स्वतंत्रता के बाद भारत ने आर्थिक विकास के लिए योजनाबद्ध विकास (planned development) का मार्ग अपनाया। 1950 में योजना आयोग (Planning Commission) की स्थापना की गई। 1951 में पहली पंचवर्षीय योजना प्रारंभ हुई। 1950 से 1990 तक की अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था एक मिश्रित अर्थव्यवस्था (mixed economy) के रूप में विकसित हुई, जिसमें सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों का महत्व था। अर्थव्यवस्था का यह मॉडल समाजवादी प्रभावों (नियोजन, सार्वजनिक क्षेत्र) और पूँजीवादी तत्वों (निजी क्षेत्र) का संयोजन था।
2. आर्थिक प्रणाली और नियोजन (Economic System and Planning)
मिश्रित अर्थव्यवस्था: सरकार (सार्वजनिक क्षेत्र) और निजी क्षेत्र दोनों आर्थिक गतिविधियों में भाग लेते थे। सरकार ने भारी उद्योगों (इस्पात, ऊर्जा) को अपने अधीन रखा, जबकि निजी क्षेत्र को उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र में अवसर दिए।
योजना आयोग: 1950 में स्थापित, जो आर्थिक योजनाएँ बनाता था। पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से विकास के लक्ष्य निर्धारित किए जाते थे।
लक्ष्य (Objectives): योजनाओं के प्रमुख लक्ष्य थे - वृद्धि (growth), आधुनिकीकरण (modernisation), आत्मनिर्भरता (self-reliance) और समता (equity)।
3. योजना के लक्ष्य (Goals of Five Year Plans)
वृद्धि (Growth)
राष्ट्रीय आय और प्रति व्यक्ति आय में निरंतर वृद्धि का लक्ष्य। राष्ट्रीय आय के मापन में GDP का उपयोग होता है।
$$ \text{वृद्धि दर} = \frac{\text{GDP वृद्धि}}{\text{पिछला GDP}} \times 100 $$
आधुनिकीकरण (Modernisation)
उत्पादन की नई तकनीकों को अपनाना, सामाजिक रूप से आधुनिक दृष्टिकोण, जीवन स्तर में सुधार।
आत्मनिर्भरता (Self-Reliance)
आयात कम करना और घरेलू उत्पादन बढ़ाना, ताकि विदेशी सहायता पर निर्भरता न रहे। इसे आयात प्रतिस्थापन (import substitution) नीति से प्रोत्साहित किया गया।
समता (Equity)
आय और संपत्ति में असमानता कम करना, गरीबी उन्मूलन और आय का समान वितरण।
4. कृषि क्षेत्र का विकास (Agriculture Sector)
भूमि सुधार (Land Reforms)
ज़मींदारी व्यवस्था का अंत: 1950 के दशक में ज़मींदारी, तालुकदारी समाप्त की गई।
बिचौलियों को हटाना: किसानों को सीधे भूमि पर अधिकार।
भूमि की ऊपरी सीमा (Land Ceiling): एक व्यक्ति के पास भूमि की अधिकतम सीमा निर्धारित की गई।
हरित क्रांति (Green Revolution)
1960 के दशक के अंत में हरित क्रांति आई, जिसमें उच्च उत्पादन देने वाली बीजों की किस्में (HYV), रासायनिक उर्वरक, सिंचाई सुविधाएँ और आधुनिक तकनीक का उपयोग हुआ।
हरित क्रांति का लक्ष्य खाद्यान्न आत्मनिर्भरता था।
यह मुख्यतः गेहूँ और चावल उत्पादन में सफल रही और पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में प्रभावी रही।
सीमाएँ: हरित क्रांति केवल कुछ फसलों (गेहूँ, चावल) और कुछ क्षेत्रों तक सीमित रही; दलहन और तिलहन पर प्रभाव कम रहा। किसानों के बीच असमानता बढ़ी।
5. औद्योगिक क्षेत्र का विकास (Industrial Sector)
औद्योगिक नीति प्रस्ताव 1956 (Industrial Policy Resolution, 1956)
इस नीति में उद्योगों को तीन श्रेणियों में बाँटा गया:
1. पहली श्रेणी: सार्वजनिक क्षेत्र में (रक्षा, ऊर्जा, इस्पात, खनन, भारी मशीनें)।
2. दूसरी श्रेणी: मुख्यतः सार्वजनिक क्षेत्र, परंतु निजी क्षेत्र को भी भागीदारी की अनुमति (रसायन, सीमेंट, कागज)।
3. तीसरी श्रेणी: शेष उद्योग निजी क्षेत्र में।
इस नीति का उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र को मजबूत बनाना और आत्मनिर्भरता प्राप्त करना था।
आयात प्रतिस्थापन (Import Substitution)
विदेशी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाकर घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहित किया गया।
लाइसेंस राज (License Raj): औद्योगिक स्थापना के लिए सरकारी लाइसेंस अनिवार्य था।
छोटे पैमाने के उद्योग (Small Scale Industries)
सरकार ने छोटे पैमाने के उद्योगों को संरक्षण दिया, क्योंकि वे अधिक रोजगार देते हैं और कम पूँजी की आवश्यकता होती है। इनके लिए कई वस्तुओं का उत्पादन आरक्षित किया गया।
6. विदेशी व्यापार की नीति (Foreign Trade Policy)
निर्यात प्रतिबंध और आयात प्रतिबंध: आयात को निरुत्साहित किया गया, निर्यात को प्रोत्साहित किया गया।
इसका उद्देश्य भुगतान संतुलन (balance of payments) की रक्षा और आत्मनिर्भरता थी।
