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1. परिचय

s-ब्लॉक तत्व वे तत्व हैं जिनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन s-कक्षक में भरता है। इनमें क्षार धातु (समूह 1 - लिथियम, सोडियम, पोटैशियम, रुबीडियम, सीज़ियम, फ्रांसियम) तथा क्षारीय मृदा धातु (समूह 2 - बेरिलियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम, स्ट्रॉन्शियम, बेरियम, रेडियम) शामिल हैं। इनका सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास क्रमशः $ns^1$ तथा $ns^2$ है। इन तत्वों में धात्विक चरित्र प्रबल होता है। क्षार धातुएँ नरम, सिल्वर-श्वेत तथा उच्च अभिक्रियाशील होती हैं। क्षारीय मृदा धातुओं के गुण क्षार धातुओं से भिन्न होते हैं - इनकी कठोरता, गलनांक तथा घनत्व अधिक होते हैं। इस अध्याय में हम इनके गुणधर्मों, यौगिकों तथा महत्व का अध्ययन करेंगे।

2. क्षार धातुओं की प्रवृत्तियाँ

क्षार धातुएँ समूह 1 में ऊपर से नीचे जाने पर निम्नलिखित प्रवृत्तियाँ दर्शाती हैं:

क्षार धातुओं की अभिक्रियाशीलता उनकी कम आयनन एन्थैल्पी का परिणाम है। ये प्रबल अपचायक हैं। ये वायु से तेजी से अभिक्रिया करते हैं तथा मिट्टी के तेल (केरोसिन) में रखे जाते हैं। क्षार धातु जल से अभिक्रिया कर हाइड्रॉक्साइड तथा हाइड्रोजन बनाते हैं:

$$2Na + 2H_2O \rightarrow 2NaOH + H_2$$

सीज़ियम सबसे अधिक अभिक्रियाशील क्षार धातु है।

फ्लेम (ज्वाला) रंग: क्षार धातुएँ गर्म करने पर विशिष्ट रंग की ज्वाला देती हैं। Li किरमिजी लाल, Na सुनहरा पीला, K बैंगनी, Rb तथा Cs नील-बैंगनी। फ्रांसियम की खोज मारग्वेट पेरे ने की।

3. क्षार धातुओं के महत्वपूर्ण यौगिक

सोडियम क्लोराइड (NaCl): साधारण नमक, समुद्री जल से प्राप्त। इसका उपयोग भोजन, संरक्षण तथा क्षारों के निर्माण में होता है।

सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH / कॉस्टिक सोडा): NaCl के विद्युत अपघटन (कास्टनर-केल्नर विधि) से प्राप्त होता है। इसका उपयोग साबुन, कागज, रेयॉन के निर्माण में होता है।

सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3 / वाशिंग सोडा): सॉल्वे विधि द्वारा बनाया जाता है। इसका उपयोग काँच, साबुन तथा जल की कठोरता दूर करने में होता है।

सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO3 / बेकिंग सोडा): गर्म करने पर यह CO2 छोड़ता है, इसलिए बेकिंग में खमीर के रूप में प्रयोग होता है। अग्निशामक में भी प्रयोग होता है।

पोटैशियम क्लोराइड (KCl), पोटैशियम नाइट्रेट (KNO3 / शोरा) तथा पोटैशियम परमैंगनेट (KMnO4) अन्य महत्वपूर्ण यौगिक हैं। KNO3 बारूद तथा उर्वरक में, KMnO4 ऑक्सीकारक के रूप में प्रयोग होता है।

क्रीम ऑफ टार्टर (पोटैशियम हाइड्रोजन टार्ट्रेट) तथा रोशेल लवण (सोडियम-पोटैशियम टार्ट्रेट) का प्रयोग खाद्य तथा चिकित्सा में होता है।

4. क्षारीय मृदा धातुओं की प्रवृत्तियाँ

समूह 2 में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु त्रिज्या बढ़ती है, आयनन एन्थैल्पी घटती है तथा विद्युत-ऋणात्मकता घटती है। क्षारीय मृदा धातुओं में:

बेरिलियम इनमें सबसे कम अभिक्रियाशील है तथा इसका गुण एल्युमीनियम से मिलता-जुलता है (विकर्ण संबंध)। बेरिलियम यौगिक सहसंयोजक प्रकृति के होते हैं, जबकि अन्य क्षारीय मृदा धातुओं के यौगिक आयनिक।

5. क्षारीय मृदा धातुओं के महत्वपूर्ण यौगिक

कैल्शियम ऑक्साइड (CaO / चूना): चूना पत्थर ($CaCO_3$) के तापीय अपघटन से प्राप्त होता है:

$$CaCO_3 \xrightarrow{\Delta} CaO + CO_2$$

इसका उपयोग सीमेंट, काँच तथा जल उपचार में होता है।

कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3): चूना पत्थर, संगमरमर तथा क्रेट के रूप में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। सीमेंट के निर्माण का मुख्य कच्चा माल।

