वायुमंडल पृथ्वी के चारों ओर फैली गैसों की वह परत है जो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण धरती से जुड़ी रहती है। वायुमंडल जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि यह जीवों को ऑक्सीजन प्रदान करता है, पृथ्वी को अत्यधिक गर्मी और ठंड से बचाता है, तथा हानिकारक पराबैंगनी किरणों से सुरक्षा करता है। वायुमंडल का अध्ययन जलवायु और मौसम को समझने के लिए आधारभूत है। इस अध्याय में हम वायुमंडल की संरचना (किस गैस की कितनी मात्रा है) तथा संरचना (विभिन्न परतों में विभाजन) का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
वायुमंडल की ऊंचाई निश्चित रूप से बताना कठिन है, परंतु वैज्ञानिकों के अनुसार वायुमंडल पृथ्वी की सतह से लगभग 10,000 किलोमीटर तक फैला हुआ है। हालांकि, वायुमंडल का अधिकांश भाग (लगभग 99%) धरातल से 30 किलोमीटर की ऊंचाई के भीतर ही केंद्रित है। ऊंचाई के साथ वायु का घनत्व कम होता जाता है। वायुमंडल का अधिकांश भाग समुद्र तल पर पाया जाता है।
वायुमंडल विभिन्न गैसों, जलवाष्प तथा धूल कणों से बना है। शुष्क वायुमंडल में गैसों का प्रतिशत वितरण निम्नलिखित है:
नाइट्रोजन (Nitrogen) लगभग 78.08% के साथ वायुमंडल का सबसे अधिक मात्रा में उपस्थित तत्व है। नाइट्रोजन जीवन के लिए आवश्यक है क्योंकि यह प्रोटीन का एक घटक है। इसके बाद ऑक्सीजन (Oxygen) लगभग 20.95% के साथ दूसरा सबसे प्रचुर तत्व है। ऑक्सीजन श्वसन तथा दहन के लिए आवश्यक है। आर्गन (Argon) लगभग 0.93% की मात्रा में उपस्थित है। कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon Dioxide) लगभग 0.038% की मात्रा में उपस्थित है। यद्यपि कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बहुत कम है, फिर भी इसका जलवायु पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है क्योंकि यह ग्रीनहाउस गैस है और पृथ्वी की गर्मी को अवशोषित करती है। शेष गैसों में नियॉन, हीलियम, क्रिप्टन, क्सीनन, हाइड्रोजन, ओजोन तथा मीथेन शामिल हैं, जो अत्यंत सूक्ष्म मात्रा में पाई जाती हैं।
वायुमंडल में गैसों के अतिरिक्त जलवाष्प (Water Vapour) भी पाई जाती है, जिसकी मात्रा स्थान और समय के अनुसार परिवर्तित होती रहती है। उष्ण कटिबंधीय आर्द्र क्षेत्रों में जलवाष्प अधिक होती है, जबकि मरुस्थलीय और ध्रुवीय क्षेत्रों में यह नगण्य होती है। जलवाष्प बादलों, वर्षा और आर्द्रता के लिए उत्तरदायी है। इसके अतिरिक्त वायुमंडल में धूल कण भी उपस्थित होते हैं, जो जलवाष्प के संघनन के केंद्र (नाभिक) का कार्य करते हैं। धूल कणों के बिना बादलों का निर्माण संभव नहीं है। धूल कण जलवाष्प को सोखकर रंगीन सूर्यास्त तथा सूर्योदय की सुंदरता भी बढ़ाते हैं।
कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल का अत्यंत महत्वपूर्ण घटक है, यद्यपि इसकी मात्रा केवल 0.038% है। यह ग्रीनहाउस गैस है जो पृथ्वी से उत्सर्जित अवरक्त विकिरण को अवशोषित करती है और ग्रह की सतह को गर्म रखती है। कार्बन डाइऑक्साइड प्रकाश-संश्लेषण में वनस्पतियों द्वारा अवशोषित होती है। औद्योगिक क्रांति के बाद से वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में निरंतर वृद्धि हो रही है, जो जलवायु परिवर्तन का प्रमुख कारण है।
वायुमंडल को तापमान के आधार पर पांच मुख्य परतों में विभाजित किया गया है – क्षोभमंडल (Troposphere), समतापमंडल (Stratosphere), मध्यमंडल (Mesosphere), तापमंडल (Thermosphere) और बाह्यमंडल (Exosphere)।
क्षोभमंडल वायुमंडल की सबसे निचली तथा सबसे महत्वपूर्ण परत है। यह धरातल से औसतन 13 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैली हुई है। विषुवत रेखा पर इसकी ऊंचाई लगभग 18 किलोमीटर होती है, जबकि ध्रुवों पर लगभग 8 किलोमीटर। क्षोभमंडल में सारी मौसम संबंधी घटनाएं (बादल, वर्षा, पवन, चक्रवात) घटित होती हैं। इसी परत में जलवाष्प और धूल कण पाए जाते हैं। क्षोभमंडल में ऊंचाई के साथ तापमान घटता है। प्रत्येक 165 मीटर की ऊंचाई पर तापमान लगभग 1 डिग्री सेल्सियस घटता है। क्षोभमंडल की ऊपरी सीमा को 'क्षोभ सीमा' (Tropopause) कहते हैं। वायुमंडल का लगभग 75% द्रव्यमान क्षोभमंडल में ही पाया जाता है। सभी मौसम संबंधी घटनाओं के कारण क्षोभमंडल को 'मौसमी मंडल' (Weather Sphere) भी कहते हैं।
