🌍
🗺️
🧭
🏔️
🌋
← डैशबोर्ड पर वापस जाएँ
Font Size:

1. परिचय

पृथ्वी को 'नीला ग्रह' (Blue Planet) कहा जाता है क्योंकि इसकी सतह का लगभग 71% भाग जल से ढका हुआ है। पृथ्वी पर उपस्थित संपूर्ण जल को 'जलमंडल' (Hydrosphere) कहते हैं। जलमंडल में महासागर, समुद्र, झीलें, नदियाँ, हिमनद, भूजल तथा वायुमंडल में उपस्थित जलवाष्प सभी सम्मिलित हैं। पृथ्वी पर जल का अधिकांश भाग (लगभग 97.5%) महासागरों में खारा जल के रूप में पाया जाता है, जबकि केवल लगभग 2.5% जल मीठा है। इस अध्याय में हम महासागरों की संरचना, समुद्री जल की विशेषताओं (लवणता, तापमान, घनत्व) तथा महासागरों के भौगोलिक विभाजन का विस्तृत अध्ययन करेंगे।

महासागर जल का विशाल भंडार होने के साथ-साथ जलवायु के नियमन, व्यापार, मछली पालन, खनिज संसाधनों तथा परिवहन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। महासागर सौर ऊर्जा को अवशोषित कर पृथ्वी की जलवायु को संतुलित रखते हैं। महासागरों की गहराई, तापमान, लवणता और घनत्व उनकी विशेषताओं को निर्धारित करते हैं।

2. महासागरों का भौगोलिक विभाजन

विश्व के प्रमुख महासागर निम्नलिखित हैं: 1. प्रशांत महासागर – यह विश्व का सबसे बड़ा तथा सबसे गहरा महासागर है। इसका क्षेत्रफल लगभग 16.6 करोड़ वर्ग किलोमीटर है। मारियाना ट्रेंच (लगभग 11 किलोमीटर गहरी) इसी महासागर में स्थित है, जो विश्व का सबसे गहरा स्थान है। 2. अटलांटिक महासागर – यह दूसरा सबसे बड़ा महासागर है, जो 'S' आकार का है। यह व्यापारिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण महासागर है। इसका क्षेत्रफल लगभग 10.6 करोड़ वर्ग किलोमीटर है। 3. हिंद महासागर – यह तीसरा सबसे बड़ा महासागर है, जिसका अधिकांश भाग दक्षिणी गोलार्ध में स्थित है। इसका क्षेत्रफल लगभग 7.4 करोड़ वर्ग किलोमीटर है। 4. दक्षिणी महासागर – यह अंटार्कटिका के चारों ओर स्थित महासागर है, जो दक्षिणी गोलार्ध में है। 5. आर्कटिक महासागर – यह विश्व का सबसे छोटा तथा सबसे उथला महासागर है, जो उत्तरी ध्रुव के आस-पास स्थित है।

महाद्वीपीय ढाल और महासागरीय तल

महासागरों के तल का अध्ययन करने पर यह स्पष्ट होता है कि महासागरीय तल समतल नहीं है, बल्कि उसमें विविध स्थलरूप पाए जाते हैं। तट से क्रमिक रूप से महाद्वीपीय मग्न तट (Continental Shelf), महाद्वीपीय ढाल (Continental Slope), महाद्वीपीय उत्थान तथा गहरे समुद्री मैदान मिलते हैं। महासागरीय तल में मध्य-महासागरीय कटकें, महासागरीय गर्त (Trenches), सीमाउंट (Seamounts) तथा गुयॉट जैसे स्थलरूप भी पाए जाते हैं। मारियाना गर्त विश्व का सबसे गहरा महासागरीय गर्त है।

3. समुद्री जल की लवणता (Salinity)

समुद्री जल में उपस्थित घुले हुए लवणों की कुल मात्रा को 'लवणता' (Salinity) कहते हैं। लवणता को प्रति हजार (parts per thousand, 0/00) में व्यक्त किया जाता है। समुद्री जल की औसत लवणता लगभग 35 ग्राम प्रति लीटर (35 0/00) होती है। समुद्री जल में सबसे अधिक मात्रा में सोडियम क्लोराइड (साधारण नमक) पाया जाता है, जो कुल लवणों का लगभग 77% है। इसके बाद मैग्नीशियम क्लोराइड, कैल्शियम सल्फेट तथा अन्य लवण पाए जाते हैं।

लवणता को प्रभावित करने वाले कारक

  1. वाष्पीकरण – वाष्पीकरण अधिक होने पर लवणता बढ़ती है। उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में वाष्पीकरण अधिक होने से लवणता अधिक होती है।
  2. वर्षा – वर्षा अधिक होने पर लवणता घटती है।
  3. नदियों का जल – नदियाँ मीठा जल लेकर आती हैं, जिससे लवणता घटती है। तटीय क्षेत्रों में लवणता कम होती है।
  4. हिमनदों का पिघलना – ध्रुवीय क्षेत्रों में हिमनदों के पिघलने से लवणता घटती है।
  5. संकुचित समुद्र – अरब प्रायद्वीप के निकट स्थित संकुचित समुद्रों (जैसे लाल सागर, फारस की खाड़ी) में वाष्पीकरण अधिक होने से लवणता अधिक होती है।