1991 से पहले भारत का विदेशी व्यापार सीमित था।
7. तकनीकी विकास (Technological Development)
भारी उद्योगों (इस्पात, रसायन) में तकनीकी सुधार।
आधुनिकीकरण का लक्ष्य तकनीक में सुधार से पूरा किया गया।
सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (BHEL, SAIL, HAL आदि) ने तकनीकी आधार विकसित किया।
8. सफलताएँ और असफलताएँ (Achievements and Failures)
सफलताएँ: खाद्यान्न आत्मनिर्भरता, औद्योगिक आधार का विस्तार, अवसंरचना में वृद्धि, उच्च शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों का निर्माण।
असफलताएँ: गरीबी और बेरोजगारी दूर नहीं हुई, आय असमानता बनी रही, सार्वजनिक क्षेत्र में अकुशलता और घाटे की समस्या।
सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों की भूमिका
इस अवधि में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (जैसे SAIL, BHEL, HAL, ONGC) ने देश के औद्योगिक आधार को मजबूत किया। इन्होंने इस्पात, ऊर्जा, रसायन और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में वह नींव रखी जो निजी क्षेत्र उस समय नहीं रख सकता था। साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र ने रोजगार के अवसर प्रदान किए और क्षेत्रीय संतुलन में योगदान दिया। परंतु समय के साथ कई सार्वजनिक उद्यमों में अकुशलता, अधिक लागत, निर्णयों में राजनीतिक हस्तक्षेप और घाटे की समस्याएँ बढ़ीं। इन्हीं कमजोरियों के कारण बाद में निजीकरण और सुधारों की आवश्यकता महसूस की गई।
योजना के लक्ष्य: वृद्धि, आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भरता, समता
त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1: योजनाओं के लक्ष्य
लक्ष्य
अर्थ
वृद्धि
राष्ट्रीय आय में वृद्धि
आधुनिकीकरण
नई तकनीक और जीवन स्तर
आत्मनिर्भरता
आयात कम, घरेलू उत्पादन
समता
आय असमानता कम करना
तालिका 2: औद्योगिक नीति 1956 की श्रेणियाँ
श्रेणी
उद्योग
पहली
सार्वजनिक क्षेत्र (इस्पात, ऊर्जा)
दूसरी
मुख्यतः सार्वजनिक (रसायन, सीमेंट)
तीसरी
निजी क्षेत्र (उपभोक्ता वस्तुएँ)
माइंड मैप
graph TD
A["भारतीय अर्थव्यवस्था 1950-1990"] --> B["योजना आयोग (1950)"]
B --> C["पंचवर्षीय योजनाएँ"]
C --> D["वृद्धि"]
C --> E["आधुनिकीकरण"]
C --> F["आत्मनिर्भरता"]
C --> G["समता"]
A --> H["कृषि"]
H --> I["भूमि सुधार"]
H --> J["हरित क्रांति"]
A --> K["उद्योग"]
K --> L["नीति 1956"]
K --> M["आयात प्रतिस्थापन"]
K --> N["छोटे उद्योग"]
महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
आरेख 1: योजना के लक्ष्य
आरेख 2: हरित क्रांति के तत्व
सामान्य गलतियाँ
योजना आयोग का स्थापना वर्ष: योजना आयोग 1950 में स्थापित हुआ, इसे 1947 या 1949 लिखना गलत है।
हरित क्रांति की फसलें: हरित क्रांति मुख्यतः गेहूँ और चावल में सफल रही; दलहन-तिलहन नहीं।
औद्योगिक नीति 1956 की श्रेणियाँ: पहली श्रेणी को निजी क्षेत्र में लिखना सामान्य गलती है।
लाइसेंस राज का अर्थ: औद्योगिक स्थापना के लिए सरकारी लाइसेंस आवश्यक था, इसे समझना आवश्यक है।
आत्मनिर्भरता और समता का भ्रम: आत्मनिर्भरता आयात घटाने से है, समता आय वितरण से, दोनों में अंतर करें।
भूमि सुधार का उद्देश्य: भूमि सुधार ज़मींदारी समाप्त करना था, इसे गलत लिखना।
परीक्षा युक्तियाँ
चारों लक्ष्यों (वृद्धि, आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भरता, समता) की परिभाषा स्पष्ट लिखें।
हरित क्रांति की सफलताएँ और सीमाएँ दोनों लिखें।
औद्योगिक नीति 1956 की तीन श्रेणियाँ तालिका में दिखाएँ।
आयात प्रतिस्थापन का अर्थ और उद्देश्य समझाएँ।
छोटे पैमाने के उद्योगों को संरक्षण का कारण (रोजगार) बताएँ।
सार्वजनिक क्षेत्र की सफलताओं और अकुशलता दोनों पर चर्चा करें।
निष्कर्ष
1950-1990 की अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था ने मिश्रित अर्थव्यवस्था के ढाँचे में योजनाबद्ध विकास किया। योजनाओं ने वृद्धि, आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भरता और समता के लक्ष्य रखे। भूमि सुधार और हरित क्रांति से कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता आई, जबकि औद्योगिक नीति 1956 और आयात प्रतिस्थापन ने औद्योगिक आधार को मजबूत किया। परंतु गरीबी, बेरोजगारी और असमानता बनी रही, तथा सार्वजनिक क्षेत्र में अकुशलता बढ़ी। ये असफलताएँ ही 1991 में आर्थिक सुधारों (उदारीकरण) का कारण बनीं। अगले अध्याय में हम इन्हीं सुधारों का अध्ययन करेंगे।