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1. परिचय (Introduction)

केंद्रीय प्रवृत्ति की मापें आँकड़ों का केवल एक प्रतिनिधि मान देती हैं, परंतु वे आँकड़ों के फैलाव (spread) की जानकारी नहीं देतीं। अपकिरण की मापें यह बताती हैं कि आँकड़े केंद्रीय मान के आसपास कितने फैले हुए या बिखरे हुए हैं। दो श्रृंखलाओं का माध्य समान हो सकता है, परंतु उनका फैलाव भिन्न हो सकता है। उदाहरण के लिए, दो दुकानों का औसत विक्रय ₹500 समान हो सकता है, परंतु एक में दैनिक बिक्री 100 से 900 तक बदलती है और दूसरे में 450 से 550 तक। दूसरी दुकान का व्यवसाय अधिक स्थिर (consistent) है। इसीलिए अपकिरण की माप आवश्यक है।

2. परास (Range)

परास वितरण के अधिकतम और न्यूनतम मानों का अंतर है। $$ R = L - S $$ यहाँ $L$ = अधिकतम मान, $S$ = न्यूनतम मान। यह सबसे सरल परंतु अपूर्ण माप है क्योंकि यह केवल दो चरम मानों पर आधारित होती है।

3. चतुर्थक विचलन (Quartile Deviation)

चतुर्थक विचलन को अर्ध-चतुर्थक अंतराल (Semi-interquartile range) भी कहते हैं। $$ QD = \frac{Q_3 - Q_1}{2} $$ यह मध्य 50% आँकड़ों के फैलाव को दर्शाता है। परास की तुलना में यह चरम मानों से कम प्रभावित होती है।

4. माध्य विचलन (Mean Deviation)

माध्य विचलन मध्य मान (माध्य, मध्यिका या बहुलक) से सभी मानों के निरपेक्ष (absolute) विचलनों का औसत होता है। $$ MD = \frac{\sum |x_i - \bar{x}|}{N} $$ आवृत्ति वितरण के लिए: $$ MD = \frac{\sum f_i |x_i - \bar{x}|}{N} $$ निरपेक्ष मानों (absolute values) के कारण इसका बीजगणितीय विश्लेषण कठिन है।

5. मानक विचलन (Standard Deviation)

मानक विचलन अपकिरण की सबसे महत्वपूर्ण और वैज्ञानिक माप है। यह माध्य से विक्षेपणों के वर्गों के माध्य का वर्गमूल होता है।

पृथक श्रृंखला:

$$ \sigma = \sqrt{\frac{\sum (x_i - \bar{x})^2}{N}} $$

आवृत्ति वितरण:

$$ \sigma = \sqrt{\frac{\sum f_i (x_i - \bar{x})^2}{N}} $$

कल्पित माध्य विधि (Short-cut):

$$ \sigma = \sqrt{\frac{\sum fd^2}{N} - \left(\frac{\sum fd}{N}\right)^2} $$

प्रसरण (Variance)

मानक विचलन का वर्ग प्रसरण कहलाता है। $$ \text{प्रसरण} = \sigma^2 = \frac{\sum f_i (x_i - \bar{x})^2}{N} $$

मानक विचलन के गुण

  1. सभी मानों पर आधारित और गणितीय रूप से सटीक।
  2. चरम मानों से प्रभावित।
  3. मानक विचलन माप की उसी इकाई में व्यक्त होता है जिस इकाई में मूल आँकड़े।
  4. किसी स्थिरांक से सभी मानों को गुणा/जोड़ने पर मानक विचलन में समान प्रभाव पड़ता है।

6. विचरण गुणांक (Coefficient of Variation)

दो श्रृंखलाओं के फैलाव की तुलना के लिए विचरण गुणांक प्रयोग किया जाता है, विशेषकर जब माप की इकाइयाँ या माध्य भिन्न हों। $$ CV = \frac{\sigma}{\bar{x}} \times 100 $$ कम CV = अधिक स्थिरता या समानता। निर्णय लेने में (जैसे निवेश या कंपनी चयन) कम CV वाली श्रृंखला को प्राथमिकता दी जाती है।

