हमारे चारों ओर का द्रव्य मुख्यतः तीन अवस्थाओं - ठोस, द्रव तथा गैस - में पाया जाता है। इन अवस्थाओं के अतिरिक्त चतुर्थ अवस्था प्लाज्मा तथा पंचम अवस्था बोस-आइंस्टीन संघनन (BEC) भी विद्यमान है। इस अध्याय में हम मुख्यतः गैसों के व्यवहार, गैस नियमों, आदर्श गैस समीकरण, अणुगति सिद्धांत, वास्तविक गैसों तथा वान डर वाल्स समीकरण का अध्ययन करेंगे। साथ ही द्रव तथा ठोस अवस्था की कुछ मूलभूत विशेषताओं पर भी चर्चा करेंगे। गैसों का अध्ययन सबसे अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि गैस नियम सरल गणितीय संबंधों द्वारा गैसों के व्यवहार की भविष्यवाणी करते हैं।
बॉयल का नियम: स्थिर ताप पर किसी निश्चित मात्रा की गैस का दाब उसके आयतन के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
$$P \propto \frac{1}{V} \quad \text{या} \quad P_1V_1 = P_2V_2$$
बॉयल के नियम का आलेख P-V वक्र रूप में होता है, जो ताप के साथ उच्चतर स्थानांतरित होता है।
चार्ल्स का नियम: स्थिर दाब पर निश्चित मात्रा की गैस का आयतन केल्विन ताप के समानुपाती होता है।
$$\frac{V_1}{T_1} = \frac{V_2}{T_2}$$
इस नियम से पता चलता है कि $0^\circ C$ पर गैस का आयतन प्रत्येक $1^\circ C$ वृद्धि पर अपने मूल आयतन का $1/273$ भाग बढ़ जाता है। अतः -273°C पर आयतन शून्य हो जाता है, जिसे परम शून्य कहते हैं।
गे-लुसाक का नियम (दाब-ताप नियम): स्थिर आयतन पर गैस का दाब परम ताप के समानुपाती होता है।
आवोगाद्रो का नियम: समान ताप तथा दाब पर समान आयतन वाली सभी गैसों में अणुओं की संख्या समान होती है। STP पर किसी गैस का एक मोल 22.4 लीटर आयतन घेरता है, जिसमें $6.022 \times 10^{23}$ अणु होते हैं।
डाल्टन का आंशिक दाब का नियम: गैसों के मिश्रण का कुल दाब, उपस्थित प्रत्येक गैस के आंशिक दाबों का योग होता है।
$$P_{total} = P_1 + P_2 + P_3 + ...$$
किसी गैस का आंशिक दाब उसके मोल-अंश के अनुपात में होता है: $P_1 = x_1 \times P_{total}$।
ग्राहम का विसरण नियम: स्थिर ताप तथा दाब पर, गैस के विसरण की दर उसके घनत्व के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
$$\frac{r_1}{r_2} = \sqrt{\frac{d_2}{d_1}} = \sqrt{\frac{M_2}{M_1}}$$
उपरोक्त सभी नियमों को संयुक्त करने पर आदर्श गैस समीकरण प्राप्त होता है:
$$PV = nRT$$
यहाँ $R$ सार्वत्रिक गैस स्थिरांक है जिसका मान $8.314$ J mol⁻¹ K⁻¹ है। आदर्श गैस वह होती है जो इन सभी नियमों का सदैव पालन करती है। आदर्श गैस के अणुओं के बीच कोई आकर्षण या प्रतिकर्षण बल नहीं होता तथा अणुओं का अपना आयतन नगण्य होता है।
वास्तविक गैसें उच्च दाब तथा निम्न ताप पर आदर्श व्यवहार से विचलन करती हैं। इस विचलन को संपीड्यता कारक (Z) से मापा जाता है:
$$Z = \frac{PV}{nRT}$$
आदर्श गैस के लिए $Z = 1$। यदि $Z > 1$, तो गैस आदर्श से धनात्मक विचलन करती है (अणु आकार महत्वपूर्ण) तथा यदि $Z < 1$, तो ऋणात्मक विचलन (आकर्षण बल महत्वपूर्ण)।
वास्तविक गैसों के व्यवहार की व्याख्या करने के लिए वान डर वाल्स ने आदर्श गैस समीकरण में दो संशोधन किए - आयतन संशोधन (b) तथा दाब संशोधन (a):
$$\left( P + \frac{an^2}{V^2} \right) (V - nb) = nRT$$
यहाँ $a$ आकर्षण बल का माप तथा $b$ अणुओं के वास्तविक आयतन का माप है। $a/V^2$ दाब में संशोधन तथा $nb$ आयतन में संशोधन है। वान डर वाल्स समीकरण से क्रांतिक स्थिरांक की व्याख्या भी होती है। जिस ताप से नीचे गैस को संपीडित करने पर द्रव बनता है, उसे क्रांतिक ताप ($T_c$) कहते हैं। क्रांतिक ताप के नीचे ही गैस का द्रवीकरण संभव है। लिंडे विधि द्वारा वायु का द्रवीकरण किया जाता है। अमोनिया तथा कार्बन डाइऑक्साइड का क्रांतिक ताप सामान्य ताप से अधिक होता है, इसलिए ये सामान्य ताप पर ही द्रवीकृत हो जाती हैं।
