Comprehensive theory, key formulas, diagrams, and memory aids for द्विपद प्रमेय.
द्विपद प्रमेय (Binomial Theorem) गणित का वह प्रमेय है जो $(x + y)^n$ के प्रसार के लिए एक व्यवस्थित सूत्र प्रदान करता है, जहाँ n एक धनात्मक पूर्णांक है। पहले हमने $(x + y)^2$ और $(x + y)^3$ जैसे प्रसार सीखे थे। द्विपद प्रमेय इन प्रसारों को किसी भी घात के लिए सामान्यीकृत करता है, जिससे बड़े घात वाले प्रसार भी सरलता से किए जा सकते हैं। यह प्रमेय पास्कल त्रिभुज से घनिष्ठ रूप से संबंधित है, क्योंकि पास्कल त्रिभुज की संख्याएँ ही द्विपद गुणांक प्रदान करती हैं।
किसी धनात्मक पूर्णांक n के लिए: $$(x + y)^n = ^nC_0 x^n + ^nC_1 x^{n-1}y + ^nC_2 x^{n-2}y^2 + \cdots + ^nC_r x^{n-r}y^r + \cdots + ^nC_n y^n$$
जहाँ $^nC_r$ को द्विपद गुणांक (Binomial Coefficient) कहते हैं। ये गुणांक पास्कल त्रिभुज की संख्याएँ हैं।
$(x + y)^n$ के प्रसार में $(r+1)$वाँ पद: $$T_{r+1} = ^nC_r x^{n-r} y^r$$
इसे सामान्य पद कहते हैं। इसकी सहायता से प्रसार का कोई भी पद बिना पूरा प्रसार किए ज्ञात किया जा सकता है।
$(1 + x)^{2n}$ में मध्य पद: n सम है (घात 2n), अतः केवल एक मध्य पद $T_{n+1}$ है। $(1 + x)^{2n+1}$ में दो मध्य पद $T_{n+1}$ और $T_{n+2}$ होते हैं।
द्विपद प्रमेय का प्रयोग $(1 + x)^n$ के प्रसार के लिए विशेष रूप में: $$(1 + x)^n = 1 + nx + \frac{n(n-1)}{2!}x^2 + \frac{n(n-1)(n-2)}{3!}x^3 + \cdots + x^n$$
इस रूप का प्रयोग अनुमानित गणनाओं में होता है।
$$(x - y)^n = ^nC_0 x^n - ^nC_1 x^{n-1}y + ^nC_2 x^{n-2}y^2 - \cdots + (-1)^n\,^nC_n y^n$$
यहाँ पदों के चिह्न एकांतर (alternating) होते हैं। $(x - y)^n$ के प्रसार में यदि n सम है, तो अंतिम पद धनात्मक; यदि n विषम है, तो ऋणात्मक।
$$^nC_0 + ^nC_2 + ^nC_4 + \cdots = ^nC_1 + ^nC_3 + ^nC_5 + \cdots = 2^{n-1}$$
द्विपद प्रमेय का प्रयोग संख्याओं की घातों की गणना में होता है। उदाहरण के लिए $99^5$ को $(100 - 1)^5$ के रूप में लिखकर प्रसार किया जा सकता है। इसी प्रकार $(1.01)^n$ जैसे दशमलव मानों की सन्निकट गणना आसानी से होती है।
$(1 + x)^6$ में x³ का गुणांक: $T_4 = ^6C_3 x^3 = 20x^3$, अतः गुणांक 20।
| गुण | विवरण |
|---|---|
| पदों की संख्या | n + 1 |
| सामान्य पद | T(r+1) = nCr x^(n-r) y^r |
| घातों का योग | n (प्रत्येक पद में) |
| n सम होने पर मध्य पद | एक |
| n विषम होने पर मध्य पद | दो |
| योग | मान |
|---|---|
| सभी गुणांकों का योग | 2^n |
| विषम स्थानों का योग | 2^(n-1) |
| सम स्थानों का योग | 2^(n-1) |
graph TD
A["द्विपद प्रमेय (x+y)^n"] --> B["प्रसार: nCr x^(n-r) y^r"]
A --> C["पदों की संख्या: n+1"]
A --> D["सामान्य पद: T(r+1)"]
A --> E["मध्य पद: n सम-एक, n विषम-दो"]
A --> F["गुणांक योग: 2^n"]
A --> G["पास्कल त्रिभुज"]
A --> H["विशेष: (1+x)^n"]
द्विपद प्रमेय प्रसार की एक शक्तिशाली विधि है जो $(x + y)^n$ को n + 1 पदों के रूप में व्यक्त करती है। पास्कल त्रिभुज, सामान्य पद, मध्य पद तथा गुणांकों के योग इस अध्याय के प्रमुख विषय हैं। द्विपद प्रमेय न केवल बीजगणित में बल्कि प्रायिकता, आंकिक विश्लेषण और कैलकुलस में भी प्रयुक्त होता है। सामान्य पद और मध्य पद की अवधारणाओं को स्पष्ट करना परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।