🌍
🗺️
🧭
🏔️
🌋
← डैशबोर्ड पर वापस जाएँ
Font Size:

1. परिचय

जल पृथ्वी पर जीवन का आधार है। वायुमंडल में जल की उपस्थिति विभिन्न रूपों में होती है – जलवाष्प, बादल, वर्षा, हिम तथा हिमकण। वायुमंडल में जल के इन रूपों का अध्ययन 'जलवायु विज्ञान' का एक महत्वपूर्ण भाग है। वायुमंडल में जल की प्रक्रियाएँ – वाष्पीकरण, संघनन, वर्षा तथा वर्षण – मौसम और जलवायु को गहराई से प्रभावित करती हैं। वायुमंडल में जल का अध्ययन आर्द्रता, संघनन, बादल, वर्षा के प्रकार तथा वर्षण के क्षेत्रीय वितरण को समझने के लिए आवश्यक है। इस अध्याय में हम आर्द्रता, संघनन, बादलों के प्रकार, वर्षा के प्रकार तथा विश्व में वर्षा के वितरण का विस्तृत अध्ययन करेंगे।

वायुमंडल में जल की मात्रा स्थान और समय के अनुसार परिवर्तित होती रहती है। उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में जलवाष्प की मात्रा अधिक होती है, जबकि ध्रुवीय और मरुस्थलीय क्षेत्रों में यह अत्यंत कम होती है। वायु में जलवाष्प की मात्रा तापमान पर निर्भर करती है – गर्म वायु में अधिक जलवाष्प रह सकती है, जबकि ठंडी वायु में कम।

2. आर्द्रता (Humidity)

वायुमंडल में उपस्थित जलवाष्प की मात्रा को 'आर्द्रता' (Humidity) कहते हैं। आर्द्रता के मापन के लिए हाइग्रोमीटर (Hygrometer) नामक यंत्र का प्रयोग किया जाता है। आर्द्रता निम्नलिखित प्रकार की होती है:

  1. निरपेक्ष आर्द्रता (Absolute Humidity) – किसी दिए गए आयतन की वायु में उपस्थित जलवाष्प का वास्तविक भार। इसे ग्राम प्रति घन मीटर में व्यक्त किया जाता है।
  2. सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity) – वायु में उपस्थित जलवाष्प की मात्रा और उसी तापमान पर वायु में रह सकने वाली जलवाष्प की अधिकतम मात्रा का प्रतिशत अनुपात। इसे प्रतिशत (%) में व्यक्त किया जाता है। वायु में जलवाष्प धारण करने की क्षमता तापमान के साथ बढ़ती है, अतः तापमान बढ़ने पर सापेक्ष आर्द्रता घटती है और तापमान घटने पर सापेक्ष आर्द्रता बढ़ती है।
  3. विशिष्ट आर्द्रता (Specific Humidity) – किसी वायु संहति के कुल द्रव्यमान की तुलना में जलवाष्प का द्रव्यमान।

ओसांक (Dew Point)

वह तापमान जिस पर वायु जलवाष्प से संतृप्त हो जाती है, 'ओसांक' (Dew Point) कहलाता है। जब वायु का तापमान ओसांक तक पहुंच जाता है, तो संघनन प्रारंभ हो जाता है। ओसांक तापमान के पहुंचने पर सापेक्ष आर्द्रता 100% हो जाती है।

3. संघनन (Condensation)

जलवाष्प का द्रव अवस्था में बदलना 'संघनन' कहलाता है। संघनन के लिए दो शर्तें आवश्यक हैं – (क) वायु जलवाष्प से संतृप्त होना तथा (ख) संघनन के नाभिक (condensation nuclei) की उपस्थिति। संघनन के नाभिक के रूप में धूल कण, नमक कण तथा धुएँ के कण कार्य करते हैं। संघनन तब होता है जब वायु ठंडी होकर ओसांक तक पहुंचती है। संघनन के विभिन्न रूप हैं – ओस, पाला, कोहरा, धुंध तथा बादल।

