केंद्रीय प्रवृत्ति की माप वह एकल मान है जो संपूर्ण वितरण का प्रतिनिधि मान (representative value) होता है। यह आँकड़ों के मध्य बिंदु को दर्शाता है और संपूर्ण श्रृंखला की प्रकृति को संक्षेप में समझाता है। मुख्य मापें तीन हैं: समांतर माध्य (Arithmetic Mean), मध्यिका (Median) और बहुलक (Mode)। अच्छी केंद्रीय प्रवृत्ति की माप में स्पष्ट परिभाषा, सरल गणना, कठोर मानों से अप्रभावित होना और आगे के सांख्यिकीय विश्लेषण में उपयोग जैसे गुण होने चाहिए।
समांतर माध्य सभी मानों का योग उनकी संख्या से भाग देने पर प्राप्त होता है। यह केंद्रीय प्रवृत्ति की सबसे लोकप्रिय माप है।
$$ \bar{x} = \frac{\sum x_i}{N} $$ यहाँ $\bar{x}$ = माध्य, $x_i$ = चर के मान, $N$ = मानों की संख्या।
$$ \bar{x} = \frac{\sum f_i x_i}{\sum f_i} = \frac{\sum f_i x_i}{N} $$
$$ \bar{x} = A + \frac{\sum f_i d_i}{N} $$ यहाँ $A$ = कल्पित माध्य, $d_i = x_i - A$, $N = \sum f_i$।
मध्यिका वह मान है जो आँकड़ों को आरोही (या अवरोही) क्रम में व्यवस्थित करने पर ठीक बीच में आता है। 50% मान मध्यिका से कम और 50% अधिक होते हैं।
$$ \text{मध्यिका} = \frac{N+1}{2} \text{वाँ पद (जब N विषम)} $$ जब N सम हो तो दोनों मध्य पदों का माध्य लिया जाता है।
$$ M = L + \frac{\frac{N}{2} - cf}{f} \times i $$ यहाँ $L$ = मध्यिका वर्ग की निचली सीमा, $cf$ = मध्यिका वर्ग से पूर्व संचयी आवृत्ति, $f$ = मध्यिका वर्ग की आवृत्ति, $i$ = वर्ग अंतराल।
$$ Q_1 = L_1 + \frac{\frac{N}{4} - cf_1}{f_1} \times i \quad ; \quad Q_3 = L_3 + \frac{\frac{3N}{4} - cf_3}{f_3} \times i $$
बहुलक वह मान है जो श्रृंखला में सबसे अधिक बार आता है, अर्थात जिसकी आवृत्ति अधिकतम होती है। यह सबसे सामान्य या विशिष्ट मान होता है।
$$ Z = L + \frac{f_1 - f_0}{2f_1 - f_0 - f_2} \times i $$ यहाँ $L$ = बहुलक वर्ग की निचली सीमा, $f_1$ = बहुलक वर्ग की आवृत्ति, $f_0$ = बहुलक वर्ग से पहले वर्ग की आवृत्ति, $f_2$ = बहुलक वर्ग के बाद वाले वर्ग की आवृत्ति।
केंद्रीय प्रवृत्ति की मापों के अतिरिक्त स्थिति संकेतक भी महत्वपूर्ण हैं। चतुर्थक वितरण को चार बराबर भागों में विभाजित करते हैं। Q1 प्रथम चतुर्थक है जिससे नीचे 25% मान होते हैं, Q2 मध्यिका है, और Q3 तृतीय चतुर्थक है जिससे नीचे 75% मान होते हैं। शतमक (percentiles) वितरण को 100 बराबर भागों में विभाजित करते हैं; P50 मध्यिका के बराबर होता है। इनका उपयोग परीक्षा परिणामों, वेतन वितरण और सांख्यिकीय विश्लेषण में होता है।
सामान्य (symmetrical) वितरण में: $$ \text{बहुलक} = 3 \times \text{मध्यिका} - 2 \times \text{माध्य} $$ अर्थात $Z = 3M - 2\bar{x}$। यदि इनमें से कोई दो ज्ञात हों तो तीसरा निकाला जा सकता है।
सामान्य (सममित) वितरण में तीनों मापें समान होती हैं, अर्थात माध्य = मध्यिका = बहुलक। जब वितरण दक्षिणावर्ती या वामावर्ती (skewed) होता है तो ये मापें अलग-अलग स्थिति में आती हैं। दक्षिणावर्ती (positively skewed) वितरण में माध्य सबसे बड़ा होता है, उसके बाद मध्यिका और सबसे छोटा बहुलक होता है। वामावर्ती (negatively skewed) वितरण में इसका विपरीत होता है, अर्थात बहुलक सबसे बड़ा और माध्य सबसे छोटा होता है। मध्यिका हमेशा माध्य और बहुलक के बीच में स्थित होती है। इसी आधार पर अनुभवजन्य संबंध Z = 3M − 2X̄ का प्रयोग किया जाता है। परीक्षा में अक्सर यह पूछा जाता है कि विषम वितरण में तीनों मापों का क्रम क्या होता है, इसलिए इन संबंधों को ध्यान से समझना चाहिए।
| आधार | समांतर माध्य | मध्यिका | बहुलक |
|---|---|---|---|
| परिभाषा | योग/संख्या | मध्य पद | अधिकतम आवृत्ति वाला मान |
| चरम मानों का प्रभाव | अधिक | नहीं | नहीं |
| खुली सीमा में | ज्ञात नहीं | ज्ञात | ज्ञात |
| आगे के विश्लेषण | सर्वोत्तम | कम उपयोगी | कम उपयोगी |
| माप | सूत्र |
|---|---|
| माध्य (पृथक) | Σxᵢ / N |
| माध्य (आवृत्ति) | Σfᵢxᵢ / Σfᵢ |
| कल्पित माध्य विधि | A + Σfᵢdᵢ / N |
| मध्यिका (निरंतर) | L + [(N/2 − cf)/f] × i |
| बहुलक (निरंतर) | L + [(f₁−f₀)/(2f₁−f₀−f₂)] × i |
केंद्रीय प्रवृत्ति की मापें आँकड़ों का एकल प्रतिनिधि मान प्रस्तुत करती हैं। समांतर माध्य सबसे अधिक प्रयुक्त होता है परंतु चरम मानों से प्रभावित होता है; मध्यिका विषम वितरण के लिए उपयुक्त है और बहुलक सबसे सामान्य मान दर्शाता है। तीनों मापों के सूत्र, गुण-दोष और उपयुक्त परिस्थितियाँ परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। अनुभवजन्य संबंध Z = 3M − 2X̄ इन तीनों को जोड़ता है। अगले अध्याय में हम आँकड़ों में फैलाव (अपकिरण) की मापों का अध्ययन करेंगे।