प्लास्टर ऑफ पेरिस (CaSO4·1/2H2O): जिप्सम ($CaSO_4 \cdot 2H_2O$) को 373 K पर गर्म करने से बनता है। जल मिलाने पर यह पुनः जिप्सम बनता है और सख्त हो जाता है, इसलिए यह भवन निर्माण तथा चिकित्सा (फ्रैक्चर पट्टी) में प्रयुक्त होता है।

जिप्सम (CaSO4·2H2O): सीमेंट में जोड़ा जाता है ताकि सीमेंट की जमने की गति नियंत्रित हो।

डोलोमाइट (CaCO3·MgCO3), ईप्सम लवण (MgSO4·7H2O) तथा कार्नेलाइट (KCl·MgCl2·6H2O) महत्वपूर्ण खनिज हैं। मैग्नीशियम यौगिकों का उपयोग आतिशबाजी, फोटोग्राफी तथा चिकित्सा में होता है।

6. क्षार धातुओं की सामान्य प्रवृत्तियाँ तथा व्यवहार

क्षार धातुओं की मोनोआटोमिक आयनों में प्रवृत्ति - ये $M^+$ आयन बनाती हैं, जिनकी त्रिज्या परमाणु से छोटी होती है। जलयोजन एन्थैल्पी ऊपर से नीचे घटती है ($Li^+$ की जलयोजन एन्थैल्पी सबसे अधिक)। लिथियम के आयन का छोटा आकार तथा उच्च जलयोजन एन्थैल्पी इसके विशिष्ट गुणों का कारण है।

विकर्ण संबंध: समूह 2 के पहले सदस्य का गुण अगले समूह (13) के दूसरे सदस्य से मिलता है। $Li$ तथा $Mg$, $Be$ तथा $Al$, $B$ तथा $Si$ के बीच विकर्ण संबंध पाया जाता है। इसका कारण समान आयनिक त्रिज्या तथा समान आयनन एन्थैल्पी है। विकर्ण संबंध के कारण ही $Be(OH)_2$ उभयधर्मी है तथा $BeCl_2$ सहसंयोजक।

क्षार धातुओं के ऑक्साइड तथा हाइड्रॉक्साइड: ये प्रबल क्षारक हैं। $Li_2O$ सबसे कम तथा $Cs_2O$ सबसे अधिक क्षारकीय है। हाइड्रॉक्साइडों की क्षारकीयता समूह में नीचे जाने पर बढ़ती है। ये हाइड्राइड आयनिक बनाते हैं जो जल से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन छोड़ते हैं।

जैविक महत्व: सोडियम तथा पोटैशियम जैविक तंत्रों के लिए अनिवार्य हैं। $Na^+$ तंत्रिका आवेग के संचरण में, $K^+$ कोशिका के अंदर, तथा $Ca^{2+}$ हड्डियों, दाँतों तथा रक्त स्कंदन में महत्वपूर्ण है। मैग्नीशियम क्लोरोफिल का अंग है।

graph TD A["s-ब्लॉक तत्व"] --> B["समूह 1 - क्षार धातु"] A --> C["समूह 2 - क्षारीय मृदा धातु"] B --> B1["ns¹ विन्यास"] B --> B2["Na, K, Li यौगिक"] C --> C1["ns² विन्यास"] C --> C2["CaCO3, CaO, जिप्सम"] A --> D["प्रवृत्तियाँ"] D --> D1["त्रिज्या बढ़ती है"] D --> D2["आयनन एन्थैल्पी घटती है"] A --> E["विकर्ण संबंध"] E --> E1["Li-Mg, Be-Al, B-Si"]

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

गुणधर्म समूह 1 में नीचे समूह 2 में नीचे
परमाणु त्रिज्या बढ़ती है बढ़ती है
आयनन एन्थैल्पी घटती है घटती है
गलनांक घटता है सामान्यतः घटता है
घनत्व सामान्यतः बढ़ता है सामान्यतः बढ़ता है
अभिक्रियाशीलता बढ़ती है बढ़ती है
यौगिक सूत्र मुख्य उपयोग
वाशिंग सोडा Na2CO3 कठोरता दूर करना
बेकिंग सोडा NaHCO3 खमीर, अग्निशामक
कॉस्टिक सोडा NaOH साबुन, कागज
प्लास्टर ऑफ पेरिस CaSO4·1/2H2O भवन, चिकित्सा
जिप्सम CaSO4·2H2O सीमेंट नियंत्रण
ईप्सम लवण MgSO4·7H2O चिकित्सा