संघनन के रूप

  1. ओस (Dew) – साफ और शांत रात में वस्तुओं की सतह पर संघनन होने से जल की बूंदें बनती हैं, जिन्हें ओस कहते हैं। ओस तब बनती है जब सतह का तापमान ओसांक तक गिर जाता है, परंतु हिमांक से ऊपर रहता है।
  2. पाला (Frost) – जब सतह का तापमान ओसांक तथा हिमांक दोनों से नीचे चला जाता है, तो जलवाष्प सीधे बर्फ के कणों में बदल जाती है, जिसे पाला कहते हैं।
  3. कोहरा (Fog) – जब संघनन स्थल की सतह के निकट होता है और दृश्यता 1 किलोमीटर से कम हो जाती है, तो उसे कोहरा कहते हैं।
  4. धुंध (Mist) – जब संघनन के कारण दृश्यता 1 किलोमीटर से अधिक होती है, तो उसे धुंध कहते हैं। धुंध में जल की बूंदें कोहरे की तुलना में बड़ी होती हैं।
  5. बादल (Clouds) – जब संघनन ऊंचाई पर होता है, तो बादल बनते हैं।

4. बादल (Clouds)

बादल जल की सूक्ष्म बूंदों और बर्फ के क्रिस्टलों का समूह है जो संघनन से बनता है। बादलों की ऊंचाई, आकार और रूप के आधार पर चार मुख्य प्रकार के बादल होते हैं – सिरस, क्यूम्युलस, स्ट्रेटस और निम्बस।

  1. सिरस बादल (Cirrus Clouds) – ऊँचे बादल (6-12 किलोमीटर की ऊंचाई पर), जो पतले और रेशेदार होते हैं। ये बर्फ के क्रिस्टलों से बने होते हैं। सिरस बादल अच्छे मौसम का संकेत होते हैं।
  2. क्यूम्युलस बादल (Cumulus Clouds) – मध्यम ऊंचाई के बादल, जो रुई के गोले जैसे दिखते हैं। ये तेजी से ऊपर उठती वायु से बनते हैं। इनसे सामान्यतः वर्षा नहीं होती।
  3. स्ट्रेटस बादल (Stratus Clouds) – सतह के निकट फैली चपटी परत वाले बादल। ये बूंदाबांदी करते हैं।
  4. निम्बस बादल (Nimbus Clouds) – वर्षा करने वाले बादल। जब स्ट्रेटस और निम्बस मिलते हैं, तो निम्बोस्ट्रेटस बनता है, और जब क्यूम्युलस और निम्बस मिलते हैं, तो क्यूम्युलोनिम्बस बनता है। क्यूम्युलोनिम्बस बादल भारी वर्षा, ओला और तड़ित का कारण बनते हैं।

5. वर्षण (Precipitation)

वायुमंडल से जल का पृथ्वी की सतह पर गिरना 'वर्षण' कहलाता है। वर्षण के मुख्य रूप हैं – वर्षा, हिमपात, ओलावृष्टि तथा बूंदाबांदी। वर्षण के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं:

संवहनीय वर्षा (Convectional Rainfall)

जब सूर्य की गर्मी से पृथ्वी की सतह गर्म होती है, तो गर्म वायु ऊपर उठती है। ऊपर उठती वायु ठंडी होकर संघनित होती है और वर्षा करती है। यह वर्षा संवहनीय वर्षा कहलाती है। यह मुख्यतः विषुवत रेखीय क्षेत्रों में होती है, जहां वर्षा लगभग प्रतिदिन दोपहर बाद होती है। इस प्रकार की वर्षा में भारी बूंदें और तीव्र वर्षा होती है, परंतु इसकी अवधि कम होती है।

पर्वतीय या ओरोग्राफिक वर्षा (Orographic Rainfall)

जब आर्द्र वायु पर्वतों से टकराकर ऊपर उठती है, तो ठंडी होकर संघनित होती है और वर्षा करती है। यह वर्षा पर्वत के पवन-अभिमुखी ढाल (windward side) पर अधिक होती है, जबकि पर्वत के दूसरी ओर (leeward side) बहुत कम वर्षा होती है। इस शुष्क भाग को 'वर्षा-छाया क्षेत्र' (Rain Shadow) कहते हैं। भारत में पश्चिमी घाट के पूर्वी ढाल पर वर्षा-छाया क्षेत्र बना है।

