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1. परिचय (Introduction)

रोजगार अर्थव्यवस्था की वह अवस्था है जिसमें लोग आय अर्जित करने के लिए कार्य करते हैं। भारत में रोजगार की स्थिति, बेरोजगारी और कार्य की प्रकृति का अध्ययन आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है। इस अध्याय में श्रमिक (workers), श्रम बल भागीदारी दर (workforce participation rate), बेरोजगारी के प्रकार, औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्रों में रोजगार तथा सरकारी नीतियों का अध्ययन किया जाता है। रोजगार का विश्लेषण करते समय आयु सीमा (आमतौर पर 15 वर्ष और उससे अधिक) और कार्य घंटों को ध्यान में रखा जाता है।

2. श्रमिक और श्रम बल (Workers and Labour Force)

$$ \text{श्रम बल भागीदारी दर} = \frac{\text{श्रम बल}}{\text{कुल जनसंख्या (15 वर्ष+ आयु)}} \times 100 $$

भारत में रोजगार की विशेषताएँ

3. बेरोजगारी के प्रकार (Types of Unemployment)

(क) खुली बेरोजगारी (Open Unemployment)

जब व्यक्ति कार्य करने को तैयार होता है परंतु उसे कार्य उपलब्ध नहीं होता। यह सामान्यतः शहरी क्षेत्रों में पाई जाती है।

(ख) छिपी या प्रच्छन्न बेरोजगारी (Disguised Unemployment)

जब किसी कार्य में आवश्यकता से अधिक लोग कार्यरत होते हैं और कुछ को हटा देने पर भी उत्पादन में कोई कमी नहीं आती। यह ग्रामीण क्षेत्रों और कृषि में अधिक पाई जाती है। उदाहरण: खेत में 4 किसान काम करते हैं जबकि 2 में भी उतना ही उत्पादन होता है।

(ग) मौसमी बेरोजगारी (Seasonal Unemployment)

जब कुछ मौसमों में कार्य उपलब्ध नहीं होता। यह कृषि क्षेत्र में अधिक होती है, क्योंकि खेती का कार्य फसलों के मौसम तक सीमित रहता है।

(घ) संरचनात्मक बेरोजगारी (Structural Unemployment)

जब अर्थव्यवस्था की संरचना में परिवर्तन (तकनीकी बदलाव, उद्योग बंद होना) के कारण बेरोजगारी उत्पन्न होती है।

(ङ) चक्रीय बेरोजगारी (Cyclical Unemployment)

व्यापार चक्र के कारण (मंदी के समय) उत्पन्न बेरोजगारी।

(च) फ्रिक्शनल बेरोजगारी (Frictional Unemployment)

नौकरी बदलने की अवधि में उत्पन्न अस्थायी बेरोजगारी।

4. औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्र (Formal and Informal Sector)

अनौपचारिकीकरण (Informalisation)

भारत में अधिकांश श्रमिक (लगभग 90% से अधिक) अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत हैं। औपचारिक क्षेत्र के कर्मचारी भी कभी-कभी अनौपचारिक रूप से कार्य करते हैं। कुल रोजगार में अनौपचारिक क्षेत्र का बढ़ता हुआ हिस्सा अनौपचारिकीकरण कहलाता है।

5. रोजगार की समस्याएँ (Problems of Employment)

  1. कृषि में छिपी और मौसमी बेरोजगारी।
  2. उद्योग क्षेत्र में सीमित रोजगार सृजन।
  3. अनौपचारिक क्षेत्र में कम वेतन और सुरक्षा का अभाव।
  4. महिलाओं के लिए सीमित रोजगार अवसर।
  5. कुशल और अकुशल श्रम में बेमेल (skill mismatch)।
  6. रोजगार की गुणवत्ता में गिरावट।

शहरी और ग्रामीण रोजगार की स्थिति

ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी मुख्यतः छिपी और मौसमी रूप में होती है, जहाँ कृषि ही प्रमुख व्यवसाय है और फसल के मौसम के बीच कार्य की कमी रहती है। शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी मुख्यतः खुली (open) रूप में होती है, जहाँ शिक्षित युवक रोजगार की तलाश में होते हैं परंतु उपयुक्त अवसर नहीं मिलते। शहरी बेरोजगारी में शिक्षित बेरोजगारों का हिस्सा अधिक होता है, क्योंकि शिक्षा का स्वरूप रोजगार की आवश्यकताओं से मेल नहीं खाता। साथ ही शहरों में प्रवासन (migration) बढ़ने से शहरी क्षेत्रों में श्रम आपूर्ति बढ़ जाती है, जिससे रोजगार पर दबाव बढ़ता है। इन दोनों क्षेत्रों की समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग नीतियों की आवश्यकता होती है - ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-कृषि गतिविधियों के विस्तार की और शहरी क्षेत्रों में कौशल विकास एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने की।

