"Mother's Day" कक्षा 11 की पाठ्यपुस्तक स्नैपशॉट्स (Snapshots) का एक प्रसिद्ध नाटक है, जिसे जे.बी. प्रीस्टले (J.B. Priestley) ने लिखा है। यह नाटक एक माँ की उपेक्षा और घर में उसके महत्व को हास्यात्मक शैली में प्रस्तुत करता है। नाटक में एक माँ, श्रीमती पियर्सन की कहानी है, जिसे उसका परिवार उसके त्याग को भूलकर उसकी सेवा का फायदा उठाता है, परंतु एक जादुई घटना के बाद सब कुछ बदल जाता है।
नाटक की नायिका श्रीमती एनी पियर्सन एक साधारण गृहिणी हैं, जो अपने पति जॉर्ज, बेटे सिरिल और बेटी डॉरिस की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित करती हैं। उसका परिवार उसकी मेहनत की कद्र नहीं करता। सभी उसे केवल काम करने वाली मशीन मानते हैं। परिवार के सदस्य स्वार्थी और आलसी हैं।
नाटक में एक रहस्यमयी मोड़ आता है जब एक जादूगरनी (पड़ोसी श्रीमती फिट्ज़गेराल्ड) एनी पियर्सन की आत्मा को अपने शरीर में बदल देती है। अब एनी पियर्सन के शरीर में श्रीमती फिट्ज़गेराल्ड की आत्मा है, जो घर के सदस्यों को उनकी गलतियों का सबक सिखाती है। नाटक का अंत इस सबक और परिवार में सुधार के साथ होता है। यह नाटक हमें सिखाता है कि माँ की मेहनत और त्याग का सम्मान करना चाहिए।
जे.बी. प्रीस्टले (John Boynton Priestley, 1894–1984) अंग्रेज़ी साहित्य के प्रसिद्ध उपन्यासकार, नाटककार और निबंधकार थे। उन्होंने कई प्रसिद्ध नाटक लिखे, जिनमें "An Inspector Calls" (एन इंस्पेक्टर कॉल्स) और "Mother's Day" शामिल हैं। उनके नाटक मानवीय रिश्तों, सामाजिक मुद्दों और नैतिक मूल्यों पर आधारित होते हैं।
प्रीस्टले की लेखन शैली हास्यपूर्ण, व्यंग्यात्मक और चिंतनशील है। वे सामाजिक समस्याओं को मनोरंजक ढंग से प्रस्तुत करते हैं, जिससे पाठक/दर्शक सोचने पर मजबूर हो जाते हैं।
नाटक की शुरुआत श्रीमती एनी पियर्सन के घर से होती है। वह अपने पति जॉर्ज, बेटे सिरिल और बेटी डॉरिस के लिए काम करती है। परिवार के सभी सदस्य उसकी मेहनत को हल्के में लेते हैं। वे उसे कभी धन्यवाद नहीं कहते और उसकी ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ करते हैं। एनी पियर्सन अकेली और थकी हुई महसूस करती है।
एनी पियर्सन अपनी पड़ोसी श्रीमती फिट्ज़गेराल्ड से मिलती है, जो एक जादूगरनी है। जादूगरनी उसकी इच्छा पूरी करती है और दोनों की आत्माएँ बदल देती है। अब एनी पियर्सन के शरीर में श्रीमती फिट्ज़गेराल्ड की आत्मा रहती है, जबकि एनी पियर्सन की आत्मा श्रीमती फिट्ज़गेराल्ड के शरीर में जाती है।
श्रीमती फिट्ज़गेराल्ड की आत्मा (एनी के शरीर में) अब परिवार के सदस्यों के सामने खड़ी होती है। वह उनकी आलोचना करती है, उन्हें उनकी गलतियाँ बताती है और उनसे सेवा की माँग करती है। जॉर्ज, सिरिल और डॉरिस इस बदलाव से चौंक जाते हैं। वे समझ जाते हैं कि एनी की मेहनत और त्याग कितना महत्वपूर्ण था।
नाटक के अंत में एनी पियर्सन की आत्मा अपने शरीर में वापस आती है। परिवार के सदस्य अब उसका सम्मान करते हैं और उसकी ज़रूरतों को समझते हैं। वे उसे धन्यवाद देते हैं और घर के कामों में उसकी मदद करने का वादा करते हैं। नाटक का अंत यह दर्शाता है कि माँ की मेहनत और त्याग को पहचानना आवश्यक है।
| पात्र | विवरण |
|---|---|
| श्रीमती एनी पियर्सन | गृहिणी, माँ, जिसकी उपेक्षा होती है |
| जॉर्ज पियर्सन | एनी का पति, स्वार्थी |
| सिरिल | बेटा, आलसी |
| डॉरिस | बेटी, स्वार्थी |
| श्रीमती फिट्ज़गेराल्ड | पड़ोसी, जादूगरनी |
इस नाटक का मूल भाव यह है कि माँ के त्याग, मेहनत और प्यार को हल्के में नहीं लेना चाहिए। श्रीमती पियर्सन पूरे दिन अपने परिवार के लिए काम करती है, परंतु उसका परिवार उसकी कद्र नहीं करता। जादुई परिवर्तन के बाद ही उन्हें अपनी गलती का एहसास होता है।
नाटक का संदेश यह है कि परिवार के हर सदस्य को एक-दूसरे की मेहनत और योगदान का सम्मान करना चाहिए। माँ की सेवा और त्याग को मात्र एक कर्तव्य नहीं, बल्कि प्रेम का प्रतीक मानना चाहिए। यह नाटक हमें सिखाता है कि प्रेम और सम्मान के बिना परिवार अधूरा है।
| पात्र | भूमिका |
|---|---|
| श्रीमती एनी पियर्सन | माँ, गृहिणी |
| जॉर्ज पियर्सन | पति |
| सिरिल | बेटा |
| डॉरिस | बेटी |
| श्रीमती फिट्ज़गेराल्ड | जादूगरनी पड़ोसी |
| क्रम | घटना |
|---|---|
| 1 | श्रीमती पियर्सन की उपेक्षा |
| 2 | जादूगरनी से आत्माओं का आदान-प्रदान |
| 3 | परिवार के सदस्यों का सामना |
| 4 | सबक सीखना |
| 5 | परिवार में सुधार |
"Mother's Day" एक ऐसा नाटक है जो हास्य और काल्पनिकता के माध्यम से एक गंभीर सामाजिक संदेश देता है। जे.बी. प्रीस्टले ने श्रीमती पियर्सन की कहानी के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि माँ का त्याग, मेहनत और प्रेम ही परिवार की असली नींव है। जादुई परिवर्तन के माध्यम से परिवार के सदस्यों को अपनी गलती का एहसास होता है और वे माँ के महत्व को पहचानते हैं। यह नाटक हमें सिखाता है कि परिवार के हर सदस्य को एक-दूसरे की मेहनत और योगदान का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि प्रेम और सम्मान के बिना परिवार अधूरा है।