🌍
🗺️
🧭
🏔️
🌋
← डैशबोर्ड पर वापस जाएँ
Font Size:

1. परिचय

प्राकृतिक आपदाएँ पृथ्वी की प्राकृतिक प्रक्रियाओं से उत्पन्न होने वाली विनाशकारी घटनाएँ हैं, जिनसे जीवन, संपत्ति तथा पर्यावरण को भारी क्षति होती है। भूकंप, बाढ़, सूखा, चक्रवात, सुनामी, भूस्खलन तथा ज्वालामुखी विस्फोट प्राकृतिक आपदाओं के प्रमुख उदाहरण हैं। 'आपदा' (Disaster) और 'विपत्ति' (Hazard) शब्दों में अंतर होता है। विपत्ति किसी खतरनाक घटना की संभावना है, जबकि आपदा उस घटना का वास्तविक घटित होकर विनाशकारी प्रभाव है। इस अध्याय में हम प्राकृतिक आपदाओं के प्रकार, भारत में प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति तथा आपदा प्रबंधन का विस्तृत अध्ययन करेंगे।

भारत भौगोलिक दृष्टि से प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील देश है। भारत का उत्तरी भाग भूकंपीय दृष्टि से सक्रिय क्षेत्र है, जबकि तटीय क्षेत्र चक्रवात और सुनामी के प्रति संवेदनशील हैं। उत्तरी मैदान में बाढ़ तथा कुछ क्षेत्रों में सूखा एक नियमित घटना बन चुकी है। भारत को विश्व का सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित देश कहा जाता है। अतः आपदा प्रबंधन का अध्ययन अत्यंत आवश्यक है।

2. प्राकृतिक आपदाओं के प्रकार

प्राकृतिक आपदाओं को निम्नलिखित प्रमुख प्रकारों में बांटा गया है:

भूकंप (Earthquake)

भूकंप पृथ्वी की आंतरिक शक्तियों के कारण उत्पन्न होने वाली भूमि की अचानक हलचल है। यह प्लेट विवर्तनिकी के कारण उत्पन्न होता है। भूकंप की उत्पत्ति के स्थान को 'केंद्र' (Focus) तथा सतह पर उसके ठीक ऊपर के स्थान को 'अधिकेंद्र' (Epicentre) कहते हैं। भूकंप की तीव्रता को 'रिक्टर पैमाने' (Richter Scale) से मापा जाता है। भूकंप की तीव्रता 7 से अधिक होने पर भारी विनाश होता है। भारत को भूकंपीय दृष्टि से चार क्षेत्रों (जोन) में विभाजित किया गया है – जोन V (अत्यधिक सक्रिय) से लेकर जोन II (कम सक्रिय) तक। हिमालयी क्षेत्र जोन V में आता है, जो भूकंप की दृष्टि से सबसे सक्रिय है। 2001 में गुजरात का भुज भूकंप तथा 2015 में नेपाल भूकंप भारत के निकट के प्रमुख भूकंप हैं।

बाढ़ (Flood)

बाढ़ उस स्थिति को कहते हैं जब नदियों का जल स्तर बढ़कर आस-पास के क्षेत्रों में फैल जाता है। बाढ़ का मुख्य कारण अत्यधिक वर्षा, नदियों में अवसादों का जमाव, तटबंधों का टूटना तथा चक्रवात हैं। भारत के उत्तरी मैदान में बाढ़ सबसे अधिक आती है। गंगा, ब्रह्मपुत्र, कोसी जैसी नदियाँ बार-बार बाढ़ लाती हैं। बाढ़ से फसलें नष्ट होती हैं, जान-माल की हानि होती है तथा महामारियाँ फैलती हैं। भारत को विश्व का सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित देश माना जाता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम तथा ओडिशा बाढ़ के प्रमुख क्षेत्र हैं।

सूखा (Drought)

