Comprehensive theory, key formulas, diagrams, and memory aids for वायुमंडल में जल.
जल पृथ्वी पर जीवन का आधार है। वायुमंडल में जल की उपस्थिति विभिन्न रूपों में होती है – जलवाष्प, बादल, वर्षा, हिम तथा हिमकण। वायुमंडल में जल के इन रूपों का अध्ययन 'जलवायु विज्ञान' का एक महत्वपूर्ण भाग है। वायुमंडल में जल की प्रक्रियाएँ – वाष्पीकरण, संघनन, वर्षा तथा वर्षण – मौसम और जलवायु को गहराई से प्रभावित करती हैं। वायुमंडल में जल का अध्ययन आर्द्रता, संघनन, बादल, वर्षा के प्रकार तथा वर्षण के क्षेत्रीय वितरण को समझने के लिए आवश्यक है। इस अध्याय में हम आर्द्रता, संघनन, बादलों के प्रकार, वर्षा के प्रकार तथा विश्व में वर्षा के वितरण का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
वायुमंडल में जल की मात्रा स्थान और समय के अनुसार परिवर्तित होती रहती है। उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में जलवाष्प की मात्रा अधिक होती है, जबकि ध्रुवीय और मरुस्थलीय क्षेत्रों में यह अत्यंत कम होती है। वायु में जलवाष्प की मात्रा तापमान पर निर्भर करती है – गर्म वायु में अधिक जलवाष्प रह सकती है, जबकि ठंडी वायु में कम।
वायुमंडल में उपस्थित जलवाष्प की मात्रा को 'आर्द्रता' (Humidity) कहते हैं। आर्द्रता के मापन के लिए हाइग्रोमीटर (Hygrometer) नामक यंत्र का प्रयोग किया जाता है। आर्द्रता निम्नलिखित प्रकार की होती है:
वह तापमान जिस पर वायु जलवाष्प से संतृप्त हो जाती है, 'ओसांक' (Dew Point) कहलाता है। जब वायु का तापमान ओसांक तक पहुंच जाता है, तो संघनन प्रारंभ हो जाता है। ओसांक तापमान के पहुंचने पर सापेक्ष आर्द्रता 100% हो जाती है।
जलवाष्प का द्रव अवस्था में बदलना 'संघनन' कहलाता है। संघनन के लिए दो शर्तें आवश्यक हैं – (क) वायु जलवाष्प से संतृप्त होना तथा (ख) संघनन के नाभिक (condensation nuclei) की उपस्थिति। संघनन के नाभिक के रूप में धूल कण, नमक कण तथा धुएँ के कण कार्य करते हैं। संघनन तब होता है जब वायु ठंडी होकर ओसांक तक पहुंचती है। संघनन के विभिन्न रूप हैं – ओस, पाला, कोहरा, धुंध तथा बादल।
बादल जल की सूक्ष्म बूंदों और बर्फ के क्रिस्टलों का समूह है जो संघनन से बनता है। बादलों की ऊंचाई, आकार और रूप के आधार पर चार मुख्य प्रकार के बादल होते हैं – सिरस, क्यूम्युलस, स्ट्रेटस और निम्बस।
वायुमंडल से जल का पृथ्वी की सतह पर गिरना 'वर्षण' कहलाता है। वर्षण के मुख्य रूप हैं – वर्षा, हिमपात, ओलावृष्टि तथा बूंदाबांदी। वर्षण के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं:
जब सूर्य की गर्मी से पृथ्वी की सतह गर्म होती है, तो गर्म वायु ऊपर उठती है। ऊपर उठती वायु ठंडी होकर संघनित होती है और वर्षा करती है। यह वर्षा संवहनीय वर्षा कहलाती है। यह मुख्यतः विषुवत रेखीय क्षेत्रों में होती है, जहां वर्षा लगभग प्रतिदिन दोपहर बाद होती है। इस प्रकार की वर्षा में भारी बूंदें और तीव्र वर्षा होती है, परंतु इसकी अवधि कम होती है।