चक्रवाती वर्षा (Cyclonic Rainfall)

जब गर्म और ठंडी वायु संहतियाँ मिलती हैं, तो गर्म वायु ऊपर उठकर ठंडी होती है और वर्षा करती है। इस वर्षा को चक्रवाती या सामने वाली वर्षा (frontal rainfall) कहते हैं। यह शीतोष्ण क्षेत्रों में अधिक होती है और इसकी अवधि लंबी होती है।

विश्व में वर्षा का वितरण

विश्व में वर्षा का वितरण असमान है। विषुवत रेखीय क्षेत्रों में सर्वाधिक वर्षा होती है, क्योंकि वहां सूर्यातप अधिक होने से संवहनीय वर्षा अधिक होती है। उपोष्ण उच्च दाब क्षेत्रों में वायु अवरोही होने से बादल नहीं बनते और वहां वर्षा बहुत कम होती है। यही कारण है कि विश्व के प्रमुख मरुस्थल उपोष्ण क्षेत्रों में स्थित हैं। मध्य अक्षांशों में चक्रवाती वर्षा होती है। पवन-अभिमुखी ढालों पर वर्षा अधिक होती है।

6. वर्षा मापन

वर्षा को मापने के लिए 'वर्षा मापी यंत्र' (Rain Gauge) का प्रयोग किया जाता है। वर्षा की मात्रा को सेंटीमीटर या मिलीमीटर में मापा जाता है। किसी स्थान की वार्षिक वर्षा उसकी जलवायु का महत्वपूर्ण सूचक है।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

आर्द्रता का प्रकार परिभाषा इकाई
निरपेक्ष आर्द्रता वायु के आयतन में जलवाष्प का वास्तविक भार ग्राम/घन मीटर
सापेक्ष आर्द्रता उपस्थित जलवाष्प और अधिकतम जलवाष्प का अनुपात प्रतिशत (%)
विशिष्ट आर्द्रता वायु संहति के द्रव्यमान में जलवाष्प का द्रव्यमान ग्राम/किलोग्राम
वर्षा का प्रकार विशेषता क्षेत्र
संवहनीय वर्षा तीव्र, अल्प अवधि विषुवत रेखीय क्षेत्र
पर्वतीय वर्षा पवन-अभिमुखी ढाल पर अधिक पहाड़ी क्षेत्र
चक्रवाती वर्षा लंबी अवधि शीतोष्ण क्षेत्र

माइंड मैप

graph TD A["वायुमंडल में जल"] --> B["आर्द्रता"] A --> C["संघनन"] A --> D["बादल"] A --> E["वर्षा"] B --> B1["निरपेक्ष, सापेक्ष"] C --> C1["ओस, पाला, कोहरा, धुंध"] D --> D1["सिरस, क्यूम्युलस, स्ट्रेटस, निम्बस"] E --> E1["संवहनीय, पर्वतीय, चक्रवाती"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

संघनन के रूप संघनन सतह पर संघनन ओस, पाला सतह के निकट कोहरा, धुंध ऊंचाई पर बादल संघनन की शर्तें 1. वायु का जलवाष्प से संतृप्त होना 2. संघनन के नाभिक की उपस्थिति (धूल, नमक, धुआँ) संघनन तब होता है जब तापमान ओसांक तक पहुंचता है स्वर्ण नियम संघनन के लिए संतृप्त वायु और नाभिक दोनों आवश्यक हैं।
वर्षा के प्रकार संवहनीय वर्षा गर्म वायु ऊपर उठती है विषुवत रेखीय क्षेत्र पर्वतीय वर्षा पर्वत से टकराकर ऊपर उठती वायु पवन-अभिमुखी ढाल पर चक्रवाती वर्षा गर्म-ठंडी वायु संहति का मिलन शीतोष्ण क्षेत्र वर्षा-छाया क्षेत्र (Rain Shadow) पर्वत के पवन-रहित ढाल पर बहुत कम वर्षा होती है पश्चिमी घाट के पूर्वी ढाल पर भारत में वर्षा-छाया क्षेत्र विश्व के प्रमुख मरुस्थल उपोष्ण उच्च दाब क्षेत्रों में बादलों के प्रकार सिरस (ऊँचे) | क्यूम्युलस (मध्यम) | स्ट्रेटस (चपटी परत) | निम्बस (वर्षा) स्वर्ण नियम क्यूम्युलोनिम्बस बादल भारी वर्षा, ओला और तड़ित का कारण बनते हैं।