सूखा वह स्थिति है जब किसी क्षेत्र में सामान्य से बहुत कम वर्षा होती है, जिससे जल की कमी हो जाती है। सूखे का मुख्य कारण मानसून की विफलता या अनिश्चितता है। सूखे से कृषि उत्पादन घटता है, जल की कमी होती है तथा पशुधन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र तथा कर्नाटक के कुछ क्षेत्रों में सूखा अधिक होता है। भारत में 'राष्ट्रीय सूखा बीमा' जैसे उपायों से सूखे के प्रभाव को कम करने का प्रयास किया जाता है।

चक्रवात (Cyclone)

चक्रवात एक निम्न दाब की मौसम प्रणाली है, जिसमें तेज पवनें तथा भारी वर्षा होती है। उष्णकटिबंधीय चक्रवात भारत के पूर्वी तट (बंगाल की खाड़ी) तथा पश्चिमी तट (अरब सागर) पर आते हैं। ओडिशा, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल तथा गुजरात के तटीय क्षेत्र चक्रवात के प्रति संवेदनशील हैं। 1999 का ओडिशा चक्रवात तथा 2013 का फैलिन चक्रवात भारत के प्रमुख विनाशकारी चक्रवात हैं। चक्रवातों के कारण तेज पवन, भारी वर्षा तथा तटीय बाढ़ होती है।

सुनामी (Tsunami)

सुनामी समुद्री भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट या भूस्खलन से उत्पन्न होने वाली विशाल समुद्री तरंगें हैं। ये तरंगें तटीय क्षेत्रों में भारी विनाश लाती हैं। 2004 में हिंद महासागर में आई सुनामी ने भारत के तटीय क्षेत्रों (तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल, अंडमान-निकोबार) को भारी नुकसान पहुंचाया था। सुनामी की चेतावनी के लिए भारत में 'भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र' (INCOIS) स्थापित किया गया है।

भूस्खलन (Landslide)

भूस्खलन चट्टानों, मृदा तथा मलबे का ढाल के साथ नीचे की ओर अचानक खिसकना है। यह अधिक वर्षा, भूकंप तथा मानवीय गतिविधियों से होता है। हिमालयी क्षेत्र, पश्चिमी घाट तथा पूर्वोत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन अधिक होते हैं। भूस्खलन से सड़कें बाधित होती हैं, जान-माल की हानि होती है तथा बस्तियाँ नष्ट होती हैं।

ज्वालामुखी विस्फोट (Volcanic Eruption)

ज्वालामुखी विस्फोट पृथ्वी के भीतर से लावा, राख तथा गैसों का बाहर निकलना है। यह प्लेट सीमाओं पर अधिक होता है। ज्वालामुखी विस्फोट से जान-माल की हानि, वायु प्रदूषण तथा जलवायु पर प्रभाव पड़ता है। भारत में सक्रिय ज्वालामुखी नहीं हैं, परंतु अंडमान-निकोबार में 'बैरन द्वीप' पर भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है।

3. भारत में प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति

भारत प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील देश है। भारत के विभिन्न भागों में विभिन्न प्रकार की आपदाएँ होती हैं: 1. हिमालयी क्षेत्र – भूकंप, भूस्खलन तथा हिमस्खलन। 2. उत्तरी मैदान – बाढ़। 3. तटीय क्षेत्र – चक्रवात और सुनामी। 4. राजस्थान तथा दक्कन का कुछ भाग – सूखा। 5. पश्चिमी घाट – भूस्खलन।

भारत के लगभग 60% भू-भाग में विभिन्न प्रकार की आपदाएँ होती हैं। भारत में बाढ़ से सबसे अधिक क्षेत्र प्रभावित होता है। भारत की संवेदनशीलता का कारण उसकी भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या का घनत्व तथा आर्थिक निर्भरता है।

4. आपदा प्रबंधन (Disaster Management)

