p-ब्लॉक तत्व वे तत्व हैं जिनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन p-कक्षक में भरता है। इनका सामान्य विन्यास $ns^2np^{1-6}$ होता है। इनमें समूह 13 से 18 तक के तत्व शामिल हैं। इस अध्याय में हम समूह 13 (बोरॉन परिवार), समूह 14 (कार्बन परिवार), समूह 15 (नाइट्रोजन परिवार), समूह 16 (ऑक्सीजन परिवार/चाल्कोजन), समूह 17 (हैलोजन) तथा समूह 18 (उत्कृष्ट गैसों) का अध्ययन करेंगे। p-ब्लॉक में धातु, अधातु तथा उपधातु सभी पाए जाते हैं। किसी समूह के प्रथम सदस्य का व्यवहार बाकी सदस्यों से काफी भिन्न होता है, क्योंकि उसके पास d-कक्षक नहीं होते, इसलिए वह अपने ऑक्टेट का विस्तार नहीं कर सकता।
इस समूह में बोरॉन, एल्युमीनियम, गैलियम, इंडियम तथा थैलियम शामिल हैं। सामान्य विन्यास $ns^2np^1$ है। समूह में नीचे जाने पर:
बोरॉन एक अधातु तथा उपधातु है। यह अत्यंत कठोर तथा अभ्रक (boron) जैसा दिखता है। बोरॉन में $BF_3$, $BCl_3$ जैसे यौगिक बनते हैं, जिनमें यह अष्टक नियम का पालन नहीं करता (ऑक्टेट अधूरा)। $BF_3$ एक लुईस अम्ल है। बोरॉन के मुख्य उपयोग - काँच (बोरोसिलिकेट), उर्वरक (बोरेक्स) तथा धातु विज्ञान में।
एल्युमीनियम सबसे प्रचुर धातु है। इसकी बाह्य कोश में 3 इलेक्ट्रॉन होते हैं। $AlCl_3$ की द्विमेरिक संरचना होती है (यह क्लोराइड सेतु बनाता है)। एल्युमीनियम का उपयोग बर्तन, तार, हवाई जहाज तथा ऊष्मा-अपचयन (थर्मिट) में होता है। $Al_2O_3$ में विकर्ण संबंध के कारण बेरिलियम से समानता होती है।
इस समूह में कार्बन, सिलिकॉन, जर्मेनियम, टिन तथा लेड शामिल हैं। सामान्य विन्यास $ns^2np^2$ है। समूह में नीचे जाने पर:
कार्बन के अपररूप - हीरा (शुद्ध कार्बन, अति कठोर, sp³ संकरण), ग्रेफाइट (नरम, sp² संकरण, विद्युत का सुचालक) तथा फुलरीन ($C_{60}$ - फुटबॉल आकार, ग्रेफाइट के लेजर वाष्पीकरण से)। कार्बन में अपनत्व (Catenation) की क्षमता अद्वितीय है, जिसके कारण कार्बन यौगिकों की संख्या सबसे अधिक है। कार्बन के ऑक्साइड - $CO$ (विषैली, रंगहीन, गंधहीन) तथा $CO_2$ (अम्लीय ऑक्साइड)।
सिलिकॉन कार्बन से कम अपनत्व रखता है। इसका उपयोग अर्धचालक तथा सिलिकोन (पॉलिमर) में होता है। सिलिका ($SiO_2$) रेत तथा क्वार्ट्ज में पाई जाती है।
इस समूह में नाइट्रोजन, फास्फोरस, आर्सेनिक, एंटीमनी तथा बिस्मथ शामिल हैं। सामान्य विन्यास $ns^2np^3$ है।
नाइट्रोजन वायुमंडल में सर्वाधिक (78%) मात्रा में पाया जाता है। नाइट्रोजन गैस अक्रिय है क्योंकि $N \equiv N$ त्रि-आबंध अत्यंत मजबूत होता है। नाइट्रोजन के यौगिक:
फास्फोरस के अपररूप - श्वेत फास्फोरस ($P_4$, अत्यंत अभिक्रियाशील, विषैला), लाल फास्फोरस (कम अभिक्रियाशील) तथा काला फास्फोरस। फास्फोरस यौगिक $PH_3$ (फास्फीन) तथा $PCl_5$ हैं। फास्फोरस का उपयोग माचिस, उर्वरक (सुपरफॉस्फेट) में होता है। फास्फोरस हड्डियों तथा DNA का अंग है।
इस समूह में ऑक्सीजन, सल्फर, सेलेनियम, टेल्यूरियम तथा पोलोनियम शामिल हैं। सामान्य विन्यास $ns^2np^4$ है।
ऑक्सीजन वायुमंडल में 21% है। ऑक्सीजन के अपररूप - $O_2$ तथा ओजोन ($O_3$)। ओजोन पराबैंगनी विकिरण को अवशोषित कर पृथ्वी की रक्षा करता है। ओजोन परत का क्षय क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) के कारण होता है।
