निर्धनता भारत की सबसे बड़ी सामाजिक-आर्थिक समस्या है। निर्धनता वह स्थिति है जिसमें व्यक्ति या परिवार अपनी बुनियादी आवश्यकताओं (भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य) को पूरा करने में असमर्थ होता है। भारत में निर्धनता का अध्ययन करते समय निर्धनता रेखा (poverty line) का निर्धारण आवश्यक होता है, जो न्यूनतम आवश्यकता पूरी करने के लिए आवश्यक आय या उपभोग स्तर को दर्शाती है। निर्धनता न केवल आय की कमी है, बल्कि यह अवसरों की कमी, शक्तिहीनता और सामाजिक बहिष्कार का भी रूप है।
2. निर्धनता के आयाम (Dimensions of Poverty)
निरपेक्ष निर्धनता (Absolute Poverty): यह एक निश्चित मानक (निर्धनता रेखा) के नीचे जीवन स्तर को दर्शाती है। जो व्यक्ति निर्धनता रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं, वे निरपेक्ष रूप से निर्धन कहलाते हैं।
सापेक्ष निर्धनता (Relative Poverty): यह विभिन्न वर्गों के बीच आय की असमानता को दर्शाती है। इसमें किसी वर्ग की तुलना दूसरे वर्ग से की जाती है।
निर्धनता के विभिन्न पहलू
भूख और कुपोषण: भोजन की कमी से कुपोषण।
बेरोजगारी और अल्परोजगारी: आय का नियमित स्रोत न होना।
शिक्षा का अभाव: स्कूल न जा पाना।
स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव: बीमारी का उपचार न करा पाना।
आश्रय का अभाव: उचित आवास न होना।
सामाजिक बहिष्कार: जाति, लिंग, क्षेत्र के आधार पर बहिष्कार।
3. निर्धनता रेखा (Poverty Line)
निर्धनता रेखा वह राशि है जो किसी व्यक्ति की न्यूनतम बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यक होती है। भारत में निर्धनता रेखा का निर्धारण उपभोग व्यय (consumption expenditure) के आधार पर किया जाता है। सामान्यतः निर्धनता रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों को BPL (Below Poverty Line) परिवार कहा जाता है। निर्धनता रेखा की गणना में कैलोरी आधारित मानक का उपयोग होता है।
$$ \text{निर्धनता रेखा} = \text{न्यूनतम कैलोरी (ग्रामीण/शहरी) को पूरा करने वाला उपभोग व्यय} $$
निर्धनता रेखा की गणना की विधि
राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (NSSO) के आँकड़ों के आधार पर।
निर्धनता रेखा को रंगराजन समिति और तेंदुलकर समिति जैसी समितियों ने निर्धारित करने का प्रयास किया। तेंदुलकर समिति (2009) ने निर्धनता रेखा का नया मापदंड सुझाया।
4. भारत में निर्धनता की स्थिति (Poverty in India)
स्वतंत्रता के समय भारत में निर्धनता की दर बहुत अधिक थी।
योजना काल में निर्धनता में कमी आई, परंतु गति धीमी रही।
वर्तमान में निर्धनता मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्रों, कृषि श्रमिकों, अनुसूचित जाति/जनजाति, और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों में अधिक है।
शहरी निर्धनता झुग्गियों, असंगठित क्षेत्र में अधिक है।
5. निर्धनता के कारण (Causes of Poverty)
आर्थिक कारण
कम आर्थिक विकास: अपर्याप्त विकास दर से रोजगार सृजन कम।
जनसंख्या वृद्धि: तेज जनसंख्या वृद्धि से संसाधनों पर दबाव।
बेरोजगारी: रोजगार के अवसरों की कमी।
कृषि की निर्भरता: कृषि में मौसमी बेरोजगारी और कम आय।
आय असमानता: संपत्ति और आय का असमान वितरण।
औद्योगिक पिछड़ापन: ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योगों की कमी।
सामाजिक कारण
शिक्षा का अभाव: अशिक्षा से कुशलता की कमी।
सामाजिक बहिष्कार: जाति और लिंग आधारित भेदभाव।
स्वास्थ्य समस्याएँ: कुपोषण और बीमारी से उत्पादकता में कमी।
अन्य कारण
महँगाई (मुद्रास्फीति)
प्राकृतिक आपदाएँ (सूखा, बाढ़)
नीतिगत कमियाँ
निर्धनता के चक्र की अवधारणा
निर्धनता प्रायः एक दुष्चक्र (vicious circle) का रूप ले लेती है। निर्धन व्यक्ति के पास न्यूनतम पोषण और शिक्षा का अभाव होता है, जिससे उसकी उत्पादकता कम रहती है। कम उत्पादकता से आय कम होती है और कम आय से बचत एवं निवेश नहीं हो पाता। निवेश के अभाव में संपत्ति नहीं बनती और अगली पीढ़ी भी निर्धनता में रहती है। इस प्रकार निर्धनता एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरित होती रहती है। इस दुष्चक्र को तोड़ने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार में निवेश करना आवश्यक है, ताकि व्यक्ति की उत्पादकता और आय में स्थायी वृद्धि हो सके। सरकारी योजनाओं का उद्देश्य इसी चक्र को भंग करना है।