6. अपकिरण की मापों का चयन (Choice of a Measure of Dispersion)

उपयुक्त अपकिरण की माप का चयन निम्नलिखित स्थितियों के अनुसार किया जाता है: - परास का उपयोग तब किया जाता है जब आँकड़ों का तीव्रता से अनुमान लगाना हो और विस्तृत विश्लेषण की आवश्यकता न हो। यह मौसम संबंधी आँकड़ों, स्टॉक मूल्यों की दैनिक सीमा आदि में प्रयोग होती है। - चतुर्थक विचलन तब उपयुक्त है जब वितरण खुली सीमाओं (open-ended classes) वाला हो या मध्य 50% आँकड़ों के फैलाव पर ध्यान केंद्रित करना हो। इसे मध्यिका के साथ प्रयोग किया जाता है। - माध्य विचलन तब उपयुक्त है जब सरल व्याख्या चाहिए, परंतु यह बीजगणितीय विश्लेषण के लिए उपयुक्त नहीं है। - मानक विचलन सबसे अधिक प्रयुक्त माप है, विशेषकर जब आगे के सांख्यिकीय विश्लेषण (जैसे सामान्य वितरण, प्रतिगमन) की आवश्यकता हो। - विचरण गुणांक तब उपयुक्त है जब दो भिन्न इकाइयों वाली या भिन्न माध्यों वाली श्रृंखलाओं की तुलना करनी हो। उदाहरण के लिए, दो कंपनियों में एक की बिक्री रुपयों में और दूसरी की टन में हो तो उनकी तुलना केवल विचरण गुणांक से ही संभव है।

7. लोरेंज वक्र (Lorenz Curve)

अपकिरण की माप का चित्रात्मक रूप लोरेंज वक्र है। इसमें संचयी प्रतिशत आवृत्तियों (x-अक्ष) और संचयी प्रतिशत मूल्यों (y-अक्ष) को दर्शाया जाता है। समान वितरण रेखा (line of equal distribution) से वक्र का विचलन जितना अधिक होगा, असमानता उतनी ही अधिक होगी। इसका उपयोग आय की असमानता मापने में होता है।

लोरेंज वक्र बनाने के लिए सबसे पहले व्यक्तियों (या परिवारों) को उनकी आय के आरोही क्रम में व्यवस्थित किया जाता है। फिर व्यक्तियों की संचयी प्रतिशत संख्या और उनकी कुल आय में हिस्से की संचयी प्रतिशत राशि की गणना की जाती है। इन दोनों को ग्राफ पर बिंदुओं के रूप में दर्शाकर मिलाने से लोरेंज वक्र प्राप्त होता है। यदि आय पूर्णतः समान रूप से वितरित हो तो वक्र समान वितरण रेखा (विकर्ण) के रूप में होता है। वक्र जितना अधिक विकर्ण से नीचे झुकता है, आय की असमानता उतनी ही अधिक होती है। लोरेंज वक्र का उपयोग किसी क्षेत्र या देश में आय, भूमि या संपत्ति की असमानता की तुलना करने के लिए भी किया जाता है, जिससे नीति निर्माताओं को यह जानकारी मिलती है कि क्या पुनर्वितरण नीतियों की आवश्यकता है।

विचरण गुणांक (CV) = (σ ÷ X̄) × 100 ; कम CV = अधिक स्थिरता

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: अपकिरण की मापें और सूत्र

माप सूत्र टिप्पणी
परास (Range) L − S सबसे सरल
चतुर्थक विचलन (Q₃ − Q₁)/2 मध्य 50% फैलाव
माध्य विचलन Σ d
मानक विचलन √(Σf(x−x̄)²/N) सर्वोत्तम माप
प्रसरण σ² मानक विचलन का वर्ग

तालिका 2: निरपेक्ष और सापेक्ष मापें

प्रकार निरपेक्ष सापेक्ष
परास R R/माध्य (गुणांक)
चतुर्थक विचलन QD QD/मध्यिका
मानक विचलन σ CV = σ/x̄ × 100
उपयोग एकल श्रृंखला तुलना के लिए