सल्फर के अपररूप - रॉम्बिक (α) तथा मोनोक्लिनिक (β) सल्फर। सल्फर की मुख्य औद्योगिक क्रिया कॉन्टैक्ट विधि में सल्फ्यूरिक अम्ल ($H_2SO_4$) का निर्माण है। $H_2SO_4$ को 'रसायनों का राजा' कहा जाता है। सल्फर डाइऑक्साइड ($SO_2$) एक विषैली गैस है जो अम्ल वर्षा का कारण बनती है। सल्फर यौगिकों - $H_2S$ (सड़े अंडे की गंध) का उपयोग विश्लेषण में होता है।
इस समूह में फ्लोरीन, क्लोरीन, ब्रोमीन, आयोडीन तथा एस्टाटिन शामिल हैं। सामान्य विन्यास $ns^2np^5$ है। हैलोजन का अर्थ 'लवण जनक' है।
हैलोजनों का ऑक्सीकारक क्रम: $F_2 > Cl_2 > Br_2 > I_2$। क्लोरीन ब्रोमाइड को विस्थापित करता है, ब्रोमीन आयोडाइड को। हैलोजन अम्ल - $HF$ (दुर्बल अम्ल), $HCl$, $HBr$, $HI$ (प्रबल अम्ल) - अम्लीय प्रबलता $HI > HBr > HCl > HF$ क्रम में। हैलोजन यौगिक - क्लोरीन के उपयोग जल शोधन, विरंजक, PVC में। $HCl$ का उपयोग अम्ल के रूप में। ब्रोमीन तथा आयोडीन के यौगिक दवाओं में।
अंतर-हैलोजन यौगिक ($ICl$, $ClF_3$, $IF_5$ आदि) तथा हैलोजन ऑक्साइड भी महत्वपूर्ण हैं। हैलोजनों की ऑक्सीअम्ल जैसे $HOCl$, $HClO_3$, $HClO_4$ में ऑक्सीजन की संख्या बढ़ने पर अम्लीय प्रबलता बढ़ती है।
इन्हें अक्रिय गैसें भी कहते हैं। सामान्य विन्यास $ns^2np^6$ (पूर्ण भरा कोश)। हीलियम का विन्यास $1s^2$ है। इनकी आयनन एन्थैल्पी अत्यधिक होती है तथा ये सामान्यतः अभिक्रिया नहीं करतीं। 1962 में नील बार्टलेट ने $XePtF_6$ बनाकर सिद्ध किया कि इनके यौगिक बन सकते हैं। जीनॉन के यौगिक - $XeF_2$, $XeF_4$, $XeF_6$, $XeOF_4$ तथा $XeO_3$। उत्कृष्ट गैसों के उपयोग - हीलियम (गुब्बारे, विद्युत क्षेत्र), नियॉन (विज्ञापन संकेत), आर्गन (टंगस्टन बल्ब), क्रिप्टन तथा जीनॉन (फोटोग्राफिक फ्लैश)।
| समूह | सामान्य नाम | विन्यास | प्रथम तत्व |
|---|---|---|---|
| 13 | बोरॉन परिवार | ns²np¹ | बोरॉन |
| 14 | कार्बन परिवार | ns²np² | कार्बन |
| 15 | नाइट्रोजन परिवार | ns²np³ | नाइट्रोजन |
| 16 | चाल्कोजन | ns²np⁴ | ऑक्सीजन |
| 17 | हैलोजन | ns²np⁵ | फ्लोरीन |
| 18 | उत्कृष्ट गैसें | ns²np⁶ | हीलियम |
| गैस | औद्योगिक विधि | अभिक्रिया |
|---|---|---|
| NH3 | हैबर विधि | N2 + 3H2 ⇌ 2NH3 |
| HNO3 | ऑस्टवाल्ड विधि | NH3 का ऑक्सीकरण |
| H2SO4 | कॉन्टैक्ट विधि | SO2 + O2 → SO3 |
| NaOH | कास्टनर-केल्नर | NaCl का विद्युत अपघटन |
इस अध्याय में हमने p-ब्लॉक के सभी छह समूहों - बोरॉन, कार्बन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, हैलोजन तथा उत्कृष्ट गैस परिवार - का अध्ययन किया। प्रत्येक समूह में धात्विक चरित्र, ऑक्सीकरण अवस्थाएँ, परमाणु त्रिज्या तथा अभिक्रियाशीलता की नियमित प्रवृत्तियाँ देखी जाती हैं। निष्क्रिय युग्म प्रभाव तथा अष्टक विस्तार जैसी अवधारणाएँ इन तत्वों के रासायनिक व्यवहार को निर्धारित करती हैं। अमोनिया, नाइट्रिक अम्ल तथा सल्फ्यूरिक अम्ल जैसे यौगिकों के औद्योगिक निर्माण, हैलोजनों का विस्थापन व्यवहार तथा उत्कृष्ट गैसों के यौगिक यह दर्शाते हैं कि p-ब्लॉक रसायन उद्योग तथा जीवन दोनों के लिए कितना महत्वपूर्ण है। यह अध्याय कार्बनिक रसायन के लिए भी आधार प्रदान करता है।