सामान्य गलतियाँ

  1. ओस और पाला को एक ही घटना मान लेना गलत है; ओस में जलवाष्प द्रव बूंदों में बदलती है, जबकि पाला में सीधे बर्फ के कणों में (जब तापमान हिमांक से नीचे होता है)।
  2. कोहरे और धुंध में अंतर न करना सामान्य गलती है; दृश्यता 1 किलोमीटर से कम होने पर कोहरा और अधिक होने पर धुंध कहलाती है।
  3. सापेक्ष आर्द्रता को तापमान बढ़ने पर बढ़ती हुई मानना गलत है; तापमान बढ़ने पर जलवाष्प धारण क्षमता बढ़ने से सापेक्ष आर्द्रता घटती है।
  4. सिरस बादलों से वर्षा होती है, यह मानना गलत है; सिरस बादल बर्फ के क्रिस्टलों से बने होते हैं और अच्छे मौसम का संकेत देते हैं।
  5. संवहनीय वर्षा की अवधि लंबी होती है, यह गलत है; संवहनीय वर्षा तीव्र परंतु अल्प अवधि की होती है।
  6. पर्वतीय वर्षा में पर्वत के दोनों ओर समान वर्षा होती है, यह गलत है; पवन-अभिमुखी ढाल पर अधिक तथा वर्षा-छाया क्षेत्र में बहुत कम वर्षा होती है।
  7. आर्द्रता को थर्मामीटर से मापना बताना गलत है; आर्द्रता हाइग्रोमीटर से मापी जाती है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. आर्द्रता के तीन प्रकारों की परिभाषा तथा इकाइयाँ लिखें।
  2. ओसांक की परिभाषा लिखें तथा सापेक्ष आर्द्रता से इसका संबंध स्पष्ट करें।
  3. संघनन के रूपों को स्थान के आधार पर वर्गीकृत करें (सतह पर, निकट, ऊंचाई पर)।
  4. बादलों के चार प्रकारों तथा उनकी विशेषताओं का उल्लेख करें।
  5. वर्षा के तीन प्रकारों में अंतर सारणी में लिखें।
  6. वर्षा-छाया क्षेत्र की अवधारणा को पश्चिमी घाट के उदाहरण से समझाएं।
  7. विषुवत रेखीय क्षेत्रों में अधिक तथा उपोष्ण क्षेत्रों में कम वर्षा का कारण लिखें।

निष्कर्ष

वायुमंडल में जल की उपस्थिति तथा उसकी प्रक्रियाएँ पृथ्वी की जलवायु और मौसम को गहराई से प्रभावित करती हैं। वायुमंडल में जलवाष्प की मात्रा को आर्द्रता से मापा जाता है, जो निरपेक्ष, सापेक्ष और विशिष्ट आर्द्रता के रूप में व्यक्त होती है। जब वायु ओसांक तक ठंडी होती है, तो संघनन होता है, जिससे ओस, पाला, कोहरा, धुंध और बादल बनते हैं। बादल चार मुख्य प्रकार के होते हैं – सिरस, क्यूम्युलस, स्ट्रेटस और निम्बस। वर्षा मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है – संवहनीय, पर्वतीय और चक्रवाती। संवहनीय वर्षा विषुवत क्षेत्रों में, पर्वतीय वर्षा पर्वतों के पवन-अभिमुखी ढालों पर तथा चक्रवाती वर्षा शीतोष्ण क्षेत्रों में अधिक होती है। वर्षा-छाया क्षेत्रों में वर्षा बहुत कम होती है। विश्व में वर्षा का वितरण असमान है, जो मौसम, कृषि तथा मानव जीवन को प्रभावित करता है।