माइंड मैप

graph TD A["अपकिरण की माप"] --> B["परास: L − S"] A --> C["चतुर्थक विचलन: (Q3−Q1)/2"] A --> D["माध्य विचलन: Σ|d|/N"] A --> E["मानक विचलन: σ"] E --> F["प्रसरण: σ²"] A --> G["विचरण गुणांक: (σ/x̄)×100"] A --> H["लोरेंज वक्र (चित्रात्मक)"] H --> I["आय की असमानता"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: अपकिरण की मापों का वर्गीकरण

अपकिरण की मापें अपकिरण की माप निरपेक्ष मापें परास, चतुर्थक विचलन, मानक विचलन सापेक्ष मापें विचरण गुणांक (CV) मानक विचलन (σ) सर्वोत्तम माप, सभी मानों पर आधारित लोरेंज वक्र आय की असमानता दर्शाता है स्वर्ण नियम (Golden Rule) दो श्रृंखलाओं की तुलना सदैव विचरण गुणांक (CV) से करें।

आरेख 2: दो श्रृंखलाओं का फैलाव (समान माध्य, भिन्न अपकिरण)

समान माध्य, भिन्न अपकिरण माध्य (समान) कम अपकिरण (स्थिर) अधिक अपकिरण (अस्थिर) स्वर्ण नियम (Golden Rule) समान माध्य के बावजूद फैलाव अलग हो सकता है; फैलाव ही स्थिरता बताता है।

सामान्य गलतियाँ

  1. विचरण गुणांक का अर्थ उलटना: विद्यार्थी अधिक CV को अधिक स्थिरता मान लेते हैं, जबकि कम CV अधिक स्थिरता दर्शाता है।
  2. माध्य विचलन में निरपेक्ष मान: माध्य विचलन में निरपेक्ष (absolute) मान लिए बिना सीधा योग करना, जिससे उत्तर शून्य आ जाता है।
  3. मानक विचलन में वर्ग: (x − x̄)² की गणना करते समय ऋण चिह्नों की अनदेखी।
  4. प्रसरण और मानक विचलन में भ्रम: प्रसरण σ² है, मानक विचलन उसका वर्गमूल।
  5. परास को सर्वोत्तम माप मानना: परास केवल दो चरम मानों पर आधारित है, यह अपूर्ण है।
  6. CV में प्रतिशत लिखना भूलना: विचरण गुणांक में ×100 करना आवश्यक है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. मानक विचलन की कल्पित माध्य विधि का सूत्र (√(Σfd²/N − (Σfd/N)²)) अवश्य लिखें।
  2. दो कंपनियों/निवेशों की तुलना में विचरण गुणांक का उपयोग करें और निम्न CV को चुनें।
  3. प्रत्येक माप का एक लाभ और एक सीमा लिखें।
  4. लोरेंज वक्र का वर्णन करते समय समान वितरण रेखा से विचलन का उल्लेख करें।
  5. परास की सरलता और सीमा दोनों बताएँ।
  6. माध्य विचलन के लिए उपयुक्त मध्य मान (माध्य/मध्यिका/बहुलक) चुनने का कारण बताएँ।

निष्कर्ष

अपकिरण की मापें आँकड़ों के फैलाव को मापती हैं, जिससे केंद्रीय मान की विश्वसनीयता का पता चलता है। परास और चतुर्थक विचलन सरल परंतु अपूर्ण हैं; मानक विचलन सबसे वैज्ञानिक माप है। दो श्रृंखलाओं की तुलना के लिए विचरण गुणांक प्रयुक्त होता है, जिसमें निम्न CV अधिक स्थिरता को दर्शाता है। लोरेंज वक्र आय की असमानता को चित्रात्मक रूप में प्रस्तुत करता है। माध्य के साथ अपकिरण की माप ही आँकड़ों का पूर्ण चित्र प्रस्तुत करती है। अगले अध्याय में हम दो चरों के बीच संबंध (सहसंबंध) का अध्ययन करेंगे।