अणुगति सिद्धांत (Kinetic Molecular Theory) गैसों के अणुओं की गति के आधार पर गैस नियमों की व्याख्या करता है। इसके मुख्य अभिगृहीत:
अणुगति सिद्धांत से गैस का दाब, अणुओं की माध्य वर्ग चाल ($u_{rms} = \sqrt{3RT/M}$), सबसे संभाव्य चाल तथा औसत चाल जैसी राशियाँ प्राप्त होती हैं। उच्च ताप पर अणुओं की चाल बढ़ती है तथा हल्की गैसों की चाल भारी गैसों से अधिक होती है।
द्रवों में अणु एक-दूसरे के निकट होते हैं, जिससे उनमें आकर्षण बल अधिक होता है। द्रवों के महत्वपूर्ण गुणधर्म:
वाष्प दाब: द्रव की सतह से निकलने वाले अणुओं द्वारा बनाया गया दाब। ताप बढ़ने पर वाष्प दाब बढ़ता है। जब वाष्प दाब वायुमंडलीय दाब के बराबर हो जाता है, तो द्रव उबलता है। यह बिंदु क्वथनांक कहलाता है।
सतह तनाव: द्रव की सतह पर अणुओं के बीच आकर्षण के कारण उत्पन्न बल, जो सतह को न्यूनतम क्षेत्रफल में रखने की प्रवृत्ति रखता है। सतह तनाव का मात्रक N/m है। ताप बढ़ने पर सतह तनाव घटता है।
श्यानता: द्रव की प्रवाह के प्रति प्रतिरोध क्षमता। श्यानता गुणांक का मात्रक poise है। श्यानता ताप बढ़ने पर घटती है।
पृष्ठ तनाव तथा श्यानता दोनों अंतर-आण्विक बलों पर निर्भर करते हैं। अंतर-आण्विक बलों की सामर्थ्य के अनुसार द्रवों में लंदन बल, द्विध्रुव-द्विध्रुव अन्योन्य क्रिया तथा हाइड्रोजन आबंध हो सकते हैं।
ठोसों में अणु अत्यंत निकट तथा निश्चित क्रम में होते हैं, जिससे उनमें निश्चित आकार तथा आयतन होता है। ठोस क्रिस्टलीय (नियमित जालक) या अक्रिस्टलीय (अनियमित, जैसे काँच) हो सकते हैं। ठोसों में अणु केवल अपनी माध्य स्थिति के चारों ओर कंपन करते हैं। क्रिस्टलीय ठोसों में निश्चित गलनांक होता है, जबकि अक्रिस्टलीय ठोस नरम होकर धीरे-धीरे पिघलते हैं। इस अध्याय में ठोस अवस्था का विस्तृत अध्ययन कक्षा 11 के अगले अध्याय में किया जाएगा, किंतु यहाँ अवस्थाओं की तुलना प्रस्तुत है।
| नियम | स्थिर राशि | संबंध | सूत्र |
|---|---|---|---|
| बॉयल | ताप (T) | P ∝ 1/V | P1V1 = P2V2 |
| चार्ल्स | दाब (P) | V ∝ T | V1/T1 = V2/T2 |
| गे-लुसाक | आयतन (V) | P ∝ T | P1/T1 = P2/T2 |
| आवोगाद्रो | T, P | V ∝ n | समान अणु |
| डाल्टन | मिश्रण | P = ΣPi | P1 = x1 P |
| ग्राहम | T, P | r ∝ 1/√M | r1/r2 = √(M2/M1) |
| गैस राशि | सूत्र |
|---|---|
| आदर्श गैस समीकरण | PV = nRT |
| माध्य वर्ग चाल | urms = √(3RT/M) |
| संपीड्यता कारक | Z = PV/nRT |
| वान डर वाल्स | (P + a/V²)(V - b) = RT |
| सार्वत्रिक गैस स्थिरांक | R = 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹ |
इस अध्याय में हमने द्रव्य की अवस्थाओं, विशेषकर गैसों के व्यवहार का विस्तृत अध्ययन किया। बॉयल, चार्ल्स, गे-लुसाक, आवोगाद्रो, डाल्टन तथा ग्राहम के नियमों से गैसों के विभिन्न गुणधर्मों के बीच संबंध स्थापित होते हैं, जो आदर्श गैस समीकरण में संयुक्त होते हैं। अणुगति सिद्धांत गैस नियमों को सूक्ष्म दृष्टि से समझाता है। वास्तविक गैसों के विचलन तथा वान डर वाल्स समीकरण वास्तविक जगत के व्यवहार की व्याख्या करते हैं। द्रवों के गुणधर्म - वाष्प दाब, सतह तनाव, श्यानता - तथा ठोसों का परिचय अवस्थाओं की तुलनात्मक समझ प्रदान करते हैं। यह अध्याय ऊष्मागतिकी तथा साम्यावस्था जैसे आगामी अध्यायों की नींव रखता है।