जब आर्द्र वायु पर्वतों से टकराकर ऊपर उठती है, तो ठंडी होकर संघनित होती है और वर्षा करती है। यह वर्षा पर्वत के पवन-अभिमुखी ढाल (windward side) पर अधिक होती है, जबकि पर्वत के दूसरी ओर (leeward side) बहुत कम वर्षा होती है। इस शुष्क भाग को 'वर्षा-छाया क्षेत्र' (Rain Shadow) कहते हैं। भारत में पश्चिमी घाट के पूर्वी ढाल पर वर्षा-छाया क्षेत्र बना है।
जब गर्म और ठंडी वायु संहतियाँ मिलती हैं, तो गर्म वायु ऊपर उठकर ठंडी होती है और वर्षा करती है। इस वर्षा को चक्रवाती या सामने वाली वर्षा (frontal rainfall) कहते हैं। यह शीतोष्ण क्षेत्रों में अधिक होती है और इसकी अवधि लंबी होती है।
विश्व में वर्षा का वितरण असमान है। विषुवत रेखीय क्षेत्रों में सर्वाधिक वर्षा होती है, क्योंकि वहां सूर्यातप अधिक होने से संवहनीय वर्षा अधिक होती है। उपोष्ण उच्च दाब क्षेत्रों में वायु अवरोही होने से बादल नहीं बनते और वहां वर्षा बहुत कम होती है। यही कारण है कि विश्व के प्रमुख मरुस्थल उपोष्ण क्षेत्रों में स्थित हैं। मध्य अक्षांशों में चक्रवाती वर्षा होती है। पवन-अभिमुखी ढालों पर वर्षा अधिक होती है।
वर्षा को मापने के लिए 'वर्षा मापी यंत्र' (Rain Gauge) का प्रयोग किया जाता है। वर्षा की मात्रा को सेंटीमीटर या मिलीमीटर में मापा जाता है। किसी स्थान की वार्षिक वर्षा उसकी जलवायु का महत्वपूर्ण सूचक है।
| आर्द्रता का प्रकार | परिभाषा | इकाई |
|---|---|---|
| निरपेक्ष आर्द्रता | वायु के आयतन में जलवाष्प का वास्तविक भार | ग्राम/घन मीटर |
| सापेक्ष आर्द्रता | उपस्थित जलवाष्प और अधिकतम जलवाष्प का अनुपात | प्रतिशत (%) |
| विशिष्ट आर्द्रता | वायु संहति के द्रव्यमान में जलवाष्प का द्रव्यमान | ग्राम/किलोग्राम |
| वर्षा का प्रकार | विशेषता | क्षेत्र |
|---|---|---|
| संवहनीय वर्षा | तीव्र, अल्प अवधि | विषुवत रेखीय क्षेत्र |
| पर्वतीय वर्षा | पवन-अभिमुखी ढाल पर अधिक | पहाड़ी क्षेत्र |
| चक्रवाती वर्षा | लंबी अवधि | शीतोष्ण क्षेत्र |
graph TD
A["वायुमंडल में जल"] --> B["आर्द्रता"]
A --> C["संघनन"]
A --> D["बादल"]
A --> E["वर्षा"]
B --> B1["निरपेक्ष, सापेक्ष"]
C --> C1["ओस, पाला, कोहरा, धुंध"]
D --> D1["सिरस, क्यूम्युलस, स्ट्रेटस, निम्बस"]
E --> E1["संवहनीय, पर्वतीय, चक्रवाती"]
वायुमंडल में जल की उपस्थिति तथा उसकी प्रक्रियाएँ पृथ्वी की जलवायु और मौसम को गहराई से प्रभावित करती हैं। वायुमंडल में जलवाष्प की मात्रा को आर्द्रता से मापा जाता है, जो निरपेक्ष, सापेक्ष और विशिष्ट आर्द्रता के रूप में व्यक्त होती है। जब वायु ओसांक तक ठंडी होती है, तो संघनन होता है, जिससे ओस, पाला, कोहरा, धुंध और बादल बनते हैं। बादल चार मुख्य प्रकार के होते हैं – सिरस, क्यूम्युलस, स्ट्रेटस और निम्बस। वर्षा मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है – संवहनीय, पर्वतीय और चक्रवाती। संवहनीय वर्षा विषुवत क्षेत्रों में, पर्वतीय वर्षा पर्वतों के पवन-अभिमुखी ढालों पर तथा चक्रवाती वर्षा शीतोष्ण क्षेत्रों में अधिक होती है। वर्षा-छाया क्षेत्रों में वर्षा बहुत कम होती है। विश्व में वर्षा का वितरण असमान है, जो मौसम, कृषि तथा मानव जीवन को प्रभावित करता है।