6. निर्धनता निवारण के उपाय (Anti-Poverty Measures)
सरकारी कार्यक्रम
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA): 2005 में, 100 दिनों के रोजगार की गारंटी।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA): राशन के माध्यम से खाद्य सुरक्षा।
प्रधानमंत्री आवास योजना: आवास उपलब्ध कराना।
स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (SGSY): ग्रामीण स्वरोजगार।
इंदिरा आवास योजना (IAAY): ग्रामीण आवास।
आत्मनिर्भर भारत अभियान और अन्य रोजगार सृजन योजनाएँ।
नीतिगत उपाय
विकास दर बढ़ाना और समावेशी विकास।
शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश (मानव पूँजी निर्माण)।
कृषि की उत्पादकता बढ़ाना।
आय असमानता कम करने के लिए कर और सामाजिक सुरक्षा नीतियाँ।
7. निर्धनता मापने की समस्याएँ (Problems in Measuring Poverty)
निर्धनता रेखा के निर्धारण में विवाद।
केवल उपभोग व्यय पर आधारित होना।
ग्रामीण और शहरी मानकों में अंतर।
क्षेत्रीय विविधताएँ।
आँकड़ों की विश्वसनीयता।
निर्धनता = न्यूनतम आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थता
त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1: निर्धनता के प्रकार
प्रकार
अर्थ
निरपेक्ष निर्धनता
निर्धनता रेखा से नीचे जीवन स्तर
सापेक्ष निर्धनता
विभिन्न वर्गों के बीच आय असमानता
तालिका 2: निर्धनता निवारण कार्यक्रम
योजना
वर्ष
उद्देश्य
MGNREGA
2005
100 दिन रोजगार गारंटी
NFSA
2013
खाद्य सुरक्षा
SGSY
1999
ग्रामीण स्वरोजगार
आवास योजनाएँ
—
आवास प्रदान
माइंड मैप
graph TD
A["निर्धनता"] --> B["प्रकार"]
B --> C["निरपेक्ष"]
B --> D["सापेक्ष"]
A --> E["निर्धनता रेखा"]
E --> F["कैलोरी/उपभोग व्यय आधारित"]
A --> G["कारण"]
G --> H["आर्थिक: बेरोजगारी, असमानता"]
G --> I["सामाजिक: शिक्षा, बहिष्कार"]
A --> J["निवारण उपाय"]
J --> K["MGNREGA, NFSA"]
J --> L["मानव पूँजी निवेश"]
महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
आरेख 1: निर्धनता रेखा की अवधारणा
आरेख 2: निर्धनता के कारण
सामान्य गलतियाँ
निरपेक्ष और सापेक्ष निर्धनता का भ्रम: निरपेक्ष निर्धनता रेखा पर आधारित है, सापेक्ष असमानता पर।
निर्धनता रेखा का आधार: निर्धनता रेखा उपभोग व्यय/कैलोरी पर आधारित है, केवल आय पर नहीं।
BPL का अर्थ: BPL का अर्थ Below Poverty Line है, इसे गलत लिखना।
MGNREGA का विवरण: MGNREGA 2005 में, 100 दिन रोजगार की गारंटी, ये तथ्य गलत लिखना।
निर्धनता को केवल आय की कमी मानना: निर्धनता के सामाजिक आयाम (शिक्षा, स्वास्थ्य) छूट जाना।
तेंदुलकर समिति: निर्धनता रेखा से संबंधित समिति का नाम भूलना।
परीक्षा युक्तियाँ
निर्धनता की परिभाषा लिखकर उसके 3-4 आयाम बताएँ।
निरपेक्ष और सापेक्ष निर्धनता में अंतर स्पष्ट करें।
निर्धनता के आर्थिक और सामाजिक कारण अलग-अलग सूची में लिखें।
MGNREGA, NFSA जैसी योजनाओं के नाम और उद्देश्य याद रखें।
निर्धनता मापने की समस्याएँ (रेखा निर्धारण में विवाद) लिखें।
समाधान के रूप में मानव पूँजी निवेश (शिक्षा-स्वास्थ्य) पर बल दें।
निष्कर्ष
निर्धनता भारत की सबसे गंभीर समस्या है, जो केवल आय की कमी नहीं बल्कि अवसरों, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक समावेश का अभाव है। निर्धनता रेखा के माध्यम से निर्धन परिवारों की पहचान होती है। निर्धनता के कारण आर्थिक और सामाजिक दोनों हैं, अतः इसका समाधान भी बहुआयामी होना चाहिए। MGNREGA, NFSA जैसे कार्यक्रमों और मानव पूँजी में निवेश से निर्धनता में कमी आई है, परंतु अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। अगले अध्याय में हम मानव पूँजी निर्माण का अध्ययन करेंगे, जो निर्धनता उन्मूलन का आधार है।