आपदा प्रबंधन का अर्थ है आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए किए जाने वाले उपाय। आपदा प्रबंधन चक्र में निम्नलिखित चरण शामिल हैं: 1. न्यूनीकरण (Mitigation) – आपदा के जोखिम को कम करने के उपाय। 2. तैयारी (Preparedness) – आपदा के लिए पहले से तैयार रहना। 3. प्रतिक्रिया (Response) – आपदा के समय त्वरित सहायता। 4. पुनर्वास (Recovery) – आपदा के बाद पुनर्निर्माण तथा पुनर्वास।

आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005

भारत में आपदा प्रबंधन के लिए आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 बनाया गया है। इसके अंतर्गत 'राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण' (NDMA) तथा 'राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल' (NDRF) की स्थापना की गई है। NDMA आपदा नीतियां बनाता है, जबकि NDRF आपदा के समय बचाव कार्य करता है। इसके अतिरिक्त राज्य स्तर पर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) तथा जिला स्तर पर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) होते हैं।

आपदा पूर्वानुमान और चेतावनी

आधुनिक तकनीक (सुदूर संवेदन, जीआईएस) से मौसम पूर्वानुमान, चक्रवात चेतावनी तथा सुनामी चेतावनी की व्यवस्था की गई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) चक्रवात की चेतावनी जारी करता है। सुनामी चेतावनी के लिए INCOIS केंद्र कार्य करता है। पूर्व चेतावनी से जान-माल की हानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

5. प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के उपाय

  1. भूकंप – भूकंपरोधी भवन निर्माण, भूकंप के समय खुले स्थान पर जाना तथा आपातकालीन किट तैयार रखना।
  2. बाढ़ – तटबंधों का निर्माण, बाढ़ पूर्व चेतावनी तथा बाढ़ मैदानों में निर्माण पर प्रतिबंध।
  3. सूखा – जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, सिंचाई का विकास तथा सूखा प्रतिरोधी फसलें।
  4. चक्रवात – चक्रवात आश्रय स्थल, तटीय क्षेत्रों में वृक्षारोपण (मैंग्रोव) तथा समय पर निकासी।
  5. सुनामी – समुद्र तट से दूरी बनाए रखना तथा सुनामी चेतावनी प्रणाली।
  6. भूस्खलन – ढालों पर वृक्षारोपण, उचित जल निकासी तथा भूस्खलन संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण पर प्रतिबंध।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

आपदा कारण भारत में प्रभावित क्षेत्र
भूकंप प्लेट विवर्तनिकी हिमालयी क्षेत्र, गुजरात
बाढ़ अत्यधिक वर्षा उत्तरी मैदान, बिहार, असम
सूखा मानसून की विफलता राजस्थान, गुजरात
चक्रवात निम्न दाब प्रणाली पूर्वी तट, ओडिशा
सुनामी समुद्री भूकंप तटीय क्षेत्र
संस्था कार्य
NDMA आपदा नीतियों का निर्माण
NDRF आपदा के समय बचाव कार्य
IMD मौसम पूर्वानुमान, चक्रवात चेतावनी
INCOIS सुनामी चेतावनी

माइंड मैप

graph TD A["प्राकृतिक आपदाएँ एवं विपत्तियाँ"] --> B["आपदाओं के प्रकार"] A --> C["भारत की संवेदनशीलता"] A --> D["आपदा प्रबंधन"] B --> B1["भूकंप, बाढ़, सूखा"] B --> B2["चक्रवात, सुनामी, भूस्खलन"] D --> D1["NDMA, NDRF"] D --> D2["आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