क्षोभमंडल के ऊपर लगभग 13 से 50 किलोमीटर की ऊंचाई तक समतापमंडल फैला हुआ है। इस परत में तापमान निम्न स्तर से प्रारंभ होकर ऊपर की ओर धीरे-धीरे बढ़ता है। समतापमंडल की मुख्य विशेषता 'ओजोन परत' (Ozone Layer) है, जो लगभग 20 से 35 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित है। ओजोन परत सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों को अवशोषित करती है। इस परत में वायु बहुत शुष्क होती है, इसलिए बादल नहीं बनते और वायुमान यातायात के लिए यह परत उपयुक्त है। समतापमंडल की ऊपरी सीमा को 'समताप सीमा' (Stratopause) कहते हैं।
समतापमंडल के ऊपर लगभग 50 से 80 किलोमीटर की ऊंचाई तक मध्यमंडल फैला है। इस परत में ऊंचाई के साथ तापमान पुनः घटने लगता है और यहां सबसे कम तापमान (लगभग -100 डिग्री सेल्सियस) दर्ज होता है। उल्काओं का दहन (जलना) मध्यमंडल में ही होता है, इसलिए इसे 'उल्कामंडल' भी कहते हैं। मध्यमंडल की ऊपरी सीमा को 'मध्य सीमा' (Mesopause) कहते हैं।
मध्यमंडल के ऊपर लगभग 80 से 400 किलोमीटर तक तापमंडल फैला है। इस परत में तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है, जो ऊंचाई के साथ सैकड़ों डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। यहां गैसें आयनित अवस्था में रहती हैं, इसलिए इस परत को 'आयनमंडल' (Ionosphere) भी कहते हैं। आयनमंडल रेडियो तरंगों को परावर्तित करता है, जिससे लंबी दूरी की रेडियो संचार संभव होती है। औरोरा (Aurora) जैसी सुंदर रोशनी इसी परत में बनती है। तापमंडल की ऊपरी सीमा को 'ताप सीमा' (Thermopause) कहते हैं।
वायुमंडल की सबसे बाहरी परत को बाह्यमंडल कहते हैं। यह तापमंडल के ऊपर से लेकर अंतरिक्ष तक फैली है। इस परत में वायु अत्यंत विरल होती है। हीलियम और हाइड्रोजन जैसी हल्की गैसें इस परत से अंतरिक्ष में चली जाती हैं। पृथ्वी के परिक्रमा करने वाले उपग्रह इसी परत में स्थापित किए जाते हैं। बाह्यमंडल की निचली सीमा को 'बाह्य सीमा' (Exobase) कहते हैं।
वायुमंडल की विभिन्न परतों में तापमान की दिशा भिन्न-भिन्न होती है। क्षोभमंडल और मध्यमंडल में ऊंचाई के साथ तापमान घटता है, जबकि समतापमंडल और तापमंडल में ऊंचाई के साथ तापमान बढ़ता है। यही कारण है कि क्षोभमंडल और मध्यमंडल को मिश्रण की परतें (convective) कहा जाता है, जबकि समतापमंडल और तापमंडल को परतदार (stratified) माना जाता है। इस प्रकार वायुमंडल का तापीय संरचना के आधार पर विभाजन किया जाता है।
| गैस | प्रतिशत | महत्व |
|---|---|---|
| नाइट्रोजन | 78.08% | प्रोटीन का घटक |
| ऑक्सीजन | 20.95% | श्वसन और दहन |
| आर्गन | 0.93% | निष्क्रिय गैस |
| कार्बन डाइऑक्साइड | 0.038% | ग्रीनहाउस गैस, प्रकाश-संश्लेषण |
| परत | ऊंचाई | तापमान की दिशा | विशेषता |
|---|---|---|---|
| क्षोभमंडल | 0-13 किमी | घटता है | मौसम संबंधी घटनाएँ |
| समतापमंडल | 13-50 किमी | बढ़ता है | ओजोन परत |
| मध्यमंडल | 50-80 किमी | घटता है | उल्काओं का दहन |
| तापमंडल | 80-400 किमी | बढ़ता है | आयनमंडल, औरोरा |
| बाह्यमंडल | 400 किमी से ऊपर | अत्यधिक विरल | उपग्रह |
वायुमंडल पृथ्वी के चारों ओर फैली गैसों की वह परत है जो जीवन के लिए अनिवार्य है। वायुमंडल का संघटन नाइट्रोजन (78.08%), ऑक्सीजन (20.95%), आर्गन (0.93%) और कार्बन डाइऑक्साइड (0.038%) द्वारा निर्धारित होता है। जलवाष्प और धूल कण भी वायुमंडल के महत्वपूर्ण घटक हैं। तापमान के आधार पर वायुमंडल पांच परतों में विभाजित है – क्षोभमंडल, समतापमंडल, मध्यमंडल, तापमंडल और बाह्यमंडल। क्षोभमंडल में सारी मौसमी घटनाएँ होती हैं, समतापमंडल में ओजोन परत स्थित है जो पराबैंगनी किरणों से रक्षा करती है, मध्यमंडल में उल्काएँ दहन होती हैं, तापमंडल में रेडियो तरंगों का परावर्तन होता है और बाह्यमंडल में उपग्रह स्थापित किए जाते हैं। इस अध्याय का ज्ञान आगामी अध्यायों – सौर विकिरण, वायुमंडलीय परिसंचरण और जलवायु – को समझने के लिए आवश्यक है।