भारत का भू-आकृति विज्ञान (Physiography) पृथ्वी की सबसे पुरानी और सबसे जटिल भू-आकृतिक संरचनाओं में से एक है। भारत की भू-आकृतिक संरचना अत्यंत विविध है, जिसमें प्राचीन चट्टानों से बने प्रायद्वीपीय पठार, युवा वलित पर्वत हिमालय, विशाल मैदान, रेतीले मरुस्थल तथा लंबे तटीय मैदान शामिल हैं। भारत की भू-आकृतिक संरचना उसके भूवैज्ञानिक इतिहास से जुड़ी हुई है। भारत की मुख्य भू-आकृतिक विशेषताओं का निर्माण प्राचीन काल में गोंडवानालैंड के भाग के रूप में तथा बाद में भारतीय प्लेट के यूरेशियाई प्लेट से टकराने से हुआ। इस अध्याय में हम भारत की भूगर्भिक संरचना, प्रमुख भू-आकृतिक विभागों तथा उनकी विशेषताओं का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
भारत की भू-आकृतिक संरचना को भूवैज्ञानिक दृष्टि से तीन मुख्य भागों में बांटा गया है – (क) प्रायद्वीपीय भारत (हिमालय और मैदानों के दक्षिण में स्थित), (ख) हिमालय एवं पर्वतीय क्षेत्र, तथा (ग) भारतीय मैदान। ये तीनों भाग अपनी संरचना, चट्टानों की आयु और भू-आकृतिक विशेषताओं में भिन्न हैं।
भारत की स्थलाकृति को निम्नलिखित प्रमुख भू-आकृतिक विभागों में बांटा गया है: 1. हिमालय और उसकी पर्वत श्रृंखलाएँ 2. उत्तरी भारतीय मैदान (गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान) 3. प्रायद्वीपीय पठार 4. भारतीय मरुस्थल (थार) 5. तटीय मैदान 6. द्वीप समूह
हिमालय विश्व की सबसे ऊँची और सबसे युवा वलित पर्वत श्रृंखला है। इसका निर्माण भारतीय प्लेट और यूरेशियाई प्लेट के टकराव से हुआ है। हिमालय का निर्माण टेथिस सागर के अवसादों के वलन से हुआ। हिमालय तीन समानांतर श्रृंखलाओं में विभाजित है – (क) महान हिमालय या हिमाद्रि, (ख) मध्य हिमालय या हिमाचल, तथा (ग) शिवालिक या उप-हिमालय। महान हिमालय में विश्व की सबसे ऊँची चोटियाँ स्थित हैं, जिनमें माउंट एवरेस्ट (8848 मीटर) भी शामिल है। हिमालय भारत की प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करता है, मानसूनी पवनों को रोककर वर्षा में सहायक होता है तथा उत्तर भारत की नदियों का उद्गम स्थल है।
हिमालय के दक्षिण में विशाल उत्तरी मैदान फैला हुआ है, जो सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों के अपवाह तंत्र से निर्मित है। यह मैदान नवीन जलोढ़ मृदा से बना है। यह विश्व का सबसे विशाल मैदान है और अत्यंत उपजाऊ है। इस मैदान की ढाल पश्चिम से पूर्व की ओर है। मैदान को तीन भागों में बांटा गया है – पंजाब के मैदान, गंगा के मैदान तथा ब्रह्मपुत्र घाटी।
प्रायद्वीपीय पठार भारत के दक्षिणी भाग में स्थित सबसे पुराना भू-खंड है। यह गोंडवानालैंड का भाग था। यह प्राचीन क्रिस्टलीय तथा अग्निमय चट्टानों से बना है। प्रायद्वीपीय पठार का मध्य भाग 'दक्कन का पठार' कहलाता है। प्रायद्वीपीय पठार के पश्चिमी और पूर्वी किनारों पर क्रमशः पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट स्थित हैं। पश्चिमी घाट ऊँचे तथा निरंतर हैं, जबकि पूर्वी घाट निम्न तथा विच्छेदित हैं। दोनों घाटों के बीच स्थित पठार की ढाल पूर्व की ओर है, इसलिए प्रायद्वीपीय भारत की अधिकांश नदियाँ पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हैं। प्रायद्वीपीय पठार में दो प्रमुख चट्टानी पट्टियाँ हैं – (क) दक्कन ट्रैप (ज्वालामुखीय बेसाल्ट चट्टानें) तथा (ख) गोंडवाना कोयला क्षेत्र। प्रायद्वीपीय पठार में अनेक प्राचीन तथा अवशिष्ट पर्वत (जैसे अरावली, विंध्य, सतपुड़ा) स्थित हैं।
भारतीय मरुस्थल (थार) राजस्थान में स्थित है। यह अरावली पर्वत श्रृंखला के पश्चिम में फैला हुआ है। यहां वर्षा बहुत कम (25 से 40 सेंटीमीटर) होती है। मरुस्थल में बलुए टीले (रेतीले टिब्बे) पाए जाते हैं। लूनी नदी इस क्षेत्र की प्रमुख नदी है, जो खारे जल वाली नदी है। इस मरुस्थल में नमक की झीलें (सांभर झील) भी पाई जाती हैं।