प्राकृतिक आपदाओं के प्रकार भूकंप रिक्टर पैमाने से मापन हिमालयी क्षेत्र सक्रिय बाढ़ अत्यधिक वर्षा उत्तरी मैदान सूखा मानसून की विफलता राजस्थान, गुजरात चक्रवात निम्न दाब प्रणाली पूर्वी तट सुनामी समुद्री भूकंप तटीय क्षेत्र भूस्खलन मलबे का खिसकना हिमालय, पश्चिमी घाट भूकंप के प्रमुख शब्द केंद्र (Focus) - भूकंप की उत्पत्ति का स्थान अधिकेंद्र (Epicentre) - सतह पर उसके ठीक ऊपर का स्थान स्वर्ण नियम भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने से मापी जाती है।
आपदा प्रबंधन चक्र न्यूनीकरण तैयारी प्रतिक्रिया पुनर्वास आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 NDMA - नीति निर्माण NDRF - बचाव कार्य IMD - चक्रवात चेतावनी, INCOIS - सुनामी स्वर्ण नियम पूर्व चेतावनी और तैयारी से आपदा की हानि काफी हद तक कम हो जाती है।

सामान्य गलतियाँ

  1. भूकंप के केंद्र और अधिकेंद्र को उलट देना सामान्य गलती है; केंद्र (Focus) भूमि के अंदर उत्पत्ति स्थल है, जबकि अधिकेंद्र (Epicentre) सतह पर उसके ठीक ऊपर है।
  2. सुनामी को ज्वार-भाटा बताना गलत है; सुनामी भूकंपीय तरंग है, जो समुद्री भूकंप से उत्पन्न होती है।
  3. भारत को विश्व का सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देश बताना गलत है; भारत विश्व का सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित देश है।
  4. भूकंप की तीव्रता को ब्यूफोर्ट पैमाने से मापना बताना गलत है; यह रिक्टर पैमाने से मापी जाती है।
  5. बैरन द्वीप को मुख्य भूमि भारत में स्थित ज्वालामुखी बताना गलत है; बैरन द्वीप अंडमान-निकोबार में है, जहां भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है।
  6. आपदा प्रबंधन अधिनियम को 1972 का बताना गलत है; यह 2005 का है।
  7. चक्रवात की चेतावनी को INCOIS से जोड़ना गलत है; चक्रवात की चेतावनी IMD (भारतीय मौसम विभाग) जारी करता है, जबकि INCOIS सुनामी चेतावनी देता है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. आपदा और विपत्ति के अंतर को स्पष्ट करें।
  2. प्रत्येक आपदा के कारण तथा भारत में प्रभावित क्षेत्र लिखें।
  3. भूकंप के केंद्र, अधिकेंद्र तथा रिक्टर पैमाने का उल्लेख करें।
  4. भारत को सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित देश बताएं तथा कारण लिखें।
  5. आपदा प्रबंधन चक्र के चार चरण (न्यूनीकरण, तैयारी, प्रतिक्रिया, पुनर्वास) लिखें।
  6. NDMA, NDRF, IMD और INCOIS के कार्यों को स्पष्ट करें।
  7. प्रत्येक आपदा से बचाव के कम से कम दो उपाय लिखें।

निष्कर्ष

प्राकृतिक आपदाएँ पृथ्वी की प्राकृतिक प्रक्रियाओं से उत्पन्न होने वाली विनाशकारी घटनाएँ हैं, जिनसे जीवन और संपत्ति को भारी नुकसान होता है। भूकंप, बाढ़, सूखा, चक्रवात, सुनामी, भूस्खलन तथा ज्वालामुखी विस्फोट प्राकृतिक आपदाओं के प्रमुख प्रकार हैं। भारत भौगोलिक दृष्टि से इन आपदाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील है। हिमालयी क्षेत्र भूकंप के प्रति, उत्तरी मैदान बाढ़ के प्रति, तटीय क्षेत्र चक्रवात और सुनामी के प्रति तथा राजस्थान-गुजरात सूखे के प्रति संवेदनशील हैं। भारत विश्व का सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित देश है। आपदा प्रबंधन के लिए आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के अंतर्गत NDMA और NDRF की स्थापना की गई है। पूर्व चेतावनी, तैयारी तथा समय पर प्रतिक्रिया से आपदाओं की हानि को कम किया जा सकता है। आपदा प्रबंधन का ज्ञान जीवन और संपत्ति की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।