Comprehensive theory, key formulas, diagrams, and memory aids for सहसंबंध (Correlation).
सहसंबंध दो चरों (variables) के बीच पारस्परिक संबंध का माप है। यह बताता है कि जब एक चर में परिवर्तन होता है तो दूसरे चर में किस दिशा और सीमा में परिवर्तन होता है। उदाहरण के लिए, कीमत और माँग के बीच, विज्ञापन व्यय और बिक्री के बीच, वर्षा और फसल उत्पादन के बीच संबंध का अध्ययन सहसंबंध द्वारा किया जाता है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि संबंध का अध्ययन होने पर पूर्वानुमान और निर्णय लेना आसान हो जाता है।
इस विधि में दो चरों के जोड़ों (x, y) को ग्राफ पर बिंदुओं के रूप में दर्शाया जाता है। बिंदुओं का बिखराव देखकर संबंध की दिशा और सीमा का अनुमान लगाया जाता है। - बिंदु ऊपर की ओर बढ़ते हों → धनात्मक सहसंबंध - बिंदु नीचे की ओर बढ़ते हों → ऋणात्मक सहसंबंध - बिंदु बिना किसी क्रम के बिखरे हों → शून्य सहसंबंध - सभी बिंदु एक सीधी रेखा पर → पूर्ण सहसंबंध
यह सहसंबंध की संख्यात्मक माप है जो −1 से +1 के बीच होती है। $$ r = \frac{\sum (x_i - \bar{x})(y_i - \bar{y})}{N \cdot \sigma_x \cdot \sigma_y} $$ कल्पित माध्य विधि से: $$ r = \frac{\sum dx \cdot dy}{\sqrt{\sum dx^2 \cdot \sum dy^2}} $$ यहाँ $dx = x - A$, $dy = y - B$ (कल्पित माध्यों से विचलन)।
इस विधि में मानों के स्थान पर कोटि (ranks) दिए जाते हैं। यह गुणात्मक विशेषताओं (जैसे सुंदरता, प्रतिभा) के लिए उपयुक्त है। $$ \rho = 1 - \frac{6 \sum d^2}{N(N^2 - 1)} $$ यहाँ $d$ = दोनों श्रृंखलाओं की कोटियों में अंतर, $N$ = जोड़ों की संख्या। बराबर कोटियाँ (tied ranks) होने पर संशोधन किया जाता है।
सहसंबंध का अर्थ कारण-कार्य संबंध नहीं होता। दो चरों में सहसंबंध हो सकता है परंतु उनमें कारण संबंध आवश्यक नहीं होता। उदाहरण के लिए, गाँवों में मुर्गियों की संख्या और जन्म दर में धनात्मक सहसंबंध हो सकता है, परंतु मुर्गियों की संख्या बढ़ाने से जन्म दर नहीं बढ़ेगी। सहसंबंध केवल संबंध की दिशा और सीमा बताता है, कारण नहीं।
कार्ल पियरसन के सहसंबंध गुणांक के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं: 1. r का मान हमेशा −1 और +1 के बीच होता है, अर्थात −1 ≤ r ≤ +1। 2. r मूल बिंदु (origin) में परिवर्तन से प्रभावित नहीं होता; सभी मानों में स्थिरांक जोड़ने या घटाने से r में कोई अंतर नहीं आता। 3. r पैमाने (scale) में परिवर्तन से प्रभावित होता है; सभी मानों को स्थिरांक से गुणा या भाग करने पर r बदल जाता है। 4. r एक शुद्ध (pure) संख्या है, इसकी कोई इकाई नहीं होती। 5. r दोनों चरों के लिए सममित (symmetric) होता है, अर्थात x और y का सहसंबंध y और x के सहसंबंध के बराबर होता है। 6. r केवल रैखिक संबंध (linear relationship) को मापता है; अरैखिक संबंध को यह सही रूप से नहीं दर्शाता।
सहसंबंध का अध्ययन प्रतिगमन (regression) विश्लेषण से घनिष्ठ रूप से जुड़ा है। सहसंबंध केवल यह बताता है कि दो चरों के बीच संबंध कितना मजबूत और किस दिशा में है, जबकि प्रतिगमन यह बताता है कि एक चर में होने वाले परिवर्तन के आधार पर दूसरे चर के मान का अनुमान कैसे लगाया जाए। प्रतिगमन रेखा की ढाल (slope) सहसंबंध गुणांक पर निर्भर करती है। यदि सहसंबंध पूर्ण (r = ±1) है तो अनुमान पूर्णतः सटीक होता है; सहसंबंध जितना निम्न होगा, अनुमान की सटीकता उतनी ही कम होगी। अर्थशास्त्र में माँग का पूर्वानुमान, बिक्री का अनुमान और मूल्य विश्लेषण में इस संबंध का उपयोग होता है। परीक्षा में प्रायः पूछा जाता है कि सहसंबंध और प्रतिगमन में क्या अंतर है, इसलिए दोनों की भूमिका को स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है।
| आधार | प्रकार | उदाहरण |
|---|---|---|
| दिशा | धनात्मक | विज्ञापन और बिक्री |
| दिशा | ऋणात्मक | कीमत और माँग |
| दिशा | शून्य | ऊँचाई और अंक |
| स्वरूप | रैखिक | सीधी रेखा पर बिंदु |
| स्वरूप | अरैखिक | वक्र पर बिंदु |
| विधि | उपयोग | सीमा |
|---|---|---|
| बिखराव आरेख | प्रारंभिक अनुमान | केवल अनुमान |
| कार्ल पियरसन | संख्यात्मक माप | रैखिक संबंध के लिए |
| स्पीयरमैन कोटि | गुणात्मक विशेषताएँ | कोटियों की आवश्यकता |
graph TD
A["सहसंबंध"] --> B["प्रकार"]
B --> C["धनात्मक"]
B --> D["ऋणात्मक"]
B --> E["शून्य"]
B --> F["रैखिक/अरैखिक"]
A --> G["विधियाँ"]
G --> H["बिखराव आरेख"]
G --> I["कार्ल पियरसन r"]
G --> J["स्पीयरमैन कोटि ρ"]
A --> K["सीमा: −1 से +1"]
A --> L["सहसंबंध ≠ कार्य-कारण"]
सहसंबंध दो चरों के बीच संबंध की दिशा और सीमा का माप है। धनात्मक, ऋणात्मक और शून्य सहसंबंध संबंध की दिशा बताते हैं, जबकि गुणांक −1 से +1 के बीच इसकी सीमा दर्शाता है। बिखराव आरेख, कार्ल पियरसन गुणांक और स्पीयरमैन की कोटि विधि सहसंबंध मापने की प्रमुख विधियाँ हैं। यह याद रखना आवश्यक है कि सहसंबंध कार्य-कारण नहीं दर्शाता। सहसंबंध का अध्ययन अर्थशास्त्र में पूर्वानुमान और नीति निर्माण का आधार बनता है। अगले अध्याय में हम सूचकांकों (Index Numbers) का अध्ययन करेंगे।