माइंड मैप

graph TD A["क्षार धातुएँ"] --> B["प्रबल अपचायक"] A --> C["जल से H2 बनाती हैं"] A --> D["केरोसिन में रखी जाती हैं"] A --> E["ज्वाला रंग"] E --> E1["Na - पीला, K - बैंगनी, Li - किरमिजी"] A --> F["महत्वपूर्ण यौगिक"] F --> F1["NaCl, NaOH, Na2CO3, NaHCO3"] A --> G["विकर्ण संबंध Li-Mg"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

s-ब्लॉक तत्वों की आवर्त सारणी में स्थिति समूह 1: क्षार धातु (ns¹) समूह 2: क्षारीय मृदा धातु (ns²) p-ब्लॉक (समूह 13-18) d-ब्लॉक (संक्रमण तत्व) f-ब्लॉक (आंतरिक संक्रमण) Li, Na, K, Rb, Cs, Fr तथा Be, Mg, Ca, Sr, Ba, Ra ये प्रबल अपचायक तथा अत्यधिक अभिक्रियाशील हैं स्वर्ण नियम अंतिम इलेक्ट्रॉन s-कक्षक में भरने वाले तत्व s-ब्लॉक कहलाते हैं।
क्षार धातुओं की अभिक्रियाएँ 2Na + 2H2O → 2NaOH + H2 2Na + Cl2 → 2NaCl 2Na + H2 → 2NaH CaCO3 → CaO + CO2 (गर्म करने पर) क्षार धातुओं को केरोसिन में रखा जाता है क्योंकि ये वायु की नमी तथा ऑक्सीजन से तेजी से अभिक्रिया करती हैं Golden Rule क्षार धातुओं की अभिक्रियाशीलता समूह में नीचे जाने पर बढ़ती है।

सामान्य गलतियाँ

  1. घनत्व की असामान्यता: K का घनत्व Na से कम तथा Ca का घनत्व Mg से कम होता है - इन असामान्यताओं को याद रखें।
  2. क्षार धातुओं का भंडारण: ये केरोसिन में रखी जाती हैं, जल में नहीं, क्योंकि ये जल से अभिक्रिया करती हैं।
  3. बेरिलियम का सहसंयोजक चरित्र: Be के यौगिक सहसंयोजक हैं, अन्य क्षारीय मृदा धातुओं के आयनिक।
  4. जिप्सम बनाम प्लास्टर ऑफ पेरिस: जिप्सम CaSO4·2H2O है; इसे 373 K पर गर्म करने पर प्लास्टर ऑफ पेरिस (CaSO4·1/2H2O) बनता है। दोनों को मिलाना गलत है।
  5. क्षारकीयता का क्रम: Li2O की क्षारकीयता सबसे कम तथा Cs2O की सबसे अधिक है; समूह में नीचे जाने पर क्षारकीयता बढ़ती है।
  6. विकर्ण संबंध की पहचान: विकर्ण संबंध समूह 2 के प्रथम सदस्य तथा समूह 13 के द्वितीय सदस्य (Be-Al) में होता है।
  7. NaHCO3 का खमीर गुण: गर्म करने पर CO2 छोड़ने के कारण यह बेकिंग में खमीर की तरह कार्य करता है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. समूह में प्रवृत्तियों की तुलना करते समय परमाणु त्रिज्या, आयनन एन्थैल्पी तथा अभिक्रियाशीलता के क्रम स्मरण रखें।
  2. सभी महत्वपूर्ण यौगिकों के सूत्र (Na2CO3, NaHCO3, CaSO4·1/2H2O, MgSO4·7H2O) रट लें।
  3. ज्वाला रंग के प्रश्नों के लिए Li (लाल), Na (पीला), K (बैंगनी), Ca (ईंट लाल) याद रखें।
  4. विकर्ण संबंध के कारण (समान आयनिक त्रिज्या तथा आयनन एन्थैल्पी) लिखने के प्रश्नों का अभ्यास करें।
  5. सॉल्वे विधि (Na2CO3), कास्टनर-केल्नर विधि (NaOH) तथा CaCO3 के अपघटन के प्रश्नों को हल करें।
  6. जैविक महत्व (Na+, K+, Ca2+, Mg) के प्रश्नों का संक्षेप में उत्तर देने का अभ्यास करें।
  7. असामान्यताएँ (K < Na घनत्व, Ca < Mg घनत्व) लिखकर याद करें।

निष्कर्ष

इस अध्याय में हमने s-ब्लॉक तत्वों - क्षार धातुओं तथा क्षारीय मृदा धातुओं - का अध्ययन किया। इनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ($ns^1$ तथा $ns^2$) से इनकी उच्च अभिक्रियाशीलता तथा प्रबल अपचायक गुण व्युत्पन्न होते हैं। समूह में परमाणु त्रिज्या, आयनन एन्थैल्पी, गलनांक तथा घनत्व की प्रवृत्तियाँ इनके व्यवहार को निर्धारित करती हैं। सोडियम तथा कैल्शियम के यौगिक - नमक, कॉस्टिक सोडा, वाशिंग सोडा, बेकिंग सोडा, चूना, जिप्सम तथा प्लास्टर ऑफ पेरिस - दैनिक जीवन तथा उद्योगों में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। विकर्ण संबंध की अवधारणा s-ब्लॉक तथा p-ब्लॉक तत्वों के बीच के संबंध को स्पष्ट करती है। इन तत्वों का जैविक महत्व भी अपरिहार्य है। यह अध्याय p-ब्लॉक तत्वों के अध्ययन की पृष्ठभूमि तैयार करता है।