6. रोजगार नीतियाँ और कार्यक्रम (Employment Policies and Programmes)

7. रोजगार सृजन के उपाय (Measures for Employment Generation)

बेरोजगारी = कार्य करने की इच्छा और योग्यता होते हुए कार्य का अभाव

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: बेरोजगारी के प्रकार

प्रकार विवरण
खुली बेरोजगारी कार्य उपलब्ध न होना
छिपी बेरोजगारी अतिरिक्त श्रमिक, उत्पादन समान
मौसमी बेरोजगारी मौसम के अनुसार
संरचनात्मक संरचना में परिवर्तन
चक्रीय व्यापार चक्र से

तालिका 2: औपचारिक बनाम अनौपचारिक क्षेत्र

आधार औपचारिक अनौपचारिक
पंजीकरण हाँ नहीं
सामाजिक सुरक्षा मिलती है नहीं मिलती
वेतन नियमित अनियमित
सुरक्षा सुरक्षित असुरक्षित

माइंड मैप

graph TD A["रोजगार"] --> B["श्रमिक व श्रम बल"] A --> C["बेरोजगारी के प्रकार"] C --> D["खुली"] C --> E["छिपी"] C --> F["मौसमी"] C --> G["संरचनात्मक"] A --> H["औपचारिक/अनौपचारिक क्षेत्र"] H --> I["अनौपचारिकीकरण"] A --> J["नीतियाँ: MGNREGA, PMEGP"] A --> K["रोजगार सृजन के उपाय"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: बेरोजगारी के प्रकार

बेरोजगारी के प्रकार बेरोजगारी खुली कार्य नहीं मिलना छिपी अतिरिक्त श्रमिक मौसमी कृषि में अधिक संरचनात्मक संरचना में परिवर्तन चक्रीय व्यापार चक्र (मंदी) स्वर्ण नियम (Golden Rule) छिपी और मौसमी बेरोजगारी ग्रामीण क्षेत्रों की मुख्य समस्या है।

आरेख 2: औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्र

औपचारिक बनाम अनौपचारिक क्षेत्र औपचारिक (संगठित) पंजीकृत, नियमित वेतन सामाजिक सुरक्षा (EPF, ESI) नौकरी की सुरक्षा अनौपचारिक (असंगठित) पंजीकृत नहीं कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं काम की सुरक्षा का अभाव अनौपचारिकीकरण भारत में 90% से अधिक श्रमिक अनौपचारिक क्षेत्र में स्वर्ण नियम (Golden Rule) अनौपचारिक क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा का अभाव होता है।

सामान्य गलतियाँ

  1. छिपी और मौसमी बेरोजगारी का भ्रम: छिपी में उत्पादन समान रहता है; मौसमी में मौसम बदलने से काम नहीं मिलता।
  2. श्रमिक की परिभाषा: कार्य में कम से कम एक घंटा व्यतीत करने वाला श्रमिक, इसे भूलना।
  3. औपचारिक क्षेत्र में EPF/ESI: ये सामाजिक सुरक्षा औपचारिक क्षेत्र में मिलती है, अनौपचारिक में नहीं।
  4. अनौपचारिकीकरण का अर्थ: रोजगार में अनौपचारिक क्षेत्र का बढ़ता हिस्सा, इसे गलत समझना।
  5. मौसमी बेरोजगारी का क्षेत्र: यह कृषि में अधिक पाई जाती है, इसे शहरी क्षेत्र से जोड़ना।
  6. MGNREGA का विवरण: 100 दिन रोजगार, 2005, इन तथ्यों को गलत लिखना।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. बेरोजगारी के प्रकारों को उदाहरण सहित लिखें।
  2. छिपी बेरोजगारी का सबसे अच्छा उदाहरण (खेत में अतिरिक्त श्रमिक) दें।
  3. औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्र का तुलनात्मक उत्तर तालिका में लिखें।
  4. श्रम बल भागीदारी दर का सूत्र लिखें।
  5. MGNREGA, PMEGP जैसे रोजगार कार्यक्रमों की सूची बनाएँ।
  6. रोजगार सृजन के 4-5 उपाय लिखें।

निष्कर्ष

रोजगार आर्थिक विकास का प्रमुख संकेतक है। भारत में बेरोजगारी मुख्यतः छिपी और मौसमी प्रकार की है, जो ग्रामीण क्षेत्रों और कृषि में अधिक है। रोजगार में अनौपचारिकीकरण बढ़ता जा रहा है, जिससे श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलती। कृषि विविधीकरण, कौशल विकास, लघु उद्योगों को बढ़ावा और बुनियादी ढाँचे के विकास से रोजगार सृजन संभव है। MGNREGA जैसे कार्यक्रम ग्रामीण रोजगार में सहायक हैं। अगले अध्याय में हम अवसंरचना का अध्ययन करेंगे।