भारत के पश्चिमी और पूर्वी तटों पर तटीय मैदान पाए जाते हैं। पश्चिमी तटीय मैदान को तीन भागों में बांटा गया है – (क) गुजरात तट, (ख) कोंकण तट, तथा (ग) मालाबार तट। पूर्वी तटीय मैदान को भी तीन भागों में बांटा गया है – (क) उत्तरी सरकार, (ख) कोरोमंडल तट, तथा (ग) सुंदरबन तट। पूर्वी तटीय मैदान अधिक विस्तृत है, क्योंकि प्रायद्वीपीय नदियाँ पूर्वी तट पर विशाल डेल्टा बनाती हैं। पश्चिमी तटीय मैदान संकरा है।
भारत के दो प्रमुख द्वीप समूह हैं – अंडमान-निकोबार (बंगाल की खाड़ी में) तथा लक्षद्वीप (अरब सागर में)। अंडमान-निकोबार द्वीप ज्वालामुखीय तथा प्रवालीय हैं, जबकि लक्षद्वीप के द्वीप प्रवालीय हैं। इसके अतिरिक्त गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में नवजात द्वीप भी पाए जाते हैं।
भारत की भू-आकृतिक संरचना को समझने के लिए उसके भूवैज्ञानिक इतिहास को जानना आवश्यक है। प्राचीन काल में भारत का प्रायद्वीपीय भाग गोंडवानालैंड का भाग था। लगभग 25 करोड़ वर्ष पहले गोंडवानालैंड का विघटन हुआ और भारतीय प्लेट उत्तर की ओर बढ़ने लगी। भारतीय प्लेट ने समुद्र तल को पार कर यूरेशियाई प्लेट से टकराया। इस टकराव से टेथिस सागर के अवसादों का वलन हुआ और हिमालय का निर्माण हुआ। यह प्रक्रिया लाखों वर्षों तक चली और आज भी जारी है, जिसके कारण हिमालय का उत्थान हो रहा है। इसी प्रक्रिया से भारतीय मैदानों का निर्माण हुआ।
भारत में निम्नलिखित मुख्य पर्वत श्रृंखलाएँ पाई जाती हैं: 1. हिमालय – विश्व की सबसे ऊँची पर्वत श्रृंखला (युवा वलित पर्वत)। 2. अरावली – विश्व की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला, जो राजस्थान में स्थित है। अरावली की सबसे ऊँची चोटी गुरु शिखर है। 3. विंध्य पर्वत – मध्य भारत की पर्वत श्रृंखला। 4. सतपुड़ा पर्वत – विंध्य के दक्षिण में स्थित पर्वत श्रृंखला, जिसमें धूपगढ़ चोटी (1350 मीटर) स्थित है। 5. पश्चिमी घाट – दक्कन के पश्चिमी किनारे की पर्वत श्रृंखला, जिसकी सबसे ऊँची चोटी अनाईमुडी (2695 मीटर) है। 6. पूर्वी घाट – दक्कन के पूर्वी किनारे की विच्छेदित पर्वत श्रृंखला।
भारत की प्रमुख चोटियाँ निम्नलिखित हैं: 1. माउंट एवरेस्ट (8848 मीटर) – विश्व की सबसे ऊँची चोटी, जो नेपाल-तिब्बत सीमा पर है। इसका तिब्बती नाम 'चोमोलुंगमा' और नेपाली नाम 'सागरमाथा' है। 2. कंचनजंगा (8586 मीटर) – भारत की सबसे ऊँची चोटी, जो सिक्किम में स्थित है। 3. नंदा देवी (7817 मीटर) – उत्तराखंड की चोटी। 4. नंगा पर्वत (8126 मीटर) – जम्मू-कश्मीर की चोटी। 5. अनाईमुडी (2695 मीटर) – दक्षिण भारत की सबसे ऊँची चोटी, जो केरल में अन्नामलाई पहाड़ियों में स्थित है। 6. गुरु शिखर (1722 मीटर) – अरावली की सबसे ऊँची चोटी, जो राजस्थान के माउंट आबू में स्थित है। 7. धूपगढ़ (1350 मीटर) – सतपुड़ा की सबसे ऊँची चोटी।
| भू-आकृतिक विभाग | विशेषता | चट्टानें |
|---|---|---|
| हिमालय | युवा वलित पर्वत | नवीन अवसादी चट्टानें |
| उत्तरी मैदान | विशाल उपजाऊ मैदान | नवीन जलोढ़ |
| प्रायद्वीपीय पठार | सबसे प्राचीन भू-खंड | क्रिस्टलीय, अग्निमय चट्टानें |
| मरुस्थल (थार) | कम वर्षा | बलुई मृदा |
| पर्वत श्रृंखला | सबसे ऊँची चोटी | ऊँचाई |
|---|---|---|
| हिमालय | माउंट एवरेस्ट | 8848 मीटर |
| पश्चिमी घाट | अनाईमुडी | 2695 मीटर |
| अरावली | गुरु शिखर | 1722 मीटर |
| सतपुड़ा | धूपगढ़ | 1350 मीटर |
भारत की भू-आकृतिक संरचना अत्यंत विविध है, जिसमें प्राचीन पठार, युवा पर्वत, विशाल मैदान, मरुस्थल तथा तटीय मैदान शामिल हैं। भारत के छह प्रमुख भू-आकृतिक विभाग हैं – हिमालय, उत्तरी भारतीय मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, थार मरुस्थल, तटीय मैदान तथा द्वीप समूह। हिमालय विश्व की सबसे युवा वलित पर्वत श्रृंखला है, जबकि अरावली सबसे प्राचीन है। प्रायद्वीपीय पठार भारत का सबसे पुराना भू-खंड है, जो गोंडवानालैंड का भाग था। भारतीय प्लेट और यूरेशियाई प्लेट के टकराव से हिमालय का निर्माण हुआ। भारत की प्रमुख चोटियाँ - माउंट एवरेस्ट, कंचनजंगा, नंदा देवी, अनाईमुडी, गुरु शिखर - भारत की ऊँचाई की विविधता को दर्शाती हैं। यह अध्याय भारत के भौतिक भूगोल - अपवाह तंत्र, जलवायु, मृदा और वनस्पति - को समझने की नींव है।