लवणता का वितरण

विश्व महासागरों में लवणता का वितरण असमान है। विषुवत रेखीय क्षेत्रों में प्रचुर वर्षा होने से लवणता औसत (35 0/00 से कम) होती है। उपोष्ण उच्च दाब क्षेत्रों (20-30 डिग्री अक्षांश) में वाष्पीकरण अधिक और वर्षा कम होने से लवणता सबसे अधिक होती है। लाल सागर की लवणता सबसे अधिक (लगभग 41 0/00) है, जबकि बाल्टिक सागर की लवणता सबसे कम (लगभग 5-8 0/00) है। ध्रुवीय क्षेत्रों में हिमनदों के पिघलने से लवणता कम होती है।

4. समुद्री जल का तापमान

समुद्री जल का तापमान सौर ऊर्जा पर निर्भर करता है। समुद्री जल का तापमान विषुवत रेखा पर सबसे अधिक (लगभग 26-27 डिग्री सेल्सियस) होता है, जो ध्रुवों की ओर घटता जाता है। ध्रुवीय क्षेत्रों में तापमान लगभग -2 डिग्री सेल्सियस तक हो सकता है। समुद्री जल के तापमान को प्रभावित करने वाले कारक हैं – अक्षांश, ऊंचाई (गहराई), स्थानीय मौसम, धाराएँ तथा तटीय स्थिति। समुद्री जल का तापमान गहराई के साथ घटता है। सतह से लगभग 100 मीटर की गहराई तक तापमान समान रहता है, फिर घटता जाता है।

तापीय परतन (Thermocline)

समुद्र में गहराई के साथ तापमान घटने की वह परत जिसमें तापमान में तीव्र गिरावट होती है, 'तापीय परतन' (Thermocline) कहलाती है। तापीय परतन के ऊपर का जल गर्म होता है और नीचे का जल ठंडा। विषुवत क्षेत्रों में तापीय परतन अधिक स्पष्ट होता है, जबकि ध्रुवीय क्षेत्रों में यह लगभग अनुपस्थित होता है क्योंकि वहां सतह और गहराई के जल में तापमान का अंतर कम होता है।

5. समुद्री जल का घनत्व

समुद्री जल का घनत्व तापमान, लवणता और गहराई पर निर्भर करता है। तापमान कम होने तथा लवणता अधिक होने पर घनत्व बढ़ता है। ध्रुवीय क्षेत्रों में ठंडे जल का घनत्व अधिक होता है, जो नीचे डूबकर विश्व महासागरों में गहरे जल की धाराओं का निर्माण करता है। समुद्री जल का घनत्व समुद्री धाराओं को प्रभावित करता है। घनत्व में अंतर के कारण ही विभिन्न समुद्री धाराएँ उत्पन्न होती हैं।

6. समुद्री जल का महत्व

समुद्री जल का मानव जीवन में अत्यधिक महत्व है। यह निम्नलिखित प्रकार से उपयोगी है: 1. समुद्री जल में सोडियम क्लोराइड तथा अन्य लवण पाए जाते हैं, जिनका निष्कर्षण किया जाता है। 2. समुद्री जल में ब्रोमीन, मैग्नीशियम, कैल्शियम जैसे रासायनिक तत्व पाए जाते हैं। 3. समुद्री जल से मछलियाँ और अन्य जलीय जीव प्राप्त होते हैं। 4. समुद्री जल का उपयोग परिवहन, व्यापार तथा पर्यटन में होता है। 5. समुद्री जल से लवण-विमुक्तीकरण (Desalination) द्वारा मीठा जल प्राप्त किया जा सकता है।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

महासागर क्षेत्रफल (लगभग) विशेषता
प्रशांत महासागर 16.6 करोड़ वर्ग किमी सबसे बड़ा और सबसे गहरा
अटलांटिक महासागर 10.6 करोड़ वर्ग किमी 'S' आकार, व्यापारिक
हिंद महासागर 7.4 करोड़ वर्ग किमी तीसरा सबसे बड़ा
आर्कटिक महासागर सबसे छोटा सबसे उथला
समुद्र लवणता
लाल सागर सर्वाधिक (लगभग 41 0/00)
बाल्टिक सागर न्यूनतम (लगभग 5-8 0/00)
विश्व का औसत लगभग 35 0/00

माइंड मैप

graph TD A["जल (महासागर)"] --> B["महासागरों का विभाजन"] A --> C["लवणता"] A --> D["तापमान"] A --> E["घनत्व"] B --> B1["प्रशांत, अटलांटिक, हिंद"] C --> C1["औसत 35 0/00"] C --> C2["प्रभावित करने वाले कारक"] D --> D1["तापीय परतन"] E --> E1["तापमान और लवणता पर निर्भर"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

