यास करें।
  4. निष्क्रिय युग्म प्रभाव से संबंधित प्रश्नों (Tl⁺¹, Pb⁺²) में स्थायी अवस्था को पहचानें।
  5. जीनॉन यौगिकों (XeF2, XeF4, XeF6, XeOF4) तथा उनकी ज्यामिति को याद रखें।
  6. अम्ल वर्षा में SO2 तथा NO2 की भूमिका, तथा ओजोन क्षय में CFC की भूमिका वाले प्रश्न हल करें।
  7. कार्बन के अपररूपों (हीरा, ग्रेफाइट, फुलरीन) के गुणों तथा संकरण की तुलना करें।

निष्कर्ष

इस अध्याय में हमने p-ब्लॉक के सभी छह समूहों - बोरॉन, कार्बन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, हैलोजन तथा उत्कृष्ट गैस परिवार - का अध्ययन किया। प्रत्येक समूह में धात्विक चरित्र, ऑक्सीकरण अवस्थाएँ, परमाणु त्रिज्या तथा अभिक्रियाशीलता की नियमित प्रवृत्तियाँ देखी जाती हैं। निष्क्रिय युग्म प्रभाव तथा अष्टक विस्तार जैसी अवधारणाएँ इन तत्वों के रासायनिक व्यवहार को निर्धारित करती हैं। अमोनिया, नाइट्रिक अम्ल तथा सल्फ्यूरिक अम्ल जैसे यौगिकों के औद्योगिक निर्माण, हैलोजनों का विस्थापन व्यवहार तथा उत्कृष्ट गैसों के यौगिक यह दर्शाते हैं कि p-ब्लॉक रसायन उद्योग तथा जीवन दोनों के लिए कितना महत्वपूर्ण है। यह अध्याय कार्बनिक रसायन के लिए भी आधार प्रदान करता है।