विश्व के प्रमुख महासागर प्रशांत महासागर सबसे बड़ा और गहरा अटलांटिक महासागर 'S' आकार, व्यापारिक हिंद महासागर दक्षिणी गोलार्ध में अधिक आर्कटिक महासागर सबसे छोटा और उथला महासागरीय तल के स्थलरूप महाद्वीपीय मग्न तट, महाद्वीपीय ढाल, गहरे समुद्री मैदान मध्य-महासागरीय कटक, गर्त, सीमाउंट, गुयॉट स्वर्ण नियम मारियाना ट्रेंच प्रशांत महासागर में है - विश्व का सबसे गहरा स्थान।
लवणता को प्रभावित करने वाले कारक वाष्पीकरण अधिक होने पर लवणता बढ़ती है वर्षा अधिक होने पर लवणता घटती है नदियों का जल मीठा जल लाकर लवणता घटाता है हिमनदों का पिघलना ध्रुवीय क्षेत्रों में लवणता घटती है संकुचित समुद्र लाल सागर, फारस की खाड़ी तापमान वाष्पीकरण पर प्रभाव लवणता का क्षेत्रीय वितरण उपोष्ण उच्च दाब क्षेत्रों में लवणता सबसे अधिक लाल सागर: 41 0/00 (सर्वाधिक), बाल्टिक सागर: 5-8 0/00 (न्यूनतम) विश्व का औसत: 35 0/00 स्वर्ण नियम वाष्पीकरण लवणता बढ़ाता है, वर्षा और नदी का जल घटाता है।

सामान्य गलतियाँ

  1. पृथ्वी पर मीठे जल की मात्रा को अधिक बताना गलत है; पृथ्वी का लगभग 97.5% जल खारा है और केवल लगभग 2.5% मीठा है।
  2. लवणता की इकाई को प्रतिशत (%) में लिखना गलत है; लवणता प्रति हजार (0/00) में व्यक्त की जाती है।
  3. लाल सागर को सबसे कम लवणता वाला समुद्र बताना गलत है; लाल सागर की लवणता सबसे अधिक है, जबकि बाल्टिक सागर की सबसे कम।
  4. प्रशांत महासागर को सबसे छोटा महासागर बताना गलत है; यह सबसे बड़ा महासागर है। आर्कटिक महासागर सबसे छोटा है।
  5. विषुवत रेखीय क्षेत्रों में लवणता सबसे अधिक होती है, यह मानना गलत है; वहां प्रचुर वर्षा से लवणता औसत से कम होती है। उपोष्ण क्षेत्रों में लवणता सबसे अधिक होती है।
  6. मारियाना ट्रेंच को अटलांटिक महासागर में स्थित बताना गलत है; यह प्रशांत महासागर में है।
  7. समुद्री जल के तापमान में गहराई के साथ वृद्धि होती है, यह गलत है; तापमान गहराई के साथ घटता है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. महासागरों के क्षेत्रफल के क्रम (प्रशांत > अटलांटिक > हिंद > दक्षिणी > आर्कटिक) को याद रखें।
  2. लवणता की परिभाषा तथा इकाई (0/00) लिखें तथा औसत मान (35 0/00) का उल्लेख करें।
  3. लवणता को प्रभावित करने वाले कारकों में वाष्पीकरण, वर्षा, नदियाँ और हिमनद का उल्लेख करें।
  4. लाल सागर (सर्वाधिक) और बाल्टिक सागर (न्यूनतम) के उदाहरण लिखें।
  5. समुद्री जल के तापमान के वितरण तथा तापीय परतन (thermocline) की अवधारणा को समझाएं।
  6. समुद्री जल में सबसे अधिक मात्रा में सोडियम क्लोराइड (77%) पाया जाता है, यह तथ्य लिखें।
  7. समुद्री जल के महत्व के कम से कम चार बिंदु लिखें।

निष्कर्ष

पृथ्वी का लगभग 71% भाग जल से ढका है, जिसमें महासागरों का प्रमुख स्थान है। विश्व के पांच प्रमुख महासागरों में प्रशांत सबसे बड़ा और गहरा, जबकि आर्कटिक सबसे छोटा महासागर है। समुद्री जल की लवणता औसतन 35 0/00 होती है, जो वाष्पीकरण, वर्षा, नदियों तथा हिमनदों से प्रभावित होती है। लाल सागर की लवणता सबसे अधिक तथा बाल्टिक सागर की सबसे कम है। समुद्री जल का तापमान विषुवत रेखा पर सबसे अधिक होता है और गहराई के साथ घटता है। तापीय परतन (thermocline) वह परत है जिसमें तापमान तीव्रता से घटता है। समुद्री जल का घनत्व तापमान और लवणता पर निर्भर करता है। महासागर जलवायु नियमन, व्यापार, मत्स्य पालन और संसाधनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह अध्याय आगामी अध्याय 'महासागरीय जल की गतियाँ' को समझने का